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सफलता के सूत्र : स्वामी विवेकानंद

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सफलता के सूत्र : स्वामी विवेकानंद 14 Jan, 2013 सफलता के सूत्र उत्तिष्ठत ! जाग्रत ! प्राप्य वरान्निबोधत! हे युवाओं , उठो ! जागो ! लक्ष्य प्राप्ति तक रुको नहीं पीछे मत देखो, आगे देखो, अनंत ऊर्जा, अनंत उत्‍साह, अनंत साहस और अनंत धैर्य तभी महान कार्य, किये जा सकते हैं । आज मैं तुम्हें भी अपने जीवन का मूल मंत्र बताता हूँ ,  वह यह है कि - प्रयत्न करते रहो, जब तुम्हें अपने चारों ओर अन्धकार ही अन्धकार दिखता हो, तब भी मैं कहता हूँ कि प्रयत्न करते रहो !  किसी भी परिस्थिति में तुम हारो मत,  बस प्रयत्न करते रहो!   तुम्हें तुम्हारा लक्ष्य जरूर मिलेगा ,  इसमें जरा भी संदेह नहीं ! - विवेकानन्द सफलता के सूत्र कभी मत सोचिये कि आत्मा के लिए कुछ असंभव  है ऐसा  सोचना  सबसे  बड़ा  विधर्म है. अगर  कोई   पाप  है,  तो  ये  कहना कि तुम निर्बल  हो या  अन्य  निर्बल हैं…. ब्रह्माण्ड  की   सारी  शक्तियां  पहले से  हमारी हैं. वो हम ही हैं  जो अपनी आँखों  पर हाथ रख लेते  हैं  और  फिर रोते हैं कि कितना अन्धकार है! – विवेकानन्द यदि जीवन में सफल होना है; जीवन में कुछ पाना है; महान बनना है; तो स्वामी वि

पुरुष से ऊंचा स्‍थान है नारी का हिंदू परंपरा में - राजीव त्रिपाठी

पुरुष से ऊंचा स्‍थान है नारी का हिंदू परंपरा में  August 13, 2010   - राजीव त्रिपाठी भारतीय संस्कृति में नारी का उल्लेख जगत्-जननी आदि शक्ति-स्वरूपा के रूप में किया गया है। श्रुतियों, स्मृतियों और पुराणों में नारी को विशेष स्थान मिला है। मनु स्मृति में कहा गया है-     यत्र नार्यस्‍तु पूज्‍यन्‍ते रमन्‍ते तत्र देवता:।         यत्रेतास्‍तु न पूज्‍यन्‍ते सर्वास्‍तफला: क्रिया।। जहाँ नारी का समादर होता है वहाँ देवता प्रसन्न रहते हैं और जहाँ ऐसा नहीं है वहाँ समस्त यज्ञादि क्रियाएं व्यर्थ होती हैं। नारी की महत्ता का वर्णन करते हुये ”महर्षि गर्ग” कहते हैं- यद् गृहे रमते नारी लक्ष्‍मीस्‍तद् गृहवासिनी। देवता: कोटिशो वत्‍स! न त्‍यजन्ति गृहं हितत्।। जिस घर में सद्गुण सम्पन्न नारी सुख पूर्वक निवास करती है उस घर में लक्ष्मी जी निवास करती हैं। हे वत्स! करोड़ों देवता भी उस घर को नहीं छोड़ते। ज्ञान-ऐश्‍वर्य-शौर्य की प्रतीक भारत में सदैव नारी को उच्च स्थान दिया गया है। समुत्कर्ष और नि.श्रेयस के लिए आधारभूत ‘श्री’, ‘ज्ञान’ तथा ‘शौर्य’ की अधिष्ठात्री नारी रूपों में प्रगट देवियों को ही मान

भारतीय संस्कृति में नारी का स्थान - अश्वनी कुमार वर्मा

वैदिक भारतीय संस्कृति में नारी का स्थान और वर्तमान अवधारणा Friday, March 27, 2015 लेखक : अश्वनी कुमार वर्मा भारत में नारी को शक्ति और दुर्गा का प्रारूप माना जाता रहा है इसका एक कारण यह भी हो सकता है की अगर पुरुष के पौरुष की बात की जाए उसके शक्तिशाली व्यकतित्व की बात की जाए उसमें भी माँ  द्वारा  नौ महीने तक बच्चे को गर्भ में रखने और अबोध बालक के रूप में एक पुरुष  का लालन पालन पोषण करने में सब से बड़ा योगदान है।  आज भारतीय समाज में भी इस विषय पर चर्चा चल जाती है की हम महिलाओं को बराबरी पर नहीं ला पाये हैं वर्तमान परिपेक्ष में यह सच भी है परन्तु समाज का एक एलिट क्लास तबका जब द्रौपदी सीता का आदि महान नारियों का उदाहरण देकर यह सिद्ध करने की कोशिश करता है की हम प्राचीन काल से नारी शोषित कर रहे हैं यह भारतीय संस्कृति पर एक मिथ्या आरोप हो सकता है।  हमारे एक पाठक अश्वनी कुमार वर्मा  ने हमें ऐसा ही एक संस्मरण भेजा हैं जिसमे उन्होंने काफी प्रभावी शब्दों में प्राचीन भारत की संस्कृति और नारीवादी सोच को छद्दम एलिट क्लास लोगों के बीच विस्तार से अथ्यों के साथ  परिभाषित किया उन्ही की जुबानी पढ़ें