पोस्ट

अक्तूबर 25, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

तीस्ता सीतलवाड़ ने धार्मिक दुश्मनी फैलाई : HRD पैनल

चित्र
UPA सरकार में तीस्ता सीतलवाड़ ने धर्म-राजनीति को मिलाया, धार्मिक दुश्मनी फैलाई: HRD पैनल भाषा , नई दिल्ली | October 23, 2016 http://www.jansatta.com मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक पैनल ने दावा किया है कि तीस्ता सीतलवाड़ और उनके सबरंग ट्रस्ट ने उसे लगभग 1.4 करोड़ रुपए का अनुदान देने वाली संप्रग सरकार के लिए पाठ्यक्रम की सामग्री बनाने के दौरान ‘धर्म और राजनीति का घालमेल’ करने और दुर्भावना फैलाने की कोशिश की। समिति के निष्कर्षों को एक शीर्ष कानूनी अधिकारी का समर्थन प्राप्त है। समिति ने पाया कि प्रथम दृष्टया सीतलवाड़ के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए और 153बी के तहत धर्म आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने का और राष्ट्रीय अखंडता को लेकर पूर्वाग्रहों से ग्रसित आरोप लगाने एवं दावे करने का मामला बनता है। बताया जा रहा है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय को कानूनी अधिकारी की ओर से मिली राय में कहा गया है, ‘जांच समिति की रिपोर्ट व्यापक है और यह मामले के हर पहलू को देखती है और रिपोर्ट में कहा गया कदम उल्लंघनों की जिम्मेदारियां तय करने, दुर्भावना और घृणा फैलाने

हिन्दुत्व की व्याख्या नहीं : सुप्रीम कोर्ट

चित्र
न्याय का अधिकार यदि कोई यह सोचता हे की श्री राम जन्म भूमि मुक्ति धर्म का मामला हे तो वह गलत सोचता हे ! यह अन्याय के विरुद्ध शुद्ध रूप से न्याय के अधिकार का मामला हे  और न्याय प्राप्त करने के लिए सभी  लोकतान्त्रिक रास्ते अपनाने के लिए श्री राम जन्म भूमि मुक्ति के  लिए आंदोलित लोगों  का अधिकार है ! जिस तरह स्वतन्त्रता प्राप्ति का अधिकार था ठीक उसी प्रकार श्री राम जन्म भूमि को अपनी मुक्ति ( स्वतंत्रता ) प्राप्त करनी है । इस हेतु  लोकतान्त्रिक रास्ते कोई भी कैसे रोक सकतें  है । - अरविन्द सिसोदिया , कोटा राजस्थान । कथित सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ पत्नी जावेद आनंद  ने 1995 में आए फैसले पर दोबारा विचार की दरख्वास्त की। उनकी मांग थी चुनाव में राजनीतिक पार्टियों को ‘हिंदुत्व’ के नाम पर वोट मांगने से रोका जाए। हिन्दुत्व की व्याख्या पर कोर्ट नहीं करेगा विचार Publish Date:Tue, 25 Oct 2016 http://www.jagran.com जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। धर्म के आधार पर वोट की अपील करने की मनाही के कानूनी दायरे पर विचार कर रही सात न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने मंगलवार को एक बार फिर साफ किया