कांग्रेस की हार का कारण : शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी से मिलना - कांग्रेस सांसद मौलाना असरारुल हक




सोनिया-बुखारी की मुलाकात से हुई दुर्गतिः मौलाना हक


हार को लेकर सोनिया पर सवाल
टाइम्स न्यूज नेटवर्क | Jun 2, 2014
नई दिल्ली/मुंबई
लोकसभा चुनाव में करारी हार पर राहुल गांधी के बाद अब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ भी पार्टी के अंदर विरोध के सुर सुनाई देने लगे हैं। बिहार के किशनगंज से कांग्रेस सांसद मौलाना असरारुल हक ने चुनाव के दौरान सोनिया गांधी के जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी से मिलने को पार्टी की हार का एक बड़ा कारण बताया है। हक के मुताबिक सोनिया गांधी को यह नहीं करना चाहिए था।
काग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने भी कहा, 'मैं हमेशा से इमाम बुखारी को सांप्रदायिक विचारधारा का व्यक्ति मानता रहा हूं, क्योंकि उन्होंने 2004 में अटल बिहारी वाजपेयी के पक्ष में फतवा दिया था। मैं उन्हें सेक्युलर शख्स नहीं मानता हूं।'

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के मेंबर और बिहार से दो बार के सांसद हक ने हमारे सहयोगी अखबार 'इकनॉमिक टाइम्स' से कहा, 'सोनिया गांधी को चुनाव से पहले शाही इमाम से नहीं मिलना चाहिए था। इसका मतदाताओं तक गलत संदेश गया।' बकौल हक, 'अगर आप कोई अपील जारी करना चाहते थे, तो सबके लिए करते। एक खास वर्ग के लिए नहीं करते। शाही इमाम से मिलने की कोशिश हमारे खिलाफ गई। '

गौरतलब है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अप्रैल में शाही इमाम बुखारी से मुलाकात की थी। बुखारी ने इस मुलाकात के बाद कहा था कि सोनिया ने उनसे कहा है कि सेक्युलर वोट बंटने न पाए। उन्होंने 'सेक्युलर वोटों' के लिए अपील भी जारी की थी। बीजेपी ने सोनिया-बुखारी की मुलाकात को चुनावी मुद्दा बनाते हुए कांग्रेस पर जमकर हमला किया था। मोदी ने इसे घोर सांप्रदायिक अपील बताते हुए सोनिया गांधी पर हमला बोला था।

हक ने माना कि लोकसभा चुनाव में बीजेपी विकास ने नाम पर युवाओं के वोट झटकने में सफल रही। उन्होंने कहा, 'चीजें अब बदल गई हैं। अगर आप काम करेंगे, तो जीतेंगे। अगर काम नहीं करेंगे, तो हारेंगे।'

गौरतलब है कि इससे पहले केरल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री टी. एच. मुस्तफा और राजस्थान के विधायक भंवर लाल ने पार्टी की हार के लिए राहुल गांधी को जिम्मेदार ठहराते हुए उन्हें 'जोकर' कह डाला था। दोनों को पार्टी से निलंबन के रूप में इसका खामियाजा भुगतना पड़ा था।
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सोनिया से मिलने वाले शाही इमाम को दिग्विजय ने बताया सांप्रदायिक
By  एजेंसी  सोमवार, ०२ जून २०१४

नई दिल्ली: चुनाव में करारी हार के बाद गांधी परिवार पर पार्टी के अंदर से हमला थमने का नाम नहीं ले रहा है. राहुल गांधी पर पार्टी के कई नेताओं के हमले के बाद अब तो कांग्रेस के एक सांसद ने सोनिया गांधी पर सवाल उठाए हैं.
इकनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक बिहार के किशनगंज से जीते कांग्रेस सांसद मौलाना असरारुल हक ने कहा है कि सोनिया गांधी को चुनाव के पहले दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम से नहीं मिलना चाहिए था. इसका मतदाताओं में गलत संदेश गया. कांग्रेस के सांसद मौलाना असरारुल हक के मुताबिक अगर आप कोई अपील जारी करना चाहते थे तो सबके लिए करते, एक खास वर्ग के लिए नहीं करना चाहिए था.

जब असरारुल हक ने कांग्रेस आलाकमान के फैसले पर जुबान खोली तो कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने लगे हाथों शाही इमाम अहमद बुखारी को निशाने पर ले लिया.

दिग्विजय ने कहा, "मैं शाही इमाम को स्कुलर शख्स नहीं मानता, वे सांप्रदायिक हैं. इन्होंने 2004 में वाजपेयी के समर्थन में एलान किया था."

दिग्विजय के इस बयान पर शाही इमाम की प्रतिक्रिया का इंतज़ार है.

असरारुल हक का बयान
असरारुल हक मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के सदस्य हैं. हक ने ET से कहा जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी से सोनिया गांधी की मुलाकात के बाद ये कोशिश हमारे खिलाफ गई जिसमें उम्मीद की गई थी कि सेक्युलर वोट बंटने न पाए.
असरारुल हक ने इकनॉमिक टाइम्स से कहा, 'कि पार्टी को सेक्युलरिज्म के बजाय विकास पर चुनाव लड़ना चाहिए था. हक ने कहा कि अगर मोदी देश को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाते हैं तो उनकी पार्टी सकारात्मक सहयोग देगी. लेकिन हम धारा 370 और समान नागरिक संहिता पर पीएम मोदी की नीतियों का समर्थन नहीं कर सकते.'

असरारुल हक चौथे बड़े नेता हैं जिन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं. इसके पहले मिलिंद देवड़ा, केरल कांग्रेस के नेता टीएच मुस्तफा और राजस्थान के विधायक भंवरलाल शर्मा ने राहुल गांधी पर सवाल उठाए हैं. मिलिंद देवड़ा ने तो अपनी बात पर सफाई दे दी थी लेकिन भंवरलाल शर्मा और मुस्तफा को कांग्रेस से सस्पेंड किए जा चुके हैं.

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