*26/11 मुंबई आतंकी हमला: 10 आत्मघाती हमलावर मुंबई में हथियारों से लैस होकर घुसे। सीरियल बम धमाकों के अलावा आतंकियों ने कई जगहों पर अंधाधुंध फायरिंग की। आतंकियों ने नरीमन हाउस, होटल ताज और होटल ओबेराय को कब्जे में ले लिया था। इसमें कुल 166 लोग मारे गए थे और 293 लोग घायल हुए थे। आतंकी कसाब पकड़ा गया था, जबकि नौ आतंकी मारे गए।
*12 मार्च 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट: पूरे मुंबई में सीरियल धमाके हुए। इन धमाकों के पीछे दाउद इब्राहिम और डी कंपनी का हाथ था। इसमें 257 लोग मारे गए थे, जबकि 713 लोग घायल हुए थे।
*24 सितंबर 2002 अक्षरधाम मंदिर पर हमला: लश्कर और जैश ए मोहम्मद के 2 आतंकी मुर्तजा हाफिज यासिन और अशरफ अली मोहम्मद फारुख दोपहर 3 बजे अक्षरधाम मंदिर में घुस गए। ऑटोमैटिक हथियारों और हैंड ग्रेनेड से उन्होंने वहां मौजूद लोगों पर हमला करना शुरू कर दिया। इसमें 31 लोग मारे गए जबकि 80 लोग घायल हो गए थे।
*29 अक्टूबर 2005 दिल्ली सीरियल बम ब्लास्ट: दीवाली से 2 दिन पहले आतंकियों ने 3 बम धमाके किए। 2 धमाके सरोजनी नगर और पहाड़गंज जैसे मुख्य बाजारों में हुए। तीसरा धमाका गोविंदपुरी में एक बस में हुआ। इसमें कुल 63 लोग मारे गए जबकि 210 लोग घायल हुए थे।
*11 जुलाई 2006 मुंबई ट्रेन धमाका: मुंबई की लोकल ट्रेनों में अलग-अलग 7 बम धमाके हुए थे। सभी फर्स्ट क्लास कोच में बम रखे गए थे। इन धमाकों में इंडियन मुजाहिदीन का हाथ था। इसमें कुल 210 लोग मारे गए थे और 715 लोग जख्मी हुए थे।
*13 मई 2008 जयपुर ब्लास्ट: 15 मिनट के अंदर 9 बम धमाकों से पिंक सिटी लाल हो गई थी। इन धमाकों में कुल 63 लोग मारे गए थे जबकि 210 लोग घायल हुए थे।
*30 अक्टूबर 2008 असम में धमाके: राजधानी गुवाहाटी के विभिन्न जगहों पर कुल 18 धमाके आतंकियों ने किए। इन धमाकों में कुल 81 लोग मारे गए जबकि 470 लोग घायल हुए।
*13 दिसंबर 2001 भारतीय संसद पर हमला: लश्कर ए तैयबा और जैश मोहम्मद के 5 आतंकी भारत के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले संसद भवन परिसर में घुस गए। हालांकि सुरक्षा बलों ने आतंकियों को मार गिराया और आतंकी अपने मंसूबे में नाकाम हो गए। हमले के समय संसद भवन में 100 राजनेता मौजूद थे। इस हमले में 6 पुलिसकर्मी और 3 संसद भवन कर्मी मारे गए।
*14 फरवरी 1998 कोयम्बटूर धमाका: इस्लामिक ग्रुप अल उम्माह ने कोयम्बटूर में 11 अलग-अलग जगहों पर 12 बम धमाके किए। इसमें 200 लोग घायल हुए जबकि 60 लोग मारे गए।
*1 अक्टूबर 2001 जम्मू कश्मीर विधानसभा भवन पर हमला: जैश ए मोहम्मद ने 3 आत्मघाती हमलावरों और कार बम की सहायता से भवन पर हमला किया। इसमें 38 लोग मारे गए।
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#लखनऊ#उत्तर प्रदेश पंजाब के गुरदासपुर में सोमवार को हुए आतंकी हमले से एक बार फिर देश दहल गया है. इससे हमले ने देश में आतंकी खतरे का बड़ा संकेत दिया है.
