जासूसी नहीं, देशवासियों की सुरक्षा है संचार साथी ऐप - अरविन्द सिसोदिया


लोकसभा में तारांकित प्रश्न के माध्यम से कांग्रेस सांसद नें 

श्री दीपक सिंह हुड्डा (रोहतक):
महोदय, यह प्रश्न दूरसंचार सेवा प्रदाताओं से जुड़ा हुआ प्रश्न है। दूरसंचार सेवाओं में सरकार के संचार साथी ऐप की मैप लोकेशन की अनियमितता को लेकर एक आदेश कर देश के सामने आया है। उसके बाद मंत्री महोदय ने उत्तर पर एक स्पष्टीकरण दिया है कि वह ऐप को बंद किया जाएगा, लेकिन बाद में आप उसका डिस्कनेक्ट कर सकते हैं। वह चॉइस यूज़र को दी गई है। इसका एक स्पष्टीकरण आया है।

मैं देश में कंप्यूटर साइंस बैकग्राउंड से हूँ, सॉफ्टवेयर इंजीनियर के बैकग्राउंड से हूँ। जब सिस्टम के अंदर ऐप लोकेशन की विवेचना होती है, तो डिसेबल करने के बाद भी सभी फीचर्स डिसेबल होंगे या नहीं, किसी यूज़र को यह बात पता नहीं चलेगी। निजता का जो अधिकार है, यह उत्तर पर कोई स्पष्टता नहीं है। इसलिए मैं यह उच्च प्रश्न देश में उठ रहे हैं, इसको लेकर जो सिविल राइट्स एक्टिविस्ट हैं, कंप्यूटर साइंस एक्सपर्ट्स हैं, उनके लेकर मंत्री महोदय क्या कुछ कहना चाहेंगे?

श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया:
मैं माननीय सदस्य को उनके प्रश्न के लिए धन्यवाद अर्पित करना चाहता हूँ और मैं उनके प्रश्न के द्वारा सदन के पटल पर और देश की जनता के समक्ष सारे तथ्य रखना चाहता हूँ।

महोदय, दूरसंचार ऐप का लोगों को विश्व के साथ जोड़ने का एक बहुत बड़ा माध्यम है। आज देश में एक बिलियन यूर्सर्स हो चुके हैं। जब सकारात्मक उपयोग किया जाता है, देश के तत्व होते हैं जो नकारात्मक उपयोग भी करते हैं और तब सरकार का दायित्व होता है कि देश की जनता और हर नागरिक को जन नकारात्मक प्रयोगों और तत्वों से सुरक्षित रखे। इसी सोच के साथ संचार साथी पोर्टल की शुरुआत वर्ष 2023 में की गई थी। हमने संचार साथी ऐप का प्रयोग वर्ष 2025 में शुरू किया था। संचार साथी क्या है? संचार साथी एक ऐसा ऐप है जिसके आधार पर और जनभागीदारी के आधार पर आज हर नागरिक अपने फोन, स्मार्ट मोबाइल से सुरक्षित रख सकता है और अपने स्मार्ट मोबाइल का रिपोर्ट कर सकता है।

हमारे पोर्टल पर 20 करोड़ हिट हुए हैं और करीब डेढ़ करोड़ ऐप डाउनलोड हुए हैं। सरकार ने सॉफ्टवेयर बनाया है लेकिन इसकी सफलता का श्रेय आप किसी को जाता है देश की जनता को जाता है क्योंकि उनके उपयोग के आधार पर ही हम सफल हो पाए हैं।

महोदय, आज मैं रिकॉर्ड में लाना चाहता हूँ कि जो इस ऐप और पोर्टल के आधार पर डेढ़ करोड़ मोबाइल कनेक्शन डिस्कनेक्ट हुए हैं, जो रिपोर्ट देश की जनता ने रिपोर्ट किया है। हमने करीब 26 लाख स्मार्ट हैंडसेट्स ट्रेस किए हैं, सात लाख स्मार्ट मोबाइल उपयोगकर्ता को वापस किए हैं, 41 लाख मोबाइल कनेक्शन्स डिस्कनेक्ट हुए हैं जो फ्रॉड ब्लॉक किए गए हैं। इसी के आधार पर हम कोशिश कर रहे हैं कि हम हर नागरिक को सुविधाएं दे सकते हैं फोन नंबर, इसका मतलब यह नहीं है कि यह ऑटोमैटिकली ऑपरेट हो जाएगा। जब तक मैं उपयोगकर्ता के रूप में रजिस्टर्ड myself as a user नहीं होता मेरे फोन पर यह ऐप नहीं चलेगा और मैं उपयोगकर्ता के रूप में जब तक दबाव क्लिक कर सकता हूँ लोकतंत्र में पूर्ण अधिकार नागरिकों का है।

