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अगस्त 7, 2012 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

vaidik saraswati river

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मेरी स्पष्ट मान्यता है की एक समय सरस्वती सभ्यता सर्वश्रेष्ठ रही है , जिसका वर्णन ऋगवेद में मिलता है | कालांतर में नये सिरे से हुई खुदाई में , इसे हड़प्पा / मोहनजोदड़ो सभ्यता नाम , अवशेष मिलने वाले स्थान के कारण दे दिया गया | आज भी प्रयागराज  (इलाहावाद ) में त्रिवेणी संगम है | जिसमें गुप्त मार्ग से सरस्वती का जल प्रगट होता है |  हजारों वर्षों से यह मान्यता यहाँ बहुत ही दृढ़ता से मानी जाती है | किसी भू गर्भिय सुनामी, भूकंप या आंतरिक प्लेट खिसकने से सरस्वती का मार्ग बदल गया और वह यमुना में समाहित हो गई |  _ अरविन्द सिसोदिया , कोटा राजस्थान 94141 80151  ऐसा प्रतीत होता है कि पृथ्वी की संरचना आंतरिकी में हुए बदलाव के चलते सरस्वती भूमिगत हो गई और यह बात नदी के प्रवाह को लेकर आम धारणा के काफी करीब है। प्रयागराज में यही बात है कि संगम पर अंदर से सरस्वती नदी का जल स्पष्टता से प्रगट होता हे, यह शोध का विषय कि सरस्वती का बदला हुआ आंतरिक मार्ग क्या हे। जो लोग भूगर्भ विज्ञानी है। वे यह भी जानते हैं कि पृथ्वी के अंदर भी नदियां जलधराओं आदि का एक अलोकिक संसार है। वैदिक काल में एक और नदी दृष