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भूलें नही विभाजन को ...!!

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जानवरों की तरह काट दिया देश को - अरविन्द सीसोदिया    भारत का विभाजन जिस  गैर जिम्मेवारी से किया गया है, वह दिखाता है की , अंग्रेज कितना खुद गर्ज होता है . उनकी करूणा , दया और सेवा के क्या मायनें हैं . जैसे जानवर को शिकार करते वक्त दया नही की जाती , उसी तरह   ब्रिटिश वाइसराय लुइस माउंटबैटन नें कोई भी दया का भाव नही दिखाया , जिम्मेवारी का परिचय नहीं  दिया और एक अहंकार पूर्ण निर्णय भारत पर थोप  दिया . जिस की बली वेदी  पर लाखों लोगों की जान चढ़ गई , करोड़ों लोगन के घर - बेघर हो गये ,सच यह है की यह विभाजन टाला जाना चाहिए था , मगर सही ढंग से प्रयास किसीने किया ही नहीं . विभाजन स्वीकार नहीं करने की हिम्मत यदी भारत के नेता कर लेते  तो देश का ना विभाजन होता और ना ही आज  जो परेशानिया हैं वे होती . हमारे देश को जिस तरह से बांटा  गया है ,उसका आत्म मंथन करके , देश फिरसे एक कैसे हो इस और ध्यान देना चाहिए . जब तक हम इस आपराधिक विभाजन  को समाप्त नही कर देते तब तक चैने  नही लेंगे , इस तरह का व्रत लेना चाहिए . आज की परिस्थितियाँ भविष्य नहीं हैं , भविष्य का राज आज पत्ता  नहीं है , आशा और विश्वास पर उ