सोमवार, 25 फ़रवरी 2013

2030 में हम टेक्नोलाजी में अमेरिका से आगे होंगे

                                                       Dr Vijay P Bhatakar ( PadamShree )


सूर्य नमस्कार महायज्ञ का भव्य आयोजन सम्पन्न

पदमश्री डॉ.भाटकर ने किया मोबाइल से सीधा सम्बोधन
भारत में पुनः विश्वगुरू बनने की सभी क्षमतायें - डॉ. विजय भाटकर

- अरविन्द सीसौदिया / 09509559131                    


कोटा 18 फरवरी । भारत में पुनः विश्वगुरू बनने की क्षमता है। यह उद्गार सूर्य नमस्कार महायज्ञ के मुख्य अतिथि डॉ. विजय भाटकर ने अपने मोबाईल सम्बोधन में कहे। भाटकर को सोमवार को कोटा में सूर्य नमस्कार महायज्ञ में मुख्यअतिथि के रूप में आना था किन्तु भारत सरकार की एक आवश्यक बैठक में उन्हे भाग लेने जाने के कारण वे कार्यक्रम में स्वंय भाग लेने कोटा नहीं आ सके। उन्होने कार्यक्रम को मोबाईल से सीधे (लाइव) सम्बोधित किया जिसे लाउडस्पीकर के माध्यम से सहभागियों ने सुना।
2030 में हम टेक्नोलाजी में अमेरिका से आगे होंगे
पूरे देश में एक साथ हुआ सूर्य नमस्कार कार्यक्रम, कोटा आने वाले थे सुपर कंप्यूटर ”परम“ के जनक डॉ. विजय भाटकर, लेकिन किसी कारणवश नहीं आ सके, मोबाइल पर ही छात्रों को दिया प्रेरणास्पद संबोधन, उनके द्वारा कहीं गई बातें उन्हीं की शैली में-
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की राजधानी के रूप में मशहूर कोटा के सभी विद्यार्थियों को मेरा नमस्कार..। मैं क्षमा चाहता हूं कि इस मौके पर आपके बीच नहीं आ सका। आप देश के भविष्य हैं। हमारे देश में 1960 से वर्ल्डक्लास आईआईटी, एनआईटी, आईआईएम व कई प्राइवेट इंजीनियरिंग संस्थान हैं, जहां देश का भविष्य तैयार हो रहा है। आईआईटी की दुनियाभर में इतनी अच्छी साख है कि एमआईटी की बजाए अब विदेशी छात्र भी आईआईटी में एडमिशन लेना चाहते हैं। 11 सितंबर,1893 में शिकागो में स्वामी विवेकानंद ने 4500 शब्दों के अपने संक्षिप्त भाषण से विश्व को भारत की प्रतिभा से चकित कर दिया था। उनका कहना था कि भारत पहले तुम जागो, फिर समूचे विश्व को जगाओ। वे युवाओं के सच्चे रोल मॉडल हैं।
आज हम इकोनमी में तीसरी बड़ी शक्ति हैं। इंफार्मेशन टेक्नोलाजी में 2030 तक अमेरिका व चीन को पीछे छोड़ देंगे। अमेरिका की खुफिया रिपोर्ट में यह जिक्र किया गया है कि भारत 2030 से 2040 के दशक में ज्ञान व तकनीक में अमेरिका व चीन से आगे निकल जाएगा। आज साइंस व टेक्नोलाजी, इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट में हम दुनिया में 5वें स्थान पर हैं। 2047 तक हम इकोनमी, नालेज, रिसर्च, न्यूक्लियर, स्पेस, सुपर कंप्यूटिंग व अन्य कई क्षेत्रों में सुपर पावर होंगे। मेरा अपना अनुभव है कि आईआईटी जैसी कठिन प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए नियमित सूर्य नमस्कार जैसा सर्वांग योगासन करें। परीक्षा के समय योग की इस तकनीक से एंग्जाइटी दूर होती है और नई ऊर्जा मिलती है। यह संपूर्ण शरीर की क्रियाओं को ठीक रखने और उनकी क्षमता में वृद्धि करने के लिए उपयोगी है। रथ सप्तमी के अवसर पर संकल्प लें कि कॅरिअर व उच्च शिक्षा के साथ हम देश निर्माण को भी प्राथमिकता देंगे। ताकि विवेकानंद का सपना साकार हो सके।

स्वामी विवेकानन्दजी के 150 जयन्ति वर्ष के कार्यक्रमों के अन्तर्गत सोमवार को पूरे देश में स्वामी विेकानन्द सार्द्धशती समारोह समिति के तत्वाधान में सामूहिक सूर्य नमस्कार के कार्यक्रम आयोजित हुये है। इसी क्रम में कोटा महानगर समिति के द्वारा कोटा में उपरोक्त आयोजन हुआ ।
कार्यक्रम में स्वामी विवेकानन्द जी के राजस्थान प्रवास पर लिखी गई,हनुमानसिंह राठौड की पुस्तक “ स्वामी विवेकानन्द राजस्थान में ” का भी विमोचन किया गया।
पदमश्री डॉ.विजय भाटकर ने मोबाईल फोन से अपना सम्बोधन दिया जिसमें उन्हाने कहा कि सूर्य नमस्कार योगासन सम्पूर्ण शरीर की क्रियाओं को ठीक रखने ओर उनकी क्षमता वृद्धि के लिये महत्वपूर्ण है। यह शिक्षा ग्रहण कर रहे और परिक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिये विषेश उपयोगी है।  
भाटकर ने कहा भारत में पुनः विश्वगुरू बनने की क्षमता है। उन्होने अपनी बात के समर्थन में कहा ” अमरीका की खुफिया विभाग की रिपोर्ट में यह जिक्र  है कि भारत अमरीका और चीन को 2030 से 2040 के बीच पीछे छोड, ज्ञान एवं तकनीक में आगे बड जायेगा।
उन्होने मोबाईल से सम्बोधन में कहा स्वामी विवेकानन्द ने दो भविष्यवाणियां की थी, पहली की देश अगले 50 साल में आजाद हो जायेगा जो कि 1947 में सही साबित हुई और दूसरी भारत पुनः विश्व गुरू बनेगा, जो कि अब सही सिद्ध होने वाली है। भाटकर ने कहा कि आज भारत की प्रतिष्ठा पूरे विश्व में ज्ञान के कारण ही है । भारत सोफ्टवेयर तकनीक में विश्व में अग्रणी है उसे हार्डवेयर तकनीक में भी महारात हांसिल करनी होगी।
कार्यक्रम के मुख्यवक्ता विज्ञान भारती के अखिल भारतीय संगठनमंत्री जयन्तराव सहस्त्रबुद्धे ने अपने सम्बोधन में कहा भारत पूर्व में भी ज्ञान का विश्व केन्द्र था तक्षशिला, नालंदा, विक्रम इत्यादि विश्वविद्यालयों में हजारों विद्यार्थी विदेशों से शिक्षा ग्रहण करने आते थे। अभी हम विदेशों में शिक्षा ग्रहण करने जाते हैैं । यह स्थिति बदलनी चाहिये और फिर से भारत में लोग शिक्षा ग्रहण करने आयें, यह स्थिति वर्तमान युवा पीढ़ी के बलबूते हमें प्राप्त करनी है।
उन्होने कहा भारतीय वेदान्त का ज्ञान वर्तमान वैज्ञानिकों के लिये भी प्रेरणा स्त्रोत रहा है आज भी इसी ज्ञान के द्वारा सृष्टि के रहस्य खोजने में सहायक है। हम सभी भारतवासियों का यह कर्त्तव्य है कि हम शिक्षा को अपना आधार बना कर, स्वामी विवेकानन्दजी के स्वप्नों को साकार करने में जुट जायें। कार्यक्रम के अंत में सभी सहभागियों को प्रसाद वितरण किया गया ।
कोटा स्थित महाराव उम्मेद सिंह स्टेडियम में प्रातः 8 बजे से सूर्य नमस्कार महायज्ञ का अदभुद कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें हजारों की संख्या में सम्मिलित कोटा महानगर के विद्यालयों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों, बहिनों और अन्य सहभागियों नें सामूहिक सूर्य नमस्कार योगासन को , सूर्य भगवान को समर्पित मंत्रोचारण के साथ सम्पन्न किया। कार्यक्रम के मुख्यवक्ता विज्ञान भारती के अखिल भारतीय संगठनमंत्री जयंतराव सहस्त्रबुद्धे, मुख्य अतिथि गोविन्द माहेश्वरी निदेशक एलन केरियर, अध्यक्षता ओमप्रकाश माहेश्वरी निदेशक केरियर पाइंट, विश्ष्टि अतिथि समिति के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं रेजोनेंस के निदेशक आर. के. वर्मा, समिति की प्रदेश कार्यकारणी सदस्या डॉ. संगीता सक्सेना और समिति के प्रांतीय सह संयोजक जटाशंकर शर्मा रहे। अतिथि परिचय एवं स्वागत समिति के सह संयोजक बाबूलाल भाट ने किया और धन्यवाद समिति के महानगर संयोजक महेश शर्मा ने किया।

शनिवार, 23 फ़रवरी 2013

राम सेतु : भगवान श्रीरामचन्द्रजी की निशानी को कांग्रेस तोडना चाहती है |




सरकार राम सेतु को तोड़ने का मन बना चुकी है लेकिन वो यह भूल गयी है की रामसेतु के लिये कितना बड़ा आन्दोलन हुआ था | अब अगर ऐसा कोई कदम उठाया गया जो देश की गरिमा, हिंदू समाज की आस्था को ठेस पहुचाये तो यह कदापि मंजूर नहीं होगा | हिन्दुओं की आस्था और भगवान श्री रामचन्द्र जी की निशानी को कांग्रेस सरकार अपने फ़ायदे के लिए तोडना चाहती है | ये राम का देश जहा कण-कण में राम है | जहा इंसान पंचतत्व में विलीन हो जाता तब भी उसे राम का अंश माना जाता है | सरकार की ऐसी कोई भी नापाक कोसिस कामयाब नहीं होगी | हम अपनी सांस्कृतिक विरासत की अपना बलिदान देकर भी रक्षा करेंगे | सरकार अपने मन से यह विचार निकाल दे की वह राम सेतु को एक इंच भी तोड़ पायेगी..........!!
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नई दिल्ली [जेएनएन]। सेतु समुद्रम परियोजना पर केंद्र सरकार ने एक बार फिर पलटी खाई है। उसने इस मसले पर गठित आरके पचौरी समिति की रपट को खारिज करते हुए कहा है कि वह इस परियोजना का काम आगे बढ़ाना चाहती है। उसने तर्क दिया है कि इस परियोजना पर आठ सौ करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं और ऐसे में काम बंद करने का कोई मतलब नहीं। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में सरकार ने यह भी कहा है कि रामसेतु हिंदू धर्म का आवश्यक अंग नहीं। इस परियोजना के तहत रामसेतु कहे जाने वाले एडम ब्रिज को तोड़कर जहाजों के आने-जाने का रास्ता तैयार करना है। भाजपा ने सरकार के ताजा रुख की कठोर आलोचना करते हुए कहा है कि रामसेतु से कोई छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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http://www.jagran.com/news
http://www.jagran.com/news/national-wont-tolerate-any-tampering-with-ram-setu-bjp-10160538.html

रामसेतु तोड़ने को तैयार सरकार

Updated on: Sat, 23 Feb 2013
सेतुसमुद्रम परियोजना के तहत भारत और श्रीलंका के बीच से जहाजों के गुजरने के लिए रामसेतु को पार करते हुए 30 मीटर चौड़े, 12 मीटर गहरे और 167 किलोमीटर लंबे रास्ते की खुदाई करनी है। सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद 2008 में गठित की गई पचौरी कमेटी की रिपोर्ट में यह कहा गया है कि सेतुसमुद्रम पोत परिवहन मार्ग बनाने की परियोजना आर्थिक एवं पर्यावरणीय दोनों ही दृष्टि से ठीक नहीं है। इसके अलावा भाजपा, अन्नाद्रमुक और हिंदू संगठनों की ओर से इस आधार पर परियोजना का विरोध किया जा रहा है कि रामसेतु भगवान राम से जुड़ा है और इस धार्मिक महत्व के कारण उसे तोड़ा नहीं जाना चाहिए। एक बार इस परियोजना से संबंधित अपना हलफनामा वापस ले चुकी केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में पेश नए शपथपत्र में कहा है कि इस धार्मिक विश्वास की पुष्टि नहीं हो सकी है कि भगवान राम ने इस सेतु को श्रीलंका से लौटते समय तोड़ा था और फिर किसी तोड़ी गई चीज की पूजा नहीं की जाती। सरकार ने यह भी तर्क दिया है कि जो धार्मिक विश्वास संबंधित धर्म का आंतरिक और आवश्यक अंग न हो उसे संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत संरक्षित नहीं किया जा सकता।

भाजपा को यह हलफनामा रास नहीं आया है। उसने शनिवार को सेतुसमुद्रम परियोजना पर आगे बढ़ने के खिलाफ सरकार को चेतावनी देते हुए इस परियोजना को रद करने की मांग की। भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा, 'सरकार आरके पचौरी कमेटी की संस्तुतियों को उपेक्षा कर इस परियोजना को आगे बढ़ा रही है। प्रसाद ने सवाल किया कि क्या इसे तोड़ना ही एक मात्र समाधान है? उनके अनुसार बगैर रामसेतु के तो आप रामायण के बारे में सोच भी नहीं सकते।' रामसेतु एक पौराणिक सेतु है जिससे होकर राम और उनकी सेना ने रावण के राज्य पर आक्रमण करने के लिए समुद्र पार किया था।
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 टूटेगा राम सेतु

 पी7 ब्यूरो/दिल्ली 23 February 2013
सेतुसमुद्रम परियोजना पर एक बार फिर सियासत गरमा सकती है। केंद्र सरकार ने इस बारे में आरके पचौरी कमेटी को रिजेक्ट करने का फैसला किया है। यानी अब यह प्रोजेक्ट रामसेतु को तोड़कर ही पूरा किया जाएगा।
सरकार की ओर से शुक्रवार को इस सिलसिले में हलफनामा दायर किया गया है। परियोजना का आरएसएस जैसे धार्मिक संगठनों और एआईएडीएमके और सियासी पार्टियों के अलावा पर्यावरणविद् भी विरोध कर रहे हैं। पचौरी कमेटी के मुताबिक भी यह ढाई हज़ार करोड़ का प्रोजेक्ट पर्यावरण और आर्थिक दोनों नज़रियों से फायदेमंद नहीं है।
क्‍या है सेतुसमुद्रम परियोजना: यह भारत और श्रीलंका के बीच एक महत्वाकांक्षी समुद्री पुल परियोजना है जो कि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के बीच पूरी होनी है। सेतुसमुद्रम परियोजना पर तकरीबन ढाई हजार करोड़ खर्च होने का अनुमान है जिसमें अब तक 829 करोड़ रुपए खर्च भी हो चुके हैं।
बनने के बाद यह समुद्री पुल करीब 12 मीटर गहरा और 300 मीटर चौड़ा होगा। इसके लिए केन्द्र सरकार और स्वेज नहर प्राधिकरण के बीच समझौता है। उम्मीद है कि इस पुल के बनने से करीब 400 समुद्री मील की यात्रा कम हो जाएगी यानी भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री यात्रा करने में करीब 36 घंटों की बचत होगी।
खास बात यह है कि सेतु समुद्रम परियोजना की परिकल्पना साल 1860 में एक ब्रिटिश कमांडर एडी टेलर ने की थी लेकिन इस पर काम शुरू हुआ पूरे 135 सालों बाद।


बीबीसी : हैदराबाद धमाका: भाग्य के बली या 'अपराधी'?



केंद्र सरकार और राज्य सरकार सच पता लगाये ....


