सोमवार, 30 जून 2014

प्याज की जमाखोरी पर शिकंजा कसें राज्य सरकारें : केंद्र सरकार



प्याज की खुदरा जमाखोरी पर शिकंजा कसें राज्य : केंद्र
Monday,Jun 30,2014
नई दिल्ली। प्याज के थोक व खुदरा मूल्यों में भारी अंतर से हैरान केंद्र सरकार ने राज्यों से खुदरा व्यापारियों की जमाखोरी के खिलाफ अभियान चलाकर सख्त कार्रंवाई करने को कहा है। केंद्रीय उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने महंगाई के खिलाफ राज्यों के उठाए कदमों को नाकाफी व असंतोषजनक बताया है। इसके लिए राज्यों को एक और पत्र लिखकर प्याज की जमाखोरी व कालाबाजारी करने वाले थोक व खुदरा व्यापारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने को कहा जाएगा।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की थोक मंडियों में प्याज के थोक मूल्य 18 रुपये किलो हैं तो खुदरा में यही प्याज 25 से 30 रुपये किलो बिक रहा है। थोक व खुदरा मूल्यों के अंतर को लेकर केंद्र सरकार बेहद गंभीर है। उपभोक्ता मामले मंत्रालय के सचिव केशव देसीराजू ने कहा, पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद कीमतों में होने वाली वृद्धि की कोई वजह नहीं है। प्याज की दैनिक आपूर्ति कहीं भी बाधित नहीं है। मंडियों में प्याज की कीमतों पर सरकार की कड़ी नजर है।
देसीराजू के मुताबिक, इसीलिए राज्य सरकारों से महंगाई बढ़ाने वाले कारकों पर लगातार नजर रखने और ऐसे लोगों पर सख्ती बरतने का अनुरोध किया जाता रहा है। छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और दिल्ली ने केंद्र सरकार से प्याज की स्टॉक सीमा बढ़ाने की अनुमति मांगी है, ताकि जमाखोरों पर शिकंजा कसा सके। उनके प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। जल्दी ही उन्हें अनुमति दे दी जाएगी। गुजरात व तमिलनाडु में छापेमारी की सबसे अधिक कार्रवाई की गई है। यहां के जमाखोरों व कालाबाजारी करने वालों पर मुकदमे भी ठोके गए हैं। कमजोर मानसून को देखते हुए महंगाई बढ़ाने वाली ताकतें सक्रिय हो गई हैं, जबकि प्याज की आपूर्ति पिछले साल के इन्हीं महीनों के मुकाबले कहीं अधिक है।
महाराष्ट्र की मंडियों में 40
फीसद बढ़े प्याज के दाम
नई दिल्ली। महाराष्ट्र में देश की सबसे बड़ी प्याज मंडी लासलगांव में प्याज के दाम पिछले दो हफ्ते में 40 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 18.50 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। प्याज उत्पादक क्षेत्र से जुड़ी इस मंडी के भावों का असर देश के अन्य शहरों पर साफ दिखाई देने लगा है, जिसने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। दामों पर अंकुश रखने के लिए प्याज का न्यूनतम निर्यात मूल्य 300 डॉलर प्रति टन तय किए जाने का भी असर नहीं दिखाई पड़ रहा है।
नेशनल हॉर्टिकल्चरल रिसर्च एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन के निदेशक आरपी गुप्ता के मुताबिक, कमजोर मानसून की आशंका के कारण खरीफ में प्याज की फसल प्रभावित होने के अनुमान और सट्टाखोरी ने दाम बढ़ाए हैं। नाशिक में लासलगांव में दाम बढ़ने का असर दिल्ली की आजादपुर मंडी में भी दिखाई दिया। यहां दाम 25 रुपये प्रति किलो तक जा पहुंचे हैं। इसके अलावा चंडीगढ़ और मुंबई जैसे शहरों में भी दाम बढ़े हैं।
गुप्ता का कहना है कि एक माह में लसलगांव में प्याज के दाम 90 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं। प्याज सिर्फ सूखे की आशंका के कारण ही महंगा हुआ है, जबकि इसकी आपूर्ति में कहीं कोई कमी नहीं है। देश में रबी का करीब 39 लाख टन प्याज स्टॉक है।

