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खुदरा में विदेशी घुसपैठ : raviwar.com se पीयूष पंत

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  खुदरा में विदेशी घुसपैठ            raviwar.com se sabhar पीयूष पंत भारत में रीटेल क्षेत्र के भीतर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफडीआई नया नहीं है लेकिन अब तक यह एकल ब्रांड तक ही महदूद था। अब जबकि केंद्र सरकार ने मल्टीब्रांड में एफडीआई के लिए रीटेल क्षेत्र को खोलने का फैसला ले लिया है, तो उसकी आलोचना हो रही है। सरकार का रवैया बिल्कुल वैसा ही अडि़यल है जैसा 2005 में अमरीका के साथ नाभिकीय संधि के दौरान दिखा था। इस मौके पर हमें कुछ साल पहले नाभिकीय रिएक्टर बनाने वाली लॉबी द्वारा अमरीका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज बुश पर भारत के साथ नाभिकीय संधि करने संबंधी बनाए गए भारी दबाव को याद करना होगा, जिसके आगे अपनी सरकार के वजूद को खतरे में डालकर यूपीए-1 के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने घुटने टेक दिए थे, जिसके बाद संसद ने इसे मंजूरी दे दी थी और अब विदेशी रिटेल कंपनियों की लॉबिंग और दबाव के चलते यूपीए 2 के मंत्रिमंडल ने भारतीय खुदरा व्यापार में 51 फीसदी विदेशी निवेश को मंजूरी दे दी है. दरअसल वाल मार्ट 2007 से ही अमरीकी कानून निर्माताओं के बीच भारत में अपने प्रवेश की योजना को लेकर पैरवी व प्र