महोदय, मैं फिर भी सदन में कहना चाहता हूँ कि हमारा पक्ष स्पष्ट है। इसकी सफलता का प्रयोग जनता के आधार पर हुआ है। हमें जो शिकायत मिली, उस फीडबैक के आधार पर अगर जो ऑर्डर में जो अस्पष्टता थी, उसको Minister ने स्पष्ट किया। मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूँ कि जन उपयोगिता के आधार पर हम निर्णय लेंगे और यह ना समाप्त होगी। माननीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार देश की जनता के हाथों में अधिकार देना चाहता है ताकि जनता अपने आप को सुरक्षित रख पाए।

(इति)

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संचार साथी ऐप पर हंगामा

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को लोकसभा में दो टूक कहा कि सरकार की साइबर सिक्योरिटी ऐप ‘संचार साथी’ से न तो जासूसी संभव है और न ही कभी जासूसी होगी. प्रश्न काल के दौरान विपक्ष के सदस्यों द्वारा ऐप को सभी नए स्मार्टफोन में पहले से इंस्टॉल करने के मंत्रालय के आदेश पर सवाल उठाए जाने के बाद सिंधिया ने कहा, 'संचार साथी ऐप से न स्नूपिंग संभव है, न स्नूपिंग होगा. यह ऐप जनता की सुरक्षा के लिए है, जासूसी के लिए नहीं. हम जनता के हाथ में ताकत देना चाहते हैं ताकि वह खुद अपनी सुरक्षा कर सके.'

संचार मंत्रालय ने 28 नवंबर को सभी मोबाइल फोन निर्माता कंपनियों को निर्देश दिया था कि भारत में बिकने वाले सभी नए हैंडसेट में ‘संचार साथी’ ऐप पहले से इंस्टॉल (प्री-लोडेड) होनी चाहिए. साथ ही मौजूदा डिवाइस में सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए यह ऐप अनिवार्य रूप से डाली जाए.

क्या है सरकार का दावा?

सरकार का दावा है कि यह ऐप उपभोक्ताओं को साइबर फ्रॉड से बचाने का एक सशक्त हथियार है. विपक्षी सदस्यों ने हालांकि इसे “निजता पर हमला” और “जबरन थोपी जा रही सरकारी जासूसी” करार देते हुए आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग की. कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर और टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने ऐप को “डिजिटल जासूस” बताया. सिंधिया ने सदन में भरोसा दिलाया कि ऐप में यूजर का कोई भी निजी डेटा सरकार के पास नहीं जाता और यह पूरी तरह पारदर्शी एवं सुरक्षित है. इस मुद्दे पर सदन में काफी हंगामा हुआ और विपक्ष ने मामले को स्थगन प्रस्ताव के जरिए उठाने की कोशिश की, जिसे अध्यक्ष ने स्वीकार नहीं किया.

संचार साथी ऐप को अनिवार्य रूप से प्री-इंस्टॉल करने के विवाद पर लोकसभा में बुधवार को केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम के बीच तीखी नोंक-झोंक हुई. मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सदन में स्पष्ट किया: “जनता में जो अफवाहें चल रही हैं, उन पर मत जाइए. नियम 7B में कहीं नहीं लिखा है कि यूज़र ऐप को अनइंस्टॉल नहीं कर सकता. समस्या यह है कि बिना डिटेल में गए बहुत सारी सच्चाई खो जाती है.

7B सिर्फ इतना कहता है कि फोन में ऐप इंस्टॉल होनी चाहिए और यूज़र तक उसकी पहुंच में कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए, उसे डिसेबल नहीं किया जाना चाहिए ताकि यूज़र इस्तेमाल कर सके. 7B में कहीं नहीं लिखा कि यूज़र ऐप डिलीट नहीं कर सकता. 7B यूज़र के लिए नहीं, निर्माता कंपनियों के लिए है. इसका गलत अर्थ निकाला जा रहा है. मेरा एकमात्र उद्देश्य जनता की सुरक्षा है. हम लोगों को इस कैंसर यानी साइबर फ्रॉड से बचाना चाहते हैं. अब फैसला करना है कि हम लोगों को ठगी से बचाएं या ठगी को चलने दें. जो फीडबैक आया है, उसके आधार पर हम नियम में संशोधन करने को तैयार हैं. मैंने संसद में कह दिया है, हम जिद्दी नहीं हैं.”

संचार साथी ऐप पर कार्ति चिदंबरम का पलटवार

कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने तुरंत जवाब दिया- 'अगर ऐसा है तो फिर सरकार निर्माता कंपनियों पर ऐप प्री-इंस्टॉल करने की जिद क्यों कर रही है? अगर यह अनिवार्य नहीं है तो लोग जैसे दूसरे ऐप डाउनलोड करते हैं, वैसे ही डाउनलोड कर लेंगे, प्री-लोडेड करने की क्या जरूरत है? दूसरी बात, जो डायरेक्टिव जारी हुआ है, वह मंत्री जी के बयान का सीधा-सीधा खंडन कर रहा है. अगर वाकई यूज़र को पूरी छूट है तो फिर इस डायरेक्टिव को तुरंत वापस ले लिया जाए.” विपक्ष इस मुद्दे को “नागरिकों की निजता पर हमला” बता रहा है और डायरेक्टिव को पूरी तरह वापस लेने की मांग पर अड़ा हुआ है.


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