सोमवार, 29 सितंबर 2014

स्क्वायर गार्डन में ; भारत माता की जय और मोदी-मोदी के नारे लगे, वन्देमातरम गूंजा !



स्क्वायर गार्डन में लगे भारत माता की जय और मोदी-मोदी के नारे
Date : Mon, 29 Sep 2014

न्यूयॉर्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अनिवासी भारतीयों के साथ ही अमेरिकियों के दिलो-दिमाग पर भी छा गए हैं। रविवार को मोदी जब मेडिसन स्क्वायर गार्डन पर सभा को संबोधित करने पहुंचे तो वहां 'लघु भारत' का नजारा दिखाई दिया। 'भारत माता की जय' और नवरात्रि की शुभकामना से भाषण की शुरुआत करते हुए मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि सवा सौ करोड़ लोगों के बल पर भारत 21वीं सदी में दुनिया का नेतृत्व करेगा।
यह हमारी सदी हो सकती है। 2020 तक भारत दुनिया को पेशेवर लोगों का निर्यात करेगा। अनिवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि आपने देश की इज्जत बढ़ाई है। हम आपका माथा नहीं झुकने देंगे। इस मौके पर उन्होंने अनिवासी भारतीयों के लिए आजीवन वीजा का एलान किया और कहा कि अब लोगों को थानों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। अमेरिकी पर्यटकों को लंबे समय तक के लिए वीजा दिया जाएगा।
लगभग 20 हजार लोगों को हिंदी में संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भारत में लोगों को सरकार से बहुत अपेक्षाएं हैं और हमारी सरकार उनकी उम्मीदों पर खरा उतरेगी। मोदी के मुताबिक, सरकारें विकास नहीं करतीं। विकास जनभागीदारी से होता है। हम जनता के साथ मिलकर विकास करेंगे। उन्होंने विकास को जनांदोलन बनाने का आह्वान भी किया। अपने करीब सवा घंटे के संबोधन में प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार द्वारा शुरू किए गए कामों को भी गिनाया। उन्होंने कहा कि जनधन योजना में अब तक चार करोड़ खाते खुल चुके हैं और 1500 करोड़ रुपये जमा हुए हैं।

हर-हर मोदी के लगे नारे:-
टाइम्स स्क्वायर पर सीधा प्रसारण:-
कार्यक्रम से जुड़ी कुछ खास बातें:-
- मेडिसन स्क्वायर पर जुटे 20,000 लोग
- 50अमेरिकी सांसद भी पहुंचे मोदी को सुनने1
- 19 राज्यों के 45 विश्वविद्यालयों और ओरेगन स्थित इंटेल कंपनी परिसर में हुआ भाषण का सीधा प्रसारण।
- 100 बोहरा मुस्लिम भी मोदी के भाषण के साक्षी बने
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मेडिसन स्क्वायर में मोदी भाषण कार्यक्रम के रोचक तथ्य
Publish Date:Mon, 29 Sep 2014

-मैनहट्टन स्थित मैडिसन स्क्वॉयर गार्डन न्यूयॉर्क का सबसे महंगा इनडोर स्टेडियम है। इसमें सभा को संबोधित करने वाले मोदी पहले विदेशी नेता बने।
-सभास्थल पर 360 डिग्री में घूमने वाला मंच बनाया गया था।
-18 हजार अनिवासी भारतीय और दो हजार विशेष मेहमान इसमें शरीक हुए। इनके लिए बाकायदा टिकट रखे गए थे।
-भारत सहित 80 देशों में इसके सीधे प्रसारण की व्यवस्था की गई।
-टाइम्स स्क्वॉयर की स्क्रीनों पर मोदी का भाषण दिखाने के लिए विशेष प्रबंध किए गए थे।
-अनिवासी भारतीयों ने कार्यक्रम के लिए 20 लाख डॉलर (12 करोड़ रुपए) जुटाए। कार्यक्रम पर 9 करोड़ रुपए खर्च होंगे। बाकी राशि दान कर दी जाएगी।
-अमेरिका में बसे गुजराती परिवारों के लोगों ने कार्यक्रम स्थल पर डांडिया खेला।
-हाथों में तिरंगे लिए सैकड़ों लोग वहां भारत उत्सव जैसा नजारा पेश कर रहे थे।
-डीफ फूड और राजभोग स्वीट्स ने लंच की व्यवस्था नि:शुल्क उपलब्ध करवाई।
- प्रख्यात गायिका कविता कृष्णमूर्ति ने राष्ट्रगान गाया।
-हेमा चौकसे के नेतृत्व में 15 लड़कियों ने 'रंगीला म्हारो डोलना' पर परफॉर्म किया।
2005 में नहीं हो सका था कार्यक्रम
अनिवासी भारतीय 2005 में मैडिसन स्क्वॉयर पर मोदी का कार्यक्रम करने वाले थे, लेकिन गुजरात दंगों के कारण अमेरिका ने मोदी को वीजा नहीं दिया था। उस वक्त मोदी की चेयर खाली रखकर कार्यक्रम हुआ था। मोदी ने गुजरात से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया था। नौ साल बाद मोदी अब प्रधानमंत्री के रूप में वहां पहुंचे और ऐतिहासिक कार्यक्रम को संबोधित किया।

अमेरिका से : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीता दुनिया का दिल



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीता अमेरिकी सांसदों का दिल
Bhasha 29 सितम्बर 2014 

न्यूयॉर्क:
अमेरिका दौरे पर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिर्फ प्रवासी भारतीयों का ही नहीं बल्कि लगभग 40 शीर्ष अमेरिकी सांसदों का दिल भी जीत लिया। इन सांसदों ने उनके शब्दों को ‘प्रेरणादायी और विहंगम दृष्टिकोण से परिपूर्ण’ बताया।  

मैडिसन स्क्वेयर में अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि वह एक छोटे आदमी थे, जो ‘चाय बेचकर’ यहां तक पहुंचे हैं, लेकिन ‘छोटे लोगों के लिए बड़े काम’ करने की इच्छा रखते हैं। मोदी की इस बात को सुनकर वहां मौजूद कांग्रेस सदस्य उनके साथ एक खास जुड़ाव महसूस करने लगे।
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मेडिसन स्क्वायर में मोदी के भाषण पर राजनेताओं की प्रतिक्रियाएं

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेडिसन स्क्वायर में भाषण के बाद ट्विटर पर कई सारी प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। इनमें न सिर्फ आम आदमी शामिल है बल्कि कई राजनेता और बॉलीवुड से जुड़े लोग भी शामिल हैं। ज्यादा प्रतिक्रियाओं में लोगों ने मोदी के इस भाषण की जबरदस्त तारीफ की है। पेश है उनके भाषण पर मिली कुछ खास प्रतिक्रियाएं:-
- कांग्रेस के नेता संजय निरूपम ने मोदी के भाषण पर प्रतिक्रिया स्वरूप ट्विटर पर लिखा है कि इसरो ने मंगलयान भेजने में सात रुपये प्रति किमी के हिसाब से खर्चा किया, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने अमेरिकी दौरे पर करीब सात लाख यूएस डालर खर्च किए। उन्हें यह बात भी अपने फालोअर्स को बतानी चाहिए।
- उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने मोदी के भाषण पर कहा है कि दुनिया में किसी भी कोने में बसे भारतीय उन्हें एक सही दिशा दिखाने वाले के साथ हमेशा खड़े रहे हैं।
- भाजपा नेता विजय गोयल का कहना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा लोगों के सामने नई सोच लेकर आते हैं यही उनकी खासियत भी है। उनका कहना था कि मेडिसन स्क्वायर में भारत माता की जय की गूंज विदेशों में रहने वाले भारतीयों में देश भक्ति के जज्बे को दिखाने के लिए काफी है।
- बॉलीवुड अभिनेता कबीर बेदी ने मोदी को सलाम करते हुए उनके इस भाषण की जबरदस्त तारीफ की है। उनका कहना था कि जब मोदी ने कहा कि भाई मैं तो यहां पर चाय बेचते बेचते पहुंचा हूं, दिल को छूने वाला था।
- केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस भाषण को बेजोड़ बताया है।

- शाहनवाज हुसैन ने कहा कि मेडिसन स्क्वायर में दिया गया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण काबिले तारीफ था। पीएम के भाषण के बाद यहां मौजूद हजारों की भीड़ को इस बात का अहसास भी हो गया कि उनके सपनों का भारत बनना अब संभव है।

इस अवसर पर मौजूद अमेरिका के शीर्ष 40 सांसदों में से एक ने उन्हें एक ‘करिश्माई’ व्यक्ति बताया जबकि कई अन्य को लगा कि वे ‘देश का कायाकल्प उनके हाथों होना है’। न्यूनतम शासन पर उनके विचारों को भी सांसदों ने काफी पसंद किया।

जॉर्जिया से कांग्रेस सदस्य हैनरी सी ‘हैंक’ जॉनसन ने कहा, अब मैं समझा कि भारत के लोगों ने उन्हें क्यों चुना है? टैक्सॉस से कांग्रेस के सदस्य पेटे ओल्सन ने कहा, उनके पास एक परिपूर्ण दृष्टिकोण है। उनके पास उसे सच करने की योजना है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस स्थान को एक रॉकस्टार की तरह भीड़ से भर दिया। मौजूदा प्रतिनिधि सभा में भारतीय मूल के एकमात्र अमेरिकी सांसद एमी बेरा ने मोदी के भाषण को प्रेरणादायी और विहंगम दृष्टिकोण से परिपूर्ण बताया।
बेरा ने कहा, आज भारतीय-अमेरिकी समुदाय जश्न मना रहा है। मैं अमेरिका और भारत के संबंध को पुनर्जीवित करने के लिए मिलकर काम जारी रखने की उम्मीद करता हूं। कांग्रेस की महिला सदस्य तुलसी गब्बार्ड ने कहा, न्यूयॉर्क के प्रसिद्ध मैडिसन स्क्वेयर गार्डन में जोश से भरी भीड़ को दिए उनके संबोधन में उनका शांति एवं मैत्री का संदेश सुनकर बहुत अच्छा लगा। प्रधानमंत्री को उनके होटल पर फोन करके उनसे बात करने वाली गब्बार्ड ने कहा, मोदी की यह यात्रा अमेरिका और भारत के बीच संबंध विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक कदम है। यह संबंध हमारे साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और आपसी समृद्धि एवं सुरक्षा पर किए जाने वाले फोकस पर आधारित है। प्रधानमंत्री और गब्बार्ड के बीच चर्चाएं मुख्यत: गब्बार्ड के भारत से जुड़ी रुचियों पर आधारित थीं।

गब्बार्ड ने प्रधानमंत्री को गीता भेंट की। उनका कहना था कि अमेरिकी प्रतिनिधि सभा का सदस्य चुने जाने पर उन्होंने गीता की शपथ ली थी।

न्यूयॉर्क से कांग्रेस की महिला सदस्य ग्रेस मेंग ने कहा, मैडिसन स्क्वेयर में प्रधानमंत्री मोदी का भाषण अपने आप में परिपूर्ण था। उन्होंने सभी सही विषयों को छुआ, सभी सही मुद्दों को उठाया और अमेरिका एवं भारत के संबंध को एक नई ऊंचाई पर ले आए। मेंग ने कहा, मैडिसन स्क्वेयर गार्डन के मंच पर होना और इस ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण समारोह का हिस्सा बनना एक सम्मान की बात थी। मैं भारत और अमेरिका के बीच के संबंध को और भी अधिक मजबूत बनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी एवं उनके प्रशासन के साथ काम करने का इंतजार कर रही हूं।

व्योमिंग से कांग्रेस की महिला सदस्य सिंथिया ल्यूमिन्स ने मोदी को भारत के लिए एक परिवर्तनकारी शख्सियत बताया। मोदी के मुख्यमंत्रित्वकाल के दौरान सिंथिया ने पिछले साल उनसे गुजरात में मुलाकात की थी। उन्होंने कहा, मेरे पास बहुत कम भारतीय मूल के अमेरिकी मतदाता हैं, लेकिन मैं इस समारोह के लिए व्योमिंग से आई हूं, क्योंकि मुझे यकीन है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए वे परिवर्तनकारी शख्सियत हैं। उन्होंने कहा कि सांसद उस समय उनसे बेहद प्रभावित हो गए थे, जब मोदी ने कहा कि वे एक छोटे आदमी हैं और छोटे लोगों के लिए बड़ी चीजें करना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, वे मेरी ही तरह के व्यक्ति हैं, जो शासन को किसी (समस्या के) हल के रूप में नहीं देखते। वे देश के सुधार में सरकार को निर्देशक या नियंत्रक के बजाय सहयोग करने वाले की भूमिका में देखते हैं। एक रिपब्लिकन होने के नाते मैं भी इन्हीं चीजों में यकीन रखती हूं।

रविवार, 28 सितंबर 2014

'मेक इन इण्डिया' : सशक्त भारत की समर्थ डगर




सबल, सशक्त भारत की समर्थ डगर
तारीख: 27 Sep 2014
मोदी के 'मेक इन इण्डिया' अभियान में रेखांकित हुआ दुनिया के उद्यमियों और भारत के नागरिकों के उत्थान का मंत्र। कार्यक्रम में पहंचे बड़े बड़े उद्योगपति

इस गरिमामय कार्यक्रम में देश-दुनिया के करीब 500 शीर्ष उद्योगपतियों ने भाग लिया। इनमें से कुछ को मंच से संबोधित करने का मौका भी मिला। कार्यक्रम में इस अभियान को अपना समर्थन देते हुए अपने उद्यमों के प्रयासों की जानकारी देने वालों में थे-रिलायंस उद्योग समूह के अध्यक्ष मुकेश अंबानी, टाटा समूह के अध्यक्ष सायरस मिस्त्री, विप्रो समूह के अध्यक्ष अजीम प्रेमजी, आईटीसी के अध्यक्ष वाई. सी. दावेश्वर, बिरला समूह के अध्यक्ष कुमार मंगलम बिरला, आईसीआईसीआई बैंक की मुख्य कार्यकारी अधिकारी चंदा कोचर, मारुति इण्डिया के अध्यक्ष केनीची आयुकावा, लॉकहीड मार्टिन के फिल शॉ और बॉश कंपनी के निदेशक फ्रेंज हॉबर।

आएंगे सैकड़ों वास्को डि गामा
भारत में निर्माण की अपार संभावनाओं का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि भारत में डेमोक्रेसी (लोकतंत्र) है, डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी) है और डिमांड (मांग) है। जो देश इन तीनों का सकारात्मक रूप से उपयोग करता है उसकी तरफ निवेशक खिंचे चले आते हैं। इसलिए आने वाले वक्त में विदेशों में गली गली में वास्को डि गामा पैदा होंगे जो भारत को ढूंढते ढूंढते यहां पहंुच जाएंगे।

