*26/11 मुंबई आतंकी हमला: 10 आत्मघाती हमलावर मुंबई में हथियारों से लैस होकर घुसे। सीरियल बम धमाकों के अलावा आतंकियों ने कई जगहों पर अंधाधुंध फायरिंग की। आतंकियों ने नरीमन हाउस, होटल ताज और होटल ओबेराय को कब्जे में ले लिया था। इसमें कुल 166 लोग मारे गए थे और 293 लोग घायल हुए थे। आतंकी कसाब पकड़ा गया था, जबकि नौ आतंकी मारे गए।
*12 मार्च 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट: पूरे मुंबई में सीरियल धमाके हुए। इन धमाकों के पीछे दाउद इब्राहिम और डी कंपनी का हाथ था। इसमें 257 लोग मारे गए थे, जबकि 713 लोग घायल हुए थे।
*24 सितंबर 2002 अक्षरधाम मंदिर पर हमला: लश्कर और जैश ए मोहम्मद के 2 आतंकी मुर्तजा हाफिज यासिन और अशरफ अली मोहम्मद फारुख दोपहर 3 बजे अक्षरधाम मंदिर में घुस गए। ऑटोमैटिक हथियारों और हैंड ग्रेनेड से उन्होंने वहां मौजूद लोगों पर हमला करना शुरू कर दिया। इसमें 31 लोग मारे गए जबकि 80 लोग घायल हो गए थे।
*29 अक्टूबर 2005 दिल्ली सीरियल बम ब्लास्ट: दीवाली से 2 दिन पहले आतंकियों ने 3 बम धमाके किए। 2 धमाके सरोजनी नगर और पहाड़गंज जैसे मुख्य बाजारों में हुए। तीसरा धमाका गोविंदपुरी में एक बस में हुआ। इसमें कुल 63 लोग मारे गए जबकि 210 लोग घायल हुए थे।
*11 जुलाई 2006 मुंबई ट्रेन धमाका: मुंबई की लोकल ट्रेनों में अलग-अलग 7 बम धमाके हुए थे। सभी फर्स्ट क्लास कोच में बम रखे गए थे। इन धमाकों में इंडियन मुजाहिदीन का हाथ था। इसमें कुल 210 लोग मारे गए थे और 715 लोग जख्मी हुए थे।
*13 मई 2008 जयपुर ब्लास्ट: 15 मिनट के अंदर 9 बम धमाकों से पिंक सिटी लाल हो गई थी। इन धमाकों में कुल 63 लोग मारे गए थे जबकि 210 लोग घायल हुए थे।
*30 अक्टूबर 2008 असम में धमाके: राजधानी गुवाहाटी के विभिन्न जगहों पर कुल 18 धमाके आतंकियों ने किए। इन धमाकों में कुल 81 लोग मारे गए जबकि 470 लोग घायल हुए।
*13 दिसंबर 2001 भारतीय संसद पर हमला: लश्कर ए तैयबा और जैश मोहम्मद के 5 आतंकी भारत के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले संसद भवन परिसर में घुस गए। हालांकि सुरक्षा बलों ने आतंकियों को मार गिराया और आतंकी अपने मंसूबे में नाकाम हो गए। हमले के समय संसद भवन में 100 राजनेता मौजूद थे। इस हमले में 6 पुलिसकर्मी और 3 संसद भवन कर्मी मारे गए।
*14 फरवरी 1998 कोयम्बटूर धमाका: इस्लामिक ग्रुप अल उम्माह ने कोयम्बटूर में 11 अलग-अलग जगहों पर 12 बम धमाके किए। इसमें 200 लोग घायल हुए जबकि 60 लोग मारे गए।
*1 अक्टूबर 2001 जम्मू कश्मीर विधानसभा भवन पर हमला: जैश ए मोहम्मद ने 3 आत्मघाती हमलावरों और कार बम की सहायता से भवन पर हमला किया। इसमें 38 लोग मारे गए।
----------------------------------------
#लखनऊ#उत्तर प्रदेश पंजाब के गुरदासपुर में सोमवार को हुए आतंकी हमले से एक बार फिर देश दहल गया है. इससे हमले ने देश में आतंकी खतरे का बड़ा संकेत दिया है.
