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जनवरी 29, 2011 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

गांधीजी को बचाया जा सकता था ....

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- अरविन्द सीसोदिया  भारत की जिस महान आत्मा ने स्वतंत्रता के  महान संघर्ष का नेत्रत्व किया उसका नाम मोहनदास  करमचंद  गांधी था ! इस महान व्यक्तित्व नें रघुपति राघव राजा राम से लेकर हे राम तक के सफ़र में हमेशा हिन्दू मूल्यों को जिया और उनके महान असर से विश्व को परचित  करवाया ..! राष्ट्रपिता महात्मा  गांधी  की हत्या एक ऐसा सन्दर्भ  है जो कई प्रश्न खड़े करता है ??  उनकी सुरक्षा में कौताही क्यों बरती गई ????? यह बात स्वीकार नहीं की जा सकती  की गांधी जी ने यह नहीं करने दिया या वह नहीं करने दिया !! जिस दिन देश का गृह मंत्री कुशलक्षेम पूछ कर जाये , उसके कुछ घंटों में ही उसकी हत्या हो जाये ? यह एक एतिहासिक प्रश्न है !! गांधी वध के मूलमें .... * गांधी जी विभाजन के पक्ष में नहीं थे मगर उनके  करीबी सहयोगियों ने बंटवारे को एक सर्वोत्तम उपाय के रूप में स्वीकार इसलिए कर लिया था की उनके हाथ में सत्ता आनीं तय था ! नेहरु व सरदार पटेल ने गांधी जी को समझाने का प्रयास किया कि नागरिक अशांति वाले युद्ध और आराजकता को रोकने का यही एक उपाय है। मज़बूर गांधी ने अपनी अनुमति दे दी।  * १९४७ के (Indo-Pakistani War o

भगवद गीता के उपदेशों का ऋणी हूँ-गाँधी

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- अरविन्द सीसोदिया  महात्मा गाँधी का जन्म हिंदू धर्म में हुआ, उनके पूरे  जीवन में अधिकतर सिधान्तों की उत्पति हिंदुत्व से ही हुई ,  साधारण हिंदू कि तरह वे सारे धर्मों को समान रूप से आदर करते  थे और सारे प्रयासों जो उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए कोशिश किए जा रहे थे उसे उन्होंने अस्वीकार किया. वे ब्रह्मज्ञान के जानकार थे और सभी प्रमुख धर्मो को विस्तार से पढ़तें थे. उन्होंने हिंदू धर्म के बारे में  कहा है.हिंदू धर्म के बारें में जितना मैं जानता हूँ यह मेरी आत्मा को संतुष्ट करता है |  और सारी कमियों को दूर  करता   है जब मुझे संदेह घेर लेता  है, जब निराशा मुझे घूरने लगती है और जब मुझे आशा की कोई किरण नजर नही आती है, तब मैं भगवद् गीता को पढ़ लेता हूँ और तब मेरे मन को असीम शान्ति मिलती है और तुंरत ही मेरे चेहरे से निराशा के बादल छंट जातें हैं और मैं खुश हो जाता हूँ.मेरा पुरा जीवन त्रासदियों से भरा है और यदि वो दृश्यात्मक और अमिट प्रभाव मुझ पर नही छोड़ता, मैं इसके लिए भगवद गीता के उपदेशों का ऋणी हूँ. गाँधी ने भगवद गीता की व्याख्या गुजराती में भी की है.महादेव देसाई ने गुजराती पाण्डुलिपि का अत

गांधी जी ने गिनाए , सात सामाजिक पाप

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- अरविन्द सीसोदिया वर्तमान भारतीय राजनीति का मूल स्त्रोत स्वतंत्रता के आन्दोलन के दौरान उपजा कांग्रेस नामक दल ही बना जो आज तमाम सिद्धांतों  और नैतिकताओं को छोड़ चुका है और उसी के प्रभाव से भारत की तमाम राजनीति भी दूषित हुई..! सामाजिक न्याय के रास्ते में जो अनैतिक्तायें आती हैं , उन्हें गांधीजी ने सात सामाजिक पाप के नाम से समय रहते गिनाया था !  वे जो आज भी प्रासंगिक हैं जिनकी आज भी उपयोगिता है ..! नीचे उन्हें दिया जा रहा है ..! महात्मा गांधी ही पुन्य तिथि पर इनका अनुशरण भारतीय राजनीति करे तो यह बापू को सबसे बड़ी श्रधांजलि होगी !  मोहनदास करमचंद गांधी (2 अक्तूबर 1869 - 30 जनवरी1948) भारत एवं भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे। सत्‍य के मूल्‍यों की सार्थकता और अहिंसा को महात्‍मा गांधी द्वारा दशकों पहले आरंभ किया गया और ये मान्‍यताएं आज भी सत्‍य हैं। विभिन्‍न संस्‍कृतियों और धर्मों के आदर से हम एक दूसरे की बात सुनें, आपस में बोलें और सभी की प्रशंसा करें। एक अनोखी लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था वह है जहां प्रत्‍येक के लिए चिंता, प्रमुख रूप से निर्धनों, महिलाओं