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गरीब की सेवा में नहीं हो धर्मांतरण का भाव - परम पूज्य सरसंघचालक मोहन जी भागवत

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इसाईयत सिर्फ 2000 वर्ष पुराना है। विस्तारवाद उसकी रग रग में है। पहले यूरोप फिर , दोनों अमरीका , अस्ट्रेलिया, अफ्रिका महादीपों को  इसाई बनाया, अब हिन्दुस्तान को इसाई बनाने का कार्य योजनापूर्वक चल रहा है। इसी षडयंत्र का एक हिस्सा मदर टेरसा भी थीं, पोप ने उन्हे संत घोषित कर सम्मानि किया था। किसी भी षडयंत्र को उजागर करना अथवा उससे सावचेत करना कोई गलत नहीं है। - अरविन्द सिसोदिया ------------               गरीब की सेवा में नहीं हो धर्मांतरण का भाव - परम पूज्य सरसंघचालक मोहन जी भागवत कल इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने राष्ट्रीय  स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन जी भागवत के भरतपुर के एक कार्यक्रम दिए उध्बोधन को अपने हित से तोड़ मरोड़ कर अपने कौन से मंसूबे पुरा कर रहा है किसी से छिपा नहीं है . सेवा और सेवा के पीछे के भाव  वास्तव में एक चिंता का विषय है। स्थानीय समाचार पत्रों  में छपे समाचार से स्थति स्पष्ट है कि भागवत जी ने ऐसा कुछ नहीं कहा था। गरीब की सेवा में नहीं हो धर्मांतरण का भाव- भागवत अपना घर के कार्यक्रम में बोले संघ प्रमुख भास्कर न्यूज | भरतपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के