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व्यक्ति निर्माण से देशहित संधान ही संघ का कार्य - परम पूज्य मोहन जी भागवत

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व्यक्ति निर्माण से देशहित संधान ही संघ का कार्य - परम पूज्य मोहन जी भागवत  तारीख: 15 Mar 2014 बेंगलूरू प्रतिनिधि सभा में श्री मोहनराव भागवत ने कहा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मूलभूत कार्य राष्ट्रनीति यानी देश हित के लिए कार्य करना है। इस उद्देश्य हेतु संघ ने अपनी कार्यपद्धति व्यक्ति निर्माण के सौहार्दपूर्ण तरीके पर आधारित की है। स्वयंसेवकों को हमारे देश में शासन करने के तरीकों को पूरी तरह बदलने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए न कि उन लोगों को बदलने की चिंता करनी चाहिए, जो शासन करते हैं।ह्ण यह कहना था रा. स्व. संघ. के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत का। वे 7-9 मार्च, 2014 को बेंगलूरू में सम्पन्न संघ की अ. भा. प्रतिनिधि सभा के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। श्री भागवत ने आगे कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारे प्रेरणा का स्रोत भगवाध्वज है और राष्ट्रीय पुनर्निर्माण हेतु संपूर्ण समाज को संगठित करना हमारा मुख्य लक्ष्य है। पिछले 10 वर्षों में देश में परिस्थितियां जिस प्रकार बिगड़ी हैं, उससे समाज के सामने यह स्पष्ट हो गया है कि देश का शासन किसके हाथ मे