कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती koshish karne walon ki kabhi haar nahin hoti

 


सोहन लाल द्विवेदी की वह कविता

sohan lal dwivedi

famous poem -
koshish karne walon ki kabhi haar nahin hoti
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती
- सोहनलाल द्विवेदी

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

 
नन्ही चींटीं जब दाना ले कर चढ़ती है
चढ़ती दीवारों पर सौ बार फिसलती है
मन का विश्वास रगॊं मे साहस भरता है
चढ़ कर गिरना, गिर कर चढ़ना न अखरता है
मेहनत उसकी बेकार नहीं हर बार होती
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

 
डुबकियाँ सिंधु में गोताखोर लगाता है
जा-जा कर खाली हाथ लौट कर आता है
मिलते न सहज ही मोती गहरे पानी में
बढ़ता दूना विश्वास इसी हैरानी में
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती


असफलता एक चुनौती है, स्वीकार करो
क्या कमी रह गयी देखो और सुधार करो
जब तक न सफल हो नींद-चैन को त्यागो तुम
संघर्षों का मैदान छोड़ मत भागो तुम
कुछ किए बिना ही जय-जयकार नहीं होती
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

यह कविता कानपुर के स्वतंत्रता सेनानी रहे सोहनलाल द्विवेदी जी की है। इसका समर्थन कई प्रकार से प्राप्त है।
डॉ कविता वाचक्नवी ने इसे सोहनलाल जी की ही कविता माना है।
महाराष्ट्र पाठयपुस्तक समिति के अध्यक्ष डॉ राम जी तिवारी ने भी इसे सोहनलाल द्विवेदी की ही कविता माना है।
यह कोर्स में भी चलती रही है, कवि का पोस्टल पता उपलब्ध नहीं होनें से रायल्टी का कभी भुगतान नहीं हुआ।

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