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हैदराबाद धमाका: भाग्य के बली या 'अपराधी'?
उमर फ़ारूक़ / बीबीसी संवाददाता, हैदराबाद
शनिवार, 23 फ़रवरी, 2013
हैदराबाद में हुए दोहरे बम विस्फोट की छानबीन के दौरान पुलिस अधिकारियों ने उस युवक से भी पूछताछ करने का फैसला किया है जो पांच साल में दूसरी बार आतंकवादी हमले में घायल हुआ है.इस बात ने पुलिस को संदेह में डाल दिया है कि 23 वर्षीय अब्दुल वासे मिर्ज़ा इससे पहले 18 मई 2007 को मक्का मस्जिद में हुए विस्फोट में गंभीर रूप से घायल हुआ था और अब वो एक बार फिर दिलसुखनगर के बम विस्फोट में घायल होने के बाद एक निजी अस्पताल में भर्ती है.पुलिस ने इस युवक के ऊपर पहरा बैठा दिया है.
हैदराबाद के हाफिज़ बाबा नगर के रहने वाले इस युवक के बारे में पुलिस विस्तार से जांच कर रही है और उस का स्वास्थ बेहतर होते ही पुलिस अधिकारी उससे पूछताछ करना चाहते हैं. पुलिस यह जानना चाहती है कि यह युवक विस्फोट के समय वहां क्या कर रहा था.
हालाँकि उसने कुछ समाचार माध्यमों से बात करते हुए कहा कि वो चप्पल की एक दुकान में काम करता है.वासे के पिता शाहिद मिर्ज़ा ने कहा है की मक्का मस्जिद के विस्फोट में अब्दुल वासे इतनी बुरी तरह घायल हो गया था कि उसके बचने की उम्मीद नहीं रह गई थी. लेकिन लगभग चार साल के इलाज के बाद उसकी हालत सामान्य हुई.
क्या यह केवल इत्तेफाक़ है?
और अब वो एक बार फिर एक आतंकी हमले में घायल हो गया है.दोबारा इस तरह की घटना में बच जाने पर जहाँ उसके परिवार और दोस्त खुश हैं और आम लोग उसकी खुशनसीबी पर आश्चर्यचकित हैं वहीं पुलिस के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह केवल इत्तेफाक़ की बात है.यहाँ यह बात उल्लेखनीय है कि केद्रीय जांच ब्यूरो की जांच से [ कथित तौर पर ] यह बात सामने आई थी कि मक्का मस्जिद में हुए विस्फोट में कुछ हिन्दू चरमपंथियों का हाथ था इस संबंध में आरएसएस से सम्बन्ध रखने वाले असीमानंद, लोकेश शर्मा, देवेंदर गुप्ता, समुद्र सिंह और तेज राम परमार को गिरफ्तार किया जा चुका है.इन लोगों का मालेगांव, अजमेर और समझौता एक्सप्रेस में हुए धमाकों से भी सम्बन्ध बताया गया है.
अबुदल वासे ने मीडिया से बात करते हुए आतंकवादी हमले करने वालों से अनुरोध किया है कि वो ऐसे काम बंद करें क्योंकि इसमें केवल निर्दोष लोग मरते हैं.वासे के पिता शाहिद ने कहा, "मुझे न्यायालय और क़ानून पर पूरा भरोसा है की वो इन घटनाओं के ज़िम्मेदार व्यक्तियों को कड़ी सजा देंगे".
और एजेंसियां आईं इस सबके बीच महाराष्ट्र पुलिस के आतंक निरोधी दस्ते भी आन्ध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद पहुँच गए हैं.महाराष्ट्र पुलिस को शक है कि जिन लोगों ने हैदराबाद में धमाके किए हैं वो जुलाई 11 को उनके प्रदेश के पुणे और मुंबई में हुए धमाकों में शामिल हो सकते हैं.
इस बीच राष्ट्रिय जांच एजेंसी एनआईए ने तीन लोगों के नाम का अलर्ट जारी कर दिया है.

शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2013

संसद में हैदरावाद आतंकी हमले की निंदा


 

 

हैदराबाद धमाके की जांच में अब तक के अपडेट फोटो 

 आईबीएन-7 Feb 22, 2013

हैदराबाद। हैदराबाद धमाके क्या लापरवाही और सुरक्षा में चूक का नतीजा थे। अगर पिछले कुछ महीनों की खुफिया जानकारियों का विश्लेषण करें तो जवाब मिलता है हां। हैदराबाद पुलिस की सबसे बड़ी चूक ये रही कि उसने धमाके के बारे में दी गई खुफिया जानकारी को नजरअंदाज किया। अक्टूबर 2012 मे दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने हैदराबाद पुलिस को जानकारी दी थी कि आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन के गुर्गों ने हैदराबाद के बेगमपेट और दिलसुखनगर इलाके की रेकी की है। ये जानकारी भी दी गई कि इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी यासीन भटकल के भाईयों रियाज और इकबाल भटकल के कहने पर इन इलाकों में गुर्गों ने धमाकों के लिए साफ्ट टार्गेट तलाशे हैं। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को ये सारी जानकारी इंडियन मुजाहिदीन के एक आतंकी मकबूल उर्फ जुबैर ने दी थी। इस सनसनीखेज जानकारी के बाद हैदराबाद पुलिस की एक टीम ने दिल्ली आकर मकबूल उर्फ जुबैर से पूछताछ की और वापस चली गई।
अब सवाल ये है कि जब इन दो खास इलाकों के बारे में साफ जानकारी हैदराबाद पुलिस के पास थी तो इन इलाकों में सुरक्षा को चाक चौबंद क्यों नहीं किया गया? दूसरा सवाल ये कि इन इलाकों में भीड़भाड़ वाली जगहों पर खुफिया तंत्र को मजबूत क्यों नहीं किया गया? तीसरा सवाल ये कि इन इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच क्यों नहीं की गई? हैदराबाद पुलिस ने इस महत्वपूर्ण जानकारी को नजरअंदाज क्यों किया?
सूत्रों का कहना है कि हैदराबाद पुलिस के पास ये जानकारी भी थी कि इसी साल जनवरी में यासीन भटकल और मंजर नाम के आतंकी हैदराबाद में थे। पुलिस ने इन दोनों की तलाश में हैदराबाद के बेगमपेट इलाके की एक लॉज पर छापा भी मारा था। लेकिन 18 जनवरी को छापे से कोई तीन घंटे पहले ही ये दोनों आतंकी फरार होने में कामयाब हो गए। यानी पुलिस को जिस भी सूत्र से इन दोनों आतंकियों के हैदराबाद में होने की जानकीर मिली थी वो सही थी।
अब सवाल ये है कि जब ये तीनों आतंकी पुलिस को चकमा दे गए तो उनकी तलाश में आगे कार्रवाई क्यों नहीं की गई? उनकी तलाश क्यों नहीं जारी रखी गई? सवाल ये भी है कि जब मकबूल से दिल्ली में मिली जानकारी सच साबित हो रही थी तो दिलसुखनगर और बेगमपेट इलाकों में सुरक्षा इंतजाम पुख्ता क्यों नहीं किए गए? सवाल ये भी है कि हैदराबाद पुलिस ने दूसरे राज्यों को यासीन भटकल और मंजर के हाथ से निकल जाने की जानकारी क्यों नहीं दी?
वहीं 11 फरवरी 2013 को मुबंई पुलिस ने गृह मंत्रालय को यह जानकारी दी थी कि इंडियन मुजाहिदीन और लश्कर किसी बडे शहर में विस्फोट की योजना बना रहे हैं। खुफिया विभाग की इस रिपोर्ट के बाद गृह मंत्रालय ने देश भर में अलर्ट जारी किया था और सभी राज्यों को इस साजिश की जानकारी भी थी दी थी। सवाल उठता है कि गृह मंत्रालय के अलर्ट को हैदराबाद पुलिस ने गंभीरता से क्यों नहीं लिया? गृह मंत्री ने खुद माना है कि उन्हें दो दिन पहले पता था कि कहीं धमाके होने जा रहे हैं और इस सूचना को सभी राज्यों को भेजा गया था। सवाल उठता है कि ऐन दो दिन पहले मिली सूचना को भी हैदराबाद पुलिस ने क्यों नजरंदाज कर दिया? सवाल कई हैं और हैदराबाद पुलिस के पास एक का भी जवाब नहीं है।
हैदराबाद धमाके में मरने वालों की संख्या 16 हो गई है। घायलों का इलाज हैदराबाद के अस्पतालों में ही चल रहा है जिनमें 6 लोगों की हालत नाजुक बनी हुई है। आज भी वहां अजीब सा सन्नाटा फैला हुआ है। सुबह सुबह देश के गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे हैदराबाद पहुंचे और वारदात वाली जगह का जायजा लिया। शिंदे ने घायलों से भी मुलाकात थी। धमाके के बाद से ही जांच एजेंसियां सुराग की तलाश में जुट गई हैं। मौका-ए-वारदात से विस्फोटकों के नमूने लिए गए हैं। इन धमाकों ने हैदराबाद पुलिस के निकम्मेपन की भी पोल खोल दी है। धमाकों की जगह के सभी सीसीटीवी बंद पाए गए। इस बीच संसद ने एक सुर में धमाकों की निंदा की और सरकार से पूछा कि जब धमाकों के बारे में सुराग थे तो इन्हें नाकाम क्यों नहीं किया गया। सरकार ने ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की। इस बीच संदिग्ध आतंकियों की तलाश में NIA और राज्य पुलिस जगह-जगह छापे मारे रही है। खबर है कि पुराने हैदराबाद से एक शख्स को हिरासत में लिया है।
हैदराबाद में एक के बाद एक धमाके हुए। इन धमाकों में 16 बेकसूरो की जान गई। करीब 117 लोग घायल हुए जिनमें कई की हालत नाजुक बताई जा रही है। साफ तौर पर ये हमारी खुफिया एजेंसियां और पुलिस की नाकामी है। लेकिन गृह मंत्री सुशील शिंदे लगातार ये साबित करने की कोशिश में लगे हैं कि उनके मंत्रालय की तरफ से कोई चूक नहीं हुई। अब से थोड़ी देर पहले शिंदे ने संसद में बयान दिया। इस बयान में शिंदे ने एक बार फिर आतंकवाद से मुकाबला करने का संकल्प दोहराया। शिंदे ने सदन को ये भी बताया कि इस धमाके की जांच आंध्रप्रदेश पुलिस के सहयोग से एनआईए की टीम करेगी। शिंदे ने शुरुआती जांच का भी ब्यौरा दिया जिसके मुताबिक ब्लास्ट में इस्तेमाल आईईडी के लिए साइकिल का इस्तेमाल किया गया था। लेकिन सवाल ये है कि जब गृह मंत्रालय को दो दिन पहले ही खुफिया एजेंसियों से इस साजिश की भनक लग गई थी वो इसे रोकने में नाकाम क्यों रहा। आतंक के हैदराबाद कनेक्शन की कहानी काफी पुरानी है। 2001 से अब तक शहर में 7 बम धमाके हो चुके हैं। 2007 में 3 महीने में 2 बड़े बम ब्लास्ट कर दहशतगर्दों ने सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया। हाल ही में एक आतंकी ने खुलासा किया है कि हैदराबाद पाकिस्तान में बैठे आतंक के आकाओं का भारतीय मुख्यालय है।
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हैदराबाद धमाकों से सिहर गई संसद


By visfot news network Friday, 22 February  2013
हैदराबाद में गुरुवार को हुए दो बम विस्फोट की आतंकी घटना की लोकसभा में आज सभी दलों ने एक स्वर में निंदा करते हुए कहा कि यह समय आरोप प्रत्यारोप का नहीं है और सबको मिलकर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के बारे में एक राय बनाने की आवश्यकता है। सदन में शून्यकाल के दौरान:-
1.1 विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने इस विषय को उठाते हुए कहा कि आतंकवाद को किसी मजहब या किसी रंग की नजर से नहीं देखना चाहिए। इसके खिलाफ लड़ाई के लिए इस सोच को स्वीकार करने के साथ पूरे देश को और सभी दलों को एक होना होगा। ऐसा करके ही आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सफलता पाई जा सकती है । हैदराबाद के बम विस्फोट की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण, दर्दनाक और शर्मनाक बताते हुए उन्होंने कहा कि यह दोषारोपण करने का अवसर नहीं है और सबको एकजुट होकर आतंकवाद के खिलाफ लड़ना होगा। हालांकि यह तभी संभव है जब आतंकवाद से लड़ने को लेकर विचारों में समानता हो। यह दुभाग्यपूर्ण है कि देश में ऐसी सोच नहीं बन रही है। उन्होंने कहा कि आतंकवादी घटना की आशंका के बारे में राज्यों को सूचित भर कर देने से केन्द्र के जिम्मदारी की इतिश्री नहीं हो जाती है। उन्होंने इस बात को दुर्भाग्यपूर्ण बताया कि हमले की आशंका की जानकारी दिये जाने के बाद भी आतंकवादी ऐसा करने में सफल हो जाते हैं।

1.2 माकपा के बासुदेव आचार्य ने कहा कि हैदाराबाद में आतंकी हमलों की तीन घटनायें हो चुकी है और इसके बावजूद वहां खुफिया तंत्र बार बार चूक रहा है। उन्होंने कहा कि हैदाराबाद में राष्ट्रीय अपराध निरोधक केन्द्र की मौजूदगी के बावजूद वहां यह घटना कैसे हुई इसका जवाब केन्द्र और राज्य दोनों को देना होगा। उन्होंने कहा कि आतंकवाद का कोई रंग और धर्म नहीं होता और हमें एक होकर इससे लड़ना है।

1.3 समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि आतंकवादी हमले की आशंका की खुफिया सूचना मिलने के बावजूद आतंकी अपने कारनामों को अंजाम देने में कैसे सफल हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि जब जब आतंकी हमले हुए हैं पूरा देश और सदन सरकार के साथ होता है। सभी दलों का समर्थन मिलने के बावजूद आतंकी हमलों को सरकार क्यों नहीं रोक पा रही है, इसका वह जवाब दे। वह बताये कि उसकी क्या कमजोरी है। सपा नेता ने सरकार से सवाल किया कि आतंकी हमले की आशंका की खबर होने के बाद भी हमला हो जाये तो देश की सुरक्षा कैसे होगी। बसपा के दारा सिंह चौहान ने जानना चाहा कि केन्द्र द्वारा राज्य को आतंकी हमले की आशंका की सूचना दिये जाने के बावजूद चूक कहां हुई इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आतंकी हमले के दोषियों को दंडित किया जाना चाहिए लेकिन निर्दोष लोगों को नहीं फंसाना चाहिए।

1.4 जदयू के शरद यादव ने कहा कि आतंकी हमलों की आशंकाओं की सूचना मिलने के बावजूद ऐसी घटनायें हो जाना इस बात का द्योतक है कि यह सरकार ‘लुंज-पुंज’ है। उन्होंने कहा कि यह इस बात का भी इशारा है कि न तो सदन के भीतर न ही सदन के बाहर इस सरकार का इकबाल है। तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में उनका दल पूरी तरह से सरकार के साथ है और इस बारे में वह जो भी कदम उठायेगी उनकी पार्टी उसका समर्थन करेगी।

1.5 कांग्रेस के अरुण कुमार वुंडावल्ली ने कहा कि आतंकवाद की घटना में मारे गये लोगों को उसी तरह का सम्मान मिलना चाहिए जो सीमाओं की रक्षा करने वाले शहीदों को मिलता है।
1.6 द्रमुक के टीआर बालू ने जानना चाहा कि आतंकी हमले की आशंका के बारे में केन्द्र ने आंध्र प्रदेश सरकार को क्या सूचना दी और राज्य सरकार ने क्या कार्रवाई की।
1.7 बीजू जनता दल के भृतुहरि महताब ने कहा कि जब अमेरिका में एक आतंकी घटना और ब्रिटेन में दो तीन घटना होने के बाद उन देशों में अन्य आतंकी घटना नहीं हुई तो भारत ऐसा करने में क्यों सफल नहीं हो पा रहा है।

1.8 अन्नाद्रमुक के थंबीदुरै ने कहा कि कई सालों से देश को अस्थिर करने का प्रयास हो रहा है और आतंकी हमले इसी साजिश का हिस्सा हैं।

1.9 शिवसेना के अनंत गीते ने कहा कि भारत में होने वाले सारे आतंकी हमलों की जड़ें सीमापार पाकिस्तान में हैं। उन्होंने कहा कि अगर आतंकवाद से लड़ना है तो उसे भावनाओं से नहीं जोड़ना होगा।
1.10 तेदेपा के नमा नागेश्वर राव ने कहा कि 2004 से देश में 30 जगह विस्फोट की घटनायें हुई हैं जिनमें 952 लोग मारे गये और दो हजार से अधिक लोग धायल हुए हैं और अकेले आंध्र प्रदेश में ऐसी आठ घटनायें हुई हैं। उन्होंने जानना चाहा कि सरकार ऐसी घटनाओं को रोक पाने में सफल क्यों नहीं हो पा रही है।

1.11 कम्युनिस्ट पार्टी के गुरूदासदास गुप्ता ने कहा कि अफजल गुरू को फांसी दिये जाने के बाद से ही आतंकवादी संगठन इसका बदला लिये जाने की बात कर रहे थे। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि उसने इस धमकी को गंभीरता से क्यों नहीं लिया। उनका यह भी कहना था कि यह इस बात का भी द्योतक है कि हमारा खुफिया तंत्र और कानून व्यवस्था लागू करने वाली एजेंसियां ऐसी घटनाओं को रोकने में अक्षम हैं।
1.12 नेशनल कांफ्रेंस के एस शारिक ने हैदाराबाद बम विस्फोट की घटना को शैतानी हरकत बताते हुए इसकी निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं की केवल निंदा किया जाना ही काफी नहीं है बल्कि ऐसी पुख्ता नीति बनाये जाने की जरूरत है जिससे खुफिया तंत्र की कमियों को दूर किया जा सके और आतंकवाद से सख्ती से निपटा जा सके। उन्होंने सरकार से आतंकवाद से निपटने के मुद्दे पर विचार के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की सलाह दी और कहा कि इस बैठक में खुफिया विशेषज्ञों को बुलाया जाये जिससे यह पता लगाया जा सके कि नीतियों में क्या खामियां हैं।
1.13 राजद के रघुवंश प्रसाद सिंह और
1.14 झारखंड विकास मोर्चा के अजय कुमार ने हैदराबाद बम विस्फोट की घटना को खुफिया तंत्र की विफलता बताया।

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गुरुवार, 21 फ़रवरी 2013

आतंकवाद को आतंकवाद मानें , वोट बैंक की राजनीती छोड़ दें..