पंजाब के दीनानगर कस्बे में सोमवार सुबह आतंकवादियों ने लोगों पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें 12 लोगों की मौत की खबर आ रही है. इस आतंकी हमले में कई लोगों के घायल होने की सूचना भी मिल रही है. घायलों में पुलिसकर्मी भी शामिल हैं. इस मुठभेड़ में एक आतंकी के मारे जाने की भी खबर आ रही है. मिली जानकारी के मुताबिक आतंकी हमले की जवाबी गोलीबारी में पंजाब पुलिस के एसपी शहीद हो गए हैं.
लेकिन यह कोई पहला मौका नहीं है, जब देश कोई आतंकी हमला झेल रहा है. इससे पहले भी भारत को कई आतंकी हमलों से दहल उठा है. आइए भारत पर हुए अब तक के आतंकी हमलों पर एक नजर डालते हैं :
4 जून 2015 मणिपुर में पुलिसवालों पर हमला
मणिपुर के चंदेल जिले में आतंकियों ने पुलिसवालों के काफिले पर हमला कर दिया, जिसमें 20 जवान शहीद हुए थे.
28 दिसंबर 2014 चर्च स्ट्रीट बम धमाका
बेंगलुरू के चर्च स्ट्रीट इलाके में बम धमाका हुआ था. इस ब्लास्ट में एक शख्स की मौत हुई थी.
21 फरवरी 2013 हैदराबाद सीरियल ब्लास्ट
हैदराबाद में सीरियल ब्लास्ट हुए, जिसमें 16 लोगों की मौत हुई और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे.
26/11 मुंबई आतंकी हमला
10 आत्मघाती हमलावर मुंबई में हथियारों से लैस होकर घुसे. सीरियल बम धमाकों के अलावा आतंकियों ने कई जगहों पर अंधाधुंध फायरिंग की. आतंकियों ने नरीमन हाउस, होटल ताज और होटल ओबेराय को कब्जे में ले लिया था. इसमें कुल 166 लोग मारे गए थे और 293 लोग घायल हुए थे. आतंकी कसाब पकड़ा गया था, जबकि नौ आतंकी मारे गए थे.
13 जुलाई 2011 मुबंई सीरियल ब्लास्ट
मुंबई के तीन इलाकों में सीरियल ब्लास्ट हुए, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई और 130 से ज्यादा लोग घायल हुए थे.
13 फरवरी 2010 पुणे का जर्मन बेकरी ब्लास्ट
पुणे के जर्मन बेकरी में ब्लास्ट हुआ था, जिसमें 17 लोगों की मौत हुई थी और 60 लोग घायल हुए थे.
26 नवंबर 2008 मुंबई में फायरिंग
10 आतंकियों ने पूरी मुंबई को हिलाकर रख दिया. इन आतंकियों ने कई इलाकों में अंधाधुध फायरिंग की थी, जिसमें 171 लोगों की मौत हुई थी और 250 से ज्यादा लोग घायल हुए थे.
30 अक्टूबर 2008 असम में धमाके
राजधानी गुवाहाटी के विभिन्न जगहों पर कुल 18 धमाके आतंकियों ने किए थे. इन धमाकों में कुल 81 लोग मारे गए, जबकि 470 लोग घायल हुए.
13 सितंबर 2008 में दिल्ली में हुए ब्लास्ट
दिल्ली के कई बड़े बाजारों में सीरियल ब्लास्ट हुए, जिसमें 21 लोगों की मौत हुई और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए.
26 जुलाई 2008 अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट
गुजरात की राजधानी अहमदाबाद में सीरियल बम ब्लास्ट में 45 लोगों की मौत और 150 लोग घायल हुए थे.
13 मई 2008 जयपुर ब्लास्ट
15 मिनट के अंदर 9 बम धमाकों से पिंक सिटी लाल हो गई थी. इन धमाकों में कुल 63 लोग मारे गए थे जबकि 210 लोग घायल हुए थे.