राज्यपाल एम के नारायणन ने दिया इस्तीफा



पश्चिम बंगाल के राज्यपाल एमके नारायणन ने दिया इस्तीफा
Monday, 30 June 2014
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल एम. के. नारायणन ने आज इस्तीफा दे दिया। राजग सरकार के गठन के बाद संप्रग सरकार के समय नियुक्त कुछ राज्यपालों को हटाए जाने का दबाव बनने के पश्चात वह इस्तीफा देने वाले चौथे राज्यपाल हैं। गृह मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि नारायणन ने राज्यपाल पद से इस्तीफा दे दिया है।
सीबीआई ने हाल ही में नारायणन से बतौर ‘गवाह’ के रूप में अगस्तावेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर सौदे के बारे में पूछताछ की है।
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नयी राजग सरकार बनने के बाद केंद्रीय गृह सचिव अनिल गोस्वामी ने कुछ सप्ताह पहले ऐसे कुछ राज्यपालों को फोन करके इस्तीफा देने को कहा था, जिनकी नियुक्तियां संप्रग शासन में हुई थीं।
पिछले कुछ दिनों में नगालैंड के राज्यपाल अश्विनी कुमार, उत्तर प्रदेश के बी. एल.जोशी और छत्तीसगढ़ के शेखर दत्त इस्तीफा दे चुके हैं।
पूर्व आईपीएस अधिकारी नारायणन खुफिया ब्यूरो के निदेशक और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रह चुके हैं। उन्हें जनवरी 2010 में पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनाया गया था।
राजग सरकार बनने के बाद जिन राज्यपालों ने अभी तक इस्तीफा दिया है वे आईपीएस या आईएएस अधिकारी रह चुके हैं। नारायणन, जोशी और कुमार पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं तो दत्त पूर्व आईएएस अधिकारी हैं।
सूत्रों ने बताया कि सरकार लगभग 10 राज्यों में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को राज्यपाल के तौर पर नियुक्त करने पर विचार कर रही है।
(भाषा)

'डिजिटल इंडिया विजन एक-दूसरे से जुड़े 125 करोड़ भारतीयों की शक्ति है - मोदी




 फिल्म 'ग्रैविटी' से भी सस्ता है भारत का मंगल मिशन: मोदी
एजेंसियां | Jun 30, 2014, श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश)

पीएसएलवी सी-23 के जरिए चार देशों के पांच सैटलाइटों के अंतरिक्ष में सफल प्रक्षेपण पर इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह हर भारतीय के लिए आनंदित और गौरवान्वित होने का क्षण है। प्रक्षेपण के दौरान श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में मौजूद पीएम ने कहा कि विदेशी सैटलाइटों के प्रक्षेपण से अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारतीय क्षमता की वैश्विक पुष्टि हुई है। उन्होंने अंतरिक्ष वैज्ञानिकों से एक सार्क सैटलाइट विकसित करने की अपील की।

अमूमन हिन्दी में बोलने वाले मोदी ने यहां अंग्रेजी में भाषण देते हुए भारतीय स्पेस टेक्नॉलजी के सस्ता और विश्वसनीय होने का उल्लेख विशेष तौर पर किया। उन्होंने कहा कि हमारा मंगल मिशन हॉलिवुड की फिल्म 'ग्रैविटी' से सस्ता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि हमें गर्व है कि हमारा कार्यक्रम स्वदेशी है। वैज्ञानिकों की पीढ़ियों ने भारत को आत्मनिर्भर अंतरिक्ष शक्ति बनाने के लिए बहु
त काम किया है।

3 डी फिल्म 'ग्रैविटी' हादसे की वजह से अंतरिक्ष में फंसे दो अंतरिक्ष यात्रियों की कहानी है। बताया जाता है कि इस फिल्म को बनाने में 10 करोड़ डॉलर खर्च हुए थे। पिछले साल 13 नवंबर को मंगलायन के प्रक्षेपण के बाद 'न्यू यॉर्क टाइम्स' ने लिखा था कि भारत का मंगल मिशन 7.5 करोड़ डॉलर का है, जो फिल्म 'ग्रैविटी' के बजट का तीन-चौथाई है। 18 नवंबर को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने मेवन नामक अंतरिक्ष यान मंगल के मिशन पर भेजा था। इसकी लागत 67.1 करोड़ डॉलर बताई गई थी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि डिजिटल भारत के लक्ष्य को पूरा करने में टेक्नॉलजी की महत्वपूर्ण भूमिका है। मोदी ने कहा, 'डिजिटल इंडिया विजन एक-दूसरे से जुड़े 125 करोड़ भारतीयों की शक्ति है। इस तरह की तकनीक मूल रूप से आम आदमी से जुड़ी हुई है। बदवाव के एजेंट के रूप में यह सशक्त और कनेक्ट कर सकती है। आपने लैब में जो साधना की है, उसमें करोड़ों लोगों की जिंदगी बदलने की शक्ति है। हमारे पूर्वजों ने अन्य से पहले ही शून्य की कल्पना कर ली थी।'