- अरविन्द सिसोदिया
भारत यदि आतंकवाद को आतंकवाद मानें , वोट बैंक की राजनीती राजनैतिक दल छोड़ दें तो तीन दिन भी यह ठहर नही सकता ....
आज हैदराबाद की घटना भी,राजनैतिक डरपोक पण और वोट बैंक के कारण हुई , जरा भी साहस दखाया होता तो ये सब न केवल रुकता बल्कि आपराधी भी जेल के सीखचों में होते… जो अब शायद पकड़ में ही नहीं आयें ...
एक रिपोर्ट नीचे पेश हे इसे सरकारों ने अपनाया होता तो देश की दशा सुधर गई होती ....

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अमेरिका से क्या सीखें और क्या नहीं

चंद्रभूषण

नवभारत टाइम्स | Nov 28, 2008,
http://navbharattimes.indiatimes.com/thoughts-platform/viewpoint/--/articleshow/3766332.cms
मुंबई में 26 नवंबर 2008 की रात से शुरू हुए आतंकवादी हमले भारत में अब तक हुए ऐसे सभी हमलों से बुनियादी तौर पर अलग हैं। पुलिस वैन पर कब्जा कर के अंधाधुंध गोलीबारी के लिए उसका इस्तेमाल, सड़कों पर बेखटके ग्रेनेड, राइफलें और मशीनगनें लिए घूमना, आर्थिक राजधानी की समूची सुरक्षा व्यवस्था को पंगु बनाते हुए मुंबई के दो सबसे प्रतिष्ठित होटलों में लोगों को बंधक बना लेना और देश की सबसे ताकतवर आंतरिक सुरक्षा एजेंसियों को 24 घंटे के लिए अपनी मुट्ठी में कस लेना कोई ऐसी घटना नहीं है, जिसकी मिसाल अतीत में खोजी जा सके। भलाई इसी में है कि भारत इसे अमेरिका के 9/11 और ब्रिटेन के 7/7 की तरह लेते हुए आतंक से निपटने की अंतिम तैयारी करे।
अमेरिका में 9/11 के बाद भी काफी समय तक आतंकवाद का खौफ बना रहा। खासकर एंथ्रेक्स से जुड़े बायो-टेररिज्म ने काफी समय तक अमेरिकियों का जीना मुहाल रखा। लेकिन अंतिम निष्कर्ष के रूप में 11 सितंबर 2001 के बाद से अब तक के सात सालों में आतंकवादी अमेरिका पर एक भी उल्लेखनीय हमला करने में कामयाब नहीं हो पाए हैं। इसकी वजह क्या रही, अमेरिकी प्रशासन ने आतंकवाद से निपटने के लिए क्या-क्या कदम उठाए, इसकी नए सिरे से समझदारी कायम करना और उससे अपने काम की चीजें निकालना भारत के लिए जरूरी है।

बुश प्रशासन अमेरिकी जनमत को दबे-छुपे ढंग से यह समझाने का प्रयास करता रहा है कि 9/11 के बाद से अमेरिका पर आतंकी हमला न होने की मुख्य वजह लड़ाई का दुश्मन के इलाके की तरफ ठेल दिया जाना है। लेकिन हकीकत में अमेरिका की आतंकवाद विरोधी तैयारियों का यही सबसे कमजोर पहलू है।
पिछले हफ्ते अमेरिकी संसद में प्रस्तुत एक विशेषज्ञ रिपोर्ट में बताया गया है कि 1968 के बाद से दुनिया के 73 प्रतिशत आतंकवादी संगठनों का खात्मा स्थानीय खुफिया और पुलिस उपायों के जरिए ही संभव हुआ है, लिहाजा अमेरिका को आतंकवाद के खिलाफ विदेशी धरती पर युद्ध लड़ने के बजाय यह काम वहीं की संस्थाओं पर छोड़ कर सारा जोर अपनी आंतरिक सुरक्षा पर ही केंद्रित करना चाहिए।

भारत की तरफ से इस तरह की नी-जर्क-रिएक्शननुमा प्रतिक्रिया सन 2002 में संसद पर हुए हमले के बाद देखने को मिली थी, जब आतंकवाद से आखिरी लड़ाई एक ही बार में लड़ लेने के नाम पर 1500 करोड़ रुपये खर्च करके कई महीनों के लिए अपनी फौज को भारत-पाक सीमा पर तैनात कर दिया गया था। जाहिर है कि मौजूदा माहौल इसे दोहराने की कोई जरूरत नहीं है।

9/11 के बाद आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के लिए अमेरिकी संसद ने जो चार-सूत्रीय योजना बनाई थी, उसमें पहला बिंदु फौजी हमले का था, जिसे सिंहावलोकन के क्रम में ज्यादा कारगर नहीं माना जा सकता। दूसरा बिंदु था आतंकवादियों के धन के सोत सुखा देना। इस रणनीति को दुनिया भर में अभी तक अच्छी-खासी कामयाबी हासिल हुई है।

कहा जा सकता है कि अमेरिका के अलावा यूरोप पर भी आतंकी हमले तुलनात्मक रूप से कम होने की यह काफी बड़ी वजह है। इसमें अभी तक थोड़ी-बहुत भूमिका भारत की भी रही है, लेकिन इसके संदर्भ पश्चिमी ही होते आए हैं।

भारत को अपनी जमीन पर या पड़ोसी देशों में आतंकवाद के वित्तीय सोतों को समाप्त करना है, तो इसके लिए उसे विस्तार से योजना बनानी होगी। खासकर किसी भी स्रोत से पैसा उगाहने पर उतारू भारतीय बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को आतंकवादी ढांचों तक पैसा पहुंचने की आशंका को लेकर मुस्तैद बनाने के लिए काफी कुछ करने की जरूरत है।

अमेरिका में सबसे ज्यादा काम आतंकवाद विरोध के बाकी दोनों सूत्रों पर हुआ है, जिससे सीखना भारत के लिए बहुत जरूरी है। इनमें एक है आंतरिक सुरक्षा ढांचे की पुनर्रचना और दूसरा, सीमाओं की नए सिरे से मजबूती। इन दोनों सूत्रों की अपनी कई समस्याएं हैं। खासकर लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अति सजग अमेरिकी समाज ने शुरू के सालों में इनसे जुड़े कई उपायों का पुरजोर विरोध किया। लेकिन धीरे-धीरे चीजें पटरी पर आती चली गईं और अपने लिए कमोबेश एक फूल-प्रूफ सिक्युरिटी बनाने में अमेरिकी कामयाब रहे।

आंतरिक और सीमा सुरक्षा के लिए अमेरिका में 9/11 के बाद नैशनल इंटेलिजेंस डाइरेक्टर का एक राष्ट्रीय पद निर्मित किया गया, जिसका काम सभी खुफिया एजेंसियों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर निकाले गए निष्कर्ष से राष्ट्रपति को अवगत कराना है। नैशनल काउंटर-टेररिज्म सेंटर नाम की एक राष्ट्रीय संस्था खड़ी की गई, जिसका काम सभी खुफिया सूचनाओं की लगातार स्कैनिंग करके काम की सूचनाओं को क्रमबद्ध रूप देना है।

डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्युरिटी नाम से बाकायदा आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय खड़ा किया गया, जिसका काम सभी राज्यों की पुलिस और कोस्टल गार्ड के बीच तालमेल बिठाना है।

अमेरिका जैसे घोर संघवादी देश के लिए, जहां हर राज्य अपनी स्वतंत्र पहचान का जबर्दस्त आग्रही है, यह काम कतई आसान नहीं था। आगे शांतिकाल में यह संस्था कितनी कारगर हो पाएगी, इसे लेकर अमेरिकी राजनीति विज्ञानियों में आज भी घोर संशय मौजूद है। इस सबके अलावा अमेरिका ने 10 अरब डॉलर खर्च करके विजिटर एंड इमिग्रेंट स्टेटस टेक्नॉलजी प्रोग्राम नाम का एक ऐसा राष्ट्रव्यापी ढांचा तैयार किया, जिसके जरिए देश में बाहर से आने वाले एक-एक व्यक्ति पर चौबीसों घंटे नज़र रखी जा सकती है।

दोनों केंद्रीय खुफिया संस्थाओं सीआईए और एफबीआई के ढांचों को शीतयुद्धोत्तर युग की चुनौतियों के अनुरूप ढालने का काम अमेरिका में पहले से ही चल रहा था। लेकिन 9/11 के बाद उस प्रक्रिया को खारिज करते हुए इन्हें पहली बार अमेरिकी मुख्यभूमि पर हमले की चुनौती को केंद्र में रखते हुए नए सिरे से गढ़ने की कसरत की गई।

भारत इनमें से किसी भी कदम से कुछ सीख पाए या नहीं, लेकिन खुफिया और पुलिस ढांचों को राज्य सरकारों की जमींदारी का अंग मानने की परंपरा 26 नवंबर 2008 के बाद से समाप्त कर दी जानी चाहिए। केंद्र सरकार की तरफ से इस आशय का प्रस्ताव राज्य सरकारों द्वारा लगातार खारिज किया जा रहा है, लेकिन यह रवैया अगर जारी रहा तो हर राज्य को बारी-बारी पिटने के लिए तैयार रहना होगा।

खुफिया और पुलिस ढांचों के एक हद तक केंद्रीकरण और टेक्नॉलजी के स्तर पर इन्हें एक नए धरातल पर उठाए बगैर अभी के आतंकवाद से निपटने की बात सोची भी नहीं जा सकती। राज्य सरकारों को इसके लिए तैयार करने और केंद्र सरकार को भी अपने नियंत्रण वाली खुफिया संस्थाओं के राजनीतिक इस्तेमाल का लोभ छोड़ने का मन बनाने के लिए देश में एक बड़ी राजनीतिक सहमति की आवश्यकता है। ऐसी सहमति अगर अब भी नहीं बनी तो फिर कब बनेगी?

सोमवार, 18 फ़रवरी 2013

भारत में पुनः विश्वगुरू बनने की सभी क्षमतायें - डॉ. विजय भाटकर




सूर्य नमस्कार महायज्ञ का भव्य आयोजन सम्पन्न
पदमश्री डॉ.भाटकर ने किया मोबाइल से सीधा सम्बोधन
भारत में पुनः विश्वगुरू बनने की सभी क्षमतायें - डॉ. विजय भाटकर

प्रस्तुति - अरविन्द सिसोदिया
कोटा 18 फरवरी । भारत में पुनः विश्वगुरू बनने की क्षमता है। यह उद्गार सूर्य नमस्कार महायज्ञ के मुख्य अतिथि डॉ. विजय भाटकर ने अपने मोबाईल सम्बोधन में कहे। भाटकर को सोमवार को कोटा में सूर्य नमस्कार महायज्ञ में मुख्यअतिथि के रूप में आना था किन्तु भारत सरकार की एक आवश्यक बैठक में उन्हे भाग लेने जाने के कारण वे कार्यक्रम में स्वंय भाग लेने कोटा नहीं आ सके। उन्होने कार्यक्रम को मोबाईल से सीधे (लाइव) सम्बोधित किया जिसे लाउडस्पीकर के माध्यम से सहभागियों ने सुना।
स्वामी विवेकानन्दजी के 150 जयन्ति वर्ष के कार्यक्रमों के अन्तर्गत सोमवार को पूरे देश में स्वामी विेकानन्द सार्द्धशती समारोह समिति के तत्वाधान में सामूहिक सूर्य नमस्कार के कार्यक्रम आयोजित हुये है। इसी क्रम में कोटा महानगर समिति के द्वारा कोटा में उपरोक्त आयोजन हुआ ।
कार्यक्रम में स्वामी विवेकानन्द जी के राजस्थान प्रवास पर लिखी गई,हनुमानसिंह राठौड की पुस्तक “ स्वामी विवेकानन्द राजस्थान में ” का भी विमोचन किया गया।
 कोटा स्थित महाराव उम्मेद सिंह स्टेडियम में प्रातः 8 बजे से सूर्य नमस्कार महायज्ञ का अदभुद कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें हजारों की संख्या में सम्मिलित कोटा महानगर के विद्यालयों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों, बहिनों और अन्य सहभागियों नें सामूहिक सूर्य नमस्कार योगासन को , सूर्य भगवान को समर्पित मंत्रोचारण के साथ सम्पन्न किया।
पदमश्री डॉ.विजय भाटकर ने मोबाईल फोन से अपना सम्बोधन दिया जिसमें उन्हाने कहा कि सूर्य नमस्कार योगासन सम्पूर्ण शरीर की क्रियाओं को ठीक रखने ओर उनकी क्षमता वृद्धि के लिये महत्वपूर्ण है। यह शिक्षा ग्रहण कर रहे और परिक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिये विषेश उपयोगी है।  
भाटकर ने कहा भारत में पुनः विश्वगुरू बनने की क्षमता है। उन्होने अपनी बात के समर्थन में कहा ” अमरीका की खुफिया विभाग की रिपोर्ट में यह जिक्र  है कि भारत अमरीका और चीन को 2030 से 2040 के बीच पीछे छोड, ज्ञान एवं तकनीक में आगे बड जायेगा।
उन्होने मोबाईल से सम्बोधन में कहा स्वामी विवेकानन्द ने दो भविष्यवाणियां की थी, पहली की देश अगले 50 साल में आजाद हो जायेगा जो कि 1947 में सही साबित हुई और दूसरी भारत पुनः विश्व गुरू बनेगा, जो कि अब सही सिद्ध होने वाली है। भाटकर ने कहा कि आज भारत की प्रतिष्ठा पूरे विश्व में ज्ञान के कारण ही है । भारत सोफ्टवेयर तकनीक में विश्व में अग्रणी है उसे हार्डवेयर तकनीक में भी महारात हांसिल करनी होगी।
कार्यक्रम के मुख्यवक्ता विज्ञान भारती के अखिल भारतीय संगठनमंत्री जयन्तराव सहस्त्रबुद्धे ने अपने सम्बोधन में कहा भारत पूर्व में भी ज्ञान का विश्व केन्द्र था तक्षशिला, नालंदा, विक्रम इत्यादि विश्वविद्यालयों में हजारों विद्यार्थी विदेशों से शिक्षा ग्रहण करने आते थे। अभी हम विदेशों में शिक्षा ग्रहण करने जाते हैैं । यह स्थिति बदलनी चाहिये और फिर से भारत में लोग शिक्षा ग्रहण करने आयें, यह स्थिति वर्तमान युवा पीढ़ी के बलबूते हमें प्राप्त करनी है।
उन्होने कहा भारतीय वेदान्त का ज्ञान वर्तमान वैज्ञानिकों के लिये भी प्रेरणा स्त्रोत रहा है आज भी इसी ज्ञान के द्वारा सृष्टि के रहस्य खोजने में सहायक है। हम सभी भारतवासियों का यह कर्त्तव्य है कि हम शिक्षा को अपना आधार बना कर, स्वामी विवेकानन्दजी के स्वप्नों को साकार करने में जुट जायें। कार्यक्रम के अंत में सभी सहभागियों को प्रसाद वितरण किया गया ।
कार्यक्रम के मुख्यवक्ता विज्ञान भारती के अखिल भारतीय संगठनमंत्री जयंतराव सहस्त्रबुद्धे, मुख्य अतिथि गोविन्द माहेश्वरी निदेशक एलन केरियर, अध्यक्षता ओमप्रकाश माहेश्वरी निदेशक केरियर पाइंट, विश्ष्टि अतिथि समिति के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं रेजोनेंस के निदेशक आर. के. वर्मा, समिति की प्रदेश कार्यकारणी सदस्या डॉ. संगीता सक्सेना और समिति के प्रांतीय सह संयोजक जटाशंकर शर्मा रहे। अतिथि परिचय एवं स्वागत समिति के सह संयोजक बाबूलाल भाट ने किया और धन्यवाद समिति के महानगर संयोजक महेश शर्मा ने किया। कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम संयोजक श्रवणकुमार शर्मा ने किया । कार्यक्रम के प्रारम्भ में भारतमाता पूजन किया गया अतिथि स्वागत विभाग संयोजक त्रिलोकचंद जैन, प्रचार प्रमुख केवलकृष्ण बांगड, कोषाध्यक्ष रामबाबू सोनी, निरंजनजी और पन्नालालजी ने किया।

