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'मोदी के नेतृत्व में सुरक्षित है भारत' : परम पूज्य मोहन जी भागवत

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कानपुर : राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख परम पूज्य मोहन जी भागवत ने नरेंद्र मोदी सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत मोदी के नेतृत्व में सुरक्षित है. कानपुर में संघ की बैठक को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि सरकार के महत्वपूर्ण पदों पर स्वयं सेवक बैठे हैं इसलिए देश सुरक्षित हाथों में है. संघ प्रमुख की यह प्रशंसा ऐसे समय आई है जब यह बात चल रही है कि एफडीआई पर मोदी सरकार की सक्रियता स्वदेशी की विचारधारा से विपरीत जा रही है. बैठक में एक व्यवसायी के सवाल पर भागवत ने कहा सरकार में बैठे स्वयं सेवकों पर हमें पूरा भरोसा है धैर्य रखिए, जल्द ही परिणाम देखने को मिलेंगे. भागवत जी  ने आगे कहा कि वे मोदी से बहुत प्रभावित है. मोदी छोटे बच्चों में भी लोकप्रिय हैं. संघ प्रमुख ने वंचित वर्ग के लिए सेवा भारती के प्रसार पर भी जोर दिया. एक प्रश्न के उत्तर में भागवत पाठ्य पुस्तकों में बदलाव पर भी सहमत दिखे.उनके अनुसार बहुत समय से इस सुधार की जरूरत महसूस हो रही है. एनडीए सरकार की नीतियों का पूरी तरह से समर्थन करते हुए राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि इस समय भारत सुरक

शिक्षा के साथ विद्या का समन्वय लेकर चलें शिक्षक : परम पूज्य डॉ. मोहन जी भागवत

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नई दिल्ली, 24 जुलाई (इंविसंके)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के  परमपूज्य  सरसंघचालक डॉ . मोहन भागवत ने सिविक सेंटर स्थिति केदारनाथ साहनी आडिटोरियम में अखिल भारतीय ‘ शिक्षा भूषण ’ शिक्षक सम्मान समारोह में शिक्षकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि शिक्षा में परम्परा चलनी चाहिए , शिक्षक को शिक्षा व्यवस्था के साथ विद्या और संस्कारों की परम्परा को भी साथ लेकर चलना चाहिए। सभी विद्यालय अच्छी ही शिक्षा छात्रों को देते हैं फिर भी चोरी डकैती , अपराध आदि के समाचार आज टीवी और अखबारों में देखने को मिल रहे है। तो कमी कहां है ? सर्वप्रथम बच्चे मां फिर पिता बाद में अध्यापक के पास सीखते हैं। बच्चों के माता पिता के साथ अधिक समय रहने के कारण माता - पिता की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसके लिए पहले माता - पिता को शिक्षक की तरह बनना पड़ेगा साथ ही शिक्षक को भी छात्र की माता तथा पिता का भाव अंगीकार करना चाहिए। शिक्षा जगत में जो शिक्षा मिलती है उसको तय करने का विवेक शिक्षक में रहता है। शिक्षक को चली आ रही शिक्षा व्यवस्था के अतिरिक्त अपनी ओर से अलग से चरित्र निर्माण के संस्कार छात्रों में डालने पड़ेंगे। लेकिन यह भी सत्य