पंजाब के दीनानगर कस्बे में सोमवार सुबह आतंकवादियों ने लोगों पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें 12 लोगों की मौत की खबर आ रही है. इस आतंकी हमले में कई लोगों के घायल होने की सूचना भी मिल रही है. घायलों में पुलिसकर्मी भी शामिल हैं. इस मुठभेड़ में एक आतंकी के मारे जाने की भी खबर आ रही है. मिली जानकारी के मुताबिक आतंकी हमले की जवाबी गोलीबारी में पंजाब पुलिस के एसपी शहीद हो गए हैं.
लेकिन यह कोई पहला मौका नहीं है, जब देश कोई आतंकी हमला झेल रहा है. इससे पहले भी भारत को कई आतंकी हमलों से दहल उठा है. आइए भारत पर हुए अब तक के आतंकी हमलों पर एक नजर डालते हैं :
4 जून 2015 मणिपुर में पुलिसवालों पर हमला
मणिपुर के चंदेल जिले में आतंकियों ने पुलिसवालों के काफिले पर हमला कर दिया, जिसमें 20 जवान शहीद हुए थे.
28 दिसंबर 2014 चर्च स्ट्रीट बम धमाका
बेंगलुरू के चर्च स्ट्रीट इलाके में बम धमाका हुआ था. इस ब्लास्ट में एक शख्स की मौत हुई थी.
21 फरवरी 2013 हैदराबाद सीरियल ब्लास्ट
हैदराबाद में सीरियल ब्लास्ट हुए, जिसमें 16 लोगों की मौत हुई और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे.
26/11 मुंबई आतंकी हमला
10 आत्मघाती हमलावर मुंबई में हथियारों से लैस होकर घुसे. सीरियल बम धमाकों के अलावा आतंकियों ने कई जगहों पर अंधाधुंध फायरिंग की. आतंकियों ने नरीमन हाउस, होटल ताज और होटल ओबेराय को कब्जे में ले लिया था. इसमें कुल 166 लोग मारे गए थे और 293 लोग घायल हुए थे. आतंकी कसाब पकड़ा गया था, जबकि नौ आतंकी मारे गए थे.
13 जुलाई 2011 मुबंई सीरियल ब्लास्ट
मुंबई के तीन इलाकों में सीरियल ब्लास्ट हुए, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई और 130 से ज्यादा लोग घायल हुए थे.
13 फरवरी 2010 पुणे का जर्मन बेकरी ब्लास्ट
पुणे के जर्मन बेकरी में ब्लास्ट हुआ था, जिसमें 17 लोगों की मौत हुई थी और 60 लोग घायल हुए थे.
26 नवंबर 2008 मुंबई में फायरिंग
10 आतंकियों ने पूरी मुंबई को हिलाकर रख दिया. इन आतंकियों ने कई इलाकों में अंधाधुध फायरिंग की थी, जिसमें 171 लोगों की मौत हुई थी और 250 से ज्यादा लोग घायल हुए थे.
30 अक्टूबर 2008 असम में धमाके
राजधानी गुवाहाटी के विभिन्न जगहों पर कुल 18 धमाके आतंकियों ने किए थे. इन धमाकों में कुल 81 लोग मारे गए, जबकि 470 लोग घायल हुए.
13 सितंबर 2008 में दिल्ली में हुए ब्लास्ट
दिल्ली के कई बड़े बाजारों में सीरियल ब्लास्ट हुए, जिसमें 21 लोगों की मौत हुई और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए.
26 जुलाई 2008 अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट
गुजरात की राजधानी अहमदाबाद में सीरियल बम ब्लास्ट में 45 लोगों की मौत और 150 लोग घायल हुए थे.