आलोक गोस्वामी
पच्चीस सितम्बर को मानो भारत और दुनिया के तमाम शीर्ष उद्योग समूहों ने नवरात्र के पहले दिन राजधानी दिल्ली में भारत की नई उड़ान का उत्सव मनाया। और सिर्फ उत्सव ही नहीं मनाया, उस उड़ान में साथ देने का संकल्प करके नरेन्द्र मोदी सरकार में अपना विश्वास भी प्रकट किया। अवसर था 'मेक इन इण्डिया' के शुभारम्भ का। यह प्रधानमंत्री मोदी की भारत को उसकी विशाल जनसंख्या के साथ सबल, समर्थ राष्ट्र बनाने की योजना है। यह भारत को एशिया ही नहीं, पूरी दुनिया में उद्योग, कारोबार और व्यवसाय के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तरफ एक ईमानदार कदम है। इस मंत्र की घोषणा मोदी ने 15 अगस्त को लालकिले से अपने भाषण में की थी, अब उसे साकार करने का अवसर आया था।
नई दिल्ली के भव्य विज्ञान भवन में 'मेक इन इण्डिया' का श्रीगण्ेाश करते हुए जब मोदी ने कहा कि अशोक चक्र हमारी आर्थिक विकास यात्रा का पहिया बनना चाहिए तो पूरा सभागार देर तक तालियों से गूंजता रहा। दरअसल 'मेक इन इण्डिया' के प्रतीक चिन्ह ('लोगो') में भारत के राष्ट्रीय पशु शेर के ऊपर अशोक चक्र ही बना है। योजना संबंधी सरकार की नीतियों के संकलन, प्रतीक चिन्ह और वेबसाइट मेकइनइण्डिया डाट कॉम का उद्घाटन करने के बाद प्रधानमंत्री ने दुनिया के तमाम उद्योगपतियों का आह्वान करते हुए कहा, आइए, भारत में अपने कारोबार लगाइए और यहां उपलब्ध अपार संभावनाओं के साथ अपने विकास की गाथा लिखिए।'
उन्होंेने कहा, 'अभी कुछ वक्त पहले तक भारत के कारोबारी विदेश जाकर अपना कारोबार जमाने की बात करते थे। यहां की व्यवस्थाओं से भरोसा खत्म होता जा रहा था। वे ऐसा न करें, इसके लिए सरकार को जिम्मेदारी से काम करते हुए उनमें विश्वास कायम करना होता है। इसीलिए कागजों को किसी व्यक्ति द्वारा खुद सत्यापित करने का कायदा बनाया है तो उसके मायने भारत की एक अरब आबादी पर भरोसा करना है। हम अपने लोगों पर संदेह कैसे कर सकते हैं?' भारत का प्रधानमंत्री दुनिया के चोटी के उद्योगपतियों के बीच ऐसा कहता है तो भारत के नागरिकों का सीना गर्व से फूल जाना स्वाभाविक है। उन्होंने एफडीआई को भारत के सवा सौ करोड़ नागरिकों के लिए एक जिम्मेदारी और दुनिया के उद्यमियों के लिए अवसर बताया। भारत के लिए एफडीआई है 'फर्स्ट डेवलप इण्डिया', जबकि विदेशी उद्यमियों के लिए 'फॉरेन डायरेक्ट इंवेस्टमेंट'। उन्होंने कहा कि भारत को बड़ा बाजार मानकर निवेशक इसकी ओर आकर्षित होते हैं लेकिन जब तक यहां के आम नागरिक की क्रय शक्ति नहीं बढ़ेगी तब तक उनके उत्पाद कौन खरीदेगा। इसलिए विदेशी उद्यमी भारत में अपने उद्योग लगाएं, जिससे यहां के लोगों को रोजगार मिले, उनकी क्रय शक्ति बढ़े। भारत में निर्माण हो, इसके लिए, 'मेक इन इण्डिया' का कदम एक शेर का कदम है।
गुजरात के मुख्यमंत्री के नाते अपने अनुभव साझा करते हुए मोदी ने कहा, विदेशी निवेशक सिर्फ नारों या न्योते से नहीं आते, उसके लिए विकास का माहौल तैयार करना होता है। निवेशक पहले अपनी लगाई पूंजी की सुरक्षा चाहता है, फिर विकास और सबसे बाद में मुनाफा। प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार की तरफ से भरोसा दिलाया कि उनका रुपया डूबेगा नहीं। भारत सरकार की पूरी टीम सकारात्मक सोच के साथ पूरे जोश से काम कर रही है। दुनिया के निवेशकों की आज एशिया पर नजर है, हम उन्हें वह जगह दिखा रहे हैं जहां वे विकास कर सकते हैं, वह जगह है भारत। निवेशक को प्रभावी सरकार चाहिए, काम के अनुरूप कुशल मानव संसाधन चाहिए। हम कौशल विकास के लिए सार्वजनिक-निजी क्षेत्र के सहयोग पर चलना चाहते हैं। आज आर्थिक उन्नति का अवसर आया है। हमारे यहां 65 प्रतिशत आबादी 35 से नीचे की उम्र वाले युवाओं की है। उनकी कुशलता मंगलयान की सफलता ने साबित की है, अब उस पर कोई संदेह नहीं कर सकता। डिजिटल इण्डिया के जरिए सरकार का हर विभाग काम के सरलीकरण का प्रयास कर रहा है।
'लुक ईस्ट' की धारणा से 'लिंक वेस्ट' को जोड़ते हुए मोदी ने कहा, 'हम आर्थिक संरचना को नए प्लेटफार्म खड़ा करना चाहते हैं। इसके लिए ढांचागत विकास करना होगा, सड़क और रेल लिंक बनाने होंगे। पर्यटन की संभावनाओं को खोजना होगा।' उन्होंने कहा, यह कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं, बल्कि भरोसे का वायदा है। निवेश में केन्द्र-राज्य सरकारों के बीच दूरी होने से निवेशकों को होने वाली परेशानी को दूर करने के लिए मोदी का सुझाव था कि दोनों एक टीम की तरह काम करते हुए अड़चनों को जल्दी दूर करने का उपाय करें। हम निर्माण के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर आगे बढ़ें, देश के गरीब को ऊपर उठाएं।
इससे पहले भारत की वाणिज्य राज्य मंत्री निर्मला सीतारमन ने कहा कि 'मेक इन इण्डिया' को एक अलग टीम देखेगी। अब भारत में न इंस्पेक्टर राज रहेगा, न लाइसेंस का झंझट। उद्यमों की सहूलियत के लिए ढांचागत विकास किया जा रहा है। अभियान के उद्घाटन के बाद पर्दे पर आकर्षक ऑडियो विजुअल प्रस्तुति के माध्यम से योजना की जानकारी दी गई। प्रधानमंत्री मोदी ने देश के लिए जीने और जूझने वाले, एकात्म मानव दर्शन के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय के जन्मदिवस पर उनके चरणों में 'मेक इन इण्डिया' का यह नया अभियान समर्पित किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री के साथ मंच पर अनेक मंत्री उपस्थित थे।

एफडीआई यानी 'फर्स्ट डेवलप इण्डिया'
एकात्म मानवदर्शन के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय के जन्मदिवस (25 सितम्बर) पर 'मेक इन इण्डिया' राष्ट्र को समर्पित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारतवासियों के लिए एफडीआई है 'फर्स्ट डेवलप इण्डिया' और निवेशकों के लिए 'फॉरेन डायरेक्ट इंवेस्टमेंट'। प्रधानमंत्री के इस आह्वान का अग्रणी उद्यमियों ने इन शब्दों में समर्थन किया-
यह सरकार और उद्योग जगत के मिलकर विकास करने का पल है। भारत आज एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है।
-सायरस मिस्त्री, अध्यक्ष, टाटा समूह
इसमें कोई संदेह नहीं कि भारत तेजी से विकास पथ पर बढ़ेगा। हमारी अर्थव्यवस्था में गति आएगी।
-मुकेश अंबानी, अध्यक्ष, रिलायंस समूह
विप्रो की 30 में से 5 उत्पादन इकाइयां भारत में हैं। हमारा 80 प्रतिशत सामान भारत से ही आता है।
-अजीम प्रेमजी, अध्यक्ष, विप्रो समूह
भारत आज वैश्विक 'आईटी हब' के तौर पर जाना जाता है। इसे 'मैन्युफैक्चरिंग हब' बनाने की पूरी सामर्थ्य हमारे पास है।
-कुमार मंगलम बिरला, अध्यक्ष, बिरला समूह

हमें 'मेक इन इण्डिया' से बहुत प्रेरणा मिली है। निर्माण क्षेत्र में अगले 10 साल में 9 करोड़ रोजगार पैदा हो सकते हैं।
-चंदा कोचर, सीईओ, आईसीआईसीआई बैंक
बोश कंपनी भारत में 1922 में आई थी और यह स्थानीय लोगों को ही रोजगार देने पर जोर देती है। -फ्रेंज हॉबर, निदेशक, बॉश समूह
हम मध्य प्रदेश में निवेश करेंगे। प्रधानमंत्री ने कारोबार में आगे बढ़ने का मंत्र दिया है। इससे रोजगार के अवसर बढें़गे।
-वाई. सी. दावेश्वर, अध्यक्ष, आईटीसी समूह
भारत में हमारा अनुभव गजब का रहा है। काम गुणवत्तापूर्ण होता है। हम यहां रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में काम करना चाहेंगे।
-फिल शॉ, अध्यक्ष, लॉकहीड मार्टिन 

शनिवार, 27 सितंबर 2014

संयुक्त राष्ट्र संघ में नरेन्द्र मोदी विश्व नेता के रूप में उभरे





संयुक्त राष्ट्र में मोदी का आह्वान, चलिए 'जी-ऑल' बनाते हैं
सितम्बर 27, 2014

संयुक्त राष्ट्र: नई शब्दावलियों का उपयोग करने और बेहतरीन वक्ता के तौर पर पहचान रखने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज संयुक्त राष्ट्र में 'जी-ऑल' के रूप में नयी शब्दावली का इस्तेमाल किया और कहा कि कई तरह की चुनौतियों का सामना करने के लिए अलग अलग समूहों को मिलकर ठोस प्रयास करना चाहिए।

मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 69वें सत्र को संबोधित करते हुए कहा, 'आज, हम अब भी कई 'जी' (समूहों) में विभिन्न संख्या में काम कर रहे हैं। भारत भी इनमें से कई में शामिल है। परंतु हम जी-1 या जी-ऑल के रूप मिलकर काम करने में कितना सफल हुए हैं।'

उन्होंने कहा कि जी-5, जी-20 जैसे समूहों के नाम बदलते रहते हैं, लेकिन हमें जी-ऑल की जरूरत है, ताकि कई लक्ष्यों को पूरा किया जा सके और पूरे विश्व में लोगों के जीवन में सुधार किया जा सके।

प्रधानमंत्री ने कहा, 'एक तरफ हम कहते हैं कि हमारे भाग्य एक दूसरे से जुड़े हुए हैं, दूसरी तरफ हम अब भी नफा-नुकसान की शतो' में सोचते हैं। अगर दूसरे को लाभ होता है, तो मुझे नुकसान होता है।'

आतंकवाद तथा दूसरी चुनौतियों से निपटने के लिए साझा प्रयासों का आह्वान करते हुए मोदी ने सवाल किया कि क्या हम अधिक एकजुट हुए हैं जबकि हम परस्पर निर्भर विश्व की बात करते हैं।

उन्होंने कहा, 'निंदक होना और यह कहना आसान है कि कुछ नहीं बदल सकता, लेकिन हम ऐसा करते हैं तो हम अपनी जिम्मेदारियों से भागते हैं तथा हम अपने सामूहिक भविष्य को खतरे में डालते हैं।'

मोदी ने कहा कि वास्तविक अंतरराष्ट्रीय साझेदारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'यह सिर्फ' नैतिक रुख नहीं है, बल्कि व्यवहारिक वास्तविकता है।'
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संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण की दस खास बातें
सितम्बर 27, 2014


संयुक्त राष्ट्र: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज पहली बार संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया। पेश है प्रधानमंत्री के भाषण की दस खास बातें...

1. भारत विश्व को एक बड़े परिवार के रूप में देखता है, भारत में मानवता का छठवां हिस्सा आबाद है। मैं जानता हूं, 1.25 अरब लोगों से दुनिया की क्या उम्मीदें हैं।

2. भारत वह देश है, जहां प्रकृति के साथ संघर्ष नहीं, संवाद होता है। भारत दुनिया को 'वसुधैव कुटुंबकम' के आधार पर देखता है। सारी दुनिया के अधिकार की आवाज़ उठाता रहा है भारत, सारी दुनिया में आज लोकतंत्र की लहर है।

3. पाकिस्तान से दोस्ती चाहता हूं, लेकिन उस पर आतंकवाद की छाया न हो। संयुक्त राष्ट्र में मुद्दा उठाना दोनों देशों के बीच के मुद्दों को हल करने की दिशा में प्रगति करने का तरीका नहीं है।

4. पिछले चार दशक से आतंकवाद से जूझना जारी है, युद्ध भले न हों, लेकिन दुनिया में शांति का अभाव है। आतंकवाद का प्रश्न गंभीर, कई देश से आतंकवाद को प्रश्रय दे रहे हैं। आतंकवाद नए रूप और नए नाम ले रहा है। उत्तर, दक्षिण, पूरब या पश्चिम में कोई बड़ा या छोटा देश इसके खतरे से मुक्त नहीं है।

 5. हमें अपने मतभेद एकतरफ रखकर आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष में संगठित प्रयास करना चाहिए। मैं आप सभी से अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर समग्र कन्वेंशन अपनाने की अपील करता हूं।

6. प्रधानमंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का विस्तार महत्वपूर्ण है। कोई भी एक देश या कुछ देशों का समूह भविष्य तय नहीं कर सकता। हमें इस पर विचार करना चाहिए कि संयुक्त राष्ट्र होने के बावजूद हम इतने सारे 'जी' मंच क्यों बना रहे हैं।

7. आउटर स्पेस और साइबर स्पेस में शांति, स्थिरता सुनिश्चित करनी होगी। आइए, निशस्त्रीकरण और अप्रसार में सारी शक्ति लगाएं। भारत अपनी तकनीक व क्षमताएं दुनिया से बांटने के लिए तैयार है।

8. करोड़ों लोगों के पास बिजली और साफ पानी जैसी सुविधाएं भी नहीं हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब हम अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर समझौते करते हैं तो हमें एक दूसरे की चिंताओं और हितों को समायोजित करना चाहिए।

9. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, हमें अपनी जीवनशैली बदलने की जरूरत है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को शुरू करने की दिशा में काम करें।

10. पीएम ने कहा, अगले साल हम 70 के होंगे, यह हमारे लिए एक अवसर है। आइए, 2015 को विश्व को नया मोड़ देने वाले साल के रूप में मनाएं।
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रविवार, 21 सितंबर 2014

शारदीय नवरात्रा 25 सितम्बर गुरूवार से

शारदीय नवरात्रा 25 सितम्बर गुरूवार से

नवरात्रि का दिन १ प्रतिपदा
घटस्थापना, शैलपुत्री पूजा  
नवरात्रि में आज के दिन का रँग है,पीला
२५th सितम्बर २०१४ ( बृहस्पतिवार )
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नवरात्रि का दिन २ द्वितीया
ब्रह्मचारिणी पूजा   
नवरात्रि में आज के दिन का रँग है हरा
२६th सितम्बर २०१४ ( शुक्रवार )

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नवरात्रि का दिन ३ तृतीया
सिन्दूर तृतीय / चन्द्रघन्टा पूजा
नवरात्रि में आज के दिन का रँग है स्लेटी
२७th सितम्बर २०१४ ( शनिवार )
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नवरात्रि का दिन ४    चतुर्थी
कुष्माण्डा पूजा /वरद विनायक चौथ
उपांग ललिता व्रत   
नवरात्रि में आज के दिन का रँग है नारंगी   
२८th सितम्बर २०१४ ( रविवार )
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नवरात्रि का दिन ५    पञ्चमी
स्कन्दमाता पूजा
नवरात्रि में आज के दिन का रँग है सफ़ेद
२९th सितम्बर २०१४(सोमवार)
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नवरात्रि का दिन ६    षष्ठी
कात्यायनी पूजा
नवरात्रि में आज के दिन का रँग है लाल
३०th सितम्बर २०१४(मंगलवार)
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नवरात्रि का दिन ७    सप्तमी
सरस्वती आवाहन / कालरात्रि पूजा   
नवरात्रि में आज के दिन का रँग है गहरा नीला
१st अक्टूबर २०१४ (बुधवार)
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नवरात्रि का दिन ८    अष्टमी
सरस्वती पूजा /दुर्गा अष्टमी /महागौरी पूजा
सन्धि पूजा, महा नवमी
नवरात्रि में आज के दिन का रँग है गुलाबी
२nd अक्टूबर २०१४(बृहस्पतिवार)
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नवरात्रि का दिन ९    नवमी
आयुध पूजा / विजयदशमी
नवरात्रि में आज के दिन का रँग है बैंगनी
३rd अक्टूबर २०१४ (शुक्रवार)
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नवरात्रि का दिन १०    दशमी
दुर्गा विसर्जन के दिन का पञ्चाङ्ग
४th अक्टूबर २०१४ (शनिवार)
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू
आईबीएन-7 | Sep 21, 2014

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी अमेरिका यात्रा से पहले सीएनएन के वरिष्ठ पत्रकार फरीद जकारिया को एक्सक्लूसिव इंटरव्यू दिया। पढ़िए उस इंटरव्यू के सवालों के जवाबः-

फरीद जकारियाः आपके चुनाव के बाद लोगों ने एक प्रश्न दोबारा पूछना शुरू कर दिया है, जो पिछले दो दशकों में कई बार पूछा जा चुका है। वह यह है, कि क्या भारत अगला चीन होगा? क्या भारत स्थिरता से 8 से 9 प्रतिशत की दर से विकास कर पाएगा और खुद को बदलकर दुनिया में बदलाव ला सकेगा?

प्रधानमंत्री मोदीः देखिए, भारत को कुछ भी बनने की जरूरत नहीं है। भारत को भारत ही बनना चाहिए। ये वो देश है, जो कभी सोने की चिड़िया कहा जाता था। हम जहां थे, वहां से नीचे आए हैं। फिर से उठने की हमारी संभावनाएं बढ़ी हैं। दूसरी बात है, अगर आप पिछली पांच शताब्दियों या दस शताब्दियों का डिटेल देखेंगे, तो आपके ध्यान में आएगा, कि भारत और चीन ने हमेशा एक साथ विकास किया है। पूरे विश्व की जीडीपी में दोनों का योगदान हमेशा समान रहा है, और पतन भी दोनों का साथ-साथ हुआ है। ये युग फिर से एशिया का आया है। और बहुत तेजी से भारत और चीन दोनों साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं।

फरीद जकारियाः लेकिन मुझे लगता है, लोग अभी भी यह सोचते होंगे, कि क्या भारत 8 से 9 प्रतिशत की विकास दर हासिल कर सकता है, जो चीन लगातार 30 सालों से हासिल करता आ रहा है, जबकि भारत ने यह काफी छोटे से अरसे के लिए किया है?

