स्त्री-पुरुष एक ही तत्व के दो प्रकटीकरण- परम पूज्य डा. भागवत

 हिन्दू जीवन दृष्टि में स्त्री-पुरुष
एक ही तत्व के दो प्रकटीकरण- डा0 भागवत
- स्तम्भ लेखक संगोष्ठी का समापन
 जयपुर, 13 सितम्बर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक परम पूज्य श्री मोहनराव भागवत ने दो दिवसीय स्तम्भ लेखक संगोष्ठी के समापन पर रविवार को कहा कि हिन्दू जीवन दृष्टि के आधार पर ही सारे विषयों को और समस्याओं को देखना चाहिए। हिन्दू जीवन दृष्टि एकात्म होने के नाते स्त्री-पुरुष को एक ही तत्व के दो प्रकटीकरण के रूप में देखती है, इसलिए समानता के बदले एकत्व पर उसका बल है। 

श्री भागवत ने कहा कि भारत की परिवार व्यवस्था का मूल्य और महत्व अनेक चुनौतियों के बावजूद अक्षुण्ण टिका हुआ है। यह हिंदू समाज की एक ताकत है। अपनी जड़ों की पहचान के साथ जड़ों को मजबूत करते रहने से पश्चिमीकरण या ऐसे अनेक आक्रमणों का मुकाबला करने की शक्ति समाज में निर्माण होगी। 

उन्होंने कहा कि गलत रूढ़ियों को नकारते हुए शाश्वत जीवन मूल्यों के आधार पर दुनिया से अच्छी बातों को स्वीकार करने की भारत की परम्परा रही है। इसी के आधार पर समाज संगठित होकर खड़ा रहेगा और सारी मानवता को जीवन का उद्देश्य और जीवन की दिशा देने का कार्य वह सक्षमतापूर्वक करेगा।

श्री भागवत ने कहा कि आज वैज्ञानिक कसौटियों पर प्रचलित हिंदू धर्म का विचार करने की आवश्यकता  है, कसौटियों पर खरा नहीं उतरने वाली बातों को छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि समन्वय को लेकर सृष्टि को आगे बढ़ाने का सामर्थ्य सिर्फ हिन्दू धर्म में ही है। इसके लिए हमें सनातन मूल्य और आधुनिक परिस्थितियों को जोड़ कर आगे बढ़ना होगा।

सरसंघचालक जी के समापन भाषण के पूर्व प्रो. राकेश सिन्हा, एडवोकेट मोनिका अरोरा, डॉ. सुवर्णा रावल और श्रीमती मृणालिनी नानिवडेकर ने हिन्दू चिंतन में नारी विमर्श, मीडिया, राजनीति एवं कानूनी प्रावधान के क्षेत्रों में महिला के सामने चुनौती विषयों पर अपने विचार रखे। 

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