13 मई 2008 जयपुर ब्लास्ट
15 मिनट के अंदर 9 बम धमाकों से पिंक सिटी लाल हो गई थी. इन धमाकों में कुल 63 लोग मारे गए थे जबकि 210 लोग घायल हुए थे.
26 मई 2007 गुवाहाटी बम धमाके
गुवाहाटी में हुए धमाकों में 6 लोगों की मौत और 30 लोग घायल हुए थे.
8 सितंबर 2006 मालेगांव बम ब्लास्ट
महाराष्ट्र के मालेगांव की एक मस्जिद के पास बम ब्लास्ट, 37 लोगों की मौत और 125 घायल.
11 जुलाई 2006 मुंबई ट्रेन धमाका
मुंबई की लोकल ट्रेनों में अलग-अलग 7 बम धमाके हुए थे. सभी फर्स्ट क्लास कोच में बम रखे गए थे. इन धमाकों में इंडियन मुजाहिदीन का हाथ था. इसमें कुल 210 लोग मारे गए थे और 715 लोग जख्मी हुए थे.
7 मार्च 2006 वाराणसी में हुए आतंकी हमले
वाराणसी में हुए आतंकी हमले में 28 लोगों की मौत हुई थी और 101 लोग घायल हो गए थे.
29 अक्टूबर 2005 दिल्ली सीरियल बम ब्लास्ट
दीवाली से दो दिन पहले आतंकियों ने 3 बम धमाके किए. 2 धमाके सरोजनी नगर और पहाड़गंज जैसे मुख्य बाजारों में हुए. तीसरा धमाका गोविंदपुरी में एक बस में हुआ. इसमें कुल 63 लोग मारे गए जबकि 210 लोग घायल हुए थे.
15 अगस्त 2004 असम में ब्लास्ट
असम में ब्लास्ट हुआ जिसमें 16 लोगों की मौत हो गई. इनमें ज्यादातर स्कूली बच्चे शामिल थे.
25 अगस्त 2003 मुंबई में दोहरे कार धमाके
मुबंई में हुए दोहरे कार धमाके में 52 लोगों की मौत हो गई थी और 150 लोग घायल हो गए थे.
14 मई 2002 जम्मू के आर्मी कैंट पर आतंकी हमला
जम्मू के पास आर्मी कैंट पर आतंकी हमले में 30 लोगों की मौत हो गई थी.
24 सितंबर 2002 अक्षरधाम मंदिर पर हमला
लश्कर और जैश ए मोहम्मद के 2 आतंकी मुर्तजा हाफिज यासिन और अशरफ अली मोहम्मद फारुख दोपहर 3 बजे अक्षरधाम मंदिर में घुस गए. ऑटोमैटिक हथियारों और हैंड ग्रेनेड से उन्होंने वहां मौजूद लोगों पर हमला करना शुरू कर दिया. इसमें 31 लोग मारे गए जबकि 80 लोग घायल हो गए थे.
13 दिसंबर 2001 भारतीय संसद पर हमला
लश्कर ए तैयबा और जैश मोहम्मद के 5 आतंकी भारत के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले संसद भवन परिसर में घुस गए. हालांकि सुरक्षा बलों ने आतंकियों को मार गिराया और आतंकी अपने मंसूबे में नाकाम हो गए. हमले के समय संसद भवन में 100 राजनेता मौजूद थे. इस हमले में 6 पुलिसकर्मी और 3 संसद भवन कर्मी मारे गए.
1 अक्टूबर 2001 जम्मू कश्मीर विधानसभा भवन पर हमला
जैश ए मोहम्मद ने 3 आत्मघाती हमलावरों और कार बम की सहायता से भवन पर हमला किया. इसमें 38 लोग मारे गए.
14 फरवरी 1998 कोयम्बटूर धमाका
इस्लामिक ग्रुप अल उम्माह ने कोयम्बटूर में 11 अलग-अलग जगहों पर 12 बम धमाके किए. इसमें 200 लोग घायल हुए जबकि 60 लोग मारे गए थे.