प्रधानमंत्री मोदीः पहला, मेरा पूरा विश्वास है, कि भारत में ये क्षमताएं अपरंपार हैं। मुझे क्षमताओं के विषय में आशंका नहीं है। एक सौ पच्चीस करोड़ नागरिकों के उद्यमी स्वभाव पर मेरा पूरा भरोसा है। बहुत क्षमताएं है। सिर्फ क्षमताओं को कैसे हासिल करना है, उसका रोडमैप मेरे मन में बहुत स्पष्ट है।

फरीद जकारियाः पिछले दो साल में पूर्वी चीन के समुद्र और दक्षिणी चीन के समुद्र में चीन के व्यवहार ने इसके कई पड़ोसियों को चिंता में डाला है। फिलीपींस और वियतनाम में राष्ट्रप्रमुखों ने यह चिंता जताते हुए काफी कठोर वक्तव्य दिए हैं। क्या आपको इसकी चिंता है?

प्रधानमंत्री मोदीः भारत की मिट्टी अलग प्रकार की है। सवा सौ करोड़ लोगों का देश है। हर छोटी-मोटी चीजों से चिंतित होकर देश नहीं चलता है। लेकिन समस्याओं की तरफ हम आंख बंद करके भी नहीं रह सकते हैं। हम 18वीं शताब्दी में नहीं रह रहे हैं। सहभागिता का युग है ये। और हर किसी को हर किसी की मदद लेनी पड़ेगी और हर किसी को हर किसी की मदद करनी पड़ेगी। चीन भी एक बहुत पुरातन सांस्कृतिक विरासत वाला देश है। और जिस प्रकार से चीन में आर्थिक विकास की ओर ध्यान गया है, तो वो भी विश्व से अलग होना पसंद करेगा, ऐसा मैं नहीं मानता हूं। हम भी चीन की समझदारी पर भरोसा करें, विश्वास करें, कि वह वैश्विक कानूनों को स्वीकार करेगा, और सबके साथ मिलजुलकर आगे बढ़ने में वह अपनी भूमिका निभाएगा।

फरीद जकारियाः क्या आप चीन को देखकर यह महसूस करते हैं, कि यह इतनी तेजी से विकसित हो सका है, वास्तव में मानवीय इतिहास में सबसे तेजी से, क्योंकि यहां अथॉटेरियन सरकार है। क्योंकि यहां पर सरकार के पास अच्छे बुनियादी ढांचे के विकास, निवेश के लिए इंसेंटिव के निर्माण की शक्ति है। क्या आप इसे देखते हैं और यह सोचते हैं, कि लोकतंत्र का यह मूल्य चुकाना पड़ता है, कि आपको सब चीजें धीरे-धीरे करनी पड़ती हैं?

प्रधानमंत्री मोदीः देखिए दुनिया में चीन जैसे एक उदाहरण है, वैसे लोकतांत्रिक देश भी एक उदाहरण हैं। वो भी उतने ही तेजी से आगे बढ़े हैं। ऐसा नहीं है, कि लोकतंत्र है तो ग्रोथ संभव नहीं है। आवश्यकता है कि हम अपने लोकतांत्रिक फ्रेमवर्क में रहें। क्योंकि वह हमारा डीएनए है। वह हमारी बहुत बड़ी अमानत है। उसमें हम कोई समझौता नहीं कर सकते।

फरीद जकारियाः यदि आप चीन सरकार की शक्ति को देखें, तो क्या आप नहीं चाहेंगे, कि आपके पास कुछ वैसी ही अथॉरिटी हो?

प्रधानमंत्री मोदीः देखिए, मैंने तो लोकतंत्र की ताकत देखी है। अगर लोकतंत्र न होता, तो मोदी जैसा एक गरीब परिवार में पैदा हुआ बच्चा यहां कैसे बैठता? ये ताकत लोकतंत्र की है।

फरीद जकारियाः अमेरिका में कई, और भारत में कुछ लोग हैं, जो चाहते हैं, कि अमेरिका और भारत को निकट सहयोगी होना चाहिए। वे विश्व के सबसे पुराने लोकतंत्र और विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं। लेकिन किसी कारणवश यह कभी नहीं हो सका और हमेशा कुछ बाधाएं और मुश्किलें आती रहीं। क्या आपको लगता है, कि अमेरिका और भारत के लिए रणनीतिक गठबंधन विकसित कर पाना संभव है?

प्रधानमंत्री मोदीः पहली बात है, कि मैं इसका एक शब्द में जवाब देता हूं कि हां! और बड़े विश्वास के साथ मैं कहता हूं, हां। और मैं जो यह हां कहता हूं, उसका मतलब यह है कि भारत और अमेरिका के बीच में कई समानताएं हैं। अब पिछली कुछ सदियों की ओर देखेंगे तो दो चीजें ध्यान में आएंगी। दुनिया के हर किसी को अमेरिका ने अपने में समाया है और हर भारतीय ने दुनिया में हर इलाके में अपने आप को बसाया है। ये एक बहुत टिपिकल नेचर है, दोनों समाजों का। प्राकृतिक रूप से सहअस्तित्व के स्वभाव के ये दोनों देश हैं। दूसरा, ये बात ठीक है, कि पिछली शताब्दी में काफी उतार-चढ़ाव रहा। लेकिन 20वीं सदी के अंत से लेकर 21वीं सदी के पहले दशक में आप देखेंगे कि बहुत बदलाव आया है। संबंध बहुत गहरे हुए हैं। ऐतिहासिक रूप से, सांस्कृतिक विरासत के रूप में इन दोनों देशों की कई साम्यताएं हैं, वो हमें जोड़कर रखती हैं और मुझे लगता है, कि ये जुड़ाव आगे और गहरा होगा।

फरीद जकारियाः ओबामा प्रशासन के साथ आपके अब तक के संपर्क में कई कैबिनेट मंत्री यहां आए हैं। क्या आपको लगता है, कि वॉशिंगटन में वास्तविकता में भारत के साथ संबंधों को ठोस रूप से अपग्रेड करने की इच्छा है?

प्रधानमंत्री मोदीः पहली बात है, कि भारत और अमेरिका के संबंधों को सिर्फ दिल्ली और वॉशिंगटन के दायरे में नहीं देखना चाहिए। एक बहुत बड़ा दायरा है। अच्छी बात यह है, कि दिल्ली और वॉशिंगटन दोनों का मूड भी बड़े दायरे के अनुकूल बनता जा रहा है और उसमें भारत की भी भूमिका है, वॉशिंगटन की भी भूमिका है।

फरीद जकारियाः यूक्रेन में रूस की कार्यवाही के संबंध में भारत कुछ खास सक्रिय नहीं रहा है। आप रूस के द्वारा क्रीमिया पर कब्जा किए जाने के बारे में क्या सोचते हैं?

प्रधानमंत्री मोदीः पहली बात है, कि जो कुछ भी वहां हुआ, जो निर्दोष लोग मारे गए, या एक विमान हादसा जो हुआ, ये सारी बातें दुखद हैं। आज के युग में, मानवता के लिए ये कोई अच्छी बातें नहीं हैं। हमारे यहां एक कहावत है हिंदुस्तान में कि, पहला पत्थर वो मारे, जिसने कोई पाप न किया हो। दुनिया में ऐसे समय उपदेश देने वालों की संख्या तो बहुत रहती है, लेकिन उनके आंचल में देखें तो पता चले कि उन्होंने भी कभी न कभी ऐसे पाप किए हैं। भारत का सोचा-समझा यही दृष्टिकोण है, कि मिल-बैठकर, बातचीत करके समस्याओं का समाधान करने का प्रयास करते रहना चाहिए, निरंतर करते रहना चाहिए।

फरीद जकारियाः एक मुद्दा जिसके लिए भारत विश्व की सुर्खियों में आया है, या लोगों ने इसके बारे में सुना या पढ़ा है, और जो काफी दुर्भाग्यपूर्ण है, वह है, महिलाओं के खिलाफ हिंसा और बलात्कार। आप क्या सोचते हैं, कि भारत में महिलाओं के खिलाफ हिंसा और व्यापक भेदभाव की समस्या क्यों है? और इस बारे में क्या किया जा सकता है?

प्रधानमंत्री मोदीः एक तो इस समस्या का मूल क्या है, हम पॉलिटिकल पंडितों को इसमें उलझना नहीं चाहिए, और ज्यादा नुकसान पॉलिटिकल पंडितों की बयानबाजी से होता है। महिलाओं की इज्जत हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है और इसमें कोई समझौता नहीं होना चाहिए। कानून व्यवस्था में कोई गिरावट नहीं आना चाहिए। परिवार की संस्कृति को भी हमें एक बार फिर से पुनर्जीवित करना पड़ेगा, जिसमें नारी का सम्मान हो, नारी को समानता मिले, उसका गौरव बढ़े। और उसके लिए प्रमुख एक काम है, बालिकाओं की शिक्षा। उससे भी सशक्तिकरण की पूरी संभावना बढ़ेगी। और मेरी सरकार ने 15 अगस्त को भी बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, ये एक मूवमेंट आगे बढ़ाया है।

फरीद जकारियाः आयमान अल जवाहिरी, अलकायदा के मुखिया ने भारत में अलकायदा की शाखा के निर्माण की अपील करते हुए एक वीडियो जारी किया है। वे कहते हैं, कि दक्षिण एशिया में, लेकिन यह संदेश सीधे भारत की ओर निर्देशित है, कि वे मुसलमानों को उस दमन से मुक्त कराना चाहते हैं, जो उन्होंने गुजरात में, कश्मीर में झेला है। क्या आप सोचते हैं? क्या आप चिंता करते हैं, कि इस तरह की कोई मंशा सफल हो सकती है?

प्रधानमंत्री मोदीः मैं समझता हूं, कि हमारे देश के मुसलमानों के साथ ये अन्याय कर रहे हैं। उनको लगता है, कि भारत का मुसलमान उनके नचाने पर नाचेगा, ऐसा अगर कोई मानता है, तो वो भ्रम में है। भारत का मुसलमान हिंदुस्तान के लिए जिएगा, हिंदुस्तान के लिए मरेगा। हिंदुस्तान का बुरा हो, ऐसा कुछ भी वो नहीं चाहेगा।

फरीद जकारियाः यह एक बड़ी बात है, कि आपके पास 17 करोड़ मुसलमान हैं, जबकि अलकायदा के सदस्य नहीं हैं, या बहुत कम हैं। ऐसा क्यों है? यद्यपि अलकायदा अफगानिस्तान में है, और निश्चित ही पाकिस्तान में कई हैं? लेकिन वह क्या बात है, जिससे भारतीय मुस्लिम समुदाय उससे प्रभावित नहीं होता है?

प्रधानमंत्री मोदीः पहली बात है, कि इसका मनोवैज्ञानिक और धार्मिक विश्लेषण करने के लिए मैं अधिकृत नहीं हूं। लेकिन दुनिया में मानवतावाद की रक्षा होनी चाहिए या नहीं होनी चाहिए? मानवतावाद में विश्वास करने वाले लोगों को एक होना चाहिए या नहीं होना चाहिए? दुनिया में संकट मानवतावाद के खिलाफ है। इस देश के खिलाफ, उस देश के खिलाफ, इस जाति के खिलाफ, उस जाति के खिलाफ नहीं है। इसलिए हमें इसको मानवतावादी और मानवताविरोधी के रूप में देखना चाहिए। इससे आगे सोचने की जरूरत नहीं है।

फरीद जकारियाः आज से एक या दो साल बाद आप क्या चाहते हैं, कि लोग क्या कहें, कि नरेंद्र मोदी की, ऑफिस में अपने कार्यकाल के दौरान क्या उपलब्धियां रही हैं?

प्रधानमंत्री मोदीः सबसे बड़ी बात है, देश की जनता का भरोसा। यह भरोसा कभी टूटना नहीं चाहिए। अगर भारत की जनता को यह भरोसा देने में मैं सफल होता हूं, और मेरी वाणी से नहीं, बल्कि व्यवहार से, तो फिर भारत को आगे बढ़ाने में सवा सौ करोड़ देशवासियों की ताकत जी-जान से जुट जाएगी।

फरीद जकारियाः एक अंतिम प्रश्न, आप आराम कैसे करते हैं? जब आप काम नहीं कर रहे हैं, तब आप क्या करना पसंद करते हैं?

प्रधानमंत्री मोदीः पहली बात है, कि मैं ‘नॉट-वर्किंग’’ वाला टाइप ही नहीं हूं। मेरे काम से ही मुझे आनंद आता है, मेरे काम से ही मुझे सुकून मिलता है। हर बार, हर समय मैं नया सोचता रहता हूं। कोई नई योजना बनाता हूं, काम के नए तरीके खोजता हूं। और उसी में जैसे कि एक वैज्ञानिक को अपनी लैब में पागलपन की तरह आनंद आता है, वैसे ही मुझे गवर्नेंस में नई-नई चीजें करने में, लोगों को जोड़ने में, अपने आप में एक आनंद आता है। वही आनंद मेरे लिए काफी है।

फरीद जकारियाः क्या आप ध्यान करते हैं? क्या आप योगा करते हैं?

प्रधानमंत्री मोदीः ये मेरा सौभाग्य रहा कि मेरा बचपन से ही, योगा की दुनिया से परिचय रहा, प्राणायाम से परिचय रहा। और वो मेरे लिए काफी उपयोगी रहा है, और मैं हमेशा हर एक को कहता हूं, कि थोड़ा सा इसको जीवन में हिस्सा बनाइए।

फरीद जकारियाः आपने योगा के फायदों के बारे में एक लंबा भाषण दिया था। बताइए कि आप इसे किस रूप में देखते हैं?

प्रधानमंत्री मोदीः देखिए, कभी भी हमने देखा होगा, हमारा मन एक काम करता है, शरीर दूसरा काम करता है और समय हमें टकराव की दिशा में ला देता है, जो मन, बुद्धि और शरीर तीनों को एक कर पाता है, वो है योगा!

शनिवार, 20 सितंबर 2014

कोटा नगर निगम के वार्ड आरक्षण



कोटा नगर निगम के वार्ड आरक्षण
वार्ड 
01 एससी महिला
02 जनरल
03 एसटी महिला
04 जनरल महिला
05 ओबीसी 

 06 एसटी
07 एससी महिला
08 एसटी
09 एससी
10 एससी
11 एससी
12 जनरल
13 जनरल महिला
14 एससी महिला
15 जनरल
16 जनरल महिला
17 जनरल
18 ओबीसी
19 जनरल
20 ओबीसी
21 ओबीसी महिला
22 जनरल
23 ओबीसी
24 ओबीसी महिला
25 एससी
26 ओबीसी महिला
27 ओबीसी
28 ओबीसी
29 एससी
30 एससी महिला
31 एससी
32 जनरल महिला
33 जनरल
34 जनरल
35 एससी
36 जनरल
37 जनरल महिला
38 जनरल
39 जनरल
40 जनरल महिला
41 जनरल महिला
42 जनरल
43 ओबीसी
44 जनरल
45 जनरल
46 ओबीसी
47 जनरल महिला
48 एससी
49 जनरल
50 ओबीसी
51 जनरल
52 जनरल
53 जनरल
54 जनरल
55 जनरल
56 जनरल महिला
57 जनरल महिला
58 जनरल महिला
59 जनरल
60 जनरल
61 ओबीसी महिला
62 जनरल
63 ओबीसी महिला
64 जनरल
65 जनरल महिला

गुरुवार, 18 सितंबर 2014

क्या घटोत्कच का कंकाल छिपाया जा रहा है ??



सच झूठ पता नहीं , मगर तस्वीरें कहती हैं कुछ है ! 
जिसे सच पता हो वह अवश्य बताये ! 
एक इस लिंक को भी देखें 
http://www.ajabgjab.com/2014/04/some-mysterious-archaeological.html
 

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गुरुवार, 30 जनवरी 2014

क्या  घटोत्कच का कंकाल छिपाया जा रहा है ??

