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आपातकाल : भूमिगत कार्यकर्ताओं का संघर्ष

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आपातकाल का काला अध्याय और भूमिगत कार्यकर्ताओं का संघर्ष  भूमिगत रहे कार्यकर्ताओं ने भी भारी यातनाएं भोगी                                                 नारायण प्रसाद गुप्ता (पूर्व सांसद राज्यसभा)                       आप सब जानते हैं कि संविधान के अनुच्छेद 352 का भारी दुरूपयोग करते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. श्रीमति इंदिरा गांधी ने सत्ता में बने रहने के लिए 25 जून की अर्द्धरात्रि को अत्यंत बेरहमी से एक दुस्साहसी कदम उठाकर चुनाव के सब नियम कायदे अपने हित में बदलकर देश को आपातकाल की जंजीरों में जकड़ दिया। अपने सभी विपक्षी नेताओं को लंबे समय तक जेल में सड़ा देने के इरादे से देश को, प्रजातंत्र को भारी आघात पहुंचाया। आपातकाल लगाने के पीछे उनके इरादे बिल्कुल नेक नहीं थे। देश में क्रांति और परिवर्तन की लहर चल रही थी। उल्लेखनीय है कि इस धारा का उपयोग चीन और पाकिस्तान के हमले के समय किया था। दुर्भाग्य से देश के तत्कालीन राष्ट्रपति स्व. श्री फखरूद्दीन अली अहमद भी एक कठपुतली की तरह के कार्य कर रहे थे। परिणामतः संविधान के सभी मौलिक अधिकारों का भारी हनन हुआ।