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महाराणा के 'प्रताप' से हिल उठा मुगल सिंहासन

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माई एहड़ा पूत जण, जेहड़ा राण प्रताप। अकबर सूतो ओधकै, जाण सिराणै साप॥ पुण्यतिथि विशेष:महाराणा के 'प्रताप' से हिल उठा मुगल सिंहासन जब-जब तेरी तलवार उठी, दुश्मन की टोली डोल गयी, फीकी पड़ी दहाड़ शेर की, जब-जब तूने हुंकार भरी। था साथी तेरा घोड़ा चेतक, जिस पर तू सवारी करता था थी तुझमें कोई खास बात, जो अकबर भी तुझसे डरता था॥ महाराणा प्रताप का नाम लेते ही मुगल साम्राज्य को चुनौती देने वाले एक महान वीर योद्धा का चित्र आंखों के सामने उभर आता है।  ज्येष्ठ शुक्ल तीज सम्वत् (9 मई 1540)  को मेवाड़ के उदयपुर में जन्मे महाराणा प्रताप का संपूर्ण जीवन त्याग, संघर्ष और बलिदान का एक परिचायक है। प्रताप संघर्ष के उस कठिन दौर में पैदा हुए, जब पूरे भारत पर मुगलों का शासन छाया हुआ था। महाराणा प्रताप 'महान' कहे जाने वाले मुगल सम्राट अकबर की ‘महानता’ के पीछे छिपी उसकी साम्राज्यवादी नीति के विरुद्ध थे, इसलिए उन्होंने उसकी अधीनता स्वीकार नहीं की। अकबर के साथ संघर्ष में महाराणा प्रताप ने जिस वीरता, स्वाभिमान और त्याग का परिचय दिया, वह भारतीय इतिहास में कहीं और देखने को नहीं मि