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अयोध्या में हमारे आठ दिन : कवि ब्रजेन्द्र सोनी

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साभार By Kavi Brajendra soni नगर (भरतपुर) के लाडले कवि ब्रजेन्द्र सोनी अयोध्या में हमारे आठ दिन ,,,। न भूलने वाली दास्तान। 28 नव 1992 यह समय वो था जब राम मंदिर का आंदोलन चरम पर था बच्चा बच्चा राम का, जन्मभूमि के काम का। जैसे नारों से देश गुंजायमान था। कुछ लोगों की भूमिकायें हिन्दू समाज के लिये संदिग्ध हो गई थी तो कुछ हिन्दू समाज के सर्वे सर्वा हो गये थे। राजनीति अपना खेल खेल रही थी पर जनता इन सब बातों से बेखबर केवल मंदिर निर्माण के लिये संकल्पित हो गई थी। इसे हिन्दू समाज की एकजुटता का काल भी कह सकते हैं। मुलायम सिंह और लालू प्रसाद यादव जैसे नेता गण, हिन्दुओं की आँख की किरकिरी बन गये थे।यही वो समय था जब विश्व हिन्दू परिषद् के आह्वान पर लाखों कार सेवक, अपने आराध्य प्रभु श्री राम की जन्म भूमि को मुक्त कराने के संकल्प के साथ अयोध्या में एकत्रित थे। सभी के मन में एक ही विचार, एक ही दिशा और एक ही संकल्प था कि कैसे भी, कुछ भी करना पडे इस बार मंदिर की भूमि को मुक्त करा के ही अयोध्या से वापिस जायेंगे। 31 अक्टूबर1990 की कारसेवा में हुऐ कारसेवकों पर मुलायम सरकार के निर्मम अत