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भारत क़ी बार बार नाक कटवा रहे धोनी

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एक क्रिकेट श्रृंखला में दो बार न्यूनतम स्कोर  ....! - अरविन्द सीसोदिया   टीम के वरिष्ट खिलाडियों को बाहर बिठा कर , भारत क़ी बार बार नाक कटवा रहे धोनी पर नियन्त्रण किया जाना चाहीये , जहाँ देश का नाम आता हो वहां पर , उच्चतम प्रदशर्न क्षमता की टीम होनी ही चाहिए , त्रिकोणीय  क्रिकेट श्रृंखला का नतीजा कुछ भी हो , मगर एक क्रिकेट श्रृंखला में दो बार न्यूनतम  स्कोर पर आउट होना शर्मनाक है , सबसे बड़ी बात यह है की गेंदों क़ी द्रष्टि से यह सबसे बड़े अंतर की हार है !   रानगिरी दाम्बुला इंटरनेशनल स्टेडियम,दाम्बुला , श्रीलंका विरुद्ध भारत , एकदिवसीय , श्रीलंका 8 विकेट से जीता , युवा तेज गेंदबाज तिषारा परेरा ने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 28 रन पर पांच विकेट लेकर नो-बाल के विवाद में उलझे भारतीय शेरों  को 103 रन पर ढेर कर दिया।    श्रीलंकाई बल्लेबाजों ने फिर ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए करो या मरो का मुकाबला एकतरफा अंदाज में आठ विकेट से जीतकर त्रिकोणीय एकदिवसीय क्रिकेट श्रृंखला के फाइनल में प्रवेश कर लिया। इस जीत से बोनस सहित पांच अंक मिले और वह कुल 11 अंकों के साथ फाइनल में पहुं

हिंदुत्व : चकित कर देतें हैं उपनिषद विश्व को

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हिंदुत्व : चकित कर देतें हैं उपनिषद विश्व को - अरविन्द सीसोदिया उपनिषद ज्ञान का  संझिप्त परिचय उपनिषदों का परम लक्ष्य मोक्ष है. जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति को हम काल की अधीनता से मुक्ति भी कह सकते हैं. यह कर्म की अधीनता से मुक्ति भी है. मुक्त आत्मा के कर्म चाहे वे अच्छे हों या बुरे, उस पर कोई प्रभाव नहीं डालते हैं.छान्दोग्