 Ghatotkach skeleton 

http://ashutoshnathtiwari.blogspot.in 

जय श्री राम मित्रों
एक लम्बे अंतराल के बाद अगले लेख की शुरुवात एक महाभारतकालीन तथ्य के आधार पर करना चाहूँगा. महाभारत में भीम और हिडिम्बा के पुत्र घटोत्कच का वर्णन है जो अत्यंत ही विशालकाय मायावी और बलशाली था. महाभारत के युद्ध में घटोत्कच ने एक निर्णायक भूमिका निभाई थी जब उसने कर्ण को उस शक्तिबाण का इस्तेमाल करने को विवश किया जिसको कर्ण ने अर्जुन को मारने के लिए संभाल कर रखा था..
आज जब हम इक्कीसवी शताब्दी में हैं और पूर्व में कई सौ वर्षो से हिन्दुस्थान ऐसे लोगो का गुलाम रहा जो हिन्दू संस्कृति को नकारने एवं हेय तथा काल्पनिक बताने के निकृष्ट यत्न करते रहे.वर्तमान तथा भूतकाल की कांग्रेस सरकारे भी हिंदुविरोधी  और सम्प्रदाय विशेष के तुष्टिकरण की भावना से ग्रसित हैं अतः ये सरकार भी हिन्दू धर्म से सम्बंधित प्रतिक चिन्हों या स्थलों को सिरे से नकारने के प्रयत्न में लगी हुई है. यह सर्वविदित है की इसके पीछे वेटिकन और पोप का कांग्रेसी राजनेताओं के साथ कुख्यात गठबंधन है. इसी क्रम में उन्होंने सारे साक्ष्य उपलब्ध होने के बाद अयोध्या तथा राम को मानने से इनकार कर दिया . व्यापारिक हितो और व्यक्तिगत स्वार्थो के कारण राम सेतु के साथ साथ राम के अस्तित्व पर भी प्रश्नचिन्ह लगा दिया है जबकि हिन्दू धर्म के विभिन्न ग्रंथो से ले कर नासा तक राम सेतु के अस्तित्व को मानता है ..अगली घटना है उत्तर भारत में मिले एक महा मानव कंकाल की जिसकी उचाई लगभग अस्सी फुट कही जा रही है  कुछ लोगो ने इसकी लम्बाई 60-70 फुट के लगभग अनुमानित किया है . यह घटना सन २००७ की है जब नेशनल जियोग्रफिकल टेलीविजन चैनल की भारतीय टीम और अर्कोलोजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया ने सेना के अधिकार क्षेत्र में आने वाले एक रेगिस्तानी क्षेत्र की खुदाई में एक विशालकाय कंकाल को खोज निकाला. ऐसा कहा जा रहा है और तस्वीरो के देखने से प्रतीत होता है की इस मानव के खोपड़ी का आकर लगभग दस फुट में है. कुल मिलकर यह कंकाल सामान्य मनुष्य के कंकाल से लगभग दस बारह  गुना ज्यादा बड़ा है . कुछ उपलब्ध तस्वीरे आप सभी से साझा कर रहा हूँ जिसकी सत्यता की अंतिम पुष्टि पोप और वेटिकन के दबाव में भारत सरकार ने रोक रखा है ..

 


इस कंकाल की विशालकायता का अनुमान आप इसी बात से लगा सकते हैं की इसके आस पास काम करने वाले मनुष्य इसके सामने बौने प्रतीत हो रहे हैं.
घटना कुछ स्थानीय समाचार पत्रों में भी आई थी मगर सरकार के आदेश पर यह खबर दबा दी गयी. सन्दर्भ  के लिए 8 सितम्बर २००७ के एक समाचार पत्रों में निकली इस खबर की कापी मिली है जो आप सब से साझा कर रहा हूँ. हालाँकि सरकार ने अब तक्ल इस खबर की न तो पुष्टि की है न ही खंडन ..

इस कंकाल से पहले हम हिन्दू धर्मग्रंथो में वर्णित  राक्षसों का अस्तित्व इस कारण अस्वीकार कर देते थे क्यूकी खुदाई में आज तक मिले मनुष्य का कंकाल सामान्यता 6-8 फीट के होते थे अब जब 80 फीट का कंकाल भारत सरकार को मिला है जो की भारत में विशालकाय प्राणियों(राक्षसों) के होने की ओर इशारा करती है वहीं भारत सरकार इस तथ्य को भरसक छिपाने का प्रयास कर रही है. अखबारके अनुसार 80 फीट के नरकंकाल के पास से ब्रह्म लिपि में एक शिलालेख भी प्राप्त हुआ है। इसमें लिखा है कि ब्रह्मा ने मनुष्यों में शान्ति स्थापित करने के लिए विशेष आकार के मनुष्यों की रचना की थी। विशेष आकार के मनुष्यों की रचना एक ही बार हुई थी। ये लोग काफी शक्तिशाली होते थे और पेड़ तक को अपनी भुजाओं से उखाड़ सकते थे। लेकिन इन लोगों ने अपनी शक्ति का दुरुपयोग करना शुरू कर दिया और आपस में लड़ने के बाद देवताओं को ही चुनौती देने लगे। अन्त में भगवान शिव ने सभी को मार डाला और उसके बाद ऐसे लोगों की रचना फिर नहीं की गई। महाभारत में ये वर्णित है की घटोत्कच ने मरते समय अत्यंत विशाल आकर धारण किया था और कर्ण के शक्तिबाण से मरने के पूर्व कौरव सेना का एक बड़ा भाग घटोत्कच के शारीर से दब कर नष्ट हो गया . अब ये कंकाल उसी ओर इशारा करता है संभव है की ये कंकाल घटोत्कच का हो या उसी के सामान किसी राक्षस का हॉप मगर इससे एक बात अवश्य प्रमाणित हो जाती है की भारत में इस आकार के मानव(या राक्षसों ) का अस्तित्व था जैसा की हमारे धर्मों में वर्णित है 
यदि वैज्ञानिक दृष्ठि से देखें तो इसे घटोत्कच का कंकाल मानने के लिए एक बड़े शोध की जरुरत है मगर इस बात को प्रथम दृष्टया समझा जा सकता है की हमारे धर्मग्रंथो में वर्णित इतने बड़े व्यक्ति भारत में पाए जाते थे तभी इतना विशालकाय कंकाल प्राप्त हुआ है.यह उन लोगो को उस भारतीय शोधपरक धर्म और धर्मग्रंथो की ओर आकर्षित करने के लिए पर्याप्त है जिनके विज्ञान ने कल्पना में भी इस महामानव की कल्पना नहीं की होगी..

जय श्री राम 

बुधवार, 17 सितंबर 2014

जन्मदिन पर नरेंद्र मोदी ने : मां के पैर छू कर लिया आशीर्वाद







जन्मदिन पर घर पहुंचे मोदी,

 मां के पैर छू लिया आशीर्वाद

आईबीएन-7 | Sep 17, 2014
नई दिल्ली। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है। प्रधानमंत्री मोदी आज 64 साल के हो गए। जन्मदिन से एक दिन पहले ही मोदी गुजरात पहुंचे हैं। इस खास मौके पर पीएम मोदी अपनी मां से भेंट करने घर पहुंचे। मोदी ने मां के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया।

मां ने खुश होकर मोदी को मिठाई खिलाई और तोहफे के रूप में मोदी को शगुन के पांच हजार रुपये भी दिए। मोदी ने मां के दिए हुए 5 हजार रुपये बाढ़ पीड़ितों की राहत के लिए प्रधानमंत्री राहत कोष में जमाकरवा दिए। बता दें प्रधानमंत्री मोदी ने पहले ही अपील की है कि उनका जन्मदिन न मनाया जाए। बल्कि जम्मू-कश्मीर में आई बाढ़ से बेहाल लोगों की मदद की जाए। मोदी को जन्मदिन के मौके पर जापान के पीएम और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी दी बधाई दी।

यही नहीं आज एक और खास मौका है क्योंकि चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग 3 दिवसीय दौरे पर भारत आ रहे हैं। दोपहर ढाई बजे के लगभग वो सीधे अहमदाबाद आएंगे। वहीं पर मोदी और चिनफिंग की मुलाकात होगी। अहमदाबाद में चीनी राष्ट्रपति के स्वागत की तैयारियां जोर शोर से की गईं हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी जिंदगी के 64 सालों में अथक संघर्ष किया।

गुजरात के मेहसाणा जिले में छोटी सी आबादी वाला शहर है वडनगर, कौन जानता था कि एक दिन इसी शहर की गलियों में खेलने-कूदने वाला एक छोटा सा बच्चा देश की बागडोर संभालेगा। वडनगर में ही 1950 में जन्म हुआ था हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी का। पिता रेलवे स्टेशन पर चाय की दुकान चलाते थे। और मोदी पढ़ाई के साथ-साथ पिता के काम में हाथ बंटाते थे। स्कूल के अलावा नरेंद्र मोदी रोज दो बार संघ की शाखा में भी जाते थे। स्कूल में सिर्फ थिएटर और परिचर्चाएं ही थींजहां मोदी का मन लगता था।

18 साल की उम्र में नरेंद्र मोदी ने दो साल के लिए घर छोड़ दिया। कहा जाता है कि ये समय मोदी ने हिमालय में बिताया। इसी दौरान वो संघ के मुख्यालय नागपुर जा पहुंचे। जहां प्रशिक्षण के बाद मोदी 1970 में संघ के पूर्ण प्रचारक बन गए।

मोदी के लिए संघ हमेशा प्राथमिकता रहा। मोदी ने खुद को संघ के लिए पूरी तरह से समर्पित कर दिया। अपने काम के प्रति मोदी के समर्पण का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि परिवार को उनका साथ कभी-कभी ही मिल पाता था। नरेंद्र मोदी का विवाह छोटी उम्र में ही हो गया था। लेकिन देश की सेवा का व्रत ले चुके मोदी पत्नी को छोड़ सियासी यात्रा पर निकल पड़े। मोदी की धर्मपत्नी जशोदा बेन मेहसाणा के ऊंझा में अपने भाई के साथ रहती हैं।

मोदी की मां हीराबेन भी अपने इस बेटे से बरसों तक नहीं मिल पाईं। बीते कुछ सालों में भी वो उन्हें सिर्फ टीवी पर देखती रहीं। लेकिन जीत के बाद हीराबेन पहली शख्स थीं जिससे मोदी मिलने गए। मोदी के लिए उनकी साधारण सी सलाह थी जब वो मुख्यमंत्री बने थे।

नरेंद्र मोदी सियासत के कर्मक्षेत्र में आगे, और आगे बढ़ते गए। 80 और 90 के दशक में मोदी ने खुद को चुनावी राजनीति से दूर रखा। वो संगठन में रहे और बीजेपी को गुजरात चुनाव जिताने के लिए काम करते रहे। 1991 में मोदी ने मुरली मनोहर जोशी की कन्याकुमारी से श्रीनगर तक की एकता यात्रा का जिम्मा संभाला। स्वर्ण जयंती यात्रा के दौरान वो आडवाणी के सारथी भी रहे। मोदी की एक कुशल प्रशासक और संगठनकर्ता की जो छवि बनी, उसी के चलते साल 2001 में भूकंप राहत कार्य में केशुभाई सरकार की नाकामी के बाद उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया।

मुख्यमंत्री बनने से पहले भले ही मोदी को चुनाव लड़ने का तजुर्बा नहीं था। लेकिन उसके बाद गुजरात में 2002, 2007 और 2012 में लगातार जीत हासिल कर उन्होंने चुनावी सफलताओं का इतिहास लिख दिया। फिर बारी आई 2014 के आम चुनावों की। यहां भी मोदी की अगुवाई में बीजेपी को अब तक की सबसे ने बड़ी जीत मिली। और नरेंद्र मोदी ने 15वें प्रधानमंत्री के तौर पर देश की बागडोर संभाली।

उपचुनाव के नतीजों से हताश नहीं हों : अमित शाह



उपचुनाव के खराब नतीजों से हताश नहीं हों : अमित शाह

भाषा | Sep 17, 2014

बीदर (कर्नाटक)
उपचुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि वे हताश नहीं हों। वे चार राज्यों में आगामी विधानसभा चुनाव भारी बहुमत से जीतेंगे और इसके लिए वे कांग्रेस-मुक्त भारत के अजेंडा पर आगे बढ़ें।

शाह ने कहा, 'कुछ चुनाव नतीजे आए हैं। विपक्ष अभिभूत है। उन्हें लगता है कि कुछ बहुत अच्छी चीज हुई है, क्योंकि कुछ जगहों पर बीजेपी परास्त कर दी गई है। लेकिन वे नहीं देख सकते हैं कि हमने असम में अपना खाता खोला है, वे नहीं देख सकते कि हम बंगाल में जीते हैं।'

लोकसभा चुनाव में शानदार जीत के महज चार माह बाद बीजेपी उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात के अपने गढ़ों में हुए कुछ उप-चुनावों में बुरी तरह से हार गई।

उसे 23 विधानसभा सीटों में से 13 सीटें खोनी पड़ीं। इन उपचुनावों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता की परीक्षा के रूप में देखा जा रहा था।

शाह ने कहा, 'इन उपचुनाव नतीजों को न देखें। चार राज्यों में चुनाव हैं। आप देखेंगे कि बीजेपी इन राज्यों में जबर्दस्त बहुमत से चुनाव जीतेगी और कांग्रेस मुक्त भारत का हमारा अजेंडा आगे बढ़ेगा।
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उपचुनाव रिजल्ट: देखें, कौन कहां से जीता

नवभारतटाइम्स.कॉम | Sep 16, 2014

उत्तर प्रदेश                तब                                  अब
लखनऊ ईस्ट     कलराज मिश्रा (बीजेपी)     आशुतोष टंडन (बीजेपी) ने एसपी की जूही सिंह को 26449 वोटों से हराया
चरखारी             उमा भारती(बीजेपी)         कप्तान सिंह (समाजवादी पार्टी) ने कांग्रेस के रामजीवन को 50805 वोटों से हराया
मैनपुरी(लोकसभा)     मुलायम सिंह यादव     तेज प्रताप यादव(समाजवादी पार्टी) ने बीजेपी के प्रेम सिंह शाक्य को 321149 वोटों से हराया
बल्हा             सावित्री बाई फुले(बीजेपी)     बंशीधर बौद्ध (समाजवादी पार्टी) ने बीजेपी के अक्षयवर को 25181 वोटों से हराया
हमीरपुर         साध्वी निरंजन ज्योति     शिव प्रजापति (समाजवादी पार्टी) ने बीजेपी के जगदीश व्यास को 68556 वोटों से हराया
निघासन        अजय(बीजेपी)     कृष्ण गोपाल पटेल (समाजवादी पार्टी) ने बीजेपी के रामकुमार वर्मा को45976 वोटों से हराया
नोएडा         महेश शर्मा(बीजेपी)     बिमला बाथम (बीजेपी) ने समाजवादी पार्टी की काजल शर्मा को 58952 वोटों से हराया
रोहनिया     अनुप्रिया पटेल(अपना दल)     महेंद्र पटेल (समाजवादी पार्टी) ने अपना दल की कृष्णा पटेल को 14449 वोटों से हराया
सहारानपुर नगर     राघव लखनपाल(बीजेपी)     राजीव गूंबर(बीजेपी) ने समाजवादी पार्टी के संजय गर्ग को 26676 वोटों से हराया
सिराथु     केशव प्रसाद(बीजेपी)     वाचस्पति (समाजवादी पार्टी) ने बीजेपी के संतोष पटेल को 24522 वोटों से हराया
ठाकुरद्वारा     कुंवर सर्वेश कुमार     नवाब जान (समाजवादी पार्टी) ने बीजेपी के रामपाल सिंह को 27743 वोटों से हराया
बिजनौर      कुंवर भारतेंदु (बीजेपी)     रुचि वीरा (समाजवादी पार्टी) ने बीजेपी के हेमेंद्र पाल को 11567 वोटों से हराया
       
गुजरात           तब                    अब
दीसा             बीजेपी     गोबा राबरी (कांग्रेस) ने बीजेपी के लेबजी परमार को 10394 वोटों से हराया
मंगरौल        बीजेपी     बाबू वजा (कांग्रेस) ने बीजेपी के लक्ष्मण यादव को 22682 वोटों से हराया
टंकारा           बीजेपी     बावनजी मेटालिया (बीजेपी) ने कांग्रेस के ललित कागथारा को 11731 वोटों से हराया
मणिनगर     बीजेपी     सुरेश पटेल (बीजेपी) ने कांग्रेस के जतिन केल्ला को 49652 वोटों से हराया
लिमखेड़ा      बीजेपी     विंछिया भूरिया (बीजेपी) ने कांग्रेस के छत्र सिंह मेडा को 23934 वोटों से हराया
आणंद          बीजेपी     रोहित भाई पटेल (बीजेपी)
वड़ोदरा(लोकसभा)     बीजेपी     रंजनबेन भट्ट (बीजेपी) ने कांग्रेस के नरेंद्र रावत को 3.29 लाख वोटों से हराया
तलाजा         बीजेपी     शिव गोहिल (बीजेपी) ने कांग्रेस के प्रवीण वाला को 9518 वोटों से हराया
मातर            बीजेपी     केसरी सिंह सोलंकी (बीजेपी) ने कांग्रेस के कालीदास परमार को 8610 वोटों से हराया
खंभालिया     बीजेपी     अहीर मेरामन (कांग्रेस) ने बीजेपी के मुलु बेरा को 1227 वोटों से हराया
       
