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लव भारत और लीव भारत : इंद्रेशजी

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लव भारत और लीव भारत : इंद्रेशजी June 23, 2014 कुरुक्षेत्र. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की केन्द्रीय कार्यसमिति के सदस्य एवं वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार जी ने कहा कि ऐसे लोगों के लिये हिंदुस्थान में कोई जगह नहीं है, जो देश के विभाजन की बात करते हों. ऐसे लोगों को केवल एक ही विकल्प है कि या तो वे भारत भूमि से प्रेम करें अन्यथा इसे छोड़ कर चले जायें. 21 जून को संघ के 20 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के समापन अवसर पर इंद्रेश जी ने कहा कि कोई उन्हें संविधान के अनुच्छेद 370 के दस लाभ गिनवा दे, तो भारतीय इसके समर्थन को तैयार हैं, लेकिन इसका कोई लाभ नहीं, बल्कि बहुत हानि हुई है. जो अनुच्छेद देश में दो ध्वज, दो संविधान व दोहरी नागरिकता का पक्षधर हो, वह किसी भी प्रकार से जोडऩे वाला प्रावधान नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि कश्मीर में तिरंगे के अपमान, संविधान के अपमान पर कार्रवाई का प्रावधान नहीं है. कश्मीर का संविधान भारत के संविधान का अपमान करता है. इसके कारण कश्मीर में भारत के ही नागरिकों व महिलाओं में भेद किया जाता है, ऐसे विध्वंसक संवैधानिक प्रावधान का समाप्त होना आज देश की आवश्यकता है. उन्होंने क

नहीं बढ़ेंगे गैस के दाम - मोदी सरकार

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मोदी सरकार का रिलायंस को झटका, 3 महीने नहीं बढ़ेंगे गैस के दाम इकनॉमिक टाइम्स | Jun 26, 2014 नई दिल्ली रेल किराए में बढ़ोतरी के झटके बाद मोदी सरकार फिलहाल तीन महीने तक गैस कीमतें बढ़ाने का कड़वा डोज नहीं देगी। रिलायंस को झटका देते हुए कैबिनेट ने गैस के दाम बढ़ाने का फैसला 3 महीने के लिए टाल दिया है। वह इस मामले को अच्छी तरह समझना चाहती है और उसके बाद आम लोगों के हित को ध्यान में रखकर कोई फैसला करना चाहती है। यह रिलायंस इंडस्ट्रीज और ओएनजीसी जैसी तेल और गैस कंपनियों के लिए झटका है। इससे उन एक्सपर्ट्स की उम्मीदें भी टूटी हैं, जो मोदी सरकार से जल्द बिजनेस-फ्रेंडली फैसले की उम्मीद कर रहे थे। 3 महीने में दूसरी बार सरकार ने गैस प्राइस बढ़ाने का मामला टाला है, जो रिलायंस और ओएनजीसी के कई अरब डॉलर के इनवेस्टमेंट के लिहाज से काफी अहमियत रखता है। यूपीए सरकार की कैबिनेट ने रंगराजन फॉर्म्युले के हिसाब से गैस की कीमत तय करने को मंजूरी दी थी। इससे गैस का दाम 1 अप्रैल से 8.4 डॉलर प्रति यूनिट हो जाता। हालांकि, चुनाव आयोग ने आचार संहिता की वजह से इसे रोक दिया था, जिसकी इंडस्ट्री ने आलोचना की

इन्दिरा गांधी की हिटलर शाही के कारण लगा था आपातकाल

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इन्दिरा गांधी की हिटलर शाही के कारण लगा था आपातकाल आज के ही दिन लागू हुआ था आपातकाल,मौलिक अधिकार थे सीज Jun 26 2014 -इंटरनेट डेस्‍क- नयी दिल्‍ली : भारतीय इतिहास में काला दिन के रूप में दर्ज हो चुके आपातकाल को भला कौन याद करना चाहेगा. भारतीय लोकतंत्र ने इमरजेंसी को युवाकाल में झेला . आज के ही दिन यानी 26 जून 1975 को देश में पहली बार आपातकाल लगाये जाने की घोषणा की गयी थी. इमरजेंसी के 39 साल बाद यही वो तारीख है जब तात्‍कालिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपने खिलाफ उठ रही विरोध के आवाज को दबाने के लिए इमरजेंसी जैसी कानून का सहारा लिया. 1971 में बांग्लादेश बनवाकर शोहरत के शिखर पर पहुंचीं इंदिरा को अब अपने खिलाफ उठी हर आवाज एक साजिश लग रही थी. उन्‍होंने लाखों लोगों को जेल में डाल दिया. लिखने-बोलने पर पाबंदी लग गई. देश में व्‍याप्‍त भ्रष्‍टाचार और महंगाई से त्रस्‍त जनता ने सरकार का विरोध करना शुरू कर दिया. इस मुद्दे को लेकर देशव्‍यापी आंदोलन होने लगे. गुजरात कर्फ्यू इसका प्रबल उदाहरण था. इस मामले को लेकर गुजरात के चिमनभाई को इस्‍तीफा भी देना पड़ा. देश में छा रही अशांति को लेकर

आपातकाल बंदियों को माना जाएगा स्वतंत्रता सेनानी - नरेन्द्र मोदी

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http://dainiktribuneonline.com आपातकाल बंदियों को माना जाएगा स्वतंत्रता सेनानी Posted On June - 25 - 2014 नयी दिल्ली, 25 जून (भाषा) सरकार आपातकाल के दौरान बंदी बनाए गये लोगों को स्वतंत्रता सेनानियों के समकक्ष मान्यता देकर उचित सम्मान दिलाने तथा भत्ता या पेंशन देने की मांग पर विचार कर रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस संबंध में राज्यसभा सांसद केसी त्यागी के पत्र का जवाब देते हुए कहा, ‘आपका पत्र प्राप्त हुआ जो आपात काल के दौरान बंदी बनाए गये लोगों को स्वतंत्रता सेनानियों के समकक्ष मान्यता देकर उचित सम्मान दिलाने एवं भत्ता या पेंशन देने के संबंध में है। मैं इस मामले पर गौर करवा रहा हूं।’ त्यागी ने आपातकाल में मीसा के तहत बंद शिव कुमार मिश्र के पत्र का हवाला देते हुए कहा कि मिश्र ने केन्द्र सरकार से आपातकालीन बंदियों को स्वतंत्रता सेनानियों के समकक्ष मान्यता देकर उनको सम्मानित करने और उनको स्वाधीनता सेनानियों के बराबर भत्ता या पेंशन देने का निवेदन किया है। आज आपातकाल की 39 वीं वर्षगांठ है। उन्होंने कहा कि स्वाधीन भारत में जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में यह जन आं