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Photo RSS Ex Chif Sudarshan ji पूर्व सरसंघचालक सुदर्शनजी को अंतिम प्रणाम

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नागपुर ,  दि.  16 :  ढलते हुए सूरज को साक्षी रखते हुए पूर्व सरसंघचालक श्री. सुदर्शनजी के पार्थिव को यहॉं के गंगाबाई स्मशानघाट पर इनके बंधु रमेशजी ने मंत्राग्नी दिया ,  तो हजारों मुख से "भारत माता की जय '  घोषणा ललकार उठी। हजारों नेत्रोंने सभी बंधन अस्वीकार कर अश्रुपात कर अपने लाडले पूर्व सरसंघचालक को अंतिम श्रद्धांजली दी। श्री. सुदर्शनजी का कल शनिवार  14  तारीख को रायपुर में निधन हुआ। शाम  7  बजे विशेष विमान द्वारा उनका पार्थिव नागपुर लाया गया। रेशीमबाग के महर्षि व्यास सभागृह में सुदर्शनजी का पार्थिव अंतिम दर्शन हेतु रखा था।  7  बजेसे ही रात देर तक लोगों का तांता लगा हुआ था। आज सबेरे भी लोग आही रहे थे। विमान ,  बस ,  रेल तथा निजी वाहनों से बाहर गावसे भी लोग आये थे। जानेमाने पत्रकार मुजफ्फर हुसेन ,  डॉ. राकेश सिन्हा ,  कवि कुलगुरु कालिदास संस्कृत विद्यापीठ के पंकज चांदे ,  राष्ट्रवादी कॉंग"ेस के प्रवक्ते गिरीश गांधी ,  राजकुमारजी तिरपुडे ,  भाजप की स्मृति इराणी ,  राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के कार्यकर्तागण , कुछ ख्रिश्चन मिशनरी भी सुदर्शनजी का अंतिम दर्शन लेने हेत

स्वामी विवेकानन्द : जीवन परिचय

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स्वामी विवेकानन्द पूरा नाम       स्वामी विवेकानन्द जन्म       12 जनवरी, 1863 जन्म भूमि   कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) मृत्यु       4 जुलाई, 1902 मृत्यु स्थान  रामकृष्ण मठ, बेलूर अविभावक      विश्वनाथदत्त (पिता) गुरु     रामकृष्ण परमहंस मुख्य रचनाएँ  योग, राजयोग, ज्ञानयोग शिक्षा     स्नातक विद्यालय     कलकत्ता विश्वविद्यालय नागरिकता     भारतीय स्वामी विवेकानन्द (जन्म- 12 जनवरी, 1863 कलकत्ता - मृत्यु- 4 जुलाई, 1902 बेलूर) एक युवा संन्यासी के रूप में भारतीय संस्कृति की सुगन्ध विदेशों में बिखरने वाले साहित्य, दर्शन और इतिहास के प्रकाण्ड विद्वान थे। विवेकानन्द जी का मूल नाम 'नरेंद्रनाथ दत्त' था, जो कि आगे चलकर स्वामी विवेकानन्द के नाम से विख्यात हुए। युगांतरकारी आध्यात्मिक गुरु, जिन्होंने हिन्दू धर्म को गतिशील तथा व्यवहारिक बनाया और सुदृढ़ सभ्यता के निर्माण के लिए आधुनिक मानव से पश्चिमी विज्ञान व भौतिकवाद को भारत की आध्यात्मिक संस्कृति से जोड़ने का आग्रह किया। कलकत्ता के एक कुलीन परिवार में जन्मे नरेंद्रनाथ चिंतन व क्रम, भक्ति व तार्किकता, भौतिक एवं बौद्धिक श्रेष्ठता क