पश्चिम बंगाल             तब                        अब
बशीरहाट दक्षिण     टीएमसी       सामिक भट्टाचार्य (बीजेपी) ने तृणमूल कांग्रेस के दीपेंदु बिश्वास को 1586 वोटों से हराया
चौरंगी               सीपीआई(एम)     नयन बंदोपाध्याय (तृणमूल कांग्रेस) ने बीजेपी के रितेश तिवारी को 14344 वोटों से हराया
       
राजस्थान            तब         अब
सूरजगढ़             बीजेपी     श्रवण कुमार (कांग्रेस) 3270 वोटों से जीते
वैर                     बीजेपी   भजनलाल (कांग्रेस) 25108 वोटों से जीते
नसीराबाद          बीजेपी       रामनारायण (कांग्रेस) ने बीजेपी की सरिता गैना को 386 वोटों से हराया
कोटा साउथ        बीजेपी     संदीप शर्मा (बीजेपी) 25707 वोटों से जीते
       
तेलंगाना                          तब                        अब
मेडक (लोकसभा)     टीआरएस     प्रभाकर रेड्डी (टीआरएस) ने कांग्रेस की वी. सुनीता को 3,61,277 वोटों से हराया
       
आंध्र प्रदेश     तब                       अब
नंदीगामा     टीडीपी     सौम्या (टीडीपी) ने कांग्रेस के बोदापति बाबू राव को 74827 वोटों से हराया
       
असम              तब                       अब
सिलचर           कांग्रेस     दिलीप कुमार पॉल (बीजेपी) ने कांग्रेस के अरुण दत्ता मजूमदार को हराया
लखीपुर          कांग्रेस     राजदीप गोआला (कांग्रेस) ने बीजेपी के संजय ठाकुर को 9172 वोटों से हराया
जमुनामुख     AIUDF     अब्दुर रहीम अजमल (AIUDF) ने कांग्रेस के बशीरुद्दीन को 22959 वोटों से हराया
       
सिक्किम          तब         अब
रांगेंग-यांगेंग     SDF     आरएन चामलिंग (निर्दलीय) ने एसडीएफ की कुमारी मंगार को 708 वोटों से हराया
       
त्रिपुरा            तब                     अब
मानु             सीपीएम     प्रभात चौधरी (सीपीएम) ने कांग्रेस के माइलाफ्रू मोग को 15971 वोटों से हराया

नरेन्द्र मोदी : Narendra Modi



नरेन्द्र मोदी
भारत डिस्कवरी प्रस्तुति
http://hi.bharatdiscovery.org/india/%E0%A4%A8%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0_%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%A6%E0%A5%80
नरेन्द्र मोदी (अंग्रेज़ी: Narendra Modi, जन्म: 17 सितंबर, 1950) भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री हैं। नरेन्द्र मोदी भारतीय जनता पार्टी के प्रसिद्ध नेता और गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री हैं। 'केशुभाई पटेल' के इस्तीफे के बाद नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने। नरेंद्र मोदी गुजरात के सबसे ज़्यादा लंबे समय तक शासन करने वाले मुख्यमंत्री हैं। नरेंद्र मोदी 7 अक्तूबर, 2001 से 21 मई, 2014 तक लगातार गुजरात के मुख्यमंत्री पद पर विराजमान रहे। नरेंद्र मोदी को वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भारत की प्रमुख पार्टी भारतीय जनता पार्टी की ओर से प्रधानमन्त्री पद का प्रत्याशी घोषित किया गया तथा इन्होंने उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक नगरी वाराणसी एवं अपने गृहराज्य गुजरात के वडोदरा संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ा और दोनों जगह से चुनाव भारी मतों के अंतर से जीता। नरेन्द्र मोदी स्वतन्त्र भारत में जन्मे पहले व्यक्ति हैं जो भारत का प्रधानमन्त्री नियुक्त हुए हैं। इन्होंने 26 मई, 2014 शाम 6 बजे राष्ट्रपति भवन में भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।

जीवन परिचय
नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर, 1950 को गुजरात के वडनगर में अन्य पिछड़ा वर्ग के एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। वे दामोदरदास मूलचंद मोदी और उनकी पत्नी हीराबेन के छह बच्चों में से तीसरे हैं। बचपन से ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे हैं और किशोरावस्था से ही उनका राजनीति के प्रति झुकाव था। नरेंद्र मोदी पूरी तरह से शाकाहारी व्यक्ति हैं। एक युवा के तौर पर वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे हैं लेकिन इससे भी पहले साठ के दशक में भारत-पाक युद्ध के दौरान किशोर नरेंद्र मोदी रेलवे स्टेशनों से गुजरने वाले सैनिकों की मदद करने के लिए एक स्वयंसेवक के रूप में सक्रिय रहे हैं।


एक किशोर के तौर पर उन्होंने अपने भाई के साथ एक टी स्टाल भी चलाया है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा वडनगर में ही रहकर पूरी की। बाद में, उन्होंने गुजरात विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में मास्टर डिग्री ली।[1]नरेंद्र मोदी को अपने बाल्यकाल से कई तरह की विषमताओं एवं विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है किन्तु अपने उदात्त चरित्रबल एवं साहस से उन्होंने तमाम अवरोधों को अवसर में बदल दिया, विशेषकर जब उन्‍होने उच्च शिक्षा हेतु कॉलेज तथा विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। उन दिनों वे कठोर संद्यर्ष एवं दारुण मन:ताप से घिरे थे, परन्तु् अपने जीवन- समर को उन्होंने सदैव एक योद्धा-सिपाही की तरह लड़ा है। आगे क़दम बढ़ाने के बाद वे कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखते, साथ-साथ पराजय उन्हें स्वीकार्य नहीं है। अपने व्‍यक्‍तित्‍व की इन्‍हीं विशेषताओं के चलते उन्होंने राजनीति शास्त्र विषय के साथ अपनी एम.ए. की पढ़ाई पूरी की।

राजनीतिक जीवन
1984 में देश के प्रसिद्ध सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर.एस.एस) के स्वयं सेवक के रूप में उन्होंने अपने जीवन की शुरुआत की। यहीं उन्हें निस्वार्थता, सामाजिक दायित्वबोध, समर्पण और देशभक्‍ति के विचारों को आत्म सात करने का अवसर मिला। अपने संघ कार्य के दौरान नरेंद्र मोदी ने कई मौकों पर महत्त्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। फिर चाहे वह 1974 में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ चलाया गया आंदोलन हो, या 19 महीने (जून 1975 से जनवरी 1977) चला अत्यंत प्रताडि़त करने वाला 'आपात काल' हो।

भाजपा में प्रवेश
1987 में भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) में प्रवेश कर उन्होंने राजनीति की मुख्यधारा में क़दम रखा। सिर्फ़ एक साल के भीतर ही उनको गुजरात इकाई के प्रदेश महामंत्री (जनरल सेक्रेटरी) के रूप में पदोन्नत कर दिया गया। तब तक उन्होंने एक अत्यंत ही कार्यक्षम व्यवस्थापक के रूप में प्रतिष्ठा हासिल कर ली थी। पार्टी को संगठित कर उसमें नई शक्ति का संचार करने का चुनौतीपूर्ण काम भी उन्होंने स्वीकार कर लिया। इस दौरान पार्टी को राजनीतिक गति प्राप्त होती गई और अप्रैल, 1990 में केन्द्र में साझा सरकार का गठन हुआ। हालांकि यह गठबंधन कुछ ही महीनो तक चला, लेकिन 1995 में भाजपा अपने ही बलबूते पर गुजरात में दो तिहाई बहुमत हासिल कर सत्ता में आई। वर्ष 1998 में पार्टी के सबसे बड़े नेता लालकृष्ण आडवाणी ने तब उनसे गुजरात और हिमाचल प्रदेश में चुनावों की कमान संभालने को कहा था।

 गुजरात के मुख्यमंत्री
नरेंद्र मोदी अपनी माँ हीराबेन के साथ

विश्वविद्यालय की अपनी शिक्षा के दौरान ही मोदी संघ के पूर्ण कालिक प्रचारक बन गए थे। बाद में उन्होंने राज्य में पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट किया था और शंकर सिंह वाघेला के साथ मिलकर गुजरात में भाजपा कार्यकर्ताओं का एक मजबूत आधार तैयार किया। शुरुआती दिनों में जहां वाघेला को जनता का नेता माना जाता था वहीं मोदी की ख्याति एक कुशल रणनीतिकार की थी। अप्रैल 1990 में जहां पार्टी को केन्द्र में गठबंधन सरकार बनाने का मौका मिला। केन्द्र में सरकार भले ही लम्बे समय तक नहीं चल सकी हो लेकिन 1995 में गुजरात में भाजपा ने दो तिहाई बहुमत हासिल किया। लाल कृष्ण आडवाणी ने नरेन्द्र मोदी को दो महत्वपूर्ण कामों की जिम्मेदारी सौंपी। एक थी कि सोमनाथ से अयोध्या तक रथ यात्रा की तैयारी करना। इसी तरह का दूसरा मार्च कन्याकुमारी से कश्मीर तक के लिए रखा गया। राज्य में शंकर सिंह वाघेला के पार्टी से निकल जाने के बाद केशुभाई पटेल को मुख्यमंत्री बनाया गया और नरेंद्र मोदी मोदी को पार्टी का महासचिव बनाकर नई दिल्ली भेज दिया गया। पर 2001 में पार्टी ने नरेन्द्र मोदी को केशूभाई का उत्तराधिकारी चुन लिया। नरेन्द्र मोदी ने चुनाव जीता और वे गुजरात के मुख्यमंत्री बने रहे। तब उन्होंने राज्य की 182 विधान सभा सीटों में से पार्टी को 122 सीटों पर जीत दिलाई। तब से अबत्क नरेन्द्र मोदी ही राज्य के मुख्यमंत्री बने हुए हैं। गुजरात में 2012 में हुए विधानसभा चुनावों में भी नरेन्द्र मोदी का ही जादू चला और वे अपनी पार्टी को सत्ता में बनाए रखने में कामयाब रहे। मणिनगर सीट से उन्होंने कांग्रेस की प्रत्याशी श्वेता भट्‍ट (आईपीएस अधिकारी संजीव भट्‍ट की पत्नी) को 86 हजार से अधिक वोटों से हराया। राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर विदेशों से निवेश आकृष्ट करने के लिए नरेन्द्र मोदी चीन, सिंगापुर और जापान की यात्राएं कर चुके हैं।

लोकसभा चुनाव 2014

गोवा में भाजपा कार्यसमिति द्वारा नरेन्द्र मोदी को 2014 के लोकसभा चुनाव अभियान की कमान सौंपी गयी थी। 13 सितम्बर 2013 को हुई संसदीय बोर्ड की बैठक में आगामी लोकसभा चुनावों के लिये प्रधानमन्त्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया गया। इस अवसर पर पार्टी के शीर्षस्थ नेता लालकृष्ण आडवाणी मौजूद नहीं रहे और पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने इसकी घोषणा की। नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमन्त्री पद का उम्मीदवार घोषित होने के बाद चुनाव अभियान की कमान राजनाथ सिंह को सौंप दी। नरेन्द्र मोदी को प्रधानमन्त्री पद का उम्मीदवार बनाये जाने के बाद मोदी की पहली रैली हरियाणा प्रान्त के रेवाड़ी शहर में हुई। रैली को सम्बोधित करते हुए उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश को आपस में लड़ने की बजाय ग़रीबी और अशिक्षा से लड़ना चाहिये। एक सांसद उम्मीदवार के रूप में उन्होंने देश की दो लोकसभा सीटों वाराणसी तथा वडोदरा से चुनाव लड़ा और दोनों निर्वाचन क्षेत्रों से भारी मतों से विजयी हुए।

जनता ने देखा अद्भुत चुनाव प्रचार
भारतीय जनता पार्टी की ओर से प्रधानमन्त्री प्रत्याशी घोषित किये जाने के बाद नरेन्द्र मोदी ने पूरे भारत का भ्रमण किया। इस दौरान 3 लाख किलोमीटर की यात्रा कर पूरे देश में 437 बड़ी चुनावी रैलियाँ, 3-डी सभाएँ व चाय पर चर्चा आदि को मिलाकर कुल 5827 कार्यक्रम किये। चुनाव अभियान की शुरुआत उन्होंने 26 मार्च 2014 को मां वैष्णो देवी के आशीर्वाद के साथ जम्मू से की और समापन मंगल पाण्डे की जन्मभूमि बलिया (उत्तर प्रदेश) में किया। स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात भारत की जनता ने एक अद्भुत चुनाव प्रचार देखा।

सफलता का बना नया रिकार्ड
नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने 2014 के चुनावों में अभूतपूर्व सफलता भी प्राप्त की। चुनाव में जहाँ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) 336 सीटें जीतकर सबसे बड़े संसदीय दल के रूप में उभरा वहीं अकेले भारतीय जनता पार्टी ने 282 सीटों पर विजय प्राप्त की। काँग्रेस केवल 44 सीटों पर सिमट कर रह गयी और उसके गठबंधन को केवल 59 सीटों से ही सन्तोष करना पड़ा।


नरेन्द्र मोदी स्वतन्त्र भारत में जन्म लेने वाले ऐसे व्यक्ति हैं जो सन 2001 से 2014 तक लगभग 13 वर्ष गुजरात के 14वें मुख्यमन्त्री रहे और भारत के 15वें प्रधानमन्त्री बने। एक ऐतिहासिक तथ्य यह भी है कि नेता-प्रतिपक्ष के चुनाव हेतु विपक्ष को एकजुट होना पड़ेगा क्योंकि किसी भी एक दल ने कुल लोकसभा सीटों के 10 प्रतिशत (54 सीट) का आँकड़ा ही नहीं छुआ।

भाजपा संसदीय दल के नेता बने
20 मई 2014 को संसद भवन में भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित भाजपा संसदीय दल एवं सहयोगी दलों की एक संयुक्त बैठक में जब लोग प्रवेश कर रहे थे तो नरेन्द्र भाई मोदी ने प्रवेश करने से पूर्व संसद भवन को ठीक वैसे ही ज़मीन पर झुककर प्रणाम किया जैसे किसी पवित्र मन्दिर में श्रद्धालु प्रणाम करते हैं। संसद भवन के इतिहास में उन्होंने ऐसा करके समस्त सांसदों के लिये उदाहरण पेश किया। बैठक में नरेन्द्र भाई मोदी को सर्वसम्मति से न केवल भाजपा संसदीय दल अपितु राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का भी नेता चुना गया। भाजपा सहित समस्त सहयोगी दलों द्वारा राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को पत्र सौंपे जाने के पश्चात जब नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति से मिलने राष्ट्रपति भवन गये तो प्रणब मुखर्जी ने उनका स्वागत किया और भारी बहुमत से विजयी होने की बधाई भी दी। राष्ट्रपति भवन से वापसी में राष्ट्रपति ने नरेन्द्र मोदी को भारत का 15वाँ प्रधानमन्त्री नियुक्त करते हुए इस आशय का विधिवत पत्र सौंपा।

भारत के प्रधानमंत्री
नरेन्द्र मोदी राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के समक्ष प्रधानमंत्री पद की शपथ लेते हुए
नरेन्द्र भाई मोदी ने सोमवार 26 मई, 2014 को शाम 6 बजे प्रधानमन्त्री पद की शपथ ली। संसद भवन के केन्द्रीय कक्ष में भाजपा के संसदीय दल का नेता चुने जाने पर बोलते हुए नरेन्द्र भाई मोदी ने देश की जनता को यह विश्वास दिलाया कि उन्हें आज जो दायित्व सौंपा गया है उसे वह पूरी निष्ठा और परिश्रम की पराकाष्ठा से निभायेंगे। इस अवसर पर उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार ग़रीबों, गाँववासियों, दलितों, शोषितों और वंचितों के उत्थान के लिये पूरे समर्पण से काम करेगी। कर्मठ, समर्पित और दृढ़-निश्चयी नरेन्द्र मोदी 100 करोड़ भारतीयों के सपनों और आकांक्षाओं के लिए आशा की एक किरण बन कर आए हैं। विकास पर उनकी पैनी नज़र और परिणाम हासिल करने की उनकी प्रामाणिक क्षमता ने उन्हें भारत के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक बनाया है। उनका एक ऐसे राष्ट्र के निर्माण का संकल्प है जो मज़बूत, खुशहाल और समावेशी हो और जहां प्रत्येक भारतीय अपनी आशाओं और आकांक्षाओं को फलीभूत होते हुए देख सकता हो। नरेन्द्र मोदी ने चौथी बार पश्चिमी राज्य गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में भारत और विश्वभर में अपनी छाप छोड़ी है। इस राज्य में वे जनहितैषी सुशासन द्वारा लोगों के जीवन में भारी बदलाव लाए, जहां सरकार ने सादगी और ईमानदारी से लोगों की सेवा की। उन्होंने विनाशकारी भूकंप के दुष्परिणामों से जूझ रहे गुजरात की कायापलट की और उसे विकास में अग्रणी बनाया जिसने भारत के सर्वांगीण विकास में मजबूत योगदान दिया।


