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विचारक व प्रचारक : पंडित दीनदयाल उपाध्याय

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  विचारक व प्रचारक : पंडित दीनदयाल उपाध्याय (1916-1968)   माननीय लाल कृष्ण आडवाणी जी के पोर्टल से ------- पंडित दीनदयाल उपाध्याय 1953 से 1968 तक भारतीय जनसंघ के नेता रहे। वे एक प्रखर विचारक, उत्कृष्ट संगठनकर्ता तथा एक ऐसे नेता थे जिन्होंने जीवनपर्यंन्त अपनी व्यक्तिगत ईमानदारी व सत्यनिष्ठा के उच्चतम मानकों को अक्षुण्ण रखा। वे भारतीय जनता पार्टी के जन्म से ही पार्टी के लिए वैचारिक मार्गदर्शन और नैतिक प्रेरणा के स्रोत रहे हैं। उनकी पुस्तक ''एकात्म मानववाद'' (इंटीगरल ह्यूमेनिज्म) जिसमें साम्यवाद और पूंजीवाद, दोनों की समालोचना की गई है, में मानव जाति की मूलभूत आवश्यकताओं और सृजन कानूनों के अनुरुप राजनीतिक कार्रवाई हेतु एक वैकल्पिक सन्दर्भ दिया गया है। संक्षिप्त जीवनी पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म सोमवार,  दीनदयाल जी की माता श्री चुन्नीलाल शुक्ल, स्टेशन मास्टर धानकिया रेल्वे स्टेशन, जयपुर - अजमेर रेल मार्ग, जयपुर की पुत्री थीं, दीनदयाल जी का जन्म भी नानाजी के यहां धानकिया जिला जयपुर, राजस्थान में ही, 25 सितम्बर 1916 में हुआ था। जब वे मात्र 3 वर्ष के थे तब पिताजी का तथा

मोबाइल कॉल दरों में हुआ इजाफा : आदत डालो और फिर मुनाफा कमाओ

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    पहले सस्ता दो , फिर आदत डालो और फिर मुनाफा कमाओ  मोबाईल  कंपनियां  अब इसी अदा से  काम करना प्रारंभ  कर चुकी हें  ऐसा  ही FDI  में आने वाली कंपनियां  करेंगी    मोबाइल कॉल दरों में हुआ इजाफा दूरसंचार कंपनियों ने किया बढ़ती लागत के बोझ को कम करने का प्रयास पियाली मंडल और कात्या नायडू / नई दिल्ली/मुंबई September 21, 2012 दूरसंचार क्षेत्र ने प्रति सेकंड की दरों को लंबे समय तक बनाए रखने के बाद अब इनमें इजाफा शुरू कर दिया है। रिलायंस कम्युनिकेशंस और आइडिया सेल्युलर कुछ दूरसंचार सर्किलों में मोबाइल कॉल दरों में इजाफा कर चुकी हैं। हालांकि भारती एयरटेल, वोडाफोन और टाटा टेलीसर्विसेज जैसे बड़ी दूरसंचार कंपनियों ने संकेत दिया है कि वे कॉल दरों में तुरंत वृद्घि किए जाने पर विचार नहीं कर रही हैं। उद्योग के विश्लेषकों का मानना है कि दरों में बदलाव इस सेक्टर में जरूरी है। हालांकि दूरसंचार ऑपरेटरों ने पिछले कुछ महीनों में चुनिंदा सर्किलों में दरों में इजाफा किया है, लेकिन बड़ी वृद्घि पिछले साल की गई थी जब भारती एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया सेल्युलर ने कुछ सर्किलों में

भारत में, बाल्मार्ट का प्रखर विरोध हो

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  बालमार्ट  जैसे संस्थान भारत में इस लिए अधिक खतरनाक हें की वे यहाँ की बिकाऊ राजनीति  के सहारे अपने हित ही नहीं साधेंगे बल्कि ईसाई मिस्नरीज के हितों के लिए भी काम  करेंगी । भारतीय  संस्कृति की रक्षा के लिए अनिवार्य हे कि बाल्मार्ट का प्रखर विरोध हो।।।।।।।।।।। ========= दैनिक भास्कर का समाचार 23 सितम्बर 2012 के अंक में  अमेरिका की यह मल्टीनेशनल रिटेलर कंपनी- १९६२ में शुरू हुई, संस्थापक थे- सैम वॉल्टन। बायोग्राफी की बात सुनते ही जवाब देते-वक्त नहीं है,८५०० स्टोर्स दुनियाभर में,२० लाख कुल कर्मचारियों की संख्या,१५ देशों में ५५ अलग अलग नामों से कर रही कारोबार --- पर न्यूयॉर्क में आज तक एक भी स्टोर नहीं खोल पाई दुनिया की सबसे बड़ी रिटेलर कंपनी ...पर न्यूयॉर्क में आज तक एक भी स्टोर नहीं खोल पाई दुनिया की सबसे बड़ी रिटेलर कंपनी न्यूयॉर्क | रिटेल क्षेत्र की दिग्गज कंपनी वॉलमार्ट १२ से १८ महीनों में भारत में रिटेल स्टोर खोल सकती है। कंपनी जल्द ही उन राज्यों की अनुमति लेगी जिन्होंने अपने यहां प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को अनुमति देने की इच्छा जताई है। कंपनी के एशिया वाइस प्रेसीडेंट