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करवा चौथ, पति - पत्नी के आजीवन प्रेम की आत्मीय अभिव्यक्ती

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करवा चौथ    - अरविन्द सीसोदिया  मूल रूपसे सुहागिन नारियों के लिए , अपने पति क़ी दीर्घायु की कामना से यह उपवास लगभग प्रत्येक हिन्दू नारी रखती  है, इसकी संदर्भ कथा कमसे से कम ५००० वर्ष पूर्व से श्री कृष्ण युग से सामने आती है.., कृष्ण भी यह कहते हैं कि भगवान शिव ने यह कथा कभी पूर्व काल में कही थी...., अर्थात बहुत प्राचीन काल  से यह व्रत परंपरागत रूप से हिदू समाज का अंग है...!       भारतीय समाज व्यवस्था का सबसे महत्व पूर्ण अंग है परिवार व्यवस्था ; जिसका  मूल आधार पति पुरुष के नेतृत्व में रची गई महसूस होती  है...! मगर सच यह है क़ी हिन्दू परिवार व्यवस्था का आधार स्त्री है.., उसके महत्व को उसकी गरिमा को जितना आदर हिंदुत्व में प्राप्त होता है, वह दर्शन और किसी समाज व्यवस्था में नहीं है! सच यह है क़ी हिन्दू समाज में अन्य समाजों की तरह पुरुष और नारी भिन्न - भिन्न अस्तित्व नहीं हैं; बल्कि वे एक दूसरे पर अविलंबित दो प्राण एक शरीर रूप हैं..!  हिन्दू  नारी का अपने पति के जीवन से ही सबकुछ जुड़ा हुआ था...! हिन्दू पुरुष का अपनी नारी से ही सब कुछ जुड़ा हुआ है..! सुख शांति उन्नत्ति और अन्य विविध आयाम .