26 मई 2007 गुवाहाटी बम धमाके
गुवाहाटी में हुए धमाकों में 6 लोगों की मौत और 30 लोग घायल हुए थे.
8 सितंबर 2006 मालेगांव बम ब्लास्ट
महाराष्ट्र के मालेगांव की एक मस्जिद के पास बम ब्लास्ट, 37 लोगों की मौत और 125 घायल.
11 जुलाई 2006 मुंबई ट्रेन धमाका
मुंबई की लोकल ट्रेनों में अलग-अलग 7 बम धमाके हुए थे. सभी फर्स्ट क्लास कोच में बम रखे गए थे. इन धमाकों में इंडियन मुजाहिदीन का हाथ था. इसमें कुल 210 लोग मारे गए थे और 715 लोग जख्मी हुए थे.
7 मार्च 2006 वाराणसी में हुए आतंकी हमले
वाराणसी में हुए आतंकी हमले में 28 लोगों की मौत हुई थी और 101 लोग घायल हो गए थे.
29 अक्टूबर 2005 दिल्ली सीरियल बम ब्लास्ट
दीवाली से दो दिन पहले आतंकियों ने 3 बम धमाके किए. 2 धमाके सरोजनी नगर और पहाड़गंज जैसे मुख्य बाजारों में हुए. तीसरा धमाका गोविंदपुरी में एक बस में हुआ. इसमें कुल 63 लोग मारे गए जबकि 210 लोग घायल हुए थे.
15 अगस्त 2004 असम में ब्लास्ट
असम में ब्लास्ट हुआ जिसमें 16 लोगों की मौत हो गई. इनमें ज्यादातर स्कूली बच्चे शामिल थे.
25 अगस्त 2003 मुंबई में दोहरे कार धमाके
मुबंई में हुए दोहरे कार धमाके में 52 लोगों की मौत हो गई थी और 150 लोग घायल हो गए थे.
14 मई 2002 जम्मू के आर्मी कैंट पर आतंकी हमला
जम्मू के पास आर्मी कैंट पर आतंकी हमले में 30 लोगों की मौत हो गई थी.
24 सितंबर 2002 अक्षरधाम मंदिर पर हमला
लश्कर और जैश ए मोहम्मद के 2 आतंकी मुर्तजा हाफिज यासिन और अशरफ अली मोहम्मद फारुख दोपहर 3 बजे अक्षरधाम मंदिर में घुस गए. ऑटोमैटिक हथियारों और हैंड ग्रेनेड से उन्होंने वहां मौजूद लोगों पर हमला करना शुरू कर दिया. इसमें 31 लोग मारे गए जबकि 80 लोग घायल हो गए थे.
13 दिसंबर 2001 भारतीय संसद पर हमला
लश्कर ए तैयबा और जैश मोहम्मद के 5 आतंकी भारत के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले संसद भवन परिसर में घुस गए. हालांकि सुरक्षा बलों ने आतंकियों को मार गिराया और आतंकी अपने मंसूबे में नाकाम हो गए. हमले के समय संसद भवन में 100 राजनेता मौजूद थे. इस हमले में 6 पुलिसकर्मी और 3 संसद भवन कर्मी मारे गए.
1 अक्टूबर 2001 जम्मू कश्मीर विधानसभा भवन पर हमला
जैश ए मोहम्मद ने 3 आत्मघाती हमलावरों और कार बम की सहायता से भवन पर हमला किया. इसमें 38 लोग मारे गए.
14 फरवरी 1998 कोयम्बटूर धमाका
इस्लामिक ग्रुप अल उम्माह ने कोयम्बटूर में 11 अलग-अलग जगहों पर 12 बम धमाके किए. इसमें 200 लोग घायल हुए जबकि 60 लोग मारे गए थे.
12 मार्च 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट
पूरे मुंबई में सीरियल धमाके हुए. इन धमाकों के पीछे दाउद इब्राहिम और डी कंपनी का हाथ था. इसमें 257 लोग मारे गए थे, जबकि 713 लोग घायल हुए थे.
