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विश्व को वर्तमान विकट स्थिति से निकालने का कार्य हिन्दू संस्कृति ही कर सकती है – गुणवंत सिंह जी

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विश्व को वर्तमान विकट स्थिति से निकालने का कार्य हिन्दू संस्कृति ही कर सकती है – गुणवंत सिंह जी जयपुर (विसंकें). हिन्दू आध्यात्मिक एवं सेवा फाउण्डेशन, जयपुर के तत्वावधान में अमरूदों के बाग जयपुर में लगभग एक लाख से अधिक लोगों ने एक साथ राष्ट्रगीत वन्देमातरम् का गायन करके रिकार्ड बनाया. इनमें देश भर से आये 504 कलाकारों ने 18 प्रकार के वाद्य यंत्रों के साथ मंच पर भगवा, श्वेत एवं हरे रंग के परिधानों में वाद्य कला का प्रदर्शन किया. पं. आलोक भट्ट के संगीत निर्देशन में पूरे 100 मिनट संगीतमय कार्यक्रम में श्रोता रस विभोर रहे. विक्रम हाज़रा और सौम्य ज्योतिघोष द्वारा बांसुरी पर संगत की गई तो शंख वादन जयकिशन और अश्विनी घोष द्वारा किया गया. कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे, विशिष्ठ अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह सेवा प्रमुख गुणवंत सिंह जी, विश्व विभाग के सह संयोजक रवि कुमार जी, संघ के अखिल भारतीय सह शारीरिक शिक्षण प्रमुख जगदीश जी, सह बौद्धिक प्रमुख मुकुंद जी, क्षेत्रीय प्रचारक दुर्गादास जी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे. शंख वादन से

खून और पानी साथ नहीं बह सकते : पीएम मोदी

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सिंधु जल समझौते पर बैठक खून और पानी साथ नहीं बह सकते : पीएम मोदी  Posted on: September 26, 2016 नई दिल्ली। उरी में हुए आतंकी हमले के बाद केंद्र सरकार ने पाकिस्तान को जवाब देने की रणनीति के तहत सिंधु जल नदी पर विकल्पों को आजमाना शुरू कर दिया है। इसी के मद्देनजर पीएम नरेंद्र  मोदी के आवास पर जल संधि पर समीक्षा के लिए अहम बैठक बुलाई। सूत्रों के मुताबिक बैठक में पीएम मोदी ने पाक पर कड़ा रुख दिखाते हुए कहा कि खून और पानी साथ नहीं बह सकते। हालांकि बैठक में जल संधि में बदलाव की अभी जरूरत नहीं बताई गई। बिजली परियोजनाओं को विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया गया। करीब एक घंटे चली बैठक में पीएम मोदी सिंधु समझौते पर गंभीर दिखे। बताया जा रहा कि पाकिस्तान की ओर बहने वाली नदियों की फिर से समीक्षा करने को कहा गया है। सरकार अब बिजली परियोजनाएं बनाने पर विचार करेगी। तुलबुल परियोजना को शुरू किया जा सकता है। पाकिस्तान को ज्यादा पानी लेने से रोका जा सकता है। इस बैठक में विदेश मंत्रालय और जल संसाधन मंत्रालय के अधिकारी शामिल हुए। जल संसाधन मंत्री उमा भारती इस बैठक में शामिल नहीं थीं। बैठक में

सुषमा स्वराज : संयुक्तं राष्ट्र आम सभा : पाकिस्तान को करारा जबाव

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http://mea.gov.in विदेश मंत्री का 71वीं संयुक्तं राष्ट्र आम सभा में भाषण, न्यूयॉर्क (सितम्बतर 26, 2016) सितम्बर 26, 2016 माननीय अध्‍यक्ष जी, सबसे पहले मैं अपने देश की ओर से और स्वयं अपनी ओर से संयुक्त राष्ट्र महासभा के 71वें अधिवेशन के अध्यक्ष निर्वाचित किए जाने पर आपको हार्दिक बधाई देती हूं। यह संगठन जो इतिहास का सबसे बड़ा शांति आंदोलन है, उसके महासचिव, श्री बान की-मून जी को भी उनकी संयुक्‍त राष्ट्र को दी गई सेवाओं के लिए धन्‍यवाद देती हूं। अध्यक्ष जी, एक वर्ष पहले मैंने इसी पवित्र मंच से अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के सदस्यों को संबोधित किया था। तब से लेकर आज तक विश्व में बहुत परिवर्तन हुआ है - कुछ अच्छा, कुछ बुरा और कुछ हम सबको बहुत चिंतित करने वाला। पिछले वर्ष के दौरान किए गए कार्यों और उपलब्धियों पर विचार विमर्श करने के लिए इससे बेहतर कोई और मंच नहीं हो सकता। हम सभी को ये याद रखना होगा कि जो काम हमने किए हैं, उनकी तो समीक्षा होगी ही, लेकिन जो नहीं कर पाए हैं, उनकी भी समीक्षा होगी। अध्यक्ष जी, इस गरिमामय महासभा में अनेक मुद्दों पर चर्चा हुई है, जैसे - एएमआर के लिए नए टीक

Sushma Swara : address at the 71st UNGA New York

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http://www.mea.gov.in English Rendition Of External Affairs Minister's address at the 71st UNGA, New York (September 26, 2016) September 26, 2016 Hon’ble President, On behalf of India and on my own behalf, I congratulate you on your election as President of the 71st United Nations General Assembly. Let me also take this opportunity to thank Secretary General Ban Ki Moon for his services to the United Nations, history’s largest peace movement. Mr. President, A year has passed since I stood here at this hallowed podium to address the members of the international community. Since then, much has changed in the world around us – some for the better, some for the worse and much which has been cause of great concern. There can be no better platform to ponder our actions and our achievements over the last year. We must remember that we will be defined not just by our actions, but equally, by our inaction. Mr. President, A number of issues have been debated in this august A