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राजनीतिक दलों का अनर्थतंत्र

http://moneymantra.net.in राजनीतिक दलों का अनर्थतंत्र  पूर्व सदस्य, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड और पूर्व महानिदेशक, आयकर विभाग (इन्वेस्टिगेशन) कई राज्यों में विधानसभा चुनाव और केंद्र में लोकसभा चुनाव करीब हैं जिसे देखते हुए देश के राजनीतिक अर्थव्यवस्था की गंदगी साफ करने और राजनीतिक दलों की फंडिंग में पारदर्शिता बढ़ाने की मांग बढ़ गई है। राजनीतिक दलों का खजाना लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन उन्हें चंदा कौन दे रहा है, उनके द्वारा चुनाव में भारी खर्च के लिए इतना पैसा कहां से आ रहा है, इसका कोई हिसाब नहीं है। राजनीतिक दल खुद को मिली टैक्स छूट का दुरुपयोग करते हैं और उनके द्वारा मनी लांडरिंग करने तक के सबूत मिले हैं। सच तो यह है कि इस तरह के कई छूटों का फायदा उठाने के लिए ही कुकुरमुत्ते की तरह सैकड़ों की संख्या में राजनीतिक दल उग आए हैं। राजनीतिक दलों को २०,००० रुपए से कम के मिले चंदे का कोई हिसाब नहीं देना होता और इसी सहूलियत का फायदा उठाते हुए वे चंदे का स्रोत छिपाए रहते हैं। चुनाव आयोग के अधिकार सीमित होने की वजह से चुनावी खर्च पर भी प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा। अचरज की बात यह