23 जून 1985 में एयर इंडिया के बोइंग 747-237B को बम से उड़ा दिया था
पंजाब के आतंकी गुट ने एयर इंडिया के बोइंग 747-237B कनिष्क विमान को 31,000 फीट की ऊंचाई पर बम से उड़ा दिया गया था. इस विमान में सवार सभी 329 लोग मारे गए थे.
एक ईसा, एक बाइबल, लेकिन ईसाइयों के कितने मजहब (संप्रदाय)❓ ईसाइयत दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक समुदायों में से एक माना जाता है। लेकिन सभी ईसाई एक ही चर्च या धार्मिक संगठन से जुड़े नहीं हैं। ईसाइयत के भीतर रोमन कैथोलिक, ईस्टर्न ऑर्थोडॉक्स, ओरिएंटल ऑर्थोडॉक्स और प्रोटेस्टेंट जैसे प्रमुख मजहब हैं। इनके अतिरिक्त अनेक स्वतंत्र चर्च और छोटे-बड़े संप्रदाय भी मौजूद हैं। सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ ग्लोबल क्रिश्चियनिटी और वर्ल्ड क्रिश्चियन डेटाबेस से जुड़े अनुमानों में दुनिया भर में ईसाई संप्रदायों की संख्या लगभग 47,000 से अधिक बताई गई है। कुछ अनुमानों में यह संख्या 2025 ईस्वी तक लगभग 49,000 तक पहुँचती है। हालाँकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि ईसाइयत के भीतर लगभग 49,000 ऐसे समूह हैं जिनकी धार्मिक मान्यताएँ एक-दूसरे से पूरी तरह अलग हैं। इस संख्या की गणना में अलग-अलग देशों में मौजूद स्वतंत्र चर्चों और संस्थागत रूप से अलग इकाइयों को भी अलग संप्रदायों के रूप में गिना जा सकता है। इसलिए वास्तविक संख्या इस बात पर निर्भर करती है कि मजहब (संप्रदाय) की परिभाषा क्या रखी गई है। ईसाइयत में इतने सारे संप्रदाय ...
जर्मनी की संघीय कैबिनेट द्वारा 16 सितंबर 2026 को मंजूर किए गए 10-सूत्रीय कार्यक्रम ("सुरुक्षा बढ़ाना, स्वतंत्रता बनाए रखना, कट्टरपंथ रोकना") पर विस्तृत रिपोर्ट इस प्रकार है: EU आतंकवाद के विरुद्ध उपाय ## 1. पृष्ठभूमि और तात्कालिक कारण (The Trigger) यह विस्तृत सुरक्षा पैकेज 25 जुलाई 2026 को बर्लिन में क्रिस्टोफर स्ट्रीट डे (CSD) परेड (प्राइड इवेंट) पर हुए एक भीषण आतंकवादी हमले की सीधी प्रतिक्रिया के रूप में लाया गया है। जर्मनी में आतंकियों के विरुद्ध नये उपाय * हमला: एक 21 वर्षीय इस्लामी चरमपंथी अब्दुल बी. (Abdul Ballout) ने प्राइड परेड की भीड़ में एक वैन घुसा दी थी, जिसमें एक महिला की मौत हो गई और 30 से अधिक लोग घायल हो गए थे। घुसपैठियों का तांडव * सुरक्षा चूक: बाद में पुलिस कार्रवाई में मारा गया यह हमलावर पहले से ही खुफिया एजेंसियों की रडार पर था और एक कट्टरपंथ-विरोधी (Deradicalization) कार्यक्रम का हिस्सा था। इस घटना ने जर्मन कानून और खुफिया तंत्र की कमियों को उजागर किया, जिसके बाद गृह मंत्री अलेक्जेंडर डोब्रिंड्ट (Alexander Dobrindt) और न्याय मंत्री स्टेफनी हुबिग (S...
