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करवाचौथ के व्रत की विधि

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                                                       क्या है करवाचौथ के व्रत की विधि कार्तिक कृष्ण पक्ष की चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी अर्थात उस चतुर्थी की रात्रि को जिसमें चंद्रमा दिखाई देने वाला है, उस दिन प्रात: स्नान करके अपने सुहाग (पति) की आयु, आरोग्य, सौभाग्य का संकल्प लेकर दिनभर निराहार रहें। सौभाग्यवती (सुहागिन) स्त्रियां अपने पति की आयु, स्वास्थ्य व सौभाग्य की कामना करती हैं वे यह व्रत रखती हैं। सायंकाल चंद्रमा के उदित होने पर चंद्रमा का पूजन कर अ‌र्घ्य प्रदान करें। पूजन उस दिन भगवान शिव-पार्वती, स्वामी कार्तिकेय, गणेश एवं चंद्रमा का पूजन करें। पूजन करने के लिए बालू अथवा सफेद मिट्टी की वेदी बनाकर उपरोक्त वर्णित सभी देवों को स्थापित करें। नैवेद्य शुद्ध घी में पूरी और हलुवा अथवा खांड मिलाकर मोदक (लड्डू) नैवेद्य हेतु बनाएं। करवा मिट्टी से तैयार किए गए मिट्टी के करवे अथवा तांबे के बने हुए करवे। व्रत का विधि-विधान- करवा चौथ के व्रत के दिन शाम को लकड़ी के पटिए पर लाल वस्त्र बिछाएं। इसके बाद पटिए पर भगवान शिव, माता पार्वती, कार्तिकेय, गणेशजी की प्रतिमा स्थापित करें। वहीं