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शत्रु सम्पत्ति, मुस्लिम दवाब जिन्दावाद..!

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राष्ट्रहित मुर्दावाद  ..! वोट की राजनीति जिन्दावाद...!! - अरविन्द सीसोदिया       प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में शत्रु सम्पत्ति कानून-1968 में संशोधनों को मंजूरी दे दी गई। अब शीतकालीन सत्र के दौरान संसद से इसे मंजूरी दिलाई जाएगी। संशोधनों के अनुसार शत्रु सम्पत्ति केवल उसके मालिक को या उसके वैधानिक उत्तराधिकारी को दी जा सकती है। मूल कानून के मुताबिक इस तरह की सभी सम्पत्तियों के संरक्षक के रूप में सरकार को यह अधिकार है कि वह किसी को भी इन सम्पत्तियों को किराए पर दे सकती है।       यदि संसद ने इन संशोधनों को मंजूरी दे दी तो इससे इस तरह की संम्पत्तियों को उत्तराधिकारी के रूप में संभालने वाले भारतीय मुसलमानों के लिए उन संपत्तियों पर मालिकाना हक पाना आसान हो जाएगा। लेकिन उन्हें यह साबित करना होगा कि वे इस तरह की सम्पत्तियों के वैधानिक उत्तराधिकारी हैं, और वे जन्म से भारतीय नागरिक हैं।  गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने मानसून सत्र में इन संशोधनों को संसद में पेश करने की कोशिश की थी। लेकिन वे ऐसा नहीं कर पाए, क्योंकि कुछ मंत्रियों व विभिन्न पार्टियो