‘वोट चोरी’ का झूठा आरोप देश, जनादेश और पूरे जवाबदेह प्रशासनिक तंत्र की दक्षता को अपमानित करना है — अरविन्द सिसोदिया कोटा, 9 अक्टूबर। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन न्यासी एवं वरिष्ठ बुद्धिजीवी अरविन्द सिसोदिया ने कांग्रेस सहित विपक्षी दलों द्वारा चुनाव आयोग के खिलाफ चलाए जा रहे कथित झूठे ‘वोट चोरी’ आरोप अभियान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि " जनता जिन्हें वोट देने लायक नहीं समझती, वे अपनी राजनीतिक असफलता को चुनाव आयोग के माथे मढ़ने की जबरन कोशिश कर रहे हैं और ‘वोट चोरी-वोट चोरी’ का ढिंढोरा पीट रहे हैं। चुनाव आयोग को ‘वोट चोर’ कहना देश, जनादेश और प्रशासनिक तंत्र का अपमान है, जिसे भारत का जनमत कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।" सिसोदिया ने कहा कि " कांग्रेस सहित तुष्टिकरणवादी विपक्ष दलों को यह समझना चाहिए कि भारत में चुनाव केवल दिल्ली स्थित चुनाव आयोग के अधिकारी मात्र नहीं कराते, बल्कि प्रत्यक्ष चुनाव प्रक्रिया प्रत्येक बूथ पर तैनात बीएलओ से प्रारंभ होती है। मतदान केंद्रों पर तैनात पीठासीन अधिकारी, मतदान अधिकारी, शिक्षक, अन्...
7 अक्टूबर: मोदीजी के शासन प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूर्ण नवाचार, निर्णायक नेतृत्व और परिणामदायी शासन का ढाई दशक का अभूतपूर्व कीर्तिमान — अरविन्द सिसोदिया भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास में 7 अक्टूबर 2001 एक टर्निंग पॉइंट था। इसी दिन एक सामान्य परिवार से निकलकर नरेंद्र मोदी ने भारतीय जनता पार्टी की ओर से तब पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में संवैधानिक पद की शपथ ली। वे उन विरले नेताओं में रहे, जिन्होंने लंबी चुनावी सत्ता-सीढ़ी चढ़े बिना अपनी संगठनात्मक क्षमता, प्रशासनिक दक्षता और नेतृत्व के बल पर सीधे मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। उनके नेतृत्व में भारत नें आतंकवाद और शत्रुतापूर्ण कार्यवाहियों का मुंहतोड़ जबाब दिया है। 2001 से 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री और 2014 से निरंतर देश के प्रधानमंत्री के रूप में 7 अक्टूबर 2026 को नरेंद्र मोदी के शासन-प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। यह केवल सत्ता में बने रहने की 25 वर्ष की यात्रा नहीं है। यह भारत की शासन-व्यवस्था को पुराने ढर्रे, लालफीताशाही और प्रतिक्रियात्मक प्रशासन से निकालकर नवाचार, तकनीक, लक्ष्य-आधारित का...
मेटा (Meta) के विशाल यूजर बेस और भारत में इसके आर्थिक योगदान के साथ-साथ, इसका एक दूसरा पहलू भी है जो बेहद संवेदनशील है। चूंकि मेटा के ऐप्स (फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप) की पहुंच भारत की 80 करोड़ से अधिक आबादी तक है, इसलिए यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक स्थिरता और डेटा संप्रभुता (Data Sovereignty) के लिए एक बड़ा खतरा और चुनौती भी बन चुका है। यहाँ इस संपूर्ण जानकारी और सुरक्षा पहलुओं के आधार पर एक व्यापक और प्रमाणित लेख दिया गया है: ## खोजी विश्लेषण: मेटा का साम्राज्य और भारत के लिए छिपे हुए बड़े खतरे आज भारत मेटा प्लेटफॉर्म्स (Meta Platforms, Inc.) के लिए दुनिया का सबसे बड़ा यूजर बेस (उपयोगकर्ता आधार) है। देश के 80 करोड़ से अधिक नागरिक रोज़ाना फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर अपना समय बिताते हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, मेटा भारत से ₹36,000 करोड़ से अधिक का कुल राजस्व कमा रही है, जिसमें व्हाट्सएप बिजनेस और छोटे व्यापारियों के डिजिटल विज्ञापन सबसे बड़े माध्यम हैं। लेकिन इस अपार लोकप्रियता और आर्थिक प्रभाव के पीछे एक डरावना सच भी छिपा है। इतनी विशाल आबादी प...