हमेशा आगे आकर नेतृत्व संभालने वाले और गुजरात के चहुंमुखी विकास के लिए काम करने वाले नरेन्द्र मोदी ने राज्यभर में बड़ा बुनियादी ढांचा तैयार किया। उन्होंने सरकार के नौकरशाही तंत्र को नया स्वरूप प्रदान किया और उसे आसान बनाया ताकि वह कुशलतापूर्वक, ईमानदारी से और मानवीय भावना से काम कर सके। उनके नेतृत्व में गुजरात सरकार ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त राष्ट्र संघ जैसी संस्थाओं से 300 से अधिक पुरस्कार प्राप्त किए। वे एक ऐसे 'जन नेता' हैं, जो लोगों के कल्याण के लिए समर्पित हैं। नरेन्द्र मोदी के लिए इससे सुखद और कुछ नहीं कि वे आम लोगों के बीच रहें, उनकी खुशहाली देखें और उनके दुखों को दूर करें। उनकी मज़बूत ऑनलाइन उपस्थिति, जहां वे भारत के एक ऐसे सर्वाधिक प्रौद्योगिकी मूलक सोच रखने वाले नेता के रूप में जाने जाते हैं जो प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल लोगों से जुड़ने और उनके जीवन में बदलाव लाने के लिए करते हैं, ने उनके व्यक्तिगत संपर्क को और मजबूती दी है। वे फेसबुक, ट्वीटर, गूगल+ और अन्य मंचों सहित सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं। नरेन्द्र मोदी एक ऐसे व्यक्ति हैं जिनमें साहस, संवेदनशीलता और दृढ़ निश्चय कूट-कूटकर भरे हैं और जिन्हें देश ने इस उम्मीद के साथ जनादेश दिया है कि वे भारत में नई ऊर्जा का संचार करेंगे और उसे विश्व का पथप्रदर्शक बनाएंगे |

यक्तित्व
नरेन्द्र मोदी

नरेन्द्र मोदी की छवि एक कठोर प्रशासक और कड़े अनुशासन के आग्रही की मानी जाती है, लेकिन साथ ही अपने भीतर वे मृदुता एवं सामर्थ्य की अपार क्षमता भी संजोये हुए हैं। नरेन्द्र मोदी को शिक्षा-व्यवस्था में पूरा विश्वास है। एक ऐसी शिक्षा-व्यवस्था जो मनुष्य के आंतरिक विकास और उन्नति का माध्यम बने एवं समाज को अँधेरे, मायूसी और ग़रीबी के विषचक्र से मुक्ति दिलाये। विज्ञान और प्रौद्योगिकी में नरेन्द्र मोदी की गहरी दिलचस्पी है। उन्होंने गुजरात को ई-गवर्न्ड राज्य बना दिया है और प्रौद्योगिकी के कई नवोन्मेषी प्रयोग सुनिश्चित किये हैं। ‘स्वागत ऑनलाइन’ और ‘टेलि फरियाद’ जैसे नवीनतम प्रयासों से ई-पारदर्शिता आई है, जिसमें आम नागरिक सीधा प्रशासन के उच्चतम कार्यालय का संपर्क कर सकता है। जनशक्ति में अखण्ड विश्वास रखने वाले नरेन्द्र मोदी ने बखूबी क़रीब पाँच लाख कर्मचारियों की मज़बूत टीम की रचना की है। नरेन्द्र मोदी यथार्थवादी होने के साथ ही आदर्शवादी भी हैं। उनमें आशावाद कूटकूट कर भरा है। उनकी हमेशा एक उदात्त धारणा रही है कि असफलता नहीं, बल्कि उदेश्य का अनुदात्त होना अपराध है। वे मानते हैं कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता के लिए स्पष्ट दृष्टि, उद्देश्य या लक्ष्य का परिज्ञान और कठोर अध्यवसाय अत्यंत ही आवश्यक गुण हैं।[2]नरेन्द्र मोदी को मितव्ययी और मिताहारी के तौर पर जाना जाता है। उनके निजी स्टाफ में केवल तीन लोग हैं। अंतर्मुखी मोदी को हमेशा ही काम करते रहने वाले व्यक्ति के तौर पर भी जाना जाता है। वे कभी-कभी बिजनेस सूट पहने भी नजर आते हैं लेकिन बहुत कम अवसरों पर। उन्होंने अपने राज्य में बिना सरकारी अनुमति के बने बहुत सारे मंदिरों को भी गिराने का आदेश दिया था जिसकी विश्व हिंदू परिषद ने आलोचना की थी। पर वे अपने विरोधियों को ज्यादा तरजीह नहीं देते हैं। राजनीति के अलावा, नरेन्द्र मोदी की रुचि लेखन में है। उन्होंने विभिन्न विषयों पर कई किताबें लिखी हैं और वे कविताएं भी लिखते हैं। उनके दिन की शुरुआत हमेशा योग से होती है, जो अति सक्रिय दिनचर्या में उन्हें शांति प्रदान करता है।

सम्मान और पुरस्कार
मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कार्यकाल के दौरान राज्य के पृथक-पृथक क्षेत्रों में 60 से अधिक पुरस्कार प्राप्त किये हैं। उनमें से कुछ का उल्लेख नीचे किया जा रहा है-

दिनांक                    पुरस्कार
16-10-2003     आपदा प्रबंधन और ख़तरा टालने की दिशा में संयुक्त राष्ट्र की ओर से सासाकावा पुरस्कार।
अक्टूबर-2004     प्रबंधन में नवीनता लाने के लिए ‘कॉमनवेल्थ एसोसिएशन्स’ की ओर से CAPAM गोल्ड पुरस्कार।
27-11-2004     ‘इन्डिया इन्टरनेशनल ट्रेड फेयर-2004 में इन्डिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गेनाइज़ेशन फॉर गुजरात्स एक्सेलन्स’ की ओर से ‘स्पेशल कमेन्डेशन गोल्ड मेडल’ दिया गया।
24-02-2005     भारत सरकार की ओर से गुजरात के राजकोट ज़िले में सेनिटेशन सुविधाओं के लिए ‘निर्मल ग्राम’ पुरस्कार दिया गया।
25-04-2005     भारत सरकार के सूचना और तकनीकी मंत्रालय और विज्ञान-तकनीकी मंत्रालय द्वारा ‘भास्कराचार्य इन्स्टिट्यूट ऑफ स्पेस एप्लिकेशन’ और ‘जिओ-इन्फर्मेटिक्स’, गुजरात सरकार को "PRAGATI" के लिए ‘एलिटेक्स’ पुरस्कार दिया गया।
21-05-2005     राजीव गांधी फाउन्डेशन नई दिल्ली की ओर से आयोजित सर्वेक्षण में देश के सभी राज्यों में गुजरात को श्रेष्ठ राज्य का पुरस्कार मिला।
01-06-2005     भूकंप के दौरान क्षतिग्रस्त हुए गुरुद्वारा के पुनःस्थापन के लिए यूनेस्को द्वारा ‘एशिया पेसिफिक हेरिटेज’ अवार्ड दिया गया।
05-08-2005     ‘इन्डिया टुडे’ द्वारा श्रेष्ठ निवेश पर्यावरण पुरस्कार दिया गया।
05-08-2005     ‘इन्डिया टुडे’ द्वारा सर्वाधिक आर्थिक स्वातंत्र्य पुरस्कार दिया गया।
27-11-2005     नई दिल्ली में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में गुजरात पेविलियन को प्रथम पुरस्कार मिला।
14-10-2005     गुजराती साप्ताहिक चित्रलेखा के पाठकों ने श्री नरेन्द्र मोदी को ‘पर्सन ओफ द इयर’ चुना। इस में टेनिस स्टार सानिया मिर्ज़ा दूसरे क्रम पर और सुपरस्टार अमिताभ बच्चन तीसरे स्थान पर रहे। ये पुरस्कार दिनांक 18-05-2006 को दिये गये।
12-11-2005     इन्डिया टेक फाउन्डेशन की ओर से ऊर्जा क्षेत्र में सुधार और नवीनता के लिए इन्डिया टेक्नोलोजी एक्सेलन्स अवार्ड दिया गया।
30-01-2006     इन्डिया टुडे द्वारा देश व्यापी स्तर पर कराये गये सर्वेक्षण में श्री नरेन्द्र मोदी देश के सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री चुने गये।
23-03-2006     सेनिटेशन सुविधाओं के लिए केन्द्र सरकार द्वारा गुजरात के कुछ गाँवों को निर्मल ग्राम पुरस्कार दिये गये।
31-07-2006     बीस सूत्रीय कार्यक्रम के अमलीकरण में गुजरात एक बार फिर प्रथम स्थान पर रहा।
02-08-2006     सर्व शिक्षा अभियान में गुजरात देश के 35 राज्यों में सबसे प्रथम क्रमांक पर रहा।
12-09-2006     अहल्याबाई नेशनल अवार्ड फंक्शन, इन्दौर की ओर से पुरस्कार।
30-10-2006     चिरंजीवी योजना के लिए ‘वोल स्ट्रीट जर्नल’ और ‘फाइनान्सियल एक्सप्रेस’ की ओर से (प्रसूति समय जच्चा-बच्चा मृत्यु दर कम करने ले लिए) सिंगापुर में ‘एशियन इन्नोवेशन अवार्ड’ दिया गया।
04-11-2006     भू-रिकार्ड्स के कम्प्यूटराइजेशन के लिए चल रही ई-धरा योजना के लिए ई-गवर्नन्स पुरस्कार।
10-01-2007     देश के सबसे श्रेष्ठ ई-गवर्न्ड राज्य का ELITEX 2007- पुरस्कार भारत की केन्द्र सरकार की ओर से प्राप्त।
05-02-2007     इन्डिया टुडे-ओआरजी मार्ग के देशव्यापी सर्वेक्षण में तीसरी बार श्रेष्ट मुख्यमंत्री चुने गये। पाँच साल के कार्यकाल में किसी भी मुख्यमंत्री के लिए यह अनोखी सिद्धि थी। 

रविवार, 14 सितंबर 2014

जम्मू-कश्मीर - विपदा में बचाया वीरों ने




जम्मू-कश्मीर  - विपदा में बचाया वीरों ने
तारीख: 13 Sep 2014
- जम्मू से बलवान सिंह

कश्यप ऋषि की जिस तपस्थली, कश्यपमर्ग घाटी को प्रकृति ने धरती का स्वर्ग सा सौंदर्य दिया, आज वही जम्मू-कश्मीर प्रकृति के कोप से थराथरा उठा है। तीन दिन तक लगातार ऐसी मूसलाधार बारिश हुई कि जिसने घाटी को कई स्थानों पर 30 से 40 फुट तक डुबा दिया। हाहाकार मच गया, लोगों की जान पर बन आई, लेकिन ऐसे में सेना के बहादुर जवानों और संघ के स्वयंसेवकों ने सबसे पहले पहंुचकर नागरिकों को तेजी से सुरक्षित स्थानों पर पहंुचाया। भोजन और पानी की व्यवस्था की। बारिश, बाढ़ व भूस्खलन में अब तक 250 के करीब लोगों की जान जा चुकी है, 5 लाख लोगों को बचाया जा चुका है। सड़कें, पुल, घर, फसलें बुरी तरह तबाह हो चुकी हैं। जम्मू संभाग के पुंछ-राजोरी तथा कश्मीर के श्रीनगर व दक्षिण कश्मीर में बिजली, पानी, दूरसंचार सेवाएं पूरी तरह ठप्प पड़ी हैं। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग सहित जम्मू संभाग के कई मार्ग बंद पड़े हैं जबकि सेना, वायु सेना, एनडीआरएफ व अन्य सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जारी राहत अभियान के चलते 70 हजार के करीब लोगों को बचाकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इस बीच कई लोग लापता हैं जिसके चलते मरने वालों का आंकड़ा और भी बढ़ सकता है। श्रीनगर व दक्षिण कश्मीर में अभी भी चार से पांच लाख के करीब लोग फंसे हुए हैं जिन्हें सेना व अन्य सुरक्षा एजेंसियां सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटी हुई हैं। पिछले साठ सालों में पहली बार चारों तरफ चीख, पुकार व तबाही का मंजर दिखाई दे रहा है। बारिश की शक्ल में आई आफत से जो नुकसान राज्य को झेलना पड़ा है उससे उबरने में बरसों लग जाएंगे, देखते ही देखते सब कुछ उजड़ गया है। जितने इस तबाही में बर्बाद हो गए या मर गये हैं उससे कहीं ज्यादा वे हैं जिनकी हालत मौत से भी बदतर है और हर पल जीवन की जंग लड़ रहे हैं।
सेना, वायु सेना, एनडीआरएफ के सामने लाखों लोगों को बचाने की बड़ी चुनौती है। दक्षिण कश्मीर के कई इलाकों में अभी तक भी राहत कार्य शुरू नहीं हो पाया है। केवल जम्मू संभाग में ही 151 लोगों की मौत हो चुकी है। जम्मू संभाग के जिला पुंछ, राजौरी, जम्मू, उधमपुर, रियासी में भी काफी तबाही मची है। सड़कें, पुल, घर व फसले बुरी तरह तबाह हुई हैं। जम्मू शहर में बहती तवी नदी पर भगवती नगर में बने चौथे पुल के बह जाने से बेली चाराना सहित कई क्षेत्रों में पानी ने तबाही मचाई है।
इस राहत अभियान में सेना के हजारों जवानों सहित वायु सेना के 71 छोटे-बड़े विमान राहत कार्य में जुटे हैं जिनके माध्यम से प्रभावित इलाकों में 580 टन सामान फेंका गया है। इसके साथ ही 13 चेतक व पांच एडवांस लाइट हैलीकाप्टर भी रोजाना 120 के करीब उड़ानें भर रहे हैं। राहत कार्य में सेना की 135 नौकाएं व एनडीआरफ की 148 नौकाएं लोगों को बचाने में जुटी हुई हैं। सेना ने प्रभावितों में 7500 कंबल 220 टेंंट, 48 हजार लीटर पानी, 800 किलो बिस्कुट, 8 टन बेबी फूड व एक हजार भोजन के पैकेट फेंके हैं। इसके अलावा सेना की 80 मेडिकल व 15 इंजीनियरिंग टीमें भी राहत अभियान में जुटी हैं। श्रीनगर-लेह मार्ग सुचारु होने से सेना की 14 कोर भी 15 कोर के साथ पूरे दम खम से राहत कार्य में शामिल हो गयी है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर का दौरा कर इस मुश्किल घड़ी में केन्द्र की ओर से हर संभव सहायता देने का ऐलान करते हुए एक हजार करोड़ अतिरिक्त राहत राशि राज्य को देने के साथ मृतकों को 2-2 लाख व घायलों को 50-50 हजार रुपए देने की भी घोषणा की है। प्रधानमंत्री ने इसे राष्ट्रीय आपदा के समान बताते हुए कहा है कि केन्द्र सरकार राज्य के हर नागरिक को बचाने व राहत पहुंचाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगी। सेना द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन मेघ राहत के तहत दिन रात बचाव व राहत का कार्य जारी है। हैलीकाप्टरों, नौकाओं व अस्थायी पुल बनाकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहंुचाया जा रहा है। श्रीनगर व दक्षिण कश्मीर पूरी तरह जलमग्न हो गया है व लोगों ने अपने घरों व होटलों की छतों पर पनाह ले रखी है। सेना के जवान अपनी जान की परवाह किए बिना मदद के लिए तरस रहे हर आखिरी आदमी तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
दूसरी ओर कश्मीर घाटी में स्थानीय प्रशासन राहत कायोंर् में पूरी तरह नाकाम हो चुका है। हालत यह है कि घाटी की भौगोलिक स्थिति से अनजान केन्द्रीय एजेंसियों को ही राहत कार्य संभालना पड़ रहा है। बिजली, पानी व दूरसंचार सेवाओं के अभाव में उनमें कई बार तालमेल नहीं बन पा रहा है। राज्य सचिवालय, पुलिस मुख्यालय सहित कई सरकारी भवनों में पानी भरा है उसके कर्मचारी खुद अपने-अपने घरों में फंसे हुए हैं जिन्हें भी सेना बचाने में जुटी हुई है। हालत यह है कि राहत व बचाव कायोंर् की निगरानी करने वाले राज्य प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी श्रीनगर में अधिकारियों से सम्पर्क और तालमेल के लिए जूझ रहे हैं। यह कहना अनुचित नहीं होगा कि श्रीनगर में राज्य प्रशासन का नामोनिशान नहीं है। यहां तक कि उमर सरकार केन्द्र सरकार को अपनी जरूरतें भी नहीं बता पा रही है। राज्य सरकार की जरूरतों को समझने के लिए यहां के संयुक्त सचिव योजना बी़ आऱ शर्मा को दिल्ली तलब किया गया है और उन्हें दिल्ली में रहकर ही राज्य और केन्द्रीय एजेंसियों के साथ तालमेल करने को कहा गया है।
अन्य राज्य भी मदद के लिए आगे आए
राज्य में प्रलयकारी बाढ़ और इससे मची तबाही के बाद देश के कई राज्य भी जम्मू-कश्मीर की मदद को आगे आए हैंं। उत्तर प्रदेश ने 20 करोड़, बिहार ने 10 करोड़, ओडिशा ने 5 करोड़, उतराखण्ड ने 10 करोड़ व गुजरात ने 5 करोड़ राहत राशि देने का ऐलान किया है। आने वाले समय में सहयोग करने वाले राज्यों की सूची बढ़ सकती है।
सेना बनी देवदूत
सेना ने जम्मू-कश्मीर में युद्घ स्तर पर राहत व बचाव कार्य चलाया हुआ है। अभी तक 65 हजार लोगों को सेना ने सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ ही प्रभावितों को राशन, पानी व दवाईं उपलब्ध करवाई हैं। सैनिकों को देख लोगों में जीने की उम्मीद जाग रही है। कल तक जो सेना को वापस जाने व गालियां देने का काम करते थे आज उन्हें सेना पर गर्व महसूस हो रहा है। उनके जानमाल की रक्षा करने वाली सेना आज उनके लिए देवदूत बनी हुई है। सेना के जवानों ने भी लोगों की सुरक्षा व राहत के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है। अपनी जान पर खेल कर भी लोगों को बचाया जा रहा है।
बचाव कार्य मेंजुटे स्वयंसेवक- जम्मू-कश्मीर में आई इस तबाही के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं ने राहत व सहयोग कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। जम्मू, पुंछ, राजौरी, उधमपुर, रियासी सहित राज्य के अन्य क्षेत्रों में भी संघ के स्वयंसेवक लोगों की मदद के लिए आगे आए। इस मुसीबत की घड़ी में फंसे लोगों के लिए लंगर लगाए व अन्य जरूरत का सामान मुहैया करवाया गया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्र प्रचारक श्री रामेश्वर, सह क्षेत्र प्रचारक श्री प्रेम कुमार, प्रांत संघचालक ब्रि़ सुचेत सिंह, प्रांत कार्यवाह श्री पुरुषोतम दधीचि, प्रांत प्रचारक श्री रमेश पप्पा व प्रांत प्रौढ़ प्रमुख श्री सतपाल गुप्ता की एक आपात बैठक हुई जिसमें प्रभावितों के पुनर्वास को लेकर योजना बनाई गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि जम्मू-कश्मीर सहायता समिति के माध्यम से प्रभावितों को सहयोग व राहत पहुंचाई जाएगी। इसके लिए जम्मू-कश्मीर सहायता समिति के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की कच्ची छावनी शाखा में चल रहे खाता संख्या 10167775167 (आईएफएसएन-एसबीआईएन 0002374) को राहत कार्य में लाया जायेगा जिसमें 80-जी की सुविधा भी उपलब्ध है। जम्मू-कश्मीर सहायता समिति का एक दल कश्मीर घाटी भेजा जायेगा जो वहां होने वाले पुनर्वास कार्य की योजना तैयार करेगा। इस अवसर पर सबसे अपील की गई है कि जो भी जम्मू-कश्मीर में प्रभावितों की मदद करना चाहते हैं वे उक्त खाते में सहयोग राशि जमा करवा सकते हैं।  

