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गरबा : माँ की जीवन शक्ति के सौभाग्य की आराधना

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एक नये जीवन को जन्म देने की शक्ति ताकत या व्यवस्था मात्र मां स्वरूपा स्त्री में ही हे। गरवा संम्भवतः उसी शक्ति को प्राप्त करने तथा उससे सम्पन्न बनें रहनें की उत्कट इच्छा की आराधना स्वरूप हे।  माँ की गर्भ शक्ति की आराधना  जानिए, सौभाग्य का प्रतीक गरबा का इतिहास लाइफस्टाइल डेस्क। गरबा गुजरात का प्रसिद्ध लोकनृत्य है। यह नाम संस्कृत के गर्भ-द्वीप से है। गरबा सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है और अश्विन मास की नवरात्रों को गरबा नृत्योत्सव के रूप में मनाया जाता है। नवरात्रों की पहली रात्रि को गरबा की स्थापना होती है। फिर उसमें चार ज्योतियां प्रज्वलित की जाती हें। फिर उसके चारों ओर ताली बजाती फेरे लगाती हैं। आईये और जानते गरबा का इतिहास.... • यह परंपरागत रूप से एक बड़ी  गर्भ दीप  के आसपास प्रदर्शन किया गया था, जो कि  मां के गर्भ में भ्रूण के रूप में जीवन का प्रतिनिधित्व करती है । यह नृत्य रूप देवी दुर्गा की दिव्यता और शक्ति की पूजा करता है। • गरबा के प्रतीकात्मक रूप पर एक और दृष्टिकोण यह है, कि जैसे नृतक अपने पैरों से परिपत्र बनाते हैं। यह जीवन के चक्र का प्रतिनिधित्व करता है