रविवार, 17 फ़रवरी 2013

भारत में सुपर कम्प्यूटर : पदमश्री डॉ.विजय भाटकर




सुपर कम्प्यूटर के भारतीय पितामह - पद्मश्री डा. विजय भाटकर

प्रस्तुतकर्ता - अरविन्द सीसौदिया,कोटा            
पदमश्री डॉ.विजय भाटकर ने अमरीका के द्वारा भारत को सुपर कम्प्यूटर दिये जाने से इन्कार के बाद, सुपर कम्प्यूटर का स्वदेशी तकनीक से निर्माण किया। जिससे हमारे वैज्ञानिक तारापुर बिजली घर हेतु अपना परमार्णु इंधन बनाने में सफल हुए हैं, स्वदेशी तकनीक से क्रायोजेनिक इंजन बनाने में सफल हुए वहीं स्वयं के राकेट जी.एस.एल.वी. द्वारा 36,000 कि.मी. दूर उपग्रहों को स्थापित करने में भी सफल हुए हैं ।
            डॉ भाटकर ने अपने एक सम्बोधन में कहा है कि ”2030 तक भारत अमरीका और चीन से आगे होगा“
उन्होने एक सम्बोधन में कहा था कि ”अमरीकी खुफिया एजेंसी की रपट में कहा गया है कि 2030 तक भारत अमरीका और चीन से आगे होगा। हमें स्वयं को इस चुनौती के लिये तैयार करना होगा और जो कमियां हैं उन्हें दूर करने की जरूरत है।“
            उन्होने कहा है कि ” हमारे पास प्रतिभा की कमी नहीं है, कमी है तो बस प्रशासन की।“ 
स्वामी विवेकानंदजी का उल्लेख करते हुये डा. भाटकर ने कहा कि शिकागो भाषण के बाद स्वामीजी ने भविष्यवाणी की थी कि आने वाले 50 साल में भारत को स्वतंत्रता मिल जाएगी और उसके आगे 100 साल में भारत जगद्गुरु बनकर विश्व में छा जाएगा। उनकी पहली भविष्यवाणी 1947 में सत्य साबित हो गई और दूसरी अब होने को है।

सुपर कम्प्यूटर की परम श्रृंखला के वास्तुकार के रूप में डॉ.विजय पाडुंगर भाटकर का नाम सर्वविदित है। वह आईटी वैज्ञानिकों में एक उल्लेखनीय नाम हैं। भाटकर का जन्म अकोला, महाराष्ट्र में एक मराठा परिवार में 11 अक्तूबर, 1949 को हुआ। परम-10,000 महासंगणक के जनक डा. भाटकर ने प्रांरभिक शिक्षा महाराष्ट्र में अकोला गांव में ही पूरी हुई। इसके उपरांत वह 1965 में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के लिए वीएनआईटी, नागपुर चले गए। वीएनआईटी महाराष्ट्र के बेहतरीन और प्रतिष्ठित कालेजो में से एक है। इस कालेज की स्थापना जून 1960 में भारतीय सरकार के एजुकेशनल कार्यक्रम के तहत हुई। इस कालेज का प्रथम सत्र 1960 से शुरू हुआ। इसे बोर्ड ऑफ गवर्नर ने सर  एम.विश्वेश्वरैया के नाम पर इस कालेज का नामकरण किया। इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद 1968 में मास्टर डिग्री के लिए वह इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय ,बड़ौदा चले गए। 1972 में आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग में डाक्ट्रेट की डिग्री प्राप्त की।
इसके बाद भाटकर ने आईटी में शिक्षा,अनुसंधान के लिए अंतराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान की स्थापना की । इस संस्थान में उच्चतर शिक्षा के लिए शोध सुविधाओं के साथ शिक्षण की योजना बनायी गई। श्री भाटकर द्वारा लिखी और सम्पादित बारह पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं और अस्सी से अधिक शोध प्रपत्र वह प्रस्तुत कर चुके हैं। 2003 में रॉयल  सोसायटी की तरफ से दक्षिण अफ्रीका भेजे गए वैज्ञानिक दल का नेतृत्व विजय भाटकर ने किया। वर्तमान में वह घर शिक्षा प्रणाली ईटीएच, सहित जनकल्याण को बढ़ाने वाली कई परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं। वह भारत सरकार वैज्ञानिक सलाहकार समिति के सदस्य के रूप में भी कार्यरत हैं। इसके अलावा भाटकर ने भारत में ब्राडबैंड इंटरनेट का दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए भी कार्यरत हैं। भारतीय आईटी क्षेत्र में महान योगदान के लिए भाटकर को कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कारों  से सम्मानित किया गया है। 1999-2000 में महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार, 2000 में प्रियदर्शनी पुरस्कार और 2001 में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में ओमप्रकाश भसीन फाउंडेशन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कहा जाता है कि आज का युग ज्ञान का युग है । इस युग में आगे बढ़ने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी बने रहना जरूरी है। विजय पी भाटकर का परम श्रृंखला के कम्प्यूटरों का निर्माण कर  भारत को नई ऊचाइयां छूने के लिए आधारभूमि उपलब्ध करवाई है। मिसाइल और नाभिकीय क्षेत्र में भारत ने जो ऊंचाई हासिल की है,उसका श्रेय  विजय भाटकर को भी जाता है।
गायत्री परिवार से जुड़कर उन्होने भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत को गहराई से समझा और परम पूज्य गुरुदेव श्रीराम आचार्य के साहित्य के प्रति हमेषा उत्सुकता रहते हैं।

अध्यक्ष-ई.टी.एच. रिसर्च लैब एवं डिशनेट डी.एस.एल. तथा संस्थापक कुलपति - इंडिया इंटरनेशनल मल्टीवर्सिटी पदमश्री डॉ. विजय भाटकर ने 1980 में ई.आर.एंड डी.सी. (इलेक्ट्रानिक्स रिसर्च एंड डेवलेपमेंट सेंटर), तिरुअनन्तपुरम के निदेशक के रूप में सुपर कम्प्यूटर क्षैत्र में अनेक उत्पादों और तंत्रों के विकास में महती भूमिका निभाई है। तत्पश्चात् अनेक संस्थानों के प्रमुख पद पर रहे हैं। डा. भाटकर ने महासंगणकों अर्थात सुपर कम्प्यूटरों की श्रृंखना में स्वदेशी परम कम्प्यूटर श्रृखंला की सुविधा एवं निर्माण किया, जो एशिया महाद्वीप के सबसे बडेे महासंगणक तंत्रों में से एक है।
सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में उन्नत शिक्षा व अनुसंधान के लिए उन्होंने इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट आफ इंफोर्मेशन टेक्नालाजी की स्थापना की। भारत को विशिष्ट स्थान पर देखने की इच्छा रखने वाले डा. भाटकर कहते हैं कि विद्या की तलाश में खुद को लगाए रखना ही हमारी नियति है।
भारत के प्रति अपने सपने के बारे में वे कहते हैं: -
आज सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दुनियाभर में भारत को सम्मानित स्थान प्राप्त है। इस क्षेत्र में हमारे विकास की गति सबसे तेज है। मैं चाहता हूं कि विद्या-आधारित (सोफ्टवेयर) प्रौद्योगिकी भारत के विकास का केन्द्र बने। भारत से होने वाले निर्यात का 50 प्रतिशत विद्या पर आधारित प्रौद्योगिकी के क्षेत्र से होना चाहिए। एक धारणा है कि गुरुवर (हार्डवेयर) क्षेत्र में चीन कहीं आगे है, जबकि भारत लघुवर ( सोफटवेयर) के क्षेत्र में अच्छा है। हमें इस ओर ध्यान देते हुए गुरुवर (हार्डवेयर) निर्माण में तेजी लानी है। अगर ऐसा हो जाता है तो इसमें कोई शक नहीं कि भारत देष, इलेक्ट्रानिक्स और दूरसंचार यंत्र निर्माण में भी प्रमुख भूमिका निभाएगा। अगर हमें इस शताब्दी के पहले आधे कालखण्ड में अपनी विकास दर 25 प्रतिशत बनाए रखनी है तो हमें प्रौद्योगिकी सर्जक और उत्पाद निर्माता के रूप में उभरना होगा। दुनियाभर की सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियां अपनी अनुसंधान व विकास इकाइयां भारत में स्थापित कर रही हैं। हमें नवसर्जक बनना है तो सूचना प्रौद्योगिकी शिक्षा व अनुसंधान के लिए बडे-बडे संस्थान बनाने होंगे।
हमने लोगों को संगणक ( कम्प्यूटर ) - शिक्षित बनाने के लिए विशेष कम्प्यूटर शिक्षा कार्यक्रम तैयार किए हैं जिसके जरिए लाखों लोग कम्प्यूटर-शिक्षित हुए हैं। मेरा सपना है कि भारत में सबसे अधिक कम्प्यूटर-शिक्षित लोग हों।
आज की पीढ़ी के पुरुषार्थ से ही हम अपने देश को परम वैभव अर्थात् सर्वांगीण उन्नति के पथ पर अर्थात् अभ्युदय और निरूश्रेयस प्राप्ति के मार्ग पर ले जाने में समर्थ होंगे तथा हमारा देश विश्व मानवता के कल्याण के लिए नियति निर्दिष्ट अपनी भूमिका के निर्वाह में सफल होगा। परमेश्वर इस महती कार्य हेतु हमें संकल्प, प्रेरणा और सामर्थ्य प्रदान करें। भारत की असली पूंजी तो इसकी विद्या पर आधारित विरासत और संस्कृति है जो 5000 वर्ष पूर्व वैदिक काल से आरम्भ हुई। भारत की उन्नति और नियति यही सर्वोच्च विद्या है। यही है “भारत” नाम में गुंथा संदेश और यही है हमारी नियति।
डॉ विजय भाटकर परम कम्प्यूटर के अविष्कारक 
मिसाइल तकनीक, क्रायोजनिक इंजन और नाभिकीय विस्फोटों के समय एक साथ करोड़ों की गणनाएं करनी पड़ती है। इसके लिए सुपर कम्प्यूटर की आवश्यकता होती है।  परम शृंखला के सुपर कम्प्यूटर का अविष्कार कर डॉ.विजय भाटकर ने भारत को विष्व पटल पर एक शक्तिशाली देश के रूप में स्थापित कर दिया है।
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सुपर कम्प्यूटर

आधुनिक परिभाषा के अनुसार वे कम्प्यूटर जिनकी मेमोरी स्टोरेज (स्मृति भंडार) 52 मेगाबाइट से अधिक हो एवं जिनके कार्य करने की क्षमता 500 मेगा फ्लॉफ्स (Floating Point operations per second & Flops) हो, उन्हें सुपर कम्प्यूटर कहा जाता है। सुपर कम्प्यूटर में सामान्यतया समांतर प्रोसेसिंग (Parallel Processing) तकनीक का प्रयोग किया जाता है। सुपर कम्प्यूटिंग शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग 1920 में न्यूयॉर्क वर्ल्ड न्यूजपेपर ने आई बी एम द्वारा निर्मित टेबुलेटर्स के लिए किया था। 1960 के दशक में प्रारंभिक सुपरकम्प्यूटरों को कंट्रोल डेटा कॉर्पोरेशन, सं. रा. अमेरिका के सेमूर क्रे ने डिजाइन किया था।
सुपरकम्प्यूटर की परिभाषा काफी अस्पष्टड्ढ है। वर्तमान के सुपर कम्प्यूटर आने वाले समय के साधारण कम्प्यूटर करार दिए जा सकते हैं। 1970 के दशक के दौरान अधिकाँश सुपर कम्प्यूटर वेक्टर प्रोसेसिंग पर आधारित थे। 1980 और 1990 के दशक से वेक्टर प्रोसेङ्क्षसग का स्थान समांतर प्रोसेसिंग तकनीक ने ले लिया। समांतर प्रोसेसिंग तकनीक में बहुत सारे माइक्रोप्रोसेसरों का प्रयोग एक-दूसरे से जोड़कर किया जाता है। ये माइक्रोप्रोसेसर किसी समस्या को उनकी माँगों (demands) में विभाजित करके उन माँगों पर एक साथ कार्य करते हैं। सुपर कम्प्यूटर में 32 या 64 समानांतर परिपथों में कार्य कर रहे माइक्रोप्रोसेसरों के  सहयोग से विभिन्न सूचनाओं पर एक साथ कार्य किया जाता है, जिससे सुपर कम्प्यूटर में 5 अरब गणनाओं की प्रति सेकेण्ड क्षमता सुनिश्चित हो जाती है। इस प्रकार बहुत सारी गणनाओं की आवश्यकताओं वाली जटिल समस्याओं के समाधान हेतु सुपर कम्प्यूटर का उपयोग किया जाता है।
प्रारंभिक सुपर कम्प्यूटर की गति मेगा फ्लॉफ्स (10X6 फ्लॉफ्स) में पाई जाती थी, परंतु अब यह गति साधारण सुपर कम्प्यूटर की गति बनकर रह गई है। वर्तमान में सुपर कम्प्यूटरों में गीगा फ्लॉफ्स (10X9 फ्लाफ्स) की गति पाई जाती है।

प्रयोग
सुपर कम्प्यूटरों का प्रयोग उच्च-गणना आधारित कार्यों में किया जाता है। उदाहरण- मौसम की भविष्यवाणी, जलवायु शोध (वैश्विक ऊष्णता से सम्बंधित शोध भी इसमें शामिल है), अणु मॉडलिंग (रासायनिक यौगिकों, जैविक वृहद् अणुओं, पॉलीमरों और क्रिस्टलों के गुणों और संरचनाओं की कम्प्यूटिंग) इत्यादि। सैन्य और वैज्ञानिक एजेंसियां इसका काफी उपयोग करती हैं।
सुपर कम्प्यूटर चुनौतियाँ और तकनीक
    सुपर कम्प्यूटर भारी मात्रा में ऊष्मा पैदा करते हैं और उनका शीतलन आवश्यक है। अधिकाँश सुपर कम्प्यूटरों को ठंडा करना एक टेढ़ी खीर है।किसी सुपर कम्प्यूटर के दो भागों के मध्य सूचना प्रकाश की गति से अधिक तेजी से नहीं पहुँच सकती है। इसकी वजह से सेमूर क्रे द्वारा निर्मित सुपर कम्प्यूटर में केबल को छोटे से छोटा रखने की कोशिश की गई, तभी उनके क्रे रेंज के सुपर कम्प्यूटरों का आकार बेलनाकार रखा गया।
    सुपर कम्प्यूटर अत्यन्त अल्प काल के दौरान डाटा की विशाल मात्रा का उत्पादन व खपत कर सकते हैं। अभी ”एक्स्टर्नल स्टोरेज बैंडविड्थ“ (eÛternal storage bandwidth) पर काफी कार्य किया जाना बाकी है। जिससे यह सूचना तीव्र गति से हस्तांतरित और स्टोर कीध्पाई जा सके।

