कविता - अखण्ड भारत का पूरा करो सपना

कविता - अखण्ड भारत का पूरा करो सपना
देश अपना था, बाँट गये अंग्रेज!
स्वतंत्रता के नाम पर, देश तोड़ गये अंग्रेज!!
भागते भागते,सदियों लंबा क्लेश दे गये अंग्रेज!!
किस बात की शाबासी दें तुम्हें,
देश था अपना और तोड़ गये अंग्रेज!!!
===1===
देश अपना था, हमें वे बांटते रहे,
नेता हमारे उनके आगे झुकते रहे,
एकता की कोशिश करते रहे,
वे इसे हमारी कमजोरी मानते रहे।
हमारे नेताओं ने वफादारी भी की ,
 पर गद्दारी कर देश तोड़ गये अंग्रेज ।
===1===
स्वतंत्रता का सपना सबका था,
पर कीमत चुकाई हमने।
नेताओं ने हर तरह की मिन्नतें कीं,
और जख़्म भी झेल  हमनें ॥
लकीर खींची गैरों ने काग़ज़ पर,
खून बहाया गया सड़कों पर हमारा ।
===2===
नफ़रत उनकी विरासत, पर क्यों मिली हमें,
देश हमारा और सिर भी हमनें ही झुकाया॥
सदियों का क्लेश देकर वे चले अंग्रेज ,
मुठ्ठी भर थे वे और हम अपार थे,
वे डरा कर जीत गये, हमें हरा कर चले गये अंग्रेज ¡
===3===
आज भी जब दोष ढूँढते हैं हम,
आईने से नज़र चुराते हैं।
अंग्रेज गए, पर उनके छोड़े हुए
विभाजन हम अब भी निभाते हैं॥
अब तो अंग्रेज नहीं हैँ,शौर्य जगाओ अपना 
अखण्ड भारत का पूरा करो सपना।
=== समाप्त ===


टिप्पणियाँ

इन्हे भी पढे़....

‘फ्रीडम टु पब्लिश’ : सत्य पथ के बलिदानी महाशय राजपाल

तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहे।

सेंगर राजपूतों का इतिहास एवं विकास

छत्रपति शिवाजी : सिसोदिया राजपूत वंश

कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान

‘‘भूरेटिया नी मानू रे’’: अंग्रेजों तुम्हारी नहीं मानूंगा - गोविन्द गुरू

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती koshish karne walon ki kabhi haar nahin hoti

भगवान विष्णु के दस अवतार

वास्तविक "रघुपति राघव राजा राम " भजन Original "Raghupati Raghav Raja Ram" Bhajan

कविता - अगर तुमने वीरों का बलिदान छिपाया तो