गंगा , गंगोत्री और गोमुख





गंगोत्री



गोमुख : उदगम

 
गंगा : प्रारंभ में 

परम पवित्र माता गंगा का उद्गगम गंगौत्री से माना जाता है।
बहुत ही छोटी सी यह धारा,चलते चलते गंगासागर के रूप में विशाल हो कर
बंगाल की खाडी में समुद्र में मिल जाती है।
श्रद्धा, सौहार्द व रोमांच का त्रिवेणी संगम: गंगोत्री
गंगोत्री
गंगा के वेग से कलकल करती, वर्फ की सफेद चादरों से लिपटी, ऊचे- ऊचे पर्वतों के दृश्यों से सराबोर कर देने वाली भूमि गंगोत्री जिसे उत्तराखंड के चार धामां से एक जाना जाता है, जो ना सिर्फ हिन्दुओं की एक पावन तीर्थस्थली है बल्कि प्रकृति व पर्यटन में रूचि रखने वालों के लिए यात्रा का एक गंतव्य भी।
गंगा
समुद्र तल से 3140 किलो मीटर की ऊंचाई पर स्थित गंगोत्री ही वह स्थल है, जहां से देश की सबसे लम्बी व हिन्दुओं की पावन नदी मां गंगा का उद्गम हुआ यह उद्गम स्रोत स्थिति है गंगोत्री से 18 किमी दूर गोमुख ग्लेश्यिर में। पुराणों में ऐसा वर्णित है कि यह धारा कैलाश से शिवजी की जटाओं से निकलती है, और वहां से गंगोत्री तक सैकड़ों मील का रास्ता तय करके पहंचती है। यहां पर तपस्या कर भागीरथ गंगा को पृथ्वी पर लाये थे। इसीलिये इसे भागीरथी नाम से भी जाना जाता है। 
उदगम स्रोत गोमुख
भागीरथी यहां से उत्तर दिशा की ओर बहती है, इसलिये इस स्थान का नाम गंगोत्री पड़ा। यहॉ तीर्थालु गंगा किनारे बने गंगा माता के मंदिर के दर्शन करते हैं कुछ साहसी यात्री जो गंगा के वास्तविक उदगम स्रोत  को देखना चाहते हैं उन्हें गोमुख तक 18 किमी की पदयात्रा करनी पड़ती है हालांकि घोड़े खच्चर करके भी जाया जा सकता है किंतु यह घोड़े भोजवासा तक ही जाते हैं उसके आगे 6 किमी की रास्ता पैदल ही पार करना पड़ता है। आगे का मार्ग अत्यंत ही जोखिम भरा है। बड़ी बड़ी चट्टानों व उनपर कहीं कहीं जमी हुई वर्फ के बीच रास्ता अपने आप बनाना पड़ता है।

टिप्पणियाँ

  1. गंगोत्री धाम का इतिहास पढ़ने में बहुत मजा आया। अधिक जानकारी के लिए आप इसे भी देख सकते है गंगोत्री धाम

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