सुपर कम्प्यूटरों के लिए जो तकनीक विकसित की गई हैं वे निम्न हैं-
    वेक्टर प्रोसेसिंग
    लिक्विड कूलिंग
    नॉन यूनीफॅार्म मेमोरी एक्सेस (NUMA)
    स्ट्राइप्ट डिस्क
    पैरेलल फाइल सिस्टम्स

सामान्य प्रयोजन वाले सुपर कम्प्यूटरों के प्रयोग
इनके तीन प्रकार होते हैं-
    वेक्टर प्रोसेसिंग सुपर कम्प्यूटरों में एक साथ काफी विशाल मात्रा के डाटा पर कार्य किया जा सकता है।
    काफी कसकर जुड़े हुए क्लस्टर सुपर कम्प्यूटर कई प्रोसेसरों के लिए विशेष रूप से विकसित इंटरकनेक्ट्स का उपयोग करते हैं और उनकी मेमोरी एक-दूसरे को सूचना देती है। सामान्य प्रयोग वाले तेज गति के सुपर कम्प्यूटर आज इस तकनीक का उपयोग करते हैं।
    कॉमोडिटी क्लस्टर्स सुपर कम्प्यूटर काफी संख्या में कॉमोडिटी पर्सनल कम्प्यूटरों का प्रयोग करते हैं, जो उच्च बैंडविड्थ के लोकल एरिया नेटवर्कों से जुड़े रहते हैं।

विशेष प्रयोजन वाले सुपर कम्प्यूटर
विशेष प्रयोजन वाले सुपर कम्प्यूटर उच्च-कार्य क्षमता वाली कम्प्यूटिंग मशीनें होती हैं जिनका हार्डवेयर आर्किटेक्चर एक समस्या विशेष के लिए होता है। इनका प्रयोग खगोल-भौतिकी, गणनाओं और कोड ब्रेकिंग अनुप्रयोगों में किया जाता है।

भारत में सुपर कम्प्यूटर

भारत में प्रथम सुपर कम्प्यूटर क्रे-एक्स MP/16 1987 में अमेरिका से आयात किया गया था। इसे नई दिल्ली के मौसम केंद्र में स्थापित किया गया था। भारत में सुपर कम्प्यूटर का युग 1980 के दशक में उस समय शुरू हुआ जब सं. रा. अमेरिका ने भारत को दूसरा सुपर कम्प्यूटर क्रे-एक्स रूक्क देने से इंकार कर दिया। भारत में पूणे में 1988 में सी-डैक (C&DAC) की स्थापना की गई जो कि भारत में सुपर कम्प्यूटर की तकनीक के प्रतिरक्षा अनुसंधान तथा विकास के लिए कार्य करता है। नेशनल एयरोनॉटिक्स लि. (NAL) बंगलौर में भारत का प्रथम सुपर कम्प्यूटर ”फ्लोसॉल्वर“ विकसित किया गया था। भारत का प्रथम स्वदेशी बहुउद्देश्यीय सुपर कम्प्यूटर ”परम“ सी-डैक पूणे में 1990 में विकसित किया गया। भारत का अत्याधुनिक कम्प्यूटर ”परम 10000“ है, जिसे सी-डैक ने विकसित किया है। इसकी गति 100 गीगा फ्लॉफ्स है। अर्थात् यह एक सेकेण्ड में 1 खरब गणनाएँ कर सकता है। इस सुपर कम्प्यूटर में ओपेन फ्रेम (Open frame) डिजाइन का तरीका अपनाया गया है। परम सुपर कम्प्यूटर का भारत में व्यापक उपयोग होता है और इसका निर्यात भी किया जाता है। सी-डैक में ही टेराफ्लॉफ्स क्षमता वाले सुपर कम्प्यूटर का विकास कार्य चल रहा है। यह परम-10000 से 10 गुना ज्यादा तेज होगा।
सी-डैक ने ही सुपर कम्प्यूटिंग को शिक्षा, अनुसंधान और व्यापार के  क्षेत्र में जनसुलभ बनाने के उद्देश्य से पर्सनल कम्प्यूटर पर आधारित भारत का पहला कम कीमत का सुपर कम्प्यूटर ”परम अनंत“ का निर्माण किया है। परम अनंत में एक भारतीय भाषा का सर्च इंजन ”तलाश“, इंटरनेट पर एक मल्टीमीडिया पोर्टल और देवनागरी लिपि में एक सॉफ्टवेयर लगाया गया है। यह आसानी से अपग्रेड हो सकता है, जिससे इसकी तकनीक कभी पुरानी नहीं पड़ती है।
अप्रैल 2003 में भारत विश्व के उन पाँच देशों में शामिल हो गया जिनके पास एक टेरॉफ्लॉफ गणना की क्षमता वाले सुपरकम्प्यूटर हैं। परम पद्म नाम का यह कम्प्यूटर देश का सबसे शक्तिशाली कम्प्यूटर है।

मंगलवार, 12 फ़रवरी 2013

इटली की कंपनी के प्रमुख की गिरफ्तारी हुई : सौदे में रिश्‍वत



अब क्या कहेंगे...मनमोहनसिंह जी
रक्षा सौदे में एक बार फिर,बोफोर्स सौदे के क्वात्रोची के बाद, इटली कनेक्शन पुनः उजागर हुआ है। वीवीआईपी हेलीकॉफटर अगस्ता वेस्टलैंण्ड की खरीद में 350 करोड की घूस का मामला बहुत पहले उजागर हुआ था और अब उस कंपनी के सीओ की गिरफॅतारी भी हो गई है। कांग्रेस सरकार घूस शंका के दायरे में आ ही गई है और साबीआई भी क्वात्रोची की ही तरह इस मामाले की जांच का महज ड्रामा ही करेगी। होना जाना कुछ नहीं है.....

3850 करोड़ के सौदे में किसे दी गई 350 करोड़ की रिश्‍वत? 

होगी सीबीआई जांच

Agency  |  Feb 12, 2013,
नई दिल्‍ली. अगस्‍ता वेस्‍टलैंड हेलीकॉप्‍टर सौदे की जांच होगी। रक्षा मंत्रालय ने इस मामले में सीबीआई जांच के लिए आदेश दे दिए हैं। वीवीआईपी हेलीकॉप्‍टरों के लिए हुए 3850 करोड़ के इस सौदे में रिश्‍वत के आरोपों के बाद इटैलियन कंपनी के प्रमुख की गिरफ्तारी हुई है। भारत ने इटली की इस कंपनी से 12 हेलीकॉप्‍टर खरीदे थे। आरोप है कि इस सौदे में 350 करोड़ रुपये की घूस दी गई है। सवाल है कि क्‍या वाकई इस सौदे में इतने बड़े पैमाने पर रिश्‍वत दी गई। अगर रिश्‍वत दी गई है तो यह रकम किसे मिली है?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता सैयद अकबरुद्दीन ने कहा है कि इटली की तरफ से इस मामले में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। अकबरुद्दीन ने कहा, 'भारत सरकार ने इस मामले में इटली सरकार से जानकारी मांगी थी, लेकिन इटली की ओर से कहा गया कि चूंकि यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत है और ऐसे में जानकारी साझा नहीं की जा सकती है।'
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 इटली से रक्षा सौदे में घूसखोरी, सरकार ने बैठाई CBI जांच

आईबीएन-7  Feb 12, 2013

नई दिल्ली। भारत और इटली के बीच एक और रक्षा सौदे को लेकर घमासान मच गया है। आज इटली में फिनमैकेनिका नाम की कंपनी के सीईओ को वहां की जांच एजेंसियों ने गिरफ्तार कर लिया। इस कंपनी ने भारत के साथ 12 वीवीआईपी हेलिकॉप्टर की डील की थी। 2010 में 4 हजार करोड़ के इस सौदे के बाद भारत को 3 हेलिकॉप्टर की डिलीवरी भी हो गई है। लेकिन आज इटली के मिलान में कंपनी के दफ्तर पर छापेमारी के बाद उसके सीईओ गिसेपी ओरेसी को गिरफ्तार कर लिया गया। इस सीईओ पर सौदे के लिए घूसखोरी का आरोप लगाया गया है।
फिनमैकेनिका कंपनी में इटली सरकार की भी 30 फीसदी हिस्सेदारी है। इटली में इसी महीने चुनाव भी होने वाले हैं और इस केस के वहां और तूल पकड़ने की उम्मीद है। दूसरी तरफ भारत सरकार ने भी इटली से इस केस में जानकारी मांग ली है। रक्षा मंत्रालय ने भी इस हेलिकॉप्टर सौदे की सीबीआई जांच का आदेश दे दिया है। भारत सरकार ने बाकी बचे 9 हेलिकॉप्टरों की डिलीवरी भी रोक दी है।

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रक्षा घोटालों का इटली कनेक्शनः बीजेपी

dainikbhaskar.com | Apr 25, 2012

नई दिल्ली.एक और रक्षा डील में इटली की कंपनी का नाम आने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि रक्षा घोटालों का इटली कनेक्शन है। नई दिल्ली में प्रैस वार्ता को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता रवि शंकर प्रसाद ने यह भी कहा कि बीजेपी संसद में यह मुद्दा उठाएगी।
 रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इस सरकार का इटेलियन कनेक्शन कहीं न कहीं बार-बार दिखता रहता है।  आज एक बार फिर हेलीकॉप्टर डील से वो सामने आया है। अगस्ता वेस्टलैंड एक कंपनी हैं जिसने 12 वीवीआईपी मूवमेंट हेलीकॉप्टर की 3546 करोड़ में डील की है। समाचार है कि इस कंपनी ने 350 करोड़ रुपए एक बिचौलिए को दिए। मीडिया ने यह रिपोर्ट किया है कि इस बिचौलिए की जांच इटली की एजेंसियां कर रही हैं।  
लेकिन भारत के कानून के मुताबिक कोई भी दलाल या सलाहकार किसी भी डील में नहीं हो सकता। और अगर किसी सौदे में कोई दलाल है तो फिर सौदा रद्द होना चाहिए।   रविशंकर प्रसाद ने आगे कहा कि सवाल यह है कि भारत सरकार क्या कर रही है? क्या इसमें भी किसी को छुपाने की कोशिश की जा रही है। अगर इस मामले में इटली की पुलिस जांच कर  रही है तो फिर भारत सरकार क्या कर रही है? इस मामले का भी इटली कनेक्शन है। 
 गौरतलब है कि फरवरी 2010 में भारत सरकार ने इटली की एक कंपनी से 12 वीवीआईपी हेलीकॉप्टर खरीदने का सौदा किया था। 3546 करोड़ रुपए के इस सौदे में 350 करोड़ रुपए की दलाली की इटली पुलिस जांच कर रही है। वहीं भाजपा सांसद बलवीर पुंज ने कहा कि यह बेहद गंभीर विषय है और भारत सरकार को इस विषय पर प्रतक्रिया देनी चाहिए। भाजपा इस मुद्दे को मजबूती से उठाने पर विचार कर रही है ताकि यह डील रद्द हो सके।
सरकार ने दिए दलाली की जांच के आदेश
हेलीकॉप्टर सौदे में दलाली पर पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए रक्षा मंत्री ए के एंटनी ने कहा है कि वह इटली के साथ हुए हेलीकॉप्टर सौदे में भ्रष्टाचार के आरोपों पर गंभीरता से ध्यान देंगे। एंटनी ने कहा कि मैंने अभी रिपोर्ट को नहीं देखा है, लेकिन दलाली के आरोपों की जांच में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी। उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी होने के बाद ही उन्होंने रक्षा सचिव को इसकी जांच के आदेश दे दिए हैं। इसके साथ ही भारत सरकार ने इटली में भारतीय राजदूत को भी इस संबंध में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
एंटनी ने यह भी कहा कि यदि सौदे में  किसी तरह की दलाली का सच सामने आता है तो वह उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे। भाजपा इस सौदे को रद्द करने की मांग कर रही है।

बजरंग बाण -तुलसीदास

चित्र:Tulsidas.jpg

बजरंग बाण -तुलसीदास 

निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करें सनमान ।
तेहिं के कारज सकल शुभ,सि़द्व करें हनुमान ।।

जय हनुमंत संत हितकारी । सुन लीजै प्रभु अरज हमारी ।।
जन के काज विलंब न कीजै । आतुर दौरि महा सुख दीजै ।।
जैसे कूदि सिंधु महि पारा । सुरसा बदन पैठि विस्तारा ।।
आगे जाय लंकिनी रोका । मारेहुं लात गई सुरलोका ।।
जाय विभीषण को सुख दीन्हा । सीता निरखि परम पद लीन्हा ।।
बाग उजारि सिंधु महं बोरा । अति आतुर जमकातर तोरा ।।
अक्षयकुमार को मारि संहारा । लूम लपेटि लंक को जारा ।।
लाह समान लंक जरि गई । जय जय धुनि सुरपुर नभ भई ।।
अब बिलंब केहि कारन स्वामी । कृपा करहु उर अंतरयामी ।।
जय जय लखन प्रान के दाता । आतुर ह्वबै दुख करहु निपाता ।।
जै हनुमान जयति बलसागर । सुर समूह समरथ भटनागर ।।
ॐ हनु हनु हनु हनुमंत हठीले । बैरिहि मारू बज्र के कीले ।।
ॐ ह्री ह्रीं ह्रीं हनुमंत कपीसा । ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर सीसा ।।
जय अंजनि कुमार बलवंता । शंकरसुवन बीर हनुमंता ।।
बदन कराल काल कुल घालक । राम सहाय सदा प्रतिपालक ।।
भूत, प्रेत, पिसाच निशाचर । अगिन बेताल काल मारी मर ।।
इन्हें मारू, तोहि सपथ राम की । राखु नाथ मरजाद नाम की ।।
सत्य होहु हरि सपथ पाई कै । राम दूत धरू मारू धाई कै ।।
जय जय जय हनुमंत अगाधा । दुख पावत जन केहि अपराधा ।।
पूजा जप तप नेम अचारा । नहि जानत कुछ दास तुम्हारा ।।
बन उपबन मग गिरि गृह माही । तुम्हरे बल हम डरपत नहीं।।
जनकसुता हरि दास कहावौ । ताकी सपथ बिलंब न लावौ ।।
जै जै जै धुनि होत अकासा । सुमिरत होत दुसह दुख नासा ।।
चरन पकरि कर जोरि मनावौं । यहि अवसर अब केहिं गोहरावौं ।।
उठु, उठु, चलु तोहि राम दुहाई । पाँय परौं, कर जोरि मनाई ।।
ॐ चं चं चं चपल चलंता । ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता ।।
ॐ हं हं हाँक देत कपि चंचल । ॐ सं सं सहमि पराने खलदल ।।
अपने जन को तुरत उबारौ । सुमिरत होय आनंद हमारौ ।।
यह बजरंग बाण जेहि मारै । ताहि कहौ फिरि कौन उबारै ।।
पाठ करै बजरंग बाण की । हनुमत रक्षा करै प्रान की ।।
यह बजरंग बाण जो जापै । तासौं भूत प्रेत सब काँपै ।।
धूप देय जो जपै हमेशा । ताके तन नहि रहे कलेशा ।।

    उर प्रतीति दृढ़ सरन हवै , पाठ करै धरि ध्यान ।
     बाधा सब हर, करै सब काम सफल हनुमान ।।

        लखन सिया राम चन्द्र की जय
        उमा पति महादेव की जय
        पवन सुत हनुमान की जय

रविवार, 10 फ़रवरी 2013

आरती श्री रामायणजी की


http://www.siddh-ashram.com/Ramkadarbar.jpg


आरती श्री रामायणजी की .
कीरति कलित ललित सिय पी की ..

गावत ब्रह्मादिक मुनि नारद .
बालमीक बिग्यान बिसारद ..
सुक सनकादि सेष और सारद .
बरन पवन्सुत कीरति नीकी ..