अतीत में कांग्रेस पार्टी और उसके वरिष्ठ नेताओं ने [एलन मस्क] की स्टारलिंक (Starlink) के भारत प्रवेश को लेकर तीखा विरोध जताया था और इसके पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा व अंतरराष्ट्रीय कूटनीति से जुड़े गंभीर आरोप लगाए थे। हाल ही में केंद्रीय दूरसंचार मंत्री [ज्योतिरादित्य सिंधिया] और भाजपा सांसद [तेजस्वी सूर्या] समेत कई आलोचकों ने कांग्रेस के पुराने बयानों को साझा करते हुए उनके "यू-टर्न" पर सवाल उठाए हैं। विस्तार से जानें कि किस नेता ने क्या कहा था: ## 1. [जयराम रमेश] (वरिष्ठ नेता और महासचिव, कांग्रेस) कांग्रेस के संचार प्रभारी और वरिष्ठ नेता [जयराम रमेश] ने आधिकारिक तौर पर मीडिया के सामने स्टारलिंक को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए थे। * क्या कहा था: उन्होंने स्टारलिंक की एंट्री को "फ्रेंडशिप-बाइंग मूव" (दोस्ती खरीदने की कोशिश) करार दिया था। * तर्क: उनका आरोप था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश रखने के लिए एलन मस्क को भारत में अनुचित फायदा पहुंचाना चाहते हैं। उन्होंने कहा था, "प्रधानमंत्री स्पष्ट रूप से यह उम्मीद ...
प्रेस कॉन्फ्रेंस के मुख्य बिंदु: माननीय केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता श्री शिवराज सिंह चौहान / 12-10-2026 केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की प्रेस कॉन्फ्रेंस के मुख्य बिंदु ****************** कांग्रेस अपनी चुनावी हार के लिए संवैधानिक संस्थाओं को दोषी ठहरा रही है, जबकि असली वजह उसका नेतृत्व है, जो विचारों से रहित है। **************************** हताश और हताश कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करके, सड़कों पर अराजकता फैलाकर और जनता को गुमराह करके सत्ता में वापसी करने की कोशिश कर रही है। ******************** कई राज्यों में लंबे समय से सत्ता से बाहर रहने के कारण, कांग्रेस क्षेत्रीय दलों पर निर्भर एक कनिष्ठ सहयोगी और एक परजीवी दल बनकर रह गई है। **************************** कांग्रेस नेता इसे “शिव जी की बारात” बता रहे हैं, जबकि यह भगवान शिव की शोभायात्रा नहीं, बल्कि बदमाशों का एक समूह है जो सड़कों पर अव्यवस्था फैला रहा है। **************************** कांग्रेस और भारत-भारत गठबंधन अब विदेशी शक्तियों क...
मेरे टिवीटर एकाउन्ट को अधिक से अधिक फोलो करके विचार अभियान को विस्तार प्रदान करें - अरविन्द सिसौदिया इसे फोलो करें - Arvind S Sisodia @ArvindSSisodia https://x.com/ArvindSSisodia ध्येय साधना अमर रहे। ध्येय साधना अमर रहे। अखिल जगत को पावन करती त्रस्त उरों में आशा भरती भारतीय सभ्यता सिखाती गंगा की चिर धार बहे। इससे प्रेरित होकर जन-जन करे निछावर निज तन-मन-धन पाले देशभक्ति का प्रिय प्रण अडिग लाख आघात सहे। भीती न हमको छू पाये स्वार्थ लालसा नहीं सताये शुद्ध ह्नदय ले बढते जायें धन्य-धन्य जग आप कहे। जीवन पुष्प चढा चरणों पर माँगे मातृभूमि से यह वर तेरा वैभव अमर रहे माँ। हम दिन चार रहें न रहे। ------------- English :- dhyeya sādhanā amara rahe | dhyeya sādhanā amara rahe | akhila jagata ko pāvana karatī trasta uroṁ meṁ āśā bharatī bhāratīya sabhyatā sikhātī gaṁgā kī cira dhāra bahe | isase prerita hokara jana-jana kare nichāvara nija tana-mana-dhana pāle deśabhakti kā priya praṇa aḍiga lākha āghāta sahe | bhītī na hamako chū pāye svārtha lāla...
भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा,संवैधानिक संस्थाओं की अनिवार्य जबाबदेही है — अरविन्द सिसोदिया वर्तमान कांग्रेस और उसके ही प्रतिस्पर्धी कुछ दलों में, इस समय असंवैधानिकता, झूठ और भ्रम पर आधारित नौटंकी खड़ी करने की प्रतिस्पर्धा चल रही है, इन दलों को जनता नें सिरे से नकार दिया है और ये बिना वोट से जीते ही, शासक बनना चाहते हैँ। इनकी इस बेतुकी जिद और बदतमीजी से, पूरे देश में ही नहीं, विश्व में भी भारतीय विपक्ष मज़ाक बनकर रह गया है। सर्वोच्च न्यायलय के मुख्य न्यायाधीश तक से मिलने की, मर्यादाहीन कोशिश के बाद, देश को समझ आरहा है कि देश किस स्तरहीनता के चक्रब्यूह में फंस गया है। संवैधानिक संस्थाओं को सावचेत रहना होगा नेता प्रतिपक्ष की फ्रंट पेज पर छपने की इस बीमारी में देश के दिन-प्रतिदिन के ज़रूरी कार्यों सहित विकास और व्यवस्था बाधित हो रही है, संवेधानिक तंत्रो को जनता की सेवा की जगह, बेबुनियाद नौटंकियों में उलझाया जा रहा है। सबसे गलत यह है कि इसे जबरिया दल और जनता पर थोपा जा रहा है। वहीं देश की गरिमा और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान का निहित स्वार्थों हेतु मानमर्दन ...
प्रेस विज्ञप्ति कांग्रेस की बेतुकी मांग ब्रह्मा भी पूरी नहीं कर सकते, अति तुष्टिकरण के कारण जनता की नजर से उतरी — अरविन्द सिसोदिया कोटा, 2 अक्टूबर। भाजपा के कोटा संभाग मीडिया संयोजक एवं राजनीतिक विश्लेषक और प्रखर विचारक अरविन्द सिसोदिया ने मतदाता सूचियों में हेरफेर का आरोप लगाने वाले कांग्रेस और विपक्ष के दावों पर करारा हमला बोला है। सिसोदिया ने कांग्रेस की मांगों को पूरी तरह अतार्किक और हास्यास्पद बताते हुए कहा, "कांग्रेस की मांग तो ब्रह्मा भी पूरी नहीं कर सकते, भला दुनिया से जा चुके 2 करोड़ मृत नागरिकों को मतदाता सूची में वापस कहाँ से लाया जाएगा?" उन्होंने सोशल मीडिया और विभिन्न मीडिया चैनलों पर विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे झूठ का पर्दाफाश करते हुए कहा कि अपनी चुनावी विफलताओं को छिपाने के लिए 13 करोड़ मतदाताओं के नाम काटे जाने का फर्जी नैरेटिव गढ़ा जा रहा है। जबकि ये नाम मृत, निवास छोड़ चुके, दोहरे नाम वालों के हैं, जो बूथ स्तर पर बीएलओ के द्वारा निरीक्षण से कटे हैं। इसके लिए मुख्य चुनाव आयुक्त सीधे तौर पर कतई जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि कोई त्रुटि रही भी है तो उसके लिए कांग्र...
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