12 मार्च 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट
पूरे मुंबई में सीरियल धमाके हुए. इन धमाकों के पीछे दाउद इब्राहिम और डी कंपनी का हाथ था. इसमें 257 लोग मारे गए थे, जबकि 713 लोग घायल हुए थे.
23 जून 1985 में एयर इंडिया के बोइंग 747-237B को बम से उड़ा दिया था
पंजाब के आतंकी गुट ने एयर इंडिया के बोइंग 747-237B कनिष्क विमान को 31,000 फीट की ऊंचाई पर बम से उड़ा दिया गया था. इस विमान में सवार सभी 329 लोग मारे गए थे.
Om G Bhai Sab मित्रों आज शिवाजी जयंती है। 1303 इ. में मेवाड़ से महाराणा हम्मीर के चचेरे भाई सज्जन सिह कोल्हापुर चले गए थे। इन्ही की 18 व़ी पीढ़ी में छत्रपति शिवाजी महाराज पैदा हुए थे। ये सिसोदिया थे। सिसोदिया राजपूत वंश के कुलनायक महाराणा प्रताप के वंशज छत्रपति शिवाजी महाराज की आज जयंती है ... शूरवीरता के साक्षात अवतार लोकराज के पुरोधा छत्रपति शिवाजी महाराज के इस जन्मोत्सव पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनायें ----------------------- राज्याभिषेक सन् १६७४ तक शिवाजी ने उन सारे प्रदेशों पर अधिकार कर लिया था जो पुरन्दर की संधि के अन्तर्गत उन्हें मुगलों को देने पड़े थे। पश्चिमी महारष्ट्र में स्वतंत्र हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के बाद शिवाजी ने अपना राज्याभिषेक करना चाहा, परन्तु ब्राहमणों ने उनका घोर विरोध किया। शिवाजी के निजी सचीव बालाजी आव जी ने इसे एक चुनौती के रूप में लिया और उन्होंने ने काशी में गंगाभ नमक ब्राहमण के पास तीन दूतो को भेजा, किन्तु गंगा ने प्रस्ताव ठुकरा दिया क्योकि शिवाजी क्षत्रिय नहीं थे , उसने कहा की क्षत्रियता का प्रमाण लाओ तभी वह राज्याभ...
बालपन से 'आप कौन से राजपूत हैं 'का जवाब 'मैं सेंगर राजपूत हूँ 'कहते हैं तब मन में जिज्ञासा होती है कि सेंगर, राजपूत कौन हैं । जिनके हम वंशज हैं। मेरे मामाजी सेंगर हैं सो .... फिर मैंने राजपूतों विशेषकर सेंगर राजपूतों के उद्भव, विस्तार और वर्तमान को उपलब्ध साक्ष्यों, परम्पराओं, कुलधर्मिता, श्रुतियों, पौराणिक कथाओं और राजपूतों के उपलब्ध इतिहास को देखा, सुना,पढ़ा। फलतः मैंने इस राजवंश को त्रेतायुगीन श्रृंगी ऋषि से प्रारम्भ होकर आज सम्पूर्ण अविभाजित भारत व श्रीलंका तक विस्तारित पाया। चूँकि कोई क्रमबद्ध इतिहास सुलभ नहीं है अतः टूटी कड़ियों को जोड़ कर 'निश्चित रूप से ऐसा ही था 'वाला इतिहास नहीं बनाया जा सकता। लेकिन मुझे अपने प्रयास से बहुत ही आत्मसंतुष्टि मिली कि हमारी वंश परम्परा कुछ ऐसे ही यहाँ तक पहुँची है। आइए चलते हैं इस वंश यात्रा पर विहंगम दृष्टि डालने। क्षत्रिय कौन, फिर सेंगर क्षत्रिय कौन -- हमारे सनातन धर्म या जीवन पद्धति में स्वभावज गुणों से प्रेरित कर्मों के आधार पर मानव समाज को चार वर्णों; अर्थात ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र; में विभाजित किया गया है। ...