गावत बेद पुरान अष्टदस .
छओं सास्त्र सब ग्रंथन को रस ..
मुनि जन धन संतन को सरबस .
सार अंस सम्म्मत सब ही की ..

गावत संतत संभु भवानी .
अरु घटसंभव मुनि बिग्यानी ..
ब्यास आदि कबिबर्ज बखानी .
कागभुसुंडि गरुड के ही की ..

कलि मल हरनि बिषय रस फीकी .
सुभग सिंगार मुक्ति जुबती की ..
दलन रोग भव भूरि अमी की .
तात मात सब बिधि तुलसी की ..


शनिवार, 9 फ़रवरी 2013

वैलेंटाइन डे की कहानी - राजीव दीक्षित






वैलेंटाइन डे की कहानी
- राजीव दीक्षित

 यूरोप (और अमेरिका) का समाज जो है वो रखैलों (Kept) में विश्वास करता है पत्नियों में नहीं, यूरोप और अमेरिका में आपको शायद ही ऐसा कोई पुरुष या मिहला मिले जिसकी एक शादी हुई हो, जिनका एक पुरुष से या एक स्त्री से सम्बन्ध रहा हो और ये एक दो नहीं हजारों साल की परम्परा है उनके यहाँ | आपने एक शब्द सुना होगा "Live in Relationship" ये शब्द आज कल हमारे देश में भी नव-अिभजात्य वगर् में चल रहा है, इसका मतलब होता है कि "बिना शादी के पती-पत्नी की तरह से रहना" | तो उनके यहाँ, मतलब यूरोप और अमेरिका में ये परंपरा आज भी चलती है,खुद प्लेटो (एक यूरोपीय दार्शनिक) का एक स्त्री से सम्बन्ध नहीं रहा, प्लेटो ने लिखा है कि "मेरा 20-22 स्त्रीयों से सम्बन्ध रहा है" अरस्तु भी यही कहता है, देकातेर् भी यही कहता है, और रूसो ने तो अपनी आत्मकथा में लिखा है कि "एक स्त्री के साथ रहना, ये तो कभी संभव ही नहीं हो सकता, It's Highly Impossible" | तो वहां एक पत्नि जैसा कुछ होता नहीं | और इन सभी महान दार्शनिकों का तो कहना है कि "स्त्री में तो आत्मा ही नहीं होती" "स्त्री तो मेज और कुर्सी के समान हैं, जब पुराने से मन भर गया तो पुराना हटा के नया ले आये " | तो बीच-बीच में यूरोप में कुछ-कुछ ऐसे लोग निकले जिन्होंने इन बातों का विरोध किया और इन रहन-सहन की व्यवस्थाओं पर कड़ी टिप्पणी की | उन कुछ लोगों में से एक ऐसे ही यूरोपियन व्यक्ति थे जो आज से लगभग 1500 साल पहले पैदा हुए, उनका नाम था - वैलेंटाइन | और ये कहानी है 478 AD (after death) की, यानि ईशा की मृत्यु के बाद |
स्वदेशी अपनाओ देश बचाओ
उस वैलेंटाइन नाम के महापुरुष का कहना था कि "हम लोग (यूरोप के लोग) जो शारीरिक सम्बन्ध रखते हैं कुत्तों की तरह से, जानवरों की तरह से, ये अच्छा नहीं है, इससे सेक्स-जनित रोग (veneral disease) होते हैं, इनको सुधारो, एक पति-एक पत्नी के साथ रहो, विवाह कर के रहो, शारीरिक संबंधो को उसके बाद ही शुरू करो" ऐसी-ऐसी बातें वो करते थे और वो वैलेंटाइन महाशय उन सभी लोगों को ये सब सिखाते थे, बताते थे, जो उनके पास आते थे, रोज उनका भाषण यही चलता था रोम में घूम-घूम कर | संयोग से वो चर्च के पादरी हो गए तो चर्च में आने वाले हर व्यक्ति को यही बताते थे, तो लोग उनसे पूछते थे कि ये वायरस आप में कहाँ से घुस गया, ये तो हमारे यूरोप में कहीं नहीं है, तो वो कहते थे कि "आजकल मैं भारतीय सभ्यता और दशर्न का अध्ययन कर रहा हूँ, और मुझे लगता है कि वो परफेक्ट है, और इसिलए मैं चाहता हूँ कि आप लोग इसे मानो", तो कुछ लोग उनकी बात को मानते थे, तो जो लोग उनकी बात को मानते थे, उनकी शादियाँ वो चर्च में कराते थे और एक-दो नहीं उन्होंने सैकड़ों शादियाँ करवाई थी |
जिस समय वैलेंटाइन हुए, उस समय रोम का राजा था क्लौड़ीयस, क्लौड़ीयस ने कहा कि "ये जो आदमी है-वैलेंटाइन, ये हमारे यूरोप की परंपरा को बिगाड़ रहा है, हम बिना शादी के रहने वाले लोग हैं, मौज-मजे में डूबे रहने वाले लोग हैं, और ये शादियाँ करवाता फ़िर रहा है, ये तो अपसंस्कृति फैला रहा है, हमारी संस्कृति को नष्ट कर रहा है", तो क्लौड़ीयस ने आदेश दिया कि "जाओ वैलेंटाइन को पकड़ के लाओ ", तो उसके सैनिक वैलेंटाइन को पकड़ के ले आये | क्लौड़ीयस नेवैलेंटाइन से कहा कि "ये तुम क्या गलत काम कर रहे हो ? तुम अधमर् फैला रहे हो, अपसंस्कृति ला रहे हो" तो वैलेंटाइन ने कहा कि "मुझे लगता है कि ये ठीक है" , क्लौड़ीयस ने उसकी एक बात न सुनी और उसने वैलेंटाइन को फाँसी की सजा दे दी, आरोप क्या था कि वो बच्चों की शादियाँ कराते थे, मतलब शादी करना जुर्म था | क्लौड़ीयस ने उन सभी बच्चों को बुलाया, जिनकी शादी वैलेंटाइन ने करवाई थी और उन सभी के सामने वैलेंटाइन को 14 फ़रवरी 498 ईःवी को फाँसी दे दिया गया |
पता नहीं आप में से कितने लोगों को मालूम है कि पूरे यूरोप में 1950 ईःवी तक खुले मैदान में, सावर्जानिक तौर पर फाँसी देने की परंपरा थी | तो जिन बच्चों ने वैलेंटाइन के कहने पर शादी की थी वो बहुत दुखी हुए और उन सब ने उस वैलेंटाइन की दुखद याद में 14 फ़रवरी को वैलेंटाइन डे मनाना शुरू किया तो उस दिन से यूरोप में वैलेंटाइन डे
मनाया जाता है | मतलब ये हुआ कि वैलेंटाइन, जो कि यूरोप में शादियाँ करवाते फ़िरते थे, चूकी राजा ने उनको फाँसी की सजा दे दी, तो उनकी याद में वैलेंटाइन डे मनाया जाता है | ये था वैलेंटाइन डे का इतिहास और इसके पीछे का आधार |

स्वदेशी अपनाओ देश बचाओ
अब यही वैलेंटाइन डे भारत आ गया है जहाँ शादी होना एकदम सामान्य बात है यहाँ तो कोई बिना शादी के घूमता हो तो अद्भुत या अचरज लगे लेकिन यूरोप में शादी होना ही सबसे असामान्य बात है | अब ये वैलेंटाइन डे हमारे स्कूलों में कॉलजों में आ गया है और बड़े धूम-धाम से मनाया जा रहा है और हमारे यहाँ के लड़के-लड़िकयां बिना सोचे-समझे एक दुसरे को वैलेंटाइन डे का कार्ड दे रहे हैं | और जो कार्ड होता है उसमे लिखा होता है " Would You Be My Valentine" जिसका मतलब होता है "क्या आप मुझसे शादी करेंगे" | मतलब तो किसी को मालूम होता नहीं है, वो समझते हैं कि जिससे हम प्यार करते हैं उन्हें ये कार्ड देना चाहिए तो वो इसी कार्ड को अपने मम्मी-पापा को भी दे देते हैं, दादा-दादी को भी दे देते हैं और एक दो नहीं दस-बीस लोगों को ये
ही कार्ड वो दे देते हैं | और इस धंधे में बड़ी-बड़ी कंपिनयाँ लग गयी हैं जिनको कार्ड बेचना है, जिनको गिफ्ट बेचना है, जिनको चाकलेट बेचनी हैं और टेलीविजन चैनल वालों ने इसका धुआधार प्रचार कर दिया | ये सब लिखने के पीछे का उद्देँशय यही है कि नक़ल आप करें तो उसमे अकल भी लगा लिया करें | उनके यहाँ साधारणतया शादियाँ नहीं होती है और जो शादी करते हैं वो वैलेंटाइन डे मनाते हैं लेकिन हम भारत में क्यों ??????
जय हिंद! स्वदेशी अपनाओ देश बचाओ

शुक्रवार, 8 फ़रवरी 2013

श्रीराम जन्मभूमि, गोरक्षा,गंगा की पवित्रता,वोट बैंक की सांप्रदायिकता,महिला सुरक्षा



विश्व हिन्दू परिषद केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल बैठक महाकुम्भ प्रयागराज 2013
विश्व हिन्दू परिषद केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल बैठक
माघ कृष्णपक्ष एकादशी विक्रम संवत् 2069 दिनांक: 6 फरवरी, 2013 ई0 रसिया बाबा नगर, सेक्टर-10, मोरी रोड, मुक्ति मार्ग चैराहा, महाकुम्भ प्रयागराज 2013

प्रस्ताव – श्रीराम जन्मभूमि
त्रिवेणी के पावन संगमतट पर चल रहे पूर्णकुम्भ के अवसर पर आयोजित केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल का स्पष्ट मत है कि जिस प्रकार त्रेतायुग में प्रभु श्रीराम ने वन, गिरि, कन्दराओं और ग्राम-ग्राम यात्रा करते हुए प्रबल जन जागरण किया। उसी प्रकार आज भी श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर निर्माण की बाधाओं को दूर करने के लिए सम्पूर्ण भारत के ग्राम-ग्राम में तथा नगरों की प्रत्येक गली में एवं वन-पर्वतों में एक महा-जागरण एवं महा-अनुष्ठान की आवश्यकता है। इसलिए केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल सम्पूर्ण विश्व में फैले रामभक्त हिन्दू समाज का आवाह्न करता है कि प्रत्येक हिन्दू परिवार आगामी वर्ष प्रतिपदा विक्रमी संवत् 2070 दिनांक 11 अप्रैल, 2013 ई0 से अक्षय तृतीया दिनांक 13 मई, 2013 ई0 तक विजय महामंत्र ‘‘श्रीराम जय राम जय जय राम’’ का प्रतिदिन कम से कम ग्यारह माला जप करके आध्यात्मिक बल निर्माण करें। यह आध्यात्मिक शक्ति ही मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करेगी। हम भारत सरकार को याद दिलाना चाहते हैं कि वर्ष 1994 ई0 में भारत सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में शपथपूर्वक कहा था कि यदि ‘‘यह सिद्ध होता है कि विवादित स्थल पर 1528 ई0 के पूर्व कोई हिन्दू उपासना स्थल अथवा हिन्दू भवन था तो भारत सरकार हिन्दू भावनाओं के अनुरूप कार्य करेगी’’ इसी प्रकार तत्कालीन मुस्लिम नेतृत्व ने भारत सरकार को वचन दिया था कि ऐसा सिद्ध हो जाने पर मुस्लिम समाज स्वेच्छा से यह स्थान हिन्दू समाज को सौंप देगा। 30 सितम्बर, 2010 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पूर्णपीठ द्वारा घोषित निर्णय से स्पष्ट हो गया है कि वह स्थान ही श्रीराम जन्मभूमि है जहाँ आज रामलला विराजमान हैं तथा 1528 ई0 के पूर्व इस स्थान पर एक हिन्दू मन्दिर था, जिसे तोड़कर उसी के मलबे से तीन गुम्बदों वाला वह ढाँचा निर्माण किया गया था। अतः आवश्यक है कि अब भारत सरकार एवं मुस्लिम समाज अपने वचनों का पालन करे।
अब भारत सरकार हिन्दू को बलिदानीभाव धारण कर आन्दोलन के लिए बाध्य न करे और आगामी वर्षाकालीन संसद सत्र में कानून बनाकर श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण की सभी बाधाओं को दूर करते हुए वह स्थान श्रीराम जन्मभूमि न्यास को सौंप दे। भगवान का कपड़े का घर अब आँखों को चुभता है और इसके स्थान पर भव्य मन्दिर निर्माण करने को हिन्दू समाज आतुर है।
हमारा यह भी सुनिश्चित मत है कि जन्मभूमि के चारों ओर की भारत सरकार द्वारा अधिगृहीत 70 एकड़ भूमि प्रभु श्रीराम की क्रीड़ा एवं लीला भूमि है। मार्गदर्शक मण्डल चेतावनीपूर्वक भारत सरकार को आगाह करना चाहता है कि अयोध्या की सांस्कृतिक सीमा के अन्दर विदेशी आक्रान्ता बाबर के नाम से किसी भी प्रकार का स्मारक अथवा कोई इस्लामिक सांस्कृतिक केन्द्र नहीं बनने देंगे और अयोध्या के हिन्दू सांस्कृतिक स्वरूप की सदैव रक्षा करेंगे। साथ ही साथ श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर के जिस प्रारुप (माॅडल) के लिए सवा छः करोड़ हिन्दुओं ने धनराशि अर्पित की उसी प्रारुप का मन्दिर श्रीराम जन्मभूमि पर बनेगा तथा उन्हीं पत्थरों से बनेगा, जो नक्काशी करके अयोध्या कार्यशाला में सुरक्षित रखें हैं और श्रीराम जन्मभूमि न्यास ही मन्दिर बनाएगा। मार्गदर्शक मण्डल सभी राजनीतिक दलों का आवाह्न करता है कि हिन्दू भावनाओं का आदर करते हुए श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर निर्माण हेतु संसद में सहयोग करें अन्यथा हिन्दू समाज सन्तों के नेतृत्व में प्रचण्ड जन आन्दोलन को बाध्य होगा।

प्रस्ताव – गोरक्षा
त्रिवेणी संगम प्रयागराज में चल रहे पूर्णकुम्भ के पावन अवसर पर इस सन्त महासम्मेलन की चिन्ता है कि भगवान श्रीराम और गोपालकृष्ण तथा तीर्थंकरों की पावनी धरा पर आज भी सूर्योदय के साथ प्रतिदिन 50 हजार गोवंश की हत्या हो रही है। हिन्दू समाज गोमाता को पूजनीय व सब देवों को धारण करने वाली माता मानकर उसके प्रति श्रद्धा और भक्ति भाव रखता है। हिन्दू शास्त्रों में ‘‘गावः सर्वसुखप्रदाः’’ कहा है।
गोवंश की रक्षा की माँग हिन्दू समाज लम्बे समय से कर रहा है। स्वतंत्रता आन्दोलन के समय बालगंगाधर तिलक महाराज ने व महात्मा गाँधी ने गोहत्या बंदी की बात कही थी, परन्तु गाँधी का नाम लेकर राजनीति करने वाली कांग्रेस ने गोहत्या बंदी की माँग करने वाले सन्तों और भक्तों पर 7 नवम्बर, 1966 को गोलियाँ चलाकर मौत के घाट उतारने का पाप किया है। यह सन्त महासम्मेलन इस गोहत्यारी सरकार की घोर निन्दा करता है।
कांग्रेस हिन्दू समाज को लम्बे काल से प्रताडि़त करती रही है। हिन्दू समाज भारत माता की जय, वन्देमातरम् बोलता रहा तो इस कांग्रेस ने भारत को विभाजित कर एक शत्रु राज्य पाकिस्तान का निर्माण किया है। हिन्दू समाज गोरक्षा, गोसंवर्धन की बात करने लगा तो इन्होंने लगभग 4500 यांत्रिक कत्लखाने खोलकर गोहत्या की गति बढ़ाने का कार्य किया है। यांत्रिक कत्लखानों के अलावा लगभग 36 हजार रजिस्टर्ड कत्लखानों को भी सरकार ने पूर्व से ही अनुमति दे रखी है। गोवंश का नाम मिटाने के लिए प्रतिदिन तस्करी द्वारा 25-30 हजार गोवंश बंगलादेश को जा रहा है। न केन्द्रीय सरकार और न राज्य सरकारें इस दिशा में विशेष चिन्तित हैं। यदि यही क्रम चलता रहा तो आने वाले कुछ वर्षों में भारत में गोवंश का दर्शन ही दुर्लभ हो जाएगा।
आज की भारत सरकार गोवंश की हत्या करके गोमांस विदेशी राष्ट्रों में बेचकर पाप के डालर एकत्रित करने वाली सरकार है। यह सन्त महासम्मेलन रोषपूर्वक केन्द्र व राज्य सरकारों को चेतावनी देता है कि गोवंश रक्षा का केन्द्रीय कानून का निर्माण करो और अविलम्ब सभी यांत्रिक कत्लखानों को बंद करने का आदेश दो। यदि सरकार शीघ्रता से इस दिशा में सक्रिय नहीं हुई तो एक अभूतपूर्व जन ज्वार उठेगा जो गोहत्यारी कांग्रेस सरकार को धरती की धूल चटाएगा।

प्रस्ताव – विषय: गंगा
प्रयागराज में पूर्णकुम्भ के अवसर पर आयोजित केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल गंगा की वर्तमान स्थिति को लेकर चिन्तित है। गंगा के प्रवाह में जल की कमी और उसमें बढ़ते हुए प्रदूषण से गंगा की इस सनातन धारा पर संकट दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। गंगा और उसकी सहयोगी नदियों पर बनने वाले बाँध और गंगोत्री से लेकर गंगासागर तक गंगा के तटवर्ती शहरों तथा उद्योगों का समस्त उत्सर्जित जल बिना किसी अवरोध के गंगा में गिर रहे हैं। सन् 1984 से लेकर अब तक प्रदूषण नियंत्रण के लिए केन्द्र एवं प्रान्त सरकारों द्वारा किए गए सभी प्रयास गर्त साबित हो रहे हैं। शहरी आबादी और उद्योगों से विसर्जित प्रदूषण की मात्रा, जल शोधन के लिए किए गए सरकारी उपायों से बहुत अधिक है। जल शोधन संयंत्र भी विद्युत चालित होने के कारण पूरे समय काम नहीं कर पाते हैं। उदाहरण के लिए हरिद्वार में प्रतिदिन 70 डस्क् प्रदूषित जल-मल निकलता है जबकि जल शोधन यंत्रों की क्षमता मात्र 45 डस्क् की है।
विगत कई वर्षों से देश का गंगाभक्त समाज गंगा की वर्तमान दुर्दशा के विरुद्ध आवाज उठा रहा है। सन्त समाज समय-समय पर विभिन्न आन्दोलनों, सभाओं एवं धरना-प्रदर्शन के द्वारा सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित करता रहा है। लेकिन केन्द्र और प्रान्त की सरकरों का रवैया गंगा के प्रति सदैव गुमराह करने वाला रहा है। 2010 के हरिद्वार कुम्भ में आक्रोशित सन्त समाज को आश्वस्त करते हुए देश के प्रधानमंत्री डाॅ0 मनमोहन सिंह जी ने हम लोगों की माँग पर गंगा को राष्ट्रीय नदी तथा गंगा के अविरल और निर्मल प्रवाह को सुरक्षित करने के लिए ‘‘गंगा बेसिन प्राधिकरण’’ का गठन किया था। लेकिन ये दोनों बातें घोषणा मात्र ही साबित हुई हैं। न तो गंगा को राष्ट्रीय नदी का संवैधानिक अधिकार दिया गया है और न ही संसद से गंगा के राष्ट्रीय नदी की स्वीकृति हासिल की गई है। गंगा बेसिन प्राधिकरण (जिसके अध्यक्ष स्वयं प्रधानमंत्री महोदय हैं) की दो वर्षों में केवल दो बैठकें हुई हैं और वे बैठकें भी बिना किसी निर्णय के समाप्त हो गई। सरकार के इस रवैये से आहत होकर प्राधिकरण के कई सदस्यों ने त्यागपत्र दे दिया है। आज देश के सभी प्रमुख सन्त सरकार के इस रवैये से आहत और क्षुब्ध होकर संघर्ष करने के लिए सड़क पर उतरने को बाध्य है। जब जब सन्तों के द्वारा गंगा को लेकर आक्रोश व्यक्त किया जाता है, उस समय केन्द्र सरकार तात्कालिक राहत के नाम पर कोई आश्वासन दे देती है लेकिन उन आश्वासनों को अमल में लाने का न कोई प्रयास होता है और न सरकारी स्तर पर कोई फैसला ही लिया जाता है।
प्रो0 जी. डी. अग्रवाल (वर्तमान नाम-स्वामी सानन्द) के दीर्घकालीन अनशन और विश्व हिन्दू परिषद के प्रयास से लोहारी नागपाला की परियोजना रोकी गई थी लेकिन उसका अनुबन्ध ;डव्न्द्ध आज तक निरस्त नहीं किया गया है। अभी अलकनन्दा पर श्रीनगर में धारी देवी के निकट बन रही परियोजना को रोका तो गया है लेकिन उसको भी निरस्त करने की नियत सरकार की नहीं है। वहाँ केन्द्र के विशेषज्ञ पुनः अध्ययन के लिए भेजे गए हैं। इसी तरह आए दिन योजनाओं के विरुद्ध जब कभी कोई आक्रोश निर्मित होता है तो परियोजनाओं को बीच में ही रोक दिया जाता है और आक्रोश शान्त होते ही फिर से उस पर काम शुरू हो जाता है। इसलिए केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल का यह दृढ़ मत है कि गंगा और उसकी सहायक नदियों पर कोई बाँध न बनाया जाए और टिहरी जैसे बड़े बाँध से, जो पूरी भागीरथी को ही अपने जलाशय में कैद कर लेता है, गंगा को मुक्त किया जाए।
शहरी और औद्योगिक प्रदूषण को रोकने के लिए कड़े कानून बनाए जाएं और गंगा के निर्बाध प्रवाह और उसके जल की पवित्रता को बनाए रखने की, गंगा के एक राष्ट्रीय नदी होने के नाते, पूरी जिम्मेदारी केन्द्र सरकार ले। गंगा बेसिन प्राधिकरण का पुनर्गठन हो और उस प्राधिकरण में गंगा के निर्बाध और निर्मल प्रवाह के लिए प्रतिबद्ध वैज्ञानिकों, पर्यावरणविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रमुख सन्तों को शामिल किया जाए।
पंडित मदनमोहन मालवीय जी एवं अंग्रेज सरकार के मध्य 1916 ई0 में हुए अनुबंध के प्रति केन्द्र सरकार अपनी प्रतिबद्धता घोषित करे और उसको दृष्टि में रखकर गंगा के निर्बाध प्रवाह एवं गंगा में यथेष्ठ जल की मात्रा तथा जल की निर्मलता व पवित्रता को सुनिश्चित करने वाली एक मजबूत संवैधानिक योजना संसद में पारित करे, अन्यथा सन्तगण गंगा की रक्षा के लिए कठोर निर्णय लेने को बाध्य होंगे।   

प्रस्ताव – हिन्दू आतंकवाद – मुस्लिम वोट बैंक को आकर्षित करने का एक घृणित हथियार
जयपुर में आयोजित कांग्रेस के तथाकथित चिन्तन वर्ग में भारत के गृहमंत्री श्री सुशील शिंदे ने, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व भाजपा के प्रशिक्षण वर्गोंे में आतंकवादी प्रशिक्षण देने के संबंध में जो बयान दिया है वह अनर्गल है, निराधार है। केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल उसकी कठोर शब्दों में निन्दा व भत्र्सना करता है। आतंकवाद का इतिहास बताता है कि भारत में आतंकवाद के जितने भी स्वरूप हैं उनको प्रारम्भ करने व पोषण करने का राष्ट्र विरोधी काम कांग्रेस ने ही किया है। पंजाब का आतंकवाद, सिमी, लिट्टे का प्रशिक्षण, नक्सलवादियों का पोषण, पूर्वोत्तर के चर्च प्रेरित आतंकवाद आदि के साथ कांग्रेस का क्या संबंध रहा है, यह जग जाहिर है। इसी प्रकार मोहम्मद सूरती, कलोटा जैसे दर्जनों सजायाफ्ता आतंकवादी कांग्रेस के बड़े नेता रहे हैं। भारतीय इतिहास में सबसे बड़ी आतंकी घटना, 1984 में 3 हजार मासूम सिखों के नरसंहार के लिए कांग्रेस के शीर्षस्थ नेता ही जिम्मेदार थे। शायद अपने इन पापों को छिपाने के लिए ही वे देशभक्त संगठनों पर आतंकवाद का घृणित आरोप मढ़ रहे हैं।
‘‘हिन्दू आतंकवाद’’, ‘‘भगवा आतंकवाद’’ जैसे शब्दों का प्रयोग करके कांग्रेस ने सिद्ध कर दिया है कि वे भारतवर्ष, हिन्दू समाज व हिन्दू संतों के इतिहास और परम्परा से पूर्ण रूप से अनभिज्ञ हैं। हिन्दू समाज ने सदैव ही सम्पूर्ण विश्व के क्रूर समाजों द्वारा सताये गये मनुष्य समुदायों को अपने यहां शरण दी है तथा ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम’’ के संकल्प के साथ हमेशा विश्व में भाई चारे का भाव विकसित किया है। भगवा रंग त्याग और बलिदान का प्रतीक है। शिंदे जी ने अपने वक्तव्य से हिन्दू समाज के उज्जवल इतिहास तथा संतों व बलिदानियों की महान परम्परा को अपमानित किया है, जो असहनीय है। वैसे तो इस बयान की चैतरफा निन्दा हुई है, पर अगर कोई खुश हुए हैं तो हाफिज सईद जैसे आतंकवादी ही खुश हुए हैं। मार्गदर्शक मण्डल यह जानना चाहता है कि शिंदे जी देश के गृहमंत्री हैं अथवा आतंकवादियों के प्रवक्ता हैं।
विश्व व्यापी आतंकवादी घटनाओं में पकड़े गये युवकों के कारण सम्पूर्ण विश्व में इस आतंकवाद को दो नाम दिये गये, ‘जिहादी आतंकवाद’ और ‘इस्लामी आतंकवाद’। इसके कारण कटघरे में खड़े हुए मुस्लिम समाज के सबसे बड़े पक्षधर के रूप में अपने आपको सिद्ध करने के लिए ही, मुस्लिम वोटों के भिखारी नेताओं ने पिछले दिनों ‘‘हिन्दू आतंकवाद’’ और ‘‘भगवा आतंकवाद’’ जैसे शब्दों में गढ़ा। अपनी गढ़ी हुई कहानियों को सत्य सिद्ध करने के लिए ही सरकार ने भारत के कुछ संतों व हिन्दुओं को पकड़ा परन्तु सब प्रकार के अमानवीय व्यवहार के बावजूद भी वे अभी तक पकड़े गए व्यक्तियों पर कोई दोष सिद्ध नहीं कर सके और अब ये लोग खिसयानी बिल्ली की तरह और अधिक आक्रमक होने की असफल कोशिश कर रहे हैं। इन्होंने मुस्लिम समाज के सामने आये आत्मनिरीक्षण के अवसर भी समाप्त कर दिये, इससे आतंकवादियों के हौसले बुलन्द हुए हैं। देश के लिए हमेशा से समर्पित हिन्दू समाज, हिन्दू संतों व हिन्दू संगठनों को विश्वभर में बदनाम करने का दुष्कर्म भी किया है।
वर्तमान केन्द्र सरकार का मुस्लिम तृष्टिकरण का लम्बा इतिहास है। भारत का विभाजन कांग्रेस की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति का ही विषाक्त फल था जिसका विष भारत माँ को आज भी व्यथित कर रहा है। स्वतंत्र भारत में भी हज यात्रा के लिए सब्सिडी देने से शुरू हुआ मुस्लिम तुष्टिकरण का यह आत्मघाती अभियान सब प्रकार की सीमाएं पार कर चुका है। सम्पूर्ण विश्व में भारत ही ऐसा देश है जहां मुस्लिम समाज के लिए अलग से कानून है जिसका लाभ लेकर वे अपनी आबादी अंधाधुंध बढ़ाकर भारत में ही हिन्दू समाज को अल्पसंख्यक बनाना चाहते हैं। भारत की सैक्युलर सरकारें करोड़ों मुस्लिम बांग्लादेशी घुसपैठियों के भारत विरोधी गतिविधियों के बावजूद उसका स्वागत और संरक्षण कर रही है। साम्प्रदायिक दंगों से हमेशा से पीडि़त हिन्दू समाज को ही अपराधी घोषित करने के लिए ‘‘साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा विरोधी विधेयक’’ लाया गया है। देश के संसाधनों को अनेक वर्षों से लूट रहे मुस्लिम समाज को पिछड़ा घोषित करके उनको आरक्षण देने के षडयंत्र को लागू करने का भरसक प्रयास किया जा रहा है। न्यायपालिका द्वारा पंथिक आधार पर आरक्षण को कई बार असंवैधानिक घोषित करने के बावजूद भी इन सैक्युलर राजनीतिज्ञों में इसको लागू करने की होड़ लगी है। भारत के संसाधनों को इन लोगों पर बहुत ही बेदर्दी से लुटाया जा रहा है। आज 95 लाख से अधिक मुस्लिम विद्यार्थियों को छात्रवृŸिा दी जा रही है। मुस्लिम विद्यार्थियों व उद्यमियों को केवल 3: ब्याज पर ऋण दी जा रहा है जबकि हिन्दू विद्यार्थियों व उद्यमी को 14ः से 16ः तक ब्याज देना पड़ता है। 14 लाख मुस्लिम महिलाओं को 5000रु0 प्रति महिला प्रतिमाह भŸाा देने का निर्णय किसी के भी गले नहीं उतरता है। ऐसी और दर्जनों योजनाएं सरकारी खजाने को खाली कर रही हैं तथा मुस्लिम समाज में अलगाव के भाव को और भी पुष्ट कर रही है। हिन्दू आतंकवाद शब्द का झूठा प्रचार इसी कड़ी का अगला कदम है जिसके माध्यम से कांग्रेस व अन्य कथित सैक्युलर दल मुस्लिम वोट बैंक को अपनी ओर मजबूती से आकर्षित करना चाहते हैं।
केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल का यह स्पष्ट अभिमत है कि मुस्लिम तुष्टिकरण के इस आत्मघाती षड्यंत्रों से ये लोग देश का भीषण अहित कर रहे है। कुम्भ मेले में एकत्रित सन्त समाज की माँग है कि:-
01. भारत के प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह गृहमंत्री श्री सुशील शिन्दे को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त करके उनके इस अनर्गल प्रलाप के लिए भारत की जनता से माफी मांगे।
02. मुस्लिम तुष्टिकरण के इस साम्प्रदायिक कदमों को भारत की सभी सरकारें वापस लें।
03. भारत में समान आचार संहिता लागू करके भारत के सब नागरिकों के साथ समान व्यवहार करना प्रारम्भ करें।
केन्द्र सरकार व संबंधित राज्य सरकारें हिन्दू समाज को सड़कों पर उतरने के लिए बाध्य न करे और इन देशविरोधी कदमों को अतिशीघ्र वापस लें।

प्रस्ताव – महिला सुरक्षा
जिस देश में ‘‘यत्र नार्यन्तु पूज्यते रमन्ते तत्र देवता’’ को मूल मंत्र माना जाता है और जहाँ पर सबसे सशक्त व्यक्तित्व के रूप में एक महिला को जाना जाता है, जहाँ पर लोकतंत्र के सबसे बड़े सदन लोकसभा की अध्यक्षा महिला है और नेता प्रतिपक्ष भी महिला हो, आज वहाँ पर महिलाओं की दुर्दशा से केवल भारत ही नहीं सम्पूर्ण विश्व का सभ्य समाज व्यथित हो रहा है।
देश में दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे बलात्कार, कन्या भू्रण हत्या, दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा तथा महिलाओं के साथ हो रही छेड़खानी सन्त समाज के लिए चिन्ता का विषय बन गई है। यह सर्वकालिक सत्य है कि जिस समाज में महिलाओं का सम्मान नहीं है, वह समाज सभ्य नहीं माना जा सकता।
दिल्ली में बलात्कार की एक घृणित एवं पैशाचिक घटना के कारण आज इस विषय पर सम्पूर्ण देश में चिन्ता व्यक्त की जा रही है। सभी पक्ष अपने-अपने सुझाव दे रहे हैं लेकिन सन्त समाज का यह मानना है कि इस विषय पर समग्र दृष्टिकोण से विचार करना होगा। बलात्कार व अन्य इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए कठोरतम उपाय तो करने ही होंगे लेकिन महिलाओं के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव लाने के लिए भी प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।
दूरदर्शन, चलचित्र या विज्ञापनों के माध्यम से नारियों का जिस तरह से चित्रण किया जाता है वह विकृत मानसिकता का ही निर्माण करेगी। बाल्यकाल से ही बच्चों को नैतिक शिक्षा से विमुख करके एक स्वस्थ मानसिकता निर्माण करने का विचार नहीं किया जाता। धर्मनिरपेक्षता के नाम पर एक धर्मविहीन समाज का निर्माण किया जा रहा है। सन्त समाज का यह मानना है कि महिलाओं की वर्तमान दुरावस्था इस धर्मनिरपेक्ष राजनीति की ही देन है। अब भारत के प्रधानमंत्री भी शिक्षा मंत्रालय को नैतिक शिक्षा देने का आदेश दे रहे हैं। इसलिए अब धर्मनिरपेक्षता के नाम पर मूल्यविहीन शिक्षा देने का पाखण्ड बन्द कर देना चाहिए।
सन्त समाज इस परिस्थिति में चुप नहीं बैठ सकता। हमारी सरकार से माँग है कि-
1. शिक्षा के सभी स्तरों पर नैतिक शिक्षा अनिवार्य की जानी चाहिए।
2. दूरदर्शन, चलचित्र, विज्ञापन व अन्य प्रचार माध्यमों में महिलाओं का अश्लील चित्रण पूर्णरूप से प्रतिबन्धित होना चाहिए।
3. वर्मा कमेटी की अनुशंसाओं को पूर्णरूप से लागू किया जाना चाहिए। इस अनुशंसाओं में राजनीतिज्ञों से सम्बंधित अनुशंसाएं भी किसी भी स्थिति में छोड़नी नहीं चाहिए।
4. इन अनुशंसाओं में संशोधन करके बलात्कारी को मृत्यु दण्ड का संशोधन अवश्य करना चाहिए।
5. नाबालिग की वयमर्यादा 18 वर्ष से 16 वर्ष करने की आवश्यकता है। जिससे उम्र की मर्यादा का लाभ उठाकर दुष्कर्मी कानून से बच न पाए।

संसद अपवित्र करना बंद करें:राज्यसभा के उपसभापति पी जे कुरियन



नैतिक रूप से यह  बहुत गंभीर प्रकरण हे और जब तह पुनः इस का विश्लेषण नहीं हो जाता , तब तक उन्हें संसद में भी नहीं घुसना चाहिए ....................

सूर्यनेल्ली मामला:कुरियन का त्यागपत्र से इनकार
नयी दिल्ली : सूर्यनेल्ली बलात्कार मामले को लेकर हमले झेल रहे राज्यसभा के उपसभापति पी जे कुरियन ने आज यह कहते हुए त्यागपत्र देने से इनकार किया कि वह बेकसूर हैं. कुरियन ने कहा, ‘‘मुझे देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा कानूनी और नैतिक तौर पर पूरी तरह से बरी कर दिया गया है. अपने विवेक के आधार पर मैं एक निर्दोष व्यक्ति हूं.’’ 
यह पूछे जाने पर कि इस मामले को लेकर राजनीतिक हंगामे के मद्देनजर क्या वह अपने पद से त्यागपत्र देंगे, उन्होंने पीटीआई से कहा, ‘‘क्या एक निर्दोष व्यक्ति को आरोपों के चलते पद छोडने के लिए कहा जा सकता है? त्यागपत्र देना मेरे द्वारा अपराध सीधे तौर पर स्वीकार करने के बराबर होगा.’’
कुरियन ने कहा कि वर्तमान विवाद और इस मामले में उन पर मामला चलाने की मांगें ‘राजनीतिक रुप से प्रेरित’ हैं जिसका इस्तेमाल ‘मेरे राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों द्वारा मेरी छवि धूमिल करने के लिए किया जा रहा है.’
उन्होंने कहा, ‘‘यह विवाद संभव: इस गलतफहमी में खडा हुआ है कि मैं मुख्य मामले में एक आरोपी हूं जिसके 36 आरोपियों को उच्च न्यायालय द्वारा बरी किया जा चुका है. उच्चतम न्यायालय ने बरी किये जाने को रद्द करके मामले को वापस उच्च न्यायालय को सौंप दिया है. मैं बिल्कुल भी आरोपी नहीं हूं.’’
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सूर्यनेल्ली बलात्कार मामले में कुरियन की मुश्किलें बढ़ीं
Friday, February 08, 2013,

तिरुवनंतपुरम (कोझिकोड) : सूर्यनेल्ली सामूहिक बलात्कार मामले में एक नया मोड़ आ गया है। मामले के अहम गवाह भाजपा के एक स्थानीय नेता के एस राजन ने यह कहकर खलबली मचा दी है कि जांच अधिकारियों ने उनके बयान को गलत दर्ज किया, जिससे राज्यसभा के उप-सभापति पीजे कुरियन को फायदा मिला। राजन के इस बयान से कुरियन की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
गौरतलब है कि कुरियन पर सूर्यनेल्ली सामूहिक बलात्कार मामले में शामिल होने के आरोप लग रहे हैं और उनके इस्तीफे की मांग को लेकर राज्य भर में विरोध-प्रदर्शन का दौर जारी है।
भाजपा के राज्य सचिव के एस राजन के बयान से कुरियन को इस मामले में आरोपमुक्त होने में बहुत मदद मिली थी। लेकिन कोझिकोड में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में राजन ने कहा कि पुलिस की ओर से अदालत में पेश किया गया उनका बयान वह नहीं था जो उन्होंने दर्ज कराया था।
संवाददाता सम्मेलन में राजन के साथ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वी मुरलीधरन भी मौजूद थे। राजन ने कहा कि 1996 के इस मामले की जांच टीम की अगुवाई कर चुके पूर्व एडीजीपी सिबी मैथ्यूज के खिलाफ वह कानूनी कार्रवाई शुरू करेंगे। (एजेंसी)
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जानिए आखिर क्या है सूर्यनेल्ली सामूहिक बलात्कार कांड
नई दिल्ली, लाइव हिन्दुस्तान

केरल के इदुक्की जिले में सूर्यनेल्ली की एक लड़की का जनवरी 1996 में अपहरण कर लिया गया था। इस वारदात में 40 दिन के दौरान 42 व्यक्तियों ने कथित रूप से 16 साल की लड़की से सामूहिक बलात्कार किया था।छह सितंबर 2000 को विशेष अदालत ने 35 लोगों को दोषी ठहराते हुए विभिन्न शर्तों पर कठोर कारावास की सज़ा सुनाई थी, लेकिन केरल हाईकोर्ट ने 35 लोगों को बरी कर दिया और सिर्फ़ एक व्यक्ति को सेक्स व्यापार का दोषी मानते हुए पांच साल की क़ैद और 50 हज़ार रुपये का जुर्माना लगाया था।
वर्ष 2005 में लड़की के परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट में इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील की थी, जहां पिछले आठ साल से ये मामला लटका हुआ था। तीन जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने तीन सप्ताह के अंदर इस मामले की सुनवाई की बात कही थी। सर्वोच्च न्यायालय ने 31 जनवरी को केरल उच्च न्यायालय के उस फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें 1996 के सूर्यनेल्ली दुष्कर्म मामले में एक आरोपी को छोड़कर बाकी सभी को दोषमुक्त कर दिया गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की फिर से सुनवाई करने के आदेश दिए हैं।
इस मामले में कुरियन का नाम तब एक बार फिर सामने आया, जब पीड़ित ने 29 जनवरी को दिल्ली में अपने अधिवक्ता को पत्र लिख कर, कुरियन के खिलाफ नए सिरे से जांच के लिए एक पुनरीक्षण याचिका दाखिल करने की संभावनाएं तलाशने को कहा। पीड़िता ने शुक्रवार को संकेत दिया था कि वह कुरियन के खिलाफ मामले को फिर से शुरू करने के कानूनी विकल्प पर विचार कर रही है।
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गैंगरेप: आठ साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनी फरियाद
गुरुवार, 31 जनवरी, 2013

केरल के बहुचर्चित सूर्यनेल्ली सामूहिक बलात्कार कांड में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट को तगड़ा झटका दिया है.हाई कोर्ट ने इस सामूहिक बलात्कार कांड में 35 अभियुक्तों को बरी कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट को निर्देश दिया है कि वो इस मामले को नए सिरे से देखे.
जस्टिस एके पटनायक की खंडपीठ ने हाई कोर्ट के फ़ैसले को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में जो भी अभियुक्त ज़मानत पर हैं, उन्हें फिर से अदालत में ज़मानत के लिए अपील करें.
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट इस निष्कर्ष पर आश्चर्य व्यक्त किया कि लड़की इस मामले में 'इच्छुक सहभागी' थी.मामला वर्ष 1996 के इस बहुचर्चित सामूहिक बलात्कार कांड में 16 साल की एक लड़की का 40 दिनों तक 42 लोगों ने बलात्कार किया था.
सूर्यनेल्ली के इडुक्की ज़िले की रहने वाली इस लड़की का वर्ष 1996 में अपहरण कर लिया गया था, फिर उसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाया गया और बलात्कार किया गया.
छह सितंबर 2000 को विशेष अदालत ने 35 लोगों को दोषी ठहराते हुए विभिन्न शर्तों पर कठोर कारावास की सज़ा सुनाई थी.
लेकिन केरल हाई कोर्ट ने 35 लोगों को बरी कर दिया और सिर्फ़ एक व्यक्ति को सेक्स व्यापार का दोषी मानते हुए पाँच साल की क़ैद और 50 हज़ार रुपए का जुर्माना लगाया था.वर्ष 2005 में लड़की के परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट में इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील की थी. जहाँ पिछले आठ साल से ये मामला लटका हुआ था. तीन जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने तीन सप्ताह के अंदर इस मामले की सुनवाई की बात कही थी.

राजस्थान में भाजपा की सरकार बनायें - वसुंधरा राजे





राजस्थान में भाजपा की सरकार बनायें - राजे

दुल्हन की तरह सजा जयपुर शहर

60 छोटी बड़ी सभायें और 12 घंटे में तय हुआ सफ़र 

महारानी वसुंधरा राजे ने अपने सम्बोधन में कहा कि दिल्ली से चलने के बाद यहां तक मेरा अभूतपूर्व स्वागत व सत्कार हुआ है उसके लिए में हमेशा क्षेत्र की जनता की आभारी रहूंगी। इस प्यार को बनाए रखते हुए अब प्रदेश की बागडोर भाजपा के हाथ में सौंप पर प्रदेश को विकास की राह पर लाना होगा। नव निर्वाचित प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राजे ने भाजपा के झंडे के रंग की हरी व केसरिया लहरिये वाली विशेष साडी पहन रखा थी। राजे की एक झलक पाने के लिए राजमार्ग पर स्थित दुकानों के ऊपर तक लोग चढ गए। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री राजे के जयपुर पहुंचने पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी के साथ उनका स्वागत किया। कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए राजे ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में आप लोगों के सहयोग से राज्य में पुनः भाजपा की सरकार बनेगी।
राजे के स्वागत में जयपुर शहर को दुल्हन की तरह सजाया गया। शहर के प्रवेश द्वार से लेकर भाजपा के प्रदेश कार्यालय तक जगह-जगह स्वागत में होर्डिग और बैनर लगाए गए, शहर के मुख्य बाजारों में पार्टी के झण्डे लहरा रहे थे। निर्धारित कार्यक्रम से पांच घंटे देरी से रात करीब साढे दस बजे रामगढ मोड़ पर पहुंचने पर हजारों की संख्या में शाम चार बजे से इंतजार में खडे कार्यकर्ताओं ने फूल मालाओं से उन्हें लाद दिया और राजे के पक्ष में जम कर नारेबाजी की।
जोरावर सिंह दरवाजे पर शहनाई वादन कर स्वागत किया गया वहीं कुछ अन्य जगह हाथियों से पुष्प वर्षा कर जोरदार स्वागत किया गया। राजे बड़ी चैपड़, छोटी चैपड़, किशनपोल बाजार, अजमेरी गेट, एमआई रोड होते हुए देर रात भाजपा के प्रदेश कार्यालय पहुंची । जहां कड़ाके की ठण्ड में भी उनकी एक झलक पाने के लिए बेताबी से इंतजार कर रहे सैकड़ों लोगों ने उनका स्वागत किया। पुलिस आयुक्त कार्यालय चैराहे पर स्वागत में जम कर आतिशबाजी की गई। राजे के साथ विधानसभा में प्रतिपक्ष के नवनियुक्त नेतागुलाब चन्द कटारिया, पार्टी के सचेतक राजेन्द्र सिंह राठौड़, सांसद, विधायक और अन्य पार्टी पदाधिकारी चल रहे थे। काफिले में करीब 150 वाहन शामिल थे।

भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत, महामंत्री सतीश पूनिया, वासुदेव देवनानी, मोहन लाल गुप्ता, सुभाष महरिया, रोहिताश शर्मा, किरण माहेश्वरी, जसवंत यादव, खेमसिंह भड़ाना, बनवारीलाल सिंघल, विजय बंसल, संजना आगरी, प्रेम सिंह बाजौर, ऋषि बंसल,लक्ष्मीकांत भारद्वाज,पूर्व विधायक नन्द लाल व्यास समेत अन्य नेता चल रहे थे, जबकि पार्टी के सचेतक एवं  विधायक राजेन्द्र राठौड़ पूरी व्यवस्थाओं की कमान संभाल रहे थे।  शाहजहांपुर से जयपुर का सफर यूं तो दो घटे का है लेकिन करीब 60 छोटी बड़ी सभाओं में मिले अपार समर्थन के कारण ये सफर 12 घंटे में तय हुआ। काफिला करीब एक किलोमीटर लम्बा था। नए नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया राजे के वाहन में साथ ही आए और सभाओं में उनके साथ मौजूद थे। भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार राजस्थान आई राजे ने सुबह करीब साढे नौ बजे राज्य के प्रवेश द्वार शाहजहांपुर से अपना रोड शो शुरू किया जो देर रात समाप्त हुआ। इस दौरान उन्होंने 30 से अधिक स्थानों पर कार्यकर्ताओं को सम्बोधित किया। जहां कार्यकर्ताओं की संख्या एक हजार से कम थी वहां उनका काफिला संक्षिप्त स्वागत के बाद आगे रवाना हो गया था।
बोला कांग्रेस पर हमला
वसुंधरा ने कांग्रेस और मुख्यमंत्री का नाम लिए बगैर कहा कि इस सरकार को सत्ता में रहने का अधिकार नहीं है। इसने अन्याय के सिवाय कुछ नहीं किया।

ऎसे भेडियों से बचो
राजे ने कहा, आपके पास अलग-अलग कपड़े पहन भेडियारूपी लोग आएंगे, उनके झांसे में नहीं आना है। लोग डराने धमकाने भी आएंगे। ये लोग पुलिस व सीबीआई की मदद लेते हैं। राजे ने चुनाव तक 9 महीने की लम्बी लड़ाई बताई।

चुनरी की लाज रखूंगी
राजे ने सत्ता परिवर्तन का आह्वान करते हुए भरोसा दिलाया, मैं चुनरी की लाज रखूंगी और इस पर आंच नहीं आने दूंगी। राजस्थान को शिखर पर पहुंचाना है। आपने सत्ता में न रहने के बावजूद मुझे जो प्यार दिया वह मेरे लिए अमूल्य है।

200 किमी 14 घंटे में
10 बजे सुबह यात्रा चली शाहजहांपुर से
12 बजे रात प्रदेश भाजपा कार्यालय
200 किलोमीटर रास्ते की कुल दूरी
100 स्थानों पर किया गया स्वागत
50 स्थानों पर राजे ने किया संबोधित
11 स्थानों पर जयपुर में हुआ स्वागत