शुक्रवार, 5 सितंबर 2014

टीचर डे-- बना-- मोदी डे--!




टीचर डे-- बना-- मोदी डे--!
अदभुद सोच और सामर्थ हैं मोदी के पास आज बच्चो और अभिभावकों का दिल जीत लिया मोदी जी ने क्षिक्षको का बढ़ाया विश्वास । वाह मोदी जी वाह ।


पीएम नरेंद्र मोदी का संदेश, होशियार बच्चों को शिक्षक बनना चाहिए
05-09-2014

नई दिल्ली। शिक्षक दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में मानेकशॉ ऑडिटोरियम से देश भर के स्कूली बच्चों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने कहा कि क्या कारण है कि बहुत सामर्थ्यवान विद्यार्थी टीचर बनना पसंद नहीं करता, हमें सोचना होगा कि होशियार विद्यार्थी शिक्षक क्यों नहीं बनना चाहते।

प्रधानमंत्री ने कहा, क्या हम बच्चों के मन में यह भावना नहीं जगा सकते कि एक अच्छा टीचर बनें, हमारी कोशिश होनी चाहिए कि हम अच्छे टीचरों को एक्सपोर्ट कर सकें। प्रधानमंत्री ने कहा कि अध्यापन देश की उत्तम सेवा है। पीएम मोदी ने कहा कि स्टूडेंट्स को संबोधित करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। आज सारी दुनिया में अच्छे टीचर्स की मांग है।

उन्होंने कहा कि महापुरूषों के जीवन में शिक्षकों का बडा योगदान रहा है। जो पीढियों के बारे में सोचते हैं, वो इंसान बोते हैं। गांवों में एक समय सबसे आदरणीय शिक्षक हुआ करते थे। टीचर्स से बच्चों का अपनापन होता है। हमारे देश के बच्चों में आगे बढने का काफी सामर्थ्य है। एक बच्चे के जीवन में मां और शिक्षक का योगदान सबसे बडा होता है। उन्होंने कहा कि आज देश में एक माहौल बनना चाहिए और इसके लिए मुझे हर स्कूल से मदद चाहिए। शिक्षकों को तकनीकी पर जोर देना चाहिए।

मुझे सफाई के लिए हर स्कूल से मदद चाहिए...

हम राष्ट्रनिर्माण को जनांदोलन बना दें, तो सफल होंगे। हर किसी की शक्ति को जोडना होगा। देश के हर पढे-लिखे व्यक्ति को हफ्ते में एक बार स्कूल जाकर जरूर पढाना चाहिए।

गूगल गुरू के भरोसे नहीं रहना चाहिए...
पीएम ने बच्चों से कहा कि जीवन में खेल-कूद नहीं हो, तो जीवन खिल नहीं सकता, इसलिए बच्चे खेलकूद में सक्रिय रूप से भाग लें ताकि जिंदगी किताबों के बोझ तले दब न जाए। किताबों, टीवी के दायरे से बाहर भी जीवन है। पीएम ने कहा कि जिंदगी में परिस्थितियां किसी को रोक नहीं सकती है। जीवन में मस्ती भी होनी चाहिए। बच्चों को जीवन चरित्र पढाना चाहिए। सिर्फ गूगल गुरू के भरोसे नहीं रहना चाहिए।

बच्चों में पीएम के भाषण को लेकर खासा उत्साह दिखा। भाषण के बाद पीएम बच्चों के सवालों के जवाब दिए। इससे पहले पीएम मोदी ने हेड मास्टरों को एसएमएस भेजकर शिक्षक दिवस की बधाई दी।

�शिक्षक दिवस पर स्कूली छात्रों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच के संवाद को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के मकसद से रेडियो, दूरदर्शन, प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के वेब चैनलों के जरिये इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण (लाइव स्ट्रीमिंग) किया गया। देश के 18 लाख सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में प्रधानमंत्री के इस संबोधन का सीधा प्रसारण हुआ।

मानेकशॉ ऑडिटोरियम में मोदी के संबोधन को सुनने के लिए सरकारी स्कूलों के 600 तथा केंद्रीय विद्यालयों के 100 छात्र-छात्रा मौजूद रहे। वहीं, देश भर के स्कूलों में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये छात्र और छात्राओं नें मोदी के संबोधन को सुना।

बुधवार, 3 सितंबर 2014

हिन्दू हैं हम, सच है तो सिर चढ़कर बोलेगा !





हिन्दुत्व - हिन्दू हैं हम सच है तो सिर चढ़कर बोलेगा
तारीख: 30 Aug 2014

ये सामान्य भाव से कही गयी बात नहीं है। ये दुष्टों की आंखों में आंखें डाल कर कहा गया जवाब है। आज नहीं तो कल सम्पूर्ण विश्व उन हत्यारी विचारधाराओं से यह प्रश्न पूछेगा कि मानवीय मूल्यों और सहिष्णुता के नाम पर शांति के मजहब का खजाना खाली क्यों है? इस बात को पूछे-कहे बिना विश्व शांति संभव भी नहीं है। हिन्दुस्थान में रहने वाला 'हिन्दू' है। और इस सत्य को मानने में अपने पुरखों-परम्पराओं से साम्य रखने वाले देशवासियों को कोई आपत्ति नहीं है।

प्रस्तुत है पाञ्चजन्य का विशेष आयोजन
= तुफैल चतुर्वेदी
कुछ दिन से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक माननीय भागवत जी के बयान हिंदुस्तान के सभी नागरिक हिन्दू हैं पर वामपंथी, मुस्लिम चरमपंथी, कांग्रेसी ता-ता-थैया कर रहे हैं। भागवत जी के बयान के दूरगामी निहितार्थ हैं अत: इस पर इस प्रकार की प्रतिक्रिया अपेक्षित ही थी। इस परिप्रेक्ष्य में स्वयं को हिन्दू मानने से इंकार करने के कारणों पर विचार करना समीचीन होगा। आइये हिन्दू की परिभाषा क्या है इस विवाद में पड़े बिना हिन्दू धर्म को उसके ऐतिहासिक व्यवहार के सन्दर्भ में देखा-परखा जाये। पिछले 2000 वषोंर् के इतिहास पर संक्षिप्त दृष्टिपात करना पर्याप्त होगा। हिंदुस्तान ने 2000 वषोंर् के इतिहास में कभी किसी भी देश पर सैन्य आक्रमण नहीं किया। कभी किसी धर्म के पूजा स्थल नहीं तोड़े। कभी अपने से भिन्न मत-विश्वासियों की हत्यायें नहीं कीं। कभी मनुष्यों का व्यापार नहीं किया। आज जो संस्कृति केवल भारत और नेपाल में प्रमुख रूप से बची है, इसी को हिन्दू संस्कृति कहा, समझा जाता है। मगर इसके चिन्ह आज भी संसार के इस भाग को केंद्र मान लिया जाये तो सुदूर पूर्व के देशों थाईलैंड, कम्बोडिया से होते हुए उस क्षेत्र में भूमि की अंतिम सीमा समुद्र तक, पश्चिम में एक ओर पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान, इराक से होते हुए धुर अरब देशों तक तो दूसरी ओर अजरबेजान, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान आदि में प्रखर रूप से मिलते हैं। भारतीय मन्दिरों के खण्डहर, यज्ञशालाएं, खंडित मूर्तियां आज भी इन सारे देशों में मिलती हैं। अरब में इस्लाम के प्रवर्तक मोहम्मद साहब के चाचा ने अंतिम समय तक इस्लाम स्वीकार नहीं किया। वह इस्लाम की दृष्टि में काफिर और जहन्नुम जाने योग्य माने गए। उनके प्रति इस्लामी व्यवहार इतना कठोर रहा कि उनके मूल नाम की जगह इस्लामी ग्रंथों में उन्हें अबू जहल यानी जाहिल मूर्ख कहा, पुकारा, लिखा गया़ उनके तथा उनसे पहले के भक्त शायरों के अरबी भाषा में लिखे भगवान शिव के कसीदे इस्लाम के सारे ध्वंसक प्रयासों के बाद भी उपलब्ध हैं। अत: तथ्य यह हाथ आते हैं कि हिन्दू अर्थात वह लोग जो किसी पर भी बलात् कुछ भी थोपने, हिंसा करने के विरोधी हैं। जिनका सामान्य जीवन शांतिपूर्ण है और जो सैद्घांतिक रूप से शांतिपूर्ण सहजीवन में विश्वास करते हैं। दूसरी ओर सेमेटिक विश्वासी और कम्युनिस्ट हैं जो मानते हैं कि सत्य केवल उनके पास है और सारे संसार को मार-पीट कर, बहला-फुसला कर, बहला-बहका कर अपनी जड़ समझ के रास्ते पर लाना उनका दायित्व है।
इस कार्य के लिए सबसे नए प्रयासों में से एक सीरिया, इराक में आई एस आई एस के जघन्य हत्या-कांड हैं। इस संगठन को इस्लाम के शुरुआती क्रियाकलापों, भारत में इस्लाम फैलाने आये मुस्लिम आक्रमणकारियों के बाद सबसे खतरनाक कहा जा रहा है। अपने से भिन्न सोच रखने वाले लोगों के सर काटना कोई नई क्रिया नहीं है। ऐसा इस्लाम के जिहादी आतंक फैलाने और मतान्तरण के लिए हमेशा से करते रहे हैं। अन्य इस्लामी आक्रमणकारियों की तरह बाबर ने भी भारतीय लोगों के सर काट कर उनके मीनार बनाये थे। इसी हत्यारे ने इस्लाम के सबसे प्रबल वैचारिक उपकरण मदरसों की भारत में शुरुआत की थी।

सभ्य समाज में फांसी पाये अभियुक्त को फांसी देने वाले जल्लाद के लिए शराब का कोटा होता है। न्याय-प्रणाली के विभिन्न चरणों से गुजरने के बाद ही, अंतिम रूप से जघन्य पापी पाये जाने के बाद ही फांसी दी जाती है़ ऐसे व्यक्ति को भी फांसी देने के पहले जल्लाद का नशे में होना जरूरी होता है। ये कार्य कितना कठिन है इसे इस तरह समझें कि भारत को 125 करोड़ की जनसंख्या में केवल 2 लोग जल्लाद हैं।  विभिन्न प्रदेशों में फांसी देने के लिए उन्हीं को जाना पड़ता है। जिसके इस्तेमाल से व्यक्ति की अंतरात्मा इस हद तक जड़ हो जाती है कि हत्यारा मरते हुए व्यक्ति की आंखों में आंखें डाल कर उसकी आधी कटी गर्दन पर ठोकरें मार सकता है? उसकी बुझती हुई आंखों की मोबाइल पर वीडियो बना सकता है? वहशियों की तरह उसकी गर्दन काटकर मृतक के सीने, पेट पर रख सकता है? वह कौन लोग हैं जो इस भयानक हत्या-कांड के समय अल्लाहो-अकबर के नारे लगा सकते हैं? अल्लाह महान है इस उद्घोष को इस तरह से करने वाला मानस कैसा होता है?
इस्लामिक स्टेट मिलिशिया का प्रारम्भ सीरिया के गृह-युद्घ के दौरान हुआ ये विद्रोह सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद के खिलाफ स्थानीय सुन्नी कबीलों के लोगों ने भड़काया था। इन कबीलों के लोगों की ट्रेनिंग के लिए अमरीका की खुफिया एजेंसी सी आई ए के लोगों ने तुर्की और जर्डन में प्रशिक्षण शिविर चलाये। इन्हें हथियार और पैसा दिया। बशर अल असद को अमरीकी आवश्यकता के अनुरूप मीडिया में दैत्य बताया, दर्शाया गया। सीरिया की सेना में शिया-सुन्नी के आधार पर विभाजन और विद्रोह कराया। सऊदी अरब, कतर, कुवैत, सयुंक्त अरब अमीरात ने अपने खजाने सुन्नी जिहादियों के लिए खोल दिए़ सीरिया में प्रत्येक संस्थान को नष्ट करने, हो जाने दिया और इन सब सामूहिक कुकमोंर् का परिणाम आई एस आई एस की शक्ल में सभ्य समाज के सामने है।

अमरीका की करतूतों से ऐसा पहले भी कई बार हुआ है़ इस संघर्ष में अमरीका जिस ईरान की सहायता कर रहा है और सहायता ले रहा है वह दशकों से अमरीका का प्रबल शत्रु रहा है। इस क्षेत्र में अमरीका के सबसे अच्छे मित्र देश इस्रायइल का घोषित शत्रु है। ईरान के राष्ट्रपति, धार्मिक नेता इस्रायइल को संसार के मानचित्र से मिटा देने की खुली घोषणा करते रहे हैं। अफगानिस्तान, ईरान, इराक इत्यादि देशों में इतना सब कुछ करने, झेलने और न केवल मुंह की खाने बल्कि सभ्य समाज के लिए जीवन-मरण का प्रश्न बन गए आतंकवाद की जड़ों को खाद पानी देने का काम आखिर अमरीका ने किस समझ और विश्वास के तहत किया?