मेरे टिवीटर एकाउन्ट को अधिक से अधिक फोलो करके विचार अभियान को विस्तार प्रदान करें - अरविन्द सिसौदिया इसे फोलो करें - Arvind S Sisodia @ArvindSSisodia https://x.com/ArvindSSisodia ध्येय साधना अमर रहे। ध्येय साधना अमर रहे। अखिल जगत को पावन करती त्रस्त उरों में आशा भरती भारतीय सभ्यता सिखाती गंगा की चिर धार बहे। इससे प्रेरित होकर जन-जन करे निछावर निज तन-मन-धन पाले देशभक्ति का प्रिय प्रण अडिग लाख आघात सहे। भीती न हमको छू पाये स्वार्थ लालसा नहीं सताये शुद्ध ह्नदय ले बढते जायें धन्य-धन्य जग आप कहे। जीवन पुष्प चढा चरणों पर माँगे मातृभूमि से यह वर तेरा वैभव अमर रहे माँ। हम दिन चार रहें न रहे। ------------- English :- dhyeya sādhanā amara rahe | dhyeya sādhanā amara rahe | akhila jagata ko pāvana karatī trasta uroṁ meṁ āśā bharatī bhāratīya sabhyatā sikhātī gaṁgā kī cira dhāra bahe | isase prerita hokara jana-jana kare nichāvara nija tana-mana-dhana pāle deśabhakti kā priya praṇa aḍiga lākha āghāta sahe | bhītī na hamako chū pāye svārtha lāla...
ऑपइंडिया सरकार और नीतिसमाचार रिपोर्टराय लिंक को क्लिक करें हाई पवार कमेटी क्यों.. क्या देश पर भारी संकट है..? प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उच्च-स्तरीय जनसांख्यिकी मिशन के गठन की घोषणा के साथ, जानिए किन राज्यों में जनसांख्यिकीय परिवर्तन हो रहे हैं और इसका भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा। 15 अगस्त, 2025/ श्रद्धा पांडे लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को 'उच्च-स्तरीय जनसांख्यिकी मिशन' की शुरुआत की घोषणा की । पीएम मोदी ने सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय परिवर्तनों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। प्रधानमंत्री मोदी ने देश को चेतावनी देने में कोई कसर नहीं छोड़ी कि भारत की जनसांख्यिकीय संरचना को बदलने के लिए देश में एक सुनियोजित साजिश चल रही है। 79वें स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने घुसपैठियों के खिलाफ चेतावनी दी, जो भारतीय युवाओं की आजीविका को प्रभावित कर रहे हैं, बहनों और बेटियों को निशाना बना रहे हैं और जमीन हड़पने के लिए आदिवासी समुदायों को गुमराह कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मो...
तुमको कितनी बार.. जगाया तुमको कितनी बार तुमको कितनी बार...... जगाया तुमको कितनी बार वेदों का आदेश है ये..... गीता का उपदेश यही..... अर्जुन का संदेश यही है... चलते क्यों नहीं आज कृष्ण के..शिक्षा के अनुसार जगाया तुमको कितनी बार.......... राज बुद्ध ने छोड़ दिया था.... धन से नाता तोड़ दिया था..... स्नेहा योग से जोड़ दिया था..... धर्म चक्र के प्रवर्तको के भूल गए उपकार.... जगाया तुमको कितनी बार ........... शंकर ने जीवन दे डाला.... आत्म पतन से तुम्हें संभाला.... अंधकार में किया उजाला..... कुंभकर्ण की निद्रा से है अब करो ना फिर तुम्ह प्यार, जगाया तुमको कितनी बार ........... 80 घाव लगे थे तन में..... फिर भी व्यथा नहीं थी मन में... पानीपत के समरागण में..... तुम्हें बचाने को चमकी थी सांगा की तलवार... जगाया तुमको कितनी बार ........... शत्रु ह्रदय दहलाने वाला..... अकबर से पढ़ते ही पाला..... चमक उठाया था जिसका भाला.. उसे प्रताप के रण विक्रम को ... तुमने दिया बिसार... जगाया तुमको कितनी बार ........... विश्वविदीत शिव राजबली थे.... रण में कृष्ण सामान छली थे.... जीने के सब उद्योग फ्री थे.... सुनी नहीं क...
