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राष्ट्र वंदना : अखंड भारत संकल्प

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राष्ट्र वंदना :  अखंड भारत संकल्प 14 अगस्त को  अखंड भारत  दिवस  ओ भारत के वीर जवानों, माँ का क़र्ज़ चुका देना !! कटे फटे इस मानचित्र को, अबकी ठीक बना देना !! पटना साहीब से मीलने को ननकाना बैचेन खड़ा, अबकी तीरंगा रावलपिंडी में घुस कर फहरा देना  !! अटक कटक से सिन्धु नदी तक सब कुछ हमको प्यारा है, कश्मीर मत मांगो कह दो पाकिस्तान हमारा है !! जो उपवन से घात करे वो शाख तोड़ दी जायेगी, जो पीछे से वार करे वो बांह मोड़ दी जायेगी !! जो कुटुंब का नाश करे वो गर्दन तोड़ दी जायेगी, मेरे देश पे उठती हर एक आँख फोड़ दी जायेगी !! जो देश द्रोह की बात करे वो मनुष्य हत्यारा है, कश्मीर मत मांगों कह दो पाकिस्तान हमारा है !! अपनी झीले, नदीयाँ, पर्वतमाला कैसे दे देंगे? भारत भर की रूप सुधा का प्याला कैसे दे देंगे? वैष्णो देवी , बाला अमर उजाला कैसे दे देंगे? अमरनाथ का बोलो पुण्य शीवाला कैसे दे देंगे? गंगा से मीलने को झेलम का बैचेन कीनारा है, कश्मीर मत मांगों कह दो पाकिस्तान हमारा है !!

अखंड भारत - देवेन्द्र स्वरूप

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क्या है अखंड भारत का अर्थ July 17, 2005 -देवेन्द्र स्वरूप http://www.bhartiyapaksha.com/?p=2887    अखंड भारत का संकल्प लेने से पहले अखंड भारत की अवधारणा स्पष्ट होनी चाहिए। अगर अखंड भारत का अर्थ भौगोलिक अखंडता है तो वह आज भी अपनी जगह पर है। भूगोल तो जैसा पहले था, वैसा ही आज भी है। केवल उस पर राजनीतिक विभाजन की लकीरें खींच दी गई हैं। वे लकीरें क्यों खींची गईं? दूसरा प्रश्न यह है कि अगर भारत की परंपरागत सीमाओं की बात की जाए तो उन सीमाओं में तो अफगानिस्तान भी आता है, लेकिन अफगानिस्तान को अखंड भारत का अंग हम नहीं मानते।    अभी हमारे सामने अखंड भारत का जो चित्र है, वह एक प्रकार से ब्रिटिश भारत का चित्र है। अगर हम परंपरा के दृष्टिकोण से देखें तो भारत की सीमाओं में नेपाल भी आता है, भूटान, श्रीलंका और अफगानिस्तान भी आते हैं। भौगोलिक सीमाओं और सांस्कृतिक सीमाओं में हमेशा समन्वय बिठाने की आवश्यकता पड़ती है। फिर इसमें राजनीति भी आती है। भारत का विभाजन क्यों हुआ? वह मजहब के आधार पर हुआ। मुस्लिम बहुल क्षेत्र भारत से अलग हो गए। उनके और भारत के बीच में इस्लाम एक दीवार बनकर खड़ा हो गया। अब खंड

अखंड भारत : इतिहास का सच -गोविन्दाचार्य

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इतिहास का सच और भविष्य की चुनौती है अखंड भारत by ADMIN on JANUARY 16, 2009 akhand bharat-गोविन्दाचार्य http://www.kngovindacharya.in/?p=43 गत कुछ दिनों से अखंड भारत पर देश भर में काफी चर्चाएं हो रही हैं। इन चर्चाओं में अखंड भारत की व्यावहारिकता, वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता, इसके राजनैतिक स्वरूप, दक्षिण एशिया महासंघ बनाम अखंड भारत जैसे अनेक प्रश्न और बिन्दु सामने आए। इन्हीं प्रश्नों को लेकर भारतीय पक्ष के कार्यकारी संपादक रवि शंकर ने विख्यात विचारक श्री गोविन्दाचार्य से बातचीत की। प्रस्तुत हैं उसके मुख्य अंश। प्रश्न: गत कुछ दिनों में देश में अखंड भारत का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। श्री आडवाणी और श्री मनमोहन सिंह के पाकिस्तान के अस्तित्व और सीमाओं की परिवर्तनशीलता संबंधी बयानों के संदर्भ में आपने भी कहा था कि भारत एक भूसांस्कृतिक सत्य है। भूसांस्कृतिक सत्य से आपका क्या अभिप्राय है? उत्तर: भारत एक भूराजनैतिक वस्तु ही नहीं है। यह भूसंस्कृति भी है। भूसमाजविज्ञान भी है, भूमनोविज्ञान है, भूदर्शन है। इस भू का काफी महत्व है। भारत ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में शोध, अधय

भारत में चलने वाले न्यूज़ चैनल, अखबार वास्तव में भारत के नही

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विश्व संबाद केन्द्र , पंजाब क्या आप जानते है की कोई मीडिया समूह हिन्दू या हिन्दू संघठनो के प्रति इतना बैरभाव क्यों रखती है. -भारत में चलने वाले न्यूज़ चैनल, अखबार वास्तव में भारत के है ही नही http://vskpunjab.org/hindi/?p=988 सन २००५ में एक फ़्रांसिसी पत्रकार भारत दौरे पर आया उसका नाम फ़्रैन्कोईस था उसने भारत में हिंदुत्व के ऊपर हो रहे अत्याचारों के बारे में अध्ययन किया और उसने फिर बहुत हद तक इस कार्य के लिए मीडिया को जिम्मेवार ठहराया. फिर उसने पता करना शुरू किया तो वह आश्चर्य चकित रह गया की भारत में चलने वाले न्यूज़ चैनल, अखबार वास्तव में भारत के है ही नहीं… फीर मैंने एक लम्बा अध्ययन किया उसमे निम्नलिखित जानकारी निकल कर आई जो मै आज सार्वजानिक कर रहा हु ..विभिन्न मीडिया समूह और उनका आर्थिक श्रोत…… १-दि हिन्दू … जोशुआ सोसाईटी , बर्न, स्विट्जरलैंड , इसके संपादक एन राम , इनकी पत्नी ईसाई में बदल चुकी है. २-एन डी टी वी … गोस्पेल ऑफ़ चैरिटी, स्पेन , यूरोप ३-सी एन एन , आई बी एन ७, सी एन बी सी …१००% आर्थिक सहयोग द्वारा साउदर्न बैपिटिस्ट चर्च ४-दि टाइम्स ऑफ़ इंडिया, नवभारत ,