अमरीका और पश्चिम का नेतृत्व शुरू से ही गलत रहा। अमरीका तथा इस क्षेत्र के बड़े खिलाड़ी पश्चिमी देशों में प्रजातंत्र की प्रणाली है। ये प्रणाली मानव इतिहास में प्रत्येक मनुष्य को सबसे पहले बराबरी का अधिकार देने वाली प्रणाली है। जबकि इस्लाम अपनी उम्मत यानी मुस्लिम समाज के विशेषाधिकार और अन्य विश्वासियों को नीचे दर्जे का मानने वाली व्यवस्था है। वह अन्य विश्वासियों से जजिया वसूल करती है। न केवल मध्य युग में बल्कि अभी कुछ वर्ष पहले अफगानिस्तान में तालिबानी शासन के दौरान वहां रह रहे हिन्दुओं, सिखों से जजिया वसूला गया। परिणामत: वो लोग भाग कर भारत में शरण लेने के लिए बाध्य हुए़ स्त्रियों को केवल मुस्लिम बच्चे पैदा करने की मशीन मानने वाले समाज के साथ स्त्री अधिकारों का सम्मान करने वाले समाज की, एक स्वतंत्र न्याय-प्रणाली में विश्वास करने वाले सभ्य समाज की पट ही कैसे सकती है?

अमरीका और पश्चिमी विश्व ने अच्छे उग्रवादियों और बुरे उग्रवादियों में विभाजन रेखा यह मानकर खींची कि वह लोग सभ्य हो जायेंगे। उग्रवादियों में अच्छे बुरे का विभाजन कैंसर में अच्छे-बुरे का चुनाव है। कैंसर अच्छा नहीं होता, हो ही नहीं सकता। ये संघर्ष अफगानिस्तान, पाकिस्तान, ईरान, इराक, सीरिया या विश्व के किसी अन्य भूभाग का स्थानीय संघर्ष नहीं है। ये मध्य-युगीन बर्बर जीवन मूल्यों को प्रत्येक मनुष्य के बराबर होने को मानने वाले सभ्य समाज पर स्थापित करने का संघर्ष है, इसको वैचारिक स्तर पर परास्त करना इसकी सैनिक पराजय के बराबर ही नहीं बल्कि अधिक आवश्यक है़ सीरिया में कोई भी शासन आये, बिन लादेन मार डाला जाये या जीवित रहे, इराक में शिया अथवा सुन्नी कैसा भी शासन आये मगर जब तक इस सोच में बदलाव नहीं आएगा विश्व में शांति नहीं आने वाली। आखिर इन जिहादियों की कोख कहां है? इन्हें पैदा कौन कर रहा है? अच्छे-खासे पढ़े-लिखे लोग क्यों भयानक नृशंस हत्यारे बन गए? इन बातों पर गहन विचार-विमर्श, मंथन और फिर उससे निपटने की रणनीति बनाना आवश्यक है। अन्यथा दिन प्रति दिन नए अफगानिस्तान, पाकिस्तान, इराक, सीरिया़.़ बन रहे हैं, बनते रहेंगे। जब तक ऐसी कोई भी विचार-धारा, चिंतन-प्रणाली जो मनुष्य के बराबरी के सिद्घांत की जगह मनमाने विचार, उद्दंडता और उत्पात में विश्वास करती है कुचली, बदली नहीं जाएगी शांति कैसे आएगी? ये संघर्ष स्थानीय संघर्ष नहीं है बल्कि ये मानवता का संघर्ष है, सभ्यता का संघर्ष है। सभ्य समाज इन मूल्यों के असफल होने का खतरा मोल नहीं ले सकता। दूसरी ओर केवल जंगल के बीहड़ कानून हैं। विश्व के स्वयंभू नेता देश अमरीका के नेतृत्व ने आखिरकार वह निर्णय ले ही लिया जिसकी बहुत समय से प्रतीक्षा थी। महामहिम बराक ओबामा ने इस्लामिक स्टेट को कैंसर से भी खतरनाक कहा है और अमरीकी सेना ने आई. एस. आई. एस. के जिहादियों के ठिकानों को ध्वस्त करना शुरू कर दिया है। सभ्य समाज विशेषरूप से ईसाई समाज ने ये विचार करने और समझने में बहुत देर कर दी है। ये हमेशा का जाना-पहचाना इस्लाम का आतंक फैलाने का तरीका है। सदियों से इस्लामी हत्यारे विश्व भर में ऐसे जघन्य हत्या-कांड करते रहे हैं़ उनका उद्देश्य आतंक नहीं होता अपितु आतंक फैला कर अपनी जीवन-शैली का वर्चस्व स्थापित करना अर्थात इस्लाम में लोगों को मतान्तरित करना होता है।

अत: भागवत जी के बयान पर वामपंथी, मुस्लिम चरमपंथी, कांग्रेसी तिलमिलाहट और ता-ता-थैया को सरलता से समझा जा सकता है़ उनके मिर्चें केवल इस कारण लग रही हैं कि उन्हें मालूम है यदि बहस बढ़ी तो ये प्रश्न आएगा ही आएगा कि हिन्दू सभ्यता के सदैव से जाने-परखे शांतिप्रिय लोग हत्यारों के समूह क्यों बन गए। यदि बहस नहीं बढ़ी तो उनके कुढब विश्वासों, उनकी उत्पाती जीवन शैली, उनके बर्बर जीवन-सिद्घांतों को त्यागने का दबाव बनेगा। ये सामान्य भाव से कही गयी बात नहीं है। ये दुष्टों की आंखों में आंखें डाल कर पूछा गया, छिपा हुआ वह प्रश्न है जो आज नहीं तो कल सम्पूर्ण विश्व इस हत्यारी विचारधारा से पूछेगा, कहेगा। इस बात को पूछे-कहे बिना विश्व शांति संभव भी नहीं है।

मानवता को गले लगाने वाला हेै हिन्दू धर्म - परम पूज्य सरसंघचालक भागवतजी




हिन्दुत्व -
मानवता को गले लगाने वाला हेै हिन्दू धर्म - परम पूज्य सरसंघचालक श्री मोहनजी  भागवत
तारीख: 30 Aug 2014
— सरदार रविरंजन, वरिष्ठ पत्रकार - पाञ्चजन्य ब्यूरो


पिछले दिनों मुंबई में विश्व हिन्दू परिषद के स्वर्णजयंती समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत का एक बयान 'हिन्दुत्व राष्ट्र की पहचान है,उसकी यह अन्तर्भूति शक्ति है कि वह और भी पंथ-संप्रदायों को हजम कर सकता है। जो जरा हाजमा बिगड़ जाने के कारण थोड़ा शैथिल्य हो गया, जिसके परिणाम आज हम भुगत रहे हैं,उसको दूर करना है'। श्री भागवत के इस बयान के आते ही सेकुलरों की समाचार चैनलों पर जमात लगनी प्रारम्भ हो गई। ऐसा लगा मानो कोई संकट आ गया हो।
हिन्दुस्थान और हिन्दू की नई-नई परिभाषाएं गढ़ी जाने लगीं। यहां तक कि हिन्दुस्तान टाइम्स समाचार पत्र ने श्री मोहनराव भागवत के बयान पर एक सर्वे किया। और जनता से जानना चाहा कि कितने लोग सहमत हैं कि भारत एक हिन्दू राष्ट्र है। जनता ने सच को उद्घोषित करते हुए 60.92 प्रतिशत लोगों ने स्वीकार किया कि भारत एक हिन्दू राष्ट्र है और 38.26 प्रतिशत लोग इस मत से सहमत नजर नहीं आए। ऑन लाइन सर्वे में सिर चढ़कर बोलते सच को देखकर यह सर्वे समाचारपत्र में प्रकाशित ही नहीं किया गया। जब इसके विषय में एक बजरंग दल कार्यकर्ता ने हिन्दुस्तान टाइम्स के कार्यालय में फोन करके इस समाचार के न छपने पर जानना चाहा तो वहां के किसी कर्मचारी द्वारा बताया गया कि यह सर्वे 'स्पैम' (सैम्पल खराब) हो गया है। लेकिन इस सर्वे में आए रुझान से एक बात जरूर स्पष्ट हो गई कि देश की जनता का मत किस ओर है।
विश्व हिन्दू परिषद के स्वर्णजयंती समारोह में श्री भागवत ने जो भी कहा वह भारत की भूमि पर हजारों वर्षों तक पल्लवित-पुष्पित होते रहे आदर्श और विचारधन के सातत्य की अभिव्यक्ति ही थी। देश को जानना चाहिए कि हिन्दू राष्ट्र शब्द का प्रयोग या हिन्दू राष्ट्र का सिद्धांत रा.स्व.संघ की कोई नई खोज नहीं है। संघ संस्थापक डॉ.केशवराव बलिराम हेडगेवार ने ठीक वही विचार प्रकट किए,जो स्वामी विवेकानंद,महर्षि अरविंद,तिलक और वीर सावरकर आदि विभूतियों ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद कि नाते प्रकट किए। आज जिस प्रकार से श्री भागवत के बयान पर सेकुलर रुदन कर रहे हैं उन्हें बताना चाहिए कि इस देश में रहने वाला बहुसंख्यक जिसकी संख्या नब्बे करोड़ से भी ज्यादा की है वह कौन है? अगर उन्हें हिन्दू न कहें तो उन्हें क्या कहें? इस देश की पहचान गीता,महाभारत हैं या कुरान?
आज के सन्दर्भ सच को सच मानने से इंकार करने वाले लोगों और हिन्दू संस्कृति पर उपजते संकट का आकलन डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने बहुत पहले ही कर लिया था और इसलिए उन्होंने ही घोषित किया था 'यह हिन्दू राष्ट्र है'।
देश के हिन्दू जनमानस को समझना चाहिए कि असल में भारतीय राष्ट्रीयत्व हिन्दू राष्ट्रीयत्व ही है। इसके बारे में किसी के मन में कोई भी संदेह नहीं होना चाहिए। जो लोग इसके विरोध में तर्क देते हैं वे बताएं कि कौन सा समाज है जो इस भूमि को अपनी माता मानता है ? देवता के स्वरूप में मातृभूमि के प्रति उत्कट भावना रखता है?'त्वं हि दुर्गादश प्रहरण धारिणी' कहकर उसका ध्यान करता है? किस समाज के राष्ट्र पुरुष एक ही हैं? आपका राष्ट्र पुरुष कौन है-महाराणा प्रताप या अकबर? यह प्रश्न पूछे जाते ही तत्काल राणा प्रताप का चयन कौन सा समाज करता है? ऐसे अनेकों प्रश्नों का बस एक ही उत्तर निकलकर आता है कि ऐसा समाज हिन्दू समाज ही है। पं.दीनदयाल उपाध्याय: विचार दर्शन में पं. जी ने एक लेख के माध्यम से लिखा 'कि 1947 में हम स्वतंत्र हुए। अंग्रेज भारत छोड़कर चले गए। राष्ट्र निर्माण के प्रयासों में सबसे बड़ी बाधा हम उन्हें ही मानते थे। वह बाधा दूर हो गई। लेकिन इसके बाद हमारे सामने प्रश्न उपस्थित हुए कि स्वतंत्रता का आशय क्या है? हम यहां किस प्रकार का जीवन खड़ा करना चाहते हैं? राष्ट्र के नाते भारत के जीवन आदर्श क्या हैं? संविधान का निर्माण करते समय विदेशांे में उद्घोषित सिद्धांतों का जोड़तोड़ करने में ही हमने संतोष कर लिया। इसीलिए आजतक हम इस मूल प्रश्न का उत्तर नहीं दे पाए हैं कि आखिर हम किस प्रकार का जीवन यहां खड़ा करना चाहते हैं।'
जो लोग ऐसे बयानों से देश और मत-पंथों को खतरा बताते हैं उन्हें श्री दत्तोपंत ठंेगड़ी को पढ़ना चाहिए।'हिन्दू राष्ट्र की संकल्पना' शीर्षक वाली पुस्तिका में उनके भाषण को प्रस्तुत किया गया है। वे कहते हैं 'हिन्दू राष्ट्र की हमारी संकल्पना यह है कि हिन्दू संपूर्ण मानवता को गले लगाने वाला,पूरे विश्व का विचार करने वाला एवं विश्वधर्म का अनुयायी है। और प्रश्न करते हंै ंकि इस प्रकार संपूर्ण विश्व की दृष्टि से विचार करने पर हिन्दू राष्ट्र का स्थान क्या रहेगा?'
हिन्दू संस्कृति पर मनगढंत तथ्यों को रखते सेकुलरों को यह लगता है कि हिन्दू समाज अपना राष्ट्रीयत्व सिद्ध करे लेकिन हिन्दू समाज को इसकी कतई आवश्यकता नहीं है। उसका राष्ट्रीयत्व हजारों वर्षों से स्वयंसिद्ध है। इस देश का दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि जिस देश का राष्ट्र स्वरूप हिन्दू है,यह तत्व वस्तुत: सर्वमान्य होना चाहिए। ल्ल

हिन्दू राष्ट्र, हिन्दू दर्शन, इसी कारण सबको स्थान
भारत का एक सनातन विशिष्ट जीवन दर्शन है जिसका आधार आध्यात्मिकता है। यह दर्शन एकात्म और सर्वांगीण है। इसी दर्शन की अभिव्यक्ति 'एकम् सद् विप्र:बहुधा वदंन्ति' में हुुई है। इसलिए यहूदी और पारसी भारत में आकर अपने-अपने उपासना मार्ग का अवलंबन सम्मानपूर्वक कर सके। इसी दर्शन के कारण भारत के संविधान में सभी मतावलंबियों को अपने-अपने मत के अनुसार उपासना करने का स्वातंत्र्य सहज मिला है। भारत का यह दर्शन हिंदू जीवन दर्शन कहलाता है। डॉ. राधाकृष्णन की 'हिंदू व्यू ऑफ लाइफ' पुस्तक प्रसिद्ध है। इस जीवन दर्शन को अपने जीवन में उतारने वाला प्रत्येक व्यक्ति हिंदू है, फिर चाहे उसका मजहब या उपासना मार्ग चाहे जो हो। यह हिंदुत्व, हिंदूवाद (ँ्रल्लि४्र२े) नहीं है, यह हिंदू होना (ँ्रल्लि४ल्ली२२) है। इसलिए यह किसी मजहब या उपासना मार्ग के विरोध में नहीं है। यह हिंदुत्व भारत के समाज का व्यवच्छेदक लक्षण है,भारत के समाज की पहचान है, अस्मिता है। इसलिए भारत हिंदू राष्ट्र है। समाज ही राष्ट्र कहलाता है। राज्य व्यवस्था राष्ट्र द्वारा अपनी सुविधा के लिए बनाई गई व्यवस्था है। भारत की राज्य व्यवस्था किसी एक मजहब या उपासना मार्ग के अनुसार नहीं चलेगी। वह पंथ निरपेक्ष तरीके से कार्य करेगी। यह निर्णय इस राष्ट्र ने लिया है (ऐसा निर्णय पाकिस्तान ने नहीं लिया है) और यह निर्णय भी इसी कारण लिया जा सका क्योंकि यह राष्ट्र हिंदू राष्ट्र है। ल्ल मनमोहन वैद्य
पाञ्चजन्य ने हिन्दू राष्ट्र के विषय पर अलग-अलग मतों और संप्रदायों के लोगों से बात की जिनके मत यहां प्रस्तुत हैं-

हम शुरू से ही इस विषय पर सहमत हैं। हिन्दुस्थान को हिन्दू संस्कृति से कैसे अलग किया जा सकता है। आज पाश्चात्य देशों में जिस समुदाय की जनसंख्या 40 प्रतिशत से अधिक हो जाती है उसे उस समुदाय से संबोधित किया जाने लगता है। फिर ऐसे में इस देश में रहने वाले हिन्दु़ओं की संख्या तो 80 प्रतिशत है तो इसे क्यों हिन्दू राष्ट्र नहीं कहा जा सकता ?
आर.एल.फ्रंासिस, अध्यक्ष, पुअर क्रिश्चियन लिबरेशन मूवमेन्ट
यह तो सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत के हृदय की विशालता है। देश में जितने भी पंथ उद्गमित हुए वह हिन्दू कहने में कोई भी संकोच नहीं करते। जिस संदर्भ में बात की जा रही है,उसको समझना जरूरी है।
— रिखब चन्द्र जैन, प्रदेश अध्यक्ष,इन्द्रप्रस्थ विहिप
मैं श्री भागवत के बयान से पूरे तरीके से सहमत हूं। मेरे पुरखे हिन्दुस्थानी हैं,हमारी तहजीब हिन्दू और हिन्दी है। भारत के मुसलमानों को इस बात पर गर्व होना चाहिए। इस देश की पहचान हिन्दुत्व ही है। हम पहले हिन्दू और फिर हिन्दुस्थानी हैं। अगर हम अपनी संस्कृति पर नाज करेंगे तभी असली मुसलमान कहलाएंगे।
— मो.अफजाल, राष्ट्रीय संयोजक,मुस्लिम राष्ट्रीय मंच
हिन्दू इस देश की जीवन पद्धति है। इस देश में रहने वाले लोग हिन्दू हैं। इसमें कोई विवाद ही नहीं है क्योंकि यह राष्ट्र हिन्दू राष्ट्र है। इसकी पहचान गीता,महाभारत गुरुग्रन्थ साहिब जैसे धर्म ग्रन्थों से होती है न कि कुरान से। देश का दुर्भाग्य है कि लोग सच से आंखें चुराते हैं।