भगवान कृष्ण का जलवा पूजन भाद्रपद की परिवर्तिनी एकादशी को डोल ग्यारस है. इस दिन भगवान विष्णु नींद में करवट बदलते हैं। परिवर्तिनी एकादशी डोल ग्यारस, पद्मा एकादशी और जलझूलनी एकादशी के नाम से भी प्रसिद्ध है। इस दिन जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा-उपासना की जाती है। डोल ग्यारस व्रत का महत्व - मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत करने से वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य-फल मिलता है। इस दिन व्रत करने से रोग-दोष आदि से मुक्ति मिलती है। व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि व मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है। इस दिन दान-पुण्य करने से सौभाग्य में वृद्धि होती है। कृष्ण जन्माष्टमी के पश्चात् आने वाली एकादशी को डोल ग्यारस बोलते हैं। श्रीकृष्ण जन्म के 18वें दिन माता यशोदा ने उनका जल पूजन (घाट पूजन) किया था। इसी दिन को ’डोल ग्यारस’ के तौर पर मनाया जाता है। जलवा पूजन के पश्चात् ही संस्कारों का आरम्भ होता है। कहीं इसे सूरज पूजा बोलते हैं तो कहीं दश्टोन पूजा बोला जाता है। जलवा पूजन को कुआं पूजा भी बोला जाता है। इस ग्यारस को परिवर्तिनी एकादशी, जलझूलनी एकादशी, वामन एकादशी आदि के नाम...
मृत्यु के बाद जीवात्मा ( सूक्ष्म शरीर ) कहाँ जाती है और पुनर जन्म के पूर्व कहाँ रहती है , विज्ञान यहाँ मौन है || हिन्दू आध्यात्मवेत्ताओं नें जो अनुसन्धान किया है और हिन्दू विधि अपने पुरखों को जिस महत्वपूर्ण तरीके से याद रखती है उसका मिश्रित स्वरूप पितृ पक्ष है | मूल रूप से श्रद्धा का भाव ही आयोजन के रूप में श्राद्ध है | भारतीय देवत्व की व्यवस्था में, आगमन का श्री गणेश करते हुये चतुर्थी को गणेश जी आते हैं और चतुर्दशी को जाते है। इसके बाद 16 तिथियों तक पूर्वज आते हे। फिर माता रानी के नवरात्र का आगमन होता है। फिर दशहरा दीपावली !! एक क्रमबद्धता और वैज्ञानिकता - अरविन्द सिसोदिया 94141 80151 कोटा हिन्दू श्राद्ध पक्ष आश्विन के कृष्ण पक्ष (गुजरात-महाराष्ट्र के मुताबिक भाद्रपद) को हमारे हिन्दू धर्म में श्राद्ध पक्ष के रूप में मनाया जाता है। इसे महालय और पितृ पक्ष भी कहते हैं। श्राद्ध की महिमा एवं विधि का वर्णन विष्णु, वायु, वराह, मत्स्य आदि पुरा...
