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कौन दे रहा आतंकवाद को हथियार - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

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मोदी ने सख्ती से उठाया आतंकवाद का मुद्दा,  बोले-कौन दे रहा इन्हें हथियार? Posted on: September 04, 2016  Updated on: September 05, 2016  http://khabar.ibnlive.com/news हांगझोउ। भारत ने आज ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) के अन्य सदस्यों से आतंकवाद पर अंकुश के लिए सामूहिक प्रयासों को तेज करने का आह्वान किया। पाकिस्तान की ओर इशारा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘आतंकवाद के समर्थकों और प्रायोजकों’ को अलग-थलग करने के लिए समूह द्वारा समन्वित कार्रवाई पर जोर दिया। ब्रिक्स नेताओं की बैठक के दौरान चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए मोदी ने सख्त शब्दों में कहा कि दक्षिण एशिया या किसी अन्य क्षेत्र में आतंकवादियों के पास न तो बैंक है और न ही हथियारों का कारखाना है। इससे साफ पता चलता है कि कोई न कोई उनको पैसा और हथियार दे रहा है। मोदी ने कहा कि ब्रिक्स को आतंकवाद से लड़ने के लिए संयुक्त प्रयासों के लिए समन्वित कार्रवाई भी करनी चाहिए जिससे आतंकवाद के समर्थकों और प्रायोजकों को अलग-थलग किया जा सके। हालांकि, उन्होंने चीन के नजदीकी सहयोगी पाकिस्तान का नाम नहीं

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के प्रेरणात्मक विचार

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डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के प्रेरणात्मक विचार बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन महान दार्शनिक, तत्ववेत्ता, धर्मशास्त्री , शिक्षाशास्त्री, एवं कुशल राजनीतिज्ञ थे । इन्होंने भारत के राष्ट्रपति जैसे पद को सुसोभित किया । इनका जन्म : 5 सितंबर, 1888  एवं अवसान : 17 अप्रैल, 1975 को हुआ । डॉ राधाकृष्णन का भारतीय संस्कृति के प्रति आगाध निष्ठा थी । वो भारत को शिक्षा के क्षेत्र में क्षितिज पर ले जाने को निरंतर प्रयासरत रहे । अपने जन्म दिवस को शिक्षक दिवस के रूप में समर्पित करने वाले डॉ राधाकृष्णन के ह्रदय में शिक्षकों के प्रति अगाध श्रद्धा भाव था । प्रतिवर्ष 5 सितम्बर को शिक्षकों के सम्मान के रूप में शिक्षक दिवस सम्पूर्ण भारतवर्ष में मनाया जाता है । डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के प्रेरणात्मक विचार  INSPIRATIONAL THOUGHTS OF DR. S. RADHAKRISHNAN Quote 1. आध्यात्मिक जीवन भारत की प्रतिभा है । – डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन Quote 2. ज्ञान हमें शक्ति देता है, और प्रेम परिपूर्णता । – डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन Quote 3. धर्म के बिना इंसान बिना लगाम के घोड़े की तरह है । – डॉ सर्वप

वेदांत ही एकमात्र धर्म है : सर्वपल्ली राधाकृष्णन

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शिक्षक दिवस- वेदांत कोई एक धर्म नहीं, बल्कि वेदांत ही एकमात्र धर्म है : सर्वपल्ली राधाकृष्णन By Anand Kumar - September 5, 2016 राधाकृष्णन ने अपनी एम.ए. डिग्री के लिए जो थीसिस लिखी थी उसका विषय था “वेदांत में आचार और अध्यात्म की पूर्वमान्यताएं”. उनका इरादा अपने लेख के जरिये ऐसे लोगों को जवाब देने का था जो कहते थे वेदांत में आचारसंहिताओं जैसी कोई चीज़ नहीं थी. ये थीसिस जब छपी तो वो केवल 20 साल के थे. अपनी इस थीसिस के बारे में खुद राधाकृष्णन कहते थे कि “इसाई आलोचकों ने मुझे हिंदुत्व के अध्ययन के लिए मजबूर कर दिया. मिशनरी संस्थानों में हिंदुत्व की जो व्याख्या होती थी, उस से, स्वामी विवेकानंद से प्रभावित मेरा मन बहुत खिन्न होता था. एक हिन्दू के तौर पर मुझे शर्मिंदगी होती थी.” यही वजह रही कि उन्होंने जीवन भर भारतीय दर्शन और धर्म का अध्ययन किया. हिंदुत्व की ओर से “एकीकृत पश्चिमी आलोचकों” को करारा जवाब देने का काम उन्होंने जीवन भर किया. राधाकृष्णन की दर्शनशास्त्र की पढ़ाई कोई शौकिया नहीं थी. वो एक साधनहीन छात्र थे और उनके रिश्तेदारों में से एक ने पास होने के बाद अपनी दर्शनशास्त्

गणेश चतुर्थी भगवान गणेश का प्रगटोत्सव

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गणेश चतुर्थी भगवान गणेश का प्रगटोत्सव ! भगवान गणेश के प्रगटोत्सव को गणेश चतुर्थी के रूप में जाना जाता है। गणेश चतुर्थी के दिन, भगवान गणेश को बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के देवता के रूप में पूजा जाता है। यह मान्यता है कि भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष के दौरान भगवान गणेश का जन्म हुआ था। अंग्रेजी कैलेण्डर के अनुसार गणेश चतुर्थी का दिन अगस्त अथवा सितम्बर के महीने में आता है। गणेशोत्सव अर्थात गणेश चतुर्थी का उत्सव, १० दिन के बाद, अनन्त चतुर्दशी के दिन समाप्त होता है और यह दिन गणेश विसर्जन के नाम से जाना जाता है। अनन्त चतुर्दशी के दिन श्रद्धालु-जन बड़े ही धूम-धाम के साथ सड़क पर जुलूस निकालते हुए भगवान गणेश की प्रतिमा का सरोवर, झील, नदी इत्यादि में विसर्जन करते हैं। गणपति स्थापना और गणपति पूजा मुहूर्त ऐसा माना जाता है कि भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल के दौरान हुआ था इसीलिए मध्याह्न के समय को गणेश पूजा के लिये ज्यादा उपयुक्त माना जाता है। हिन्दु दिन के विभाजन के अनुसार मध्याह्न काल, अंग्रेजी समय के अनुसार दोपहर के तुल्य होता है। हिन्दु समय गणना के आधार पर, सूर्योदय और सूर्यास्त के मध्य