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संघ के वरिष्ठ प्रचारक डा.अमर सिंह का हृदयाघात से निधन

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वाराणसी, 18 जून (विसंके.)। पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं वर्तमान में क्षेत्र कार्यकारिणी के सदस्य डा.अमर सिंह का पार्थिव शरीर मंगलवार को मर्णिकाघाट पर पंचतत्व में विलिन हो गया। मुखाग्नि उनके भतीजे अजीत सिंह ने दी। वे अनेक वर्षो से हृदय की बीमारी से पीडि़त थे। सोमवार को रात्रि 9.05 बजे अचानक दर्द के बाद, हृदयाघात से निधन हो  गया । वे लगभग 75 वर्ष के थे। अचानक अपने प्रचारक डा. अमर सिंह के स्वर्गवासी हो जाने से पूरा संघ परिवार शोकाकुल है।  डा. अमर सिंह महान कर्मयोगी, ध्येयनिष्ठ व सौम्य व्यक्तित्व के धनी थे। उनके व्यक्तित्व से युवा, किशोर, तरुण व प्रौढ़ हर उम्र के स्वयंसेवक प्रभावित होते थे, उनका जीवन बड़ा ही सहज, सरल व विनोदप्रिय रहा। वे अपने चुटुकिले व हास्यभाव से गमगीन माहौल को भी सहज बना देते थे। उनके इस हास्य व्यवहार से ही युवा पीढ़ी उनसे ज्यादा प्रभावित थी। उनके अचानक निधन से संघ को अपूरणीय क्षति हुयी है।   श्री सिंह 1969 में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से भौतिकी में पी-एच.डी करने के बाद अपना पूरा जीवन मां भारती की सेवा

भाजपा और मीडिया का नकारात्मक दृष्टिकोण

भाजपा, गोवा और मीडिया पिछले सप्ताह सभी खबरिया चैनलों और अखबारों पर भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की गोवा बैठक छायी रही। पहले बैठक की तैयारी का समाचार, फिर बैठक में आडवाणी जैसे वरिष्ठ नेता और उनके अतिरिक्त यशवंत सिन्हा, जसवंत सिंह, शत्रुघ्न सिन्हा और उमा भारती जैसे नेताओं की अनुपस्थिति का समाचार, बैठक प्रारंभ होने पर सुषमा स्वराज के तीन घंटे लेट पहुंचने और कार्यक्रम स्थल से काफी दूर एक होटल में ठहरने का समाचार, फिर प्रश्न कि क्या आडवाणी की अनुपस्थिति में यह बैठक गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी का आगामी लोकसभा व विधानसभा चुनावों के प्रचार अभियान समिति के अध्यक्ष पद पर अभिषेक कर पायेगी? यदि अभिषेक हुआ तो भाजपा की कितनी हानि होगी? नरेन्द्र मोदी का व्यक्तित्व कितना विभाजनकारी है? क्यों भाजपा नरेन्द्र मोदी के लिए अपने संस्थापक सदस्य आडवाणी की भावनाओं की उपेक्षा कर रही है? क्यों वह सुषमा स्वराज के इस आग्रह को अनसुना कर रही है कि आडवाणी जी की अनुपस्थिति में कोई निर्णय न लिया जाए? सिर्फ नकारात्मक दृष्टिकोण किन्तु जब नरेन्द्र मोदी का अभिषेक हो ही गया और उस निर्णय से पूरे अधिवेशन में

केवल हिंदुत्व से सुधरेंगे देश के हालातः मोहन भागवत

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केवल हिंदुत्व से सुधरेंगे देश के हालातः मोहन भागवत भाषा [Edited By: नमिता शुक्ला] दिल्ली आजतक मेरठ, 18 जून 2013 | राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को बीजेपी में राष्ट्रीय भूमिका दिए जाने का समर्थन करते हुए कहा कि हिंदुत्व ही केवल वह रास्ता है जिससे देश में परिवर्तन लाया जा सकता है. मोदी का कद बढ़ाए जाने का विरोध कर रहे बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नाम लिए बिना उन्होंने कहा, ‘कोई पसंद करे या नहीं करे, हिंदुत्व ही केवल वह मार्ग है जो देश में परिवर्तन लाएगा. इसी में देश का सम्मान निहित है.’ भागवत ने कहा, ‘हमने नेता और एजेंडा बदल कर देख लिया, कुछ काम नहीं आया. राजनीति के द्वारा भारत को महाशक्ति नहीं बनाया जा सकता है, ऐसा केवल हिंदुत्व से किया जा सकता है.’ संघ प्रमुख ने देश के वर्तमान हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि सीमाएं सुरक्षित नहीं हैं और देश के अंदर भी खतरा मंडरा रहा है. ‘चीन हमारी सीमा में घुस आया और हम उसे सबक सिखाने का साहस नहीं कर पाए. तिब्बत पर कब्जा जमाने के बाद वह भारतीय राज्यों पर

आरक्षण पर प्रतिबंध लगाने वाली याचिका स्वीकार

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आरक्षण का सच यही कि हर क्षेत्र में वास्तविक व्यक्ति को कोई फायदा नहीं मिला हे , राजनीती में धन सम्पन्न वर्ग का प्रभुत्व हे । इस लिए न्यायालय  ही कुछ कर सकता हे ।  सुप्रीम कोर्ट ने देश में 62 वर्षों से जारी जातिवादी आरक्षण पर प्रतिबंध लगाने वाली याचिका को स्वीकार कर लिया है। इस मामले पर 1 जुलाई को सुनवाई होनी है। याचिकाकर्ता रामदुलार झा ने बताया कि देश की 543 संसदीय सीटों में से 126 संसदीय और 4920 विधानसभा सीटों में से 1155 विधानसभा सीटें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। इसका उद्देश्य उन लोगों को लाभ पहुंचाना है जो वास्तव में दलित हैं | लेकिन धरातल पर अनुसूचित जाति व जनजाति के संभ्रांत लोग ही इसका फायदा उठाते रहे हैं और चुनाव में सफल होते रहे हैं। इस कारण जो दलित आर्थिक व सामाजिक रूप से पिछड़े हैं उनकी स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है। उन्होंने बताया कि जिन दलितों को फायदा नहीं मिल रहा है और जो इसके हकदार हैं| उनकी संख्या 95 प्रतिशत से भी अधिक है। दलितों के प्रति यह एक तरह का अन्याय और कानून का दुरुपयोग है। झा के अनुसारए दलितों पर हो रहे अन्याय और कानून के