जनसंख्या असंतुलन के अध्ययन हेतु वह सब कुछ जो मूल पृष्ठ भूमि में है..... पूरा पढ़ने पर ही समझ आयेगा.... एक रिपोर्ट का लिंक है इसे खोल कर पढ़ें ======1====== प्रधानमंत्री [नरेंद्र मोदी] ने जनसंख्या असंतुलन (Demographic Imbalance) और अवैध घुसपैठ की यह गंभीर आशंका लाल किले की प्राचीर से ही देश के सामने रखी थी. 79वें स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त 2025) के अवसर पर लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए उन्होंने इस विषय पर कड़ा रुख अपनाया था: * लाल किले से दिया गया बयान: पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा था, "एक सोची-समझी साजिश के तहत देश की डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी) को बदला जा रहा है और एक नए संकट के बीज बोए जा रहे हैं". * घुसपैठियों पर प्रहार: उन्होंने आगाह किया कि घुसपैठिए देश के युवाओं की रोजी-रोटी छीन रहे हैं और सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा व सामाजिक स्थिरता के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं. * मिशन की घोषणा: इसी ऐतिहासिक संबोधन के दौरान उन्होंने देश में अप्राकृतिक जनसांख्यिकीय बदलावों से निपटने के लिए एक 'हाई-पावर्ड डेमोग्राफी मिशन' (High-Powered Demography Mission) शुरू कर...
श्री अनन्त चतुर्दशी महोत्सव - अरविन्द सीसौदिया भारतीय संस्कृति में निहित भक्ति एवं शक्ति का पर्व अनन्त चतुर्दशी महोत्सव, मूलतः दो प्रमुख पर्वों के मध्य मनाया जाता है। यह गणेश जी के जन्मोत्सव ‘गणेश चतुर्थी‘‘ से प्रारंभ हो कर ‘‘श्री अनन्त चतुर्दशी‘‘ तक के 10-11 दिन की अवधि में मनाया जाता है। इस दौरान गणेश चतुर्थी को घरों में गणेश जी की प्रतिमाओं तथा मोहल्लों में झांकियो की स्थापना होती है। नित्य प्रातः सायं पूजा अर्चना एवं आरती होती है, भक्ति संध्याएं आयोजित की जाती हैं तथा श्री अनन्त चतुर्दशी के दिन इन गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। अनेकानेक स्थानों पर यह विसर्जन शोभा यात्रा के रूप में सम्पन्न होता है। कोटा में भी इसी तरह श्री अनन्त चतुर्दशी महोत्सव आयोजन होता है एवं शोभा यात्रा के रूप में सम्पन्न होता है। श्री गणेश जन्मोत्सव ऐसा माना जाता है कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी (चौथ) को आदि शक्ति, पंच देवों में प्रथम पूज्य, गणपति का जन्म शिव-पार्वती की द्वितीय संतान के रूप में हुआ...
कैंसर का 'झाड़ा' और आस्था राजस्थान के व्याबर जिले में देवमाली गांव है। पारंपरिक उपचार: देवमाली में स्थित देवनारायण मंदिर में कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों के 'झाड़े' (पारंपरिक उपचार) के लिए देश-दुनिया से लोग आते हैं। कैंसर का ‘झाड़ा’ और आस्था देवमाली में परंपरा, विश्वास और आधुनिक चिकित्सा के बीच खड़ा सवाल राजस्थान के ब्यावर जिले में स्थित एक छोटा-सा गांव देवमाली आज देश-दुनिया में अपनी अनोखी आस्था के लिए जाना जाता है। अरावली की पहाड़ियों के बीच बसे इस गांव में स्थित देवनारायण मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यहां कैंसर, गंभीर बीमारियों और असाध्य रोगों के ‘झाड़े’ के लिए भी लोग दूर-दराज़ से पहुंचते हैं। आस्था का केंद्र: देवनारायण मंदिर देवनारायण भगवान को राजस्थान और गुजरात के कई समुदायों में लोकदेवता के रूप में पूजा जाता है। देवमाली स्थित मंदिर को उनका प्रमुख धाम माना जाता है। मान्यता है कि यहां की गई प्रार्थना और झाड़ा अनेक गंभीर बीमारियों से राहत दिला सकता है। मंदिर परिसर में रोज़ाना ऐसे मरीज देखे जा सकते हैं, जो कैंसर, लकवा, मानसिक रोग, त्वचा रोग और अन्य ज...
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें