पोस्ट

जनवरी 14, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

हिन्दूकुश पर्वतमाला की सचाई

इमेज
हिन्दूकुश पर्वतमाला की सचाई जानिए पुनः संशोधित: गुरुवार, 27 नवंबर 2014 http://hindi.webdunia.com हिन्दूकुश उत्तरी पाकिस्तान से मध्य अफगानिस्तान तक विस्तृत एक 800 किमी लंबी वाली पर्वत श्रृंखला है। यह पर्वतमाला हिमालय क्षेत्र के अंतर्गत आती है। दरअसल, हिन्दूकुश पर्वतमाला पामीर पर्वतों से जाकर जुड़ते हैं और हिमालय की एक उपशाखा माने जाते हैं। पामीर का पठार, तिब्बत का पठार और भारत में मालवा का पठार धरती पर रहने लायक सबसे ऊंचे पठार माने जाते हैं। प्रारंभिक मनुष्य इसी पठार पर रहते थे। हिन्दूकुश पर्वतमाला के बीचोबीच सबसे ऊंचा पहाड़ पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वा प्रां‍त के चित्राल जिले में स्थित है जिसे वर्तमान में तिरिच मीर पर्वत कहते हैं। हिन्दूकुश का दूसरा सबसे ऊंचा पहाड़ नोशक पर्वत और तीसरा इस्तोर-ओ-नल है। उत्तरी पाकिस्तान में हिन्दूकुश पर्वतमाला और काराकोरम पर्वतमाला के बीच स्थित एक हिन्दू राज पर्वत श्रृंखला है। इस पर्वत श्रृंखला में कई ऋषि-मुनियों के आश्रम बने हुए थे, जहां भारत और हिन्दूकुश के उस पार से आने वाले जिज्ञासुओं, छात्रों आदि के लिए शिक्षा, दीक्षा और ध्यान की व्यवस्था थी

हिन्दू साम्राज्य 'विजयनगर'

इमेज
                                    हिन्दू साम्राज्य 'विजयनगर' को जानिए                                                          अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'                                                पुनः संशोधित: बुधवार, 14 जनवरी 2015 http://hindi.webdunia.com   विजयनगर साम्राज्य (लगभग 1350 ई. से 1565 ई.) की स्थापना राजा हरिहर ने की थी। 'विजयनगर' का अर्थ होता है 'जीत का शहर'। मध्ययुग के इस शक्तिशाली हिन्दू साम्राज्य की स्थापना के बाद से ही इस पर लगातार आक्रमण हुए लेकिन इस साम्राज्य के राजाओं से इसका कड़ा जवाब दिया। यह साम्राज्य कभी दूसरों के अधीन नहीं रहा। इसकी राजधानी को कई बार मिट्टी में मिला दिया गया लेकिन यह फिर खड़ा कर दिया गया। हम्पी के मंदिरों और महलों के खंडहरों के देखकर जाना जा सकता है कि यह कितना भव्य रहा होगा। इसे यूनेस्को ने विश्‍व धरोहर में शामिल किया है। विजयनगर साम्राज्य की स्थापना राजा हरिहर प्रथम ने 1336 में की थी। विजयनगर साम्राज्य की स्थापना में हरिहर प्रथम को दो ब्राह्मण आचार्यों- माधव विद्याराय और उसके ख्यातिप्राप्त भाई वे

15 जनवरी को मकर संक्रांति अगले सौ साल तक

इमेज
                                      15  जनवरी को मकर संक्रांति अगले सौ साल तक 14 जनवरी को मकर संक्रांति अब अगले सौ साल तक नहीं होगी। पूरे सौ साल यह पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। सूर्य की गति में प्रति सौर वर्ष कुछ मिनट की वृद्धि से सदी का यह परिवर्तन इस साल से होने जा रहा है। इस लिहाज से यह मकर संक्रांति दुर्लभ है। बता दें कि सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश पर हर साल मकर संक्रांति होती है। इस 14 जनवरी को सूर्य शाम 7 बजकर 20 मिनट पर मकर में प्रवेश कर रहे हैं, चूंकि तब तक सूर्य अस्त हो जाएंगे, ऐसे में सारे ज्योतिष इस साल यह पर्व 14 के बजाय 15 जनवरी को मनाने पर सहमत हुए हैं। ज्योतिषाचार्य और खगोलविद डॉ. बीके शर्मा कहते हैं कि ऐसा इसलिए क्योंकि मकर संक्रांति सूर्य से जुड़ा पर्व है और संक्रांतिकाल में उस शाम को जब सूर्य अस्त होंगे तो उस दिन इस पर्व का औचित्य ही नहीं रहेगा इसलिए इसे अगले दिन सूर्य उदयकाल से माने जाने का विधान शास्त्रों में भी है। काशी के सर्वमान्य महावीर पंचांग के संपादक रामेश्वर नाथ ओझा के अनुसार, विकला खगोलीय काल गणना की सूक्ष्म इकाई बढ़ रही है। इसके का