पोस्ट

अप्रैल 17, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

'भारत माता की जय' - प्रशान्त बाजपेई

इमेज
कौन नहीं बोलना चाहता जय ? तारीख: 28 Mar 2016 'दु:स्वप्ने आतंके, रक्षा करिले अंके, स्नेहमयी तुमि माता' भारत को स्नेहमयी मां कहने वाली ये पंक्तियां गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर की रचना 'जन -गण-मन' की हैं जिसके प्रथम छंद को भारत के राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किया गया है। अर्थात् 'जन-गण-मन' की पृष्ठभूमि में भी राष्ट्र का मातृरूप समाहित है। जिस मातृरूप को सामने रखकर स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी गई, और वंदेमातरम् भारत का राष्ट्र मंत्र बन गया। पर भारत में तथाकथित 'सेकुलर', लिबरल और वामपंथी बुद्धिजीवियों का एक ऐसा वर्ग है जिन्हंे 'भारत की बरबादी' के नारे तो  विचलित नहीं करते लेकिन 'भारत माता की जय' या 'वंदेमातरम्' का उद्घोष बेचैन कर देता है। उन्हीं की ताल पर असदुद्दीन ओवैसी जैसे लोग मजहबी उन्माद का आलाप देते हैं। इन लोगों का तर्क  है कि मुसलमान देश के नागरिक मात्र बनकर रहें  लेकिन जन्मभूमि का बेटा होने का गौरव न करें। बुद्धिजीवी कहलाने वाले इसे 'मर्जी' का मामला' बताते हैं तो कट्टरपंथी इसे मजहब का मामला कहते हैं और इससे सव