मोदी ने कहा, 'हमारा अंतरिक्ष कार्यक्रम शक्तिशाली होने की इच्छा के बजाय मानवता की सेवा से प्रेरित है।' उन्होंने कहा कि स्पेस टेक्नॉलजी त्रासदी के समय काफी मददगार होती है और इससे अनगिनत लोगों की जिंदगी बचाई गई है। इससे जमीनों के प्रबंधन में भी सुधार हो रहा है और बंजर भूमि की पहचान करके उत्पादक बनाने में मदद मिल रही है।

मोदी सरकार ने, काला धन वापस लाने की मुहिम तेज की



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मोदी सरकार की , काला धन वापस लाने की मुहिम तेज

स्विट्जरलैंड के बैंकों में जमा काले धन की वापसी के लिए केंद्र सरकार एक बार फिर से सक्रिय हो गई है।
काले धन के खिलाफ अपने अभियान को तेज करते हुए केंद्र सरकार ने स्विट्जरलैंड की सरकार से वहां के बैंकों में भारतीयों के जमा धन के बारे में जानकारी मांगी है। ताजा अनुरोध वित्त मंत्रालय की ओर से किया गया है।
ऐसा स्विट्जरलैंड सरकार की ओर से काले धन के मामले में भारत सरकार के साथ हर तरह के सहयोग की बात दोहराने के बाद किया गया।
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केंद्र ने लिखी चिट्ठी
वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, "इस संबंध में स्विट्जरलैंड की सरकार को चिट्ठी लिखकर जानकारी मांगी गई है।"
पत्र में द्विपक्षीय समझौतों और अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए भारत सरकार ने स्विस सरकार से वहां के बैंकों में काला धन जमा करने वाले अपने नागरिकों के नाम और अन्य जानकारियां उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।

इस मामले में खुद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था, "विदेश में जमा काले धन को भारत लाने के लिए सरकार गंभीर है। इस पत्र में दोनों देशों के बीच हुए समझौतों और अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल का हवाला देकर स्विट्जरलैंड के बैंकों, उनमें भारतीय नागरिकों व कंपनियों की ओर से टैक्स चोरी कर जमा किए गए काले धन के बारे में जानकारी मांगी गई है।"
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स्विट्जरलैंड का सकारात्मक रुख
स्विट्जरलैंड के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मामलों के सचिवालय, एसआईएफ के प्रवक्ता के मुताबिक काले धन से जुड़ी जानकारी साझा करने के मामले में स्विस अधिकारी भारतीय अधिकारियों से संपर्क बनाए हुए हैं।
स्विस अधिकारियों ने बीते दिनों खाताधारकों का नाम और अन्य जानकारियां साझा करने के प्रति सकारात्मक रुख अपनाने का संकेत दिया था। इसलिए नई सरकार इस अवसर का लाभ उठाना चाहती है।
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काले धन को सफेद बनाने की कवायद तेज
स्विस बैंकों में रखे काले धन को छिपाने की कवायद भी शुरू हो गई है। अब सोने से लेकर हीरे और शेयरों के कारोबार के अलावा बिटकॉयन के रूप में भी काले धन को छिपाने की कोशिश चल रही है। यही वजह है कि हाल के दिनों में भारत स्विस सोने के निर्यात का सबसे बड़ा बाजार बन कर उभरा है।
जटिल फंडों को जरिये शेयर बाजार में कारोबार को अंजाम देकर और बिटकॉयन जैसी वर्चुअल करंसी का इस्तेमाल फंड ट्रांसफर में किया जा रहा है। इस तरह काले धन को छिपाने या इसे इधर-उधर करने की कोशिश हो रही है।
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स्विस बैंकों से काला धन निकाल यहां छिपा रहे लोग!
एसआईटी ने जांच एजेंसियों से ब्योरा मांगा
काले धन पर बने विशेष जांच दल (एसआईटी) ने जांच एजेंसियों से टैक्स चोरी और वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़ा ब्योरा मंगाया है।
इसके साथ ही उन्होंने जांच की स्थिति के बारे में भी जानकारी मांगी है। उनसे यह भी पूछा गया है कि क्या जांच करने के दौरान उन्हें मामले को आगे बढ़ा कर मुकदमे और जुर्माने तक ले जाने में कोई कठिनाई हो रही है। ये विभाग जल्द ही काले धन से जुड़े अपने आंकड़े एसआईटी को मुहैया कराएंगे।