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कोटा महानगर की नगर रचना

 कोटा महानगर की  नगर रचना  1 गणेश नगर संतोषी नगर स्थित शिवाजी पार्क से संतोषी नगर चैराहा, केशवपुरा 7 सेक्टर, व्यायामशाला, विश्वकर्मा मंदिर, केशवपुरा सेक्टर 6, राधाकृष्ण मंदिर, शिशु भारती स्कूल की गली, चैथमाता मंदिर, हनुमान मंदिर विस्तार योजना, शिव ज्योति कान्वेंट स्कूल, तिलक स्कूल, टीवीएस सर्किल होते हुए संतोषी नगर में विसर्जन। 2 विवेकानंद नगर मारूतिनन्दन हनुमान मंदिर से तलवण्डी प्रथम, तलवण्डी सर्किल, वर्धमान स्टेशनर्स, बरथूनिया के पीछे, मंशापूर्ण हनुमान मंदिर, खण्डेलवाल नर्सिंग होम रोड, इन्द्रविहार, तलवण्डी शिवज्योति स्कूल से मारूतिनन्दन हनुमान मंदिर तक 3 चाणक्य  नगर तलवण्डी आजाद पार्क से सेक्टर 4, सेक्टर 5, सिटी सेंटर, एलेन कैरियर इन्स्टीट्यूट, जवाहर नगर, गायत्री पार्क, मां भारती स्कूल से आजाद पार्क 4 विश्वकर्मा नगर राजकीय विद्यालय इन्द्रा विहार से एसएसएफ चैराहा, मेन रोड, गोचर साइकिल की गली, राधाकृष्ण मंदिर, कंसुआ, आदर्श विद्या मंदिर, कंसुआ मेन रोड, कंसुआ चैराहा, डीसीएम रोड सर्किल, मेन रोड, पावर हाऊस चैराहा से इन्द्रा गांधी नगर। 5 प्रताप नगर सनातन मंदिर दादाबाड़ी, शास्

रोहिंगिया देश की सुरक्षा व एकात्मता पर संकट ही बनेंगे : परम पूज्य सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत

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                                                                                                                                                                                                             परम पूज्य सरसंघचालक जी  डॉ. मोहन राव भागवत  का संबोधन         इस वर्ष की विजयादशमी के पावन अवसर को संपन्न करने के लिये हम सब आज यहाँ पर एकत्रित हैं। यह वर्ष परमपूज्य पद्मभूषण कुषोक बकुला रिनपोछे ( His eminence Kushok Bakula Rinpoche ) की जन्मशती का वर्ष है। पूज्य कुषोक बकुला रिनपोछे तथागत बुद्ध के 16 अर्हतों में से बकुल के अवतार थे ऐसी पूरे हिमालय बौद्धों में मान्यता है। वर्तमान काल में आप लद्दाख के सर्वाधिक सम्मानित लामा थे। पूरे लद्दाख में शिक्षा का प्रसार, कुरीतियों का निवारण एवं समाज सुधार व राष्ट्रभाव जागरण में आपकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। 1947 में जब कबाईलियों के वेश में पाकिस्तान की सेना ने जम्मूकश्मीर पर आक्रमण किया तो उनकी प्रेरणा से वहाँ के नौजवानों ने नुबरा ब्रिगेड का गठन कर आक्रमणकारियों को स्कर्दू से आगे बढने नहीं दिया। जम्मू कश्मीर की विधानसभा के सदस्य,

संघ : श्रेष्ठ विचारों से ही पूरे विश्व में आदरणीय

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विजयादशमी: संघ  के स्थापना दिवस पर श्रेष्ठ विचारों से ही पूरे विश्व में आदरणीय हो गया संघ प्रस्तुति - अरविन्द सिसौदिया     भारत में ही नही सम्पूर्ण विश्व में संघ या आरएसएस के नाम से जाने जाने वाले संगठन की स्थापना सन् 1925 में विजयदशमी के शुभमुहूर्त पर नागपुर में हुई थी। कांग्रेस गरम दल अर्थात “ स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है।“ की घोषणा करने वाले बाल गंगाधर तिलक के मार्ग का अनुसरण करने वाले सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के नाम से इसे स्थापित किया था।  हेडगेवार इससे पहले पराधीन भारत में चलने वाले भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में सक्रिय भाग लेने वाले प्रखर स्वतंत्रता सेनानी थे एवं संघ की स्थापना का मार्ग भी स्वतंत्रता संघर्ष के कार्यों को करते हुये उनके विचार में आया । उन्होने उस समय के प्रमुख क्रांतिकारियों के साथ और बाद में कांग्रेस ने गरमदल के नेताओं के मार्गदर्शन में निरपेक्ष भावना से तथा सर्वस्वार्पण की वृत्ति से अपनी सारी शक्ति लगाकर कार्य किया था, जेल भी गये थे। उनकी स्पष्ट एवं प्रखर शैली के कारण स्वतंत्रता आंदोलन क