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चाहे वर्षा हो या अग्नि प्रलय संघ कार्य चलता रहेगा – जे. नंद कुमार

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चाहे वर्षा हो या अग्नि प्रलय संघ कार्य चलता रहेगा – जे. नंद कुमार पूर्ण गणवेशधारी 1205 स्वयंसेवकों ने भारी वर्षा के बीच सुव्यवस्थित व अनुशासित ढंग से पथ संचलन पूर्ण किया. नई दिल्ली, 26 जनवरी (इंविसंके). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दिल्ली प्रान्त द्वारा गणतंत्र दिवस के अवसर पर पथ संचलन निकाला गया. पूर्ण गणवेशधारी 1205 स्वयंसेवकों ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रमानुसार भारी वर्षा के बीच, सुव्यवस्थित व अनुशासित ढंग से पथ संचलन पूर्ण किया. मंदिर मार्ग स्थित एन.पी. बॉयज स्कूल से आरम्भ आरम्भ हुआ संचलन पेशवा रोड, गोल मार्किट, भाई वीर सिंह मार्ग, बंगला साहिब गुरुद्वारा, बाबा खड़ग सिंह मार्ग, राजीव चौक सर्कल होते हुए राजीव चौक पर वर्षा के बीच संपन्न हुआ. इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख श्री जे.नन्द कुमार ने स्वयंसेवकों को संबोधित किया. उन्होंने बताया कि समाज के अन्दर संगठित भाव, अनुशासन, आत्मविश्वास जगाने के लिए, राष्ट्र के प्रति, देश के प्रति काम करने की प्रेरणा जगाने के लिए इस तरह का संचलन, एकत्रीकरण ऐसे कार्यक्रम चलते रहते हैं। गणतन्त्र दिवस पर और स्व

Hindus Gotra System: Scientific Meaning

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Hindus Gotra System: Scientific Meaning of Gotra in the Vedas http://www.indiadivine.org/hindus-gotra-system-scientific-meaning-of-gotra-in-vedas/ In Hindu society, the term gotra means clan. It broadly refers to people who are descendants in an unbroken male line from a common male ancestor. However, all families having same gotra need not be cousins. They can be descendants of sons or disciples or even adopted sons of the Rishi(Seer), who is the root and whose name is used as Gotra. For example if a person says that he belongs to the Kutsa Gotra then it means that he traces back his male ancestry to the ancient Rishi (Saint or Seer) Kutsa. Gotra means cowshed (Go=Cow, tra=shed) in Sanskrit. Paini defines gotra for grammatical purposes as apatyam pautraprabhrti gotram (IV. 1. 162), which means “the word gotra denotes the progeny (of a sage) beginning with the son’s son. This system was started among Brahmins, with a purpose to classify and identify the families in t

‘भारत माता की जय’ हमारे हृदय की भाषा है –परम पूज्य डॉ.मोहन भागवत जी

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‘भारत माता की जय’ हमारे हृदय की भाषा है – परम पूज्य  डॉ.   मोहन भागवत जी दुनिया भारत को विश्वगुरु की भूमिका में देख रही है – डॉ. मोहन भागवत जी भोपाल (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक परम पूज्य डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि जब हम हिन्दू समाज कहते हैं, तब उसका अर्थ होता है, संगठित हिन्दू. यदि हममें किसी भी प्रकार का भेद और झगड़ा है, तब हम अस्वस्थ समाज हैं. इसलिए स्वस्थ रहने के लिए हमें संगठित रहना होगा, सभी प्रकार के भेद छोड़ने होंगे, विविधताओं का सम्मान करना होगा. यही आदर्श और उपदेश हमारे पूर्वजों के थे. हिन्दू संगठित होगा, तब ही भारत विश्वगुरु बनेगा. सरसंघचालक जी 08 फरवरी को बैतूल में आयोजित हिन्दू सम्मलेन में संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि मत-पंथ की भिन्नता को लेकर दुनिया में रक्त-पात किया जा रहा है. अर्थ के आधार पर भी संघर्ष है. इन संघर्षों का समाधान उनके पास नहीं है. समाधान के लिए दुनिया भारत की ओर देख रही है. दुनिया भारत को विश्वगुरु की भूमिका में देख रही है और भारत को विश्वगुरु बनाने का दायित्व हिन्दू समाज पर है. इसलिए हिन्दू समाज का संगठित रहना जरू