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महाराणा प्रताप से अकबर की तुलना बर्दास्त नहीं होगी - अरविन्द सिसौदिया

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हिन्दू धर्म और राष्ट्रीयता – शंकर शरण

हिन्दू धर्म और राष्ट्रीयता – शंकर शरण द्वारा एक व्याख्यान जनवरी 8, 2018 भारतीय इतिहास का पुनर्लेखन https://indictales.com/hi समय बदल गया है, समय की मांग बदल गयी है,और जो नयी पीढ़ी आती है वह स्वयं सबकुछ तय नहीं करती; बहुत सी चीजे उसको बनी-बनायीं मिलती है | यह जो कैरियर ओरिएंटेडनेस का आज कासमय है, उसमेपढ़ना-लिखनाएक तरह से कम हो गया है|सबकुछ रेडीमेड, जल्दी, गूगल से मिल जाये, नेट से मिल जाये,उससे कम चल जाये – यह परंपरा बन गयी है और उसी में जो लोग सिद्धहस्त है,उनको ही सफलमाना जाता है |लेकिन जिस तरह के राष्ट्रवादी वातावरण में आपका संस्थानमुझे दिखाई पढ़ता है, और जिस तरह के परम्पराएं इस संस्थान ने बनाई हुई है,उसमे मुझे लगता है की आपको थोड़ी अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए | क्यूंकि भारत एक अनूठा देश है | अपने सभ्यता की दृष्टि से भी अनूठा है,और विश्व में आज भारत का जो स्थान है,अच्छा भी और कठिन भी – वह दोनों ही दृष्टिसेपहले आपको समझ के रखना चाहिए | आजआप युवा है,काल आप प्रोफेशन में जायेंगे, काम करेंगे, तो आपको यह चेतना होनी चाहिए की इस पुरे एक्सिस्टेंस में विश्व के परिदृश्य में आप, आपका देश, ...

नोट बंदी की 101 उपलब्धियां

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नोट बंदी की 101 उपलब्धियां  नोट बंदी देश का पुर्नउद्धार है, इसके बाद जमाखोरी लगभग खत्म हुई है। गरीबों के कल्याण की योजनाओं के लिये पैसा आया है। मंहगाई पर नियंत्रण हुआ है। बिना हिसाब किताब का पैसा बाजार से खत्म हुआ है। टैक्स वास्तविक रूप में मिलने लगा हे। टैक्स चोरी खत्म हुई है। उत्तरप्रदेश में प्रचण्ड बहूमत नोट बंदी के बाद ही भाजपा को मिला था। 01- नोटबंदी के बाद 16.6 खरब नोट सिस्टम में वापस आ गए। 16 हजार करोड़ रुपये को छोड़कर सभी कैश बैंक में जमा हो जाने से बिना हिसाब वाले पैसों का पता चला। 02- अधिकतर कैश के बैंकिंग सिस्टम आने से इस पैसे को कानूनी दर्जा मिला और नोटबंदी अवैध धन रखने वालों के खिलाफ एक्शन लेने का एक जरिया बना है। 03- कासा यानी चालू खाता, बचत खाता जमाओं में कम से कम 2.50-3.00 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 04- मुद्रा बाजार की ब्याज दरों में गिरावट हुई और म्युचुअल फंडों के साथ बीमा क्षेत्र में धन का प्रवाह बढ़ा। 05- आयकर विभाग ने संदिग्ध लेन-देन को लेकर 517 नोटिस जारी किए थे, जिसके बाद 1833 करोड़ रुपये की 541 संपत्तियां जब्त की गई। 06- नोटबंदी के बाद 17.73 लाख संदिग्‍...

हाथी को चींटी ने पछाड़ा : खबरों से खिलवाड़

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हाथी को चींटी ने पछाड़ा  आज चैनली मिडिया में कुछ चैनल इस तरह खबरों को परोस रहे हैं कि सच हाथी की तरह वजनदार हो कर भी झूठ रुपी चींटी से परास्त हो गया | इसके लिया कुछ चैनलों का  व्यवहार / लक्ष्य  -  हिंदुत्व को किसी भी तरह नीचा दिखाओ , उसे अपमानित करो , हिन्दू समाज में विभाजन करो , देश का बुरा करने वालोँ पक्ष लो , मदद करो की नीति का है | कुछ चैनलों के कारण सम्पूर्ण मिडिया के प्रति अविश्वास फैलता जा रहा हे | ------ खबरों से खिलवाड़ : पांचजन्य से साभार ...... दिनांक 24-अप्रैल-2018 सत्य को न देखने के कारण यह संसार जला है, इस समय जल रहा है और जलेगा। — अश्वघोष (सौंदरनंद 16/43) संस्कृत की प्रख्यात उक्ति है- अति सर्वत्र वर्जयेत्।          यानी किसी भी चीज की अधिकता बुरी है। यदि यह कसौटी खबरों पर लागू करें तो पाएंगे कि आजकल हम सूचनाओं की बमबारी से त्रस्त हैं। दिनभर जैसी कच्ची-पक्की, सच्ची-झूठी, नफरत या राजनैतिक एजेंडे में पगी खबरों की बमवर्षा होती है उसमें खबरों की छंटाई लगता है बीते दिनों की बात हो गई है...

डाटा चोरी की राजनैतिक चोर बाजारी

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डाटा चोरी की राजनैतिक  चोर बाजारी  विश्वास पर घात  दिनांक ०२-अप्रैल-२०१८ कांग्रेस ने 2014 के लोकसभा चुनावों में कैम्ब्रिज एनालिटिका की सेवाएं ली थीं, जबकि उसके एक कर्मचारी डैन मर्सीन ने किसी एनआरआई से कांग्रेस को ही हराने के पैसे ले लिए। गौरतलब है कि डैन मर्सीन 2012 में केन्या के नैरोबी स्थित एक होटल में मृत पाए गए थे। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस व्यक्ति की मृत्यु 2012 में हो गई, वह दो साल बाद हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के हारने की वजह कैसे बन सकता है? सवाल यह भी उठता है कि जब फेसबुक के डाटा लीक के खुलासे से पहले मीडिया कांग्रेस और कैम्ब्रिज एनालिटिका में अगले चुनाव के लिए हो रही बातचीत की खबरें छाप रहा था, तब कांग्रेस कहां सो रही थी? कहीं ऐसा तो नहीं कि तब कांग्रेस को कैम्ब्रिज एनालिटिका से जुड़ने की खबरें रास आ रही थीं? उसे लग रहा था कि इससे देश में माहौल तैयार करने में मदद मिलेगी अरविंद शरण   फेसबुक प्लेटफॉर्म पर अवैध डाटा खुदाई और तमाम गैरकानूनी हथकंडों से अमेरिका समेत कई देशों की राजनीतिक सत्ता का स्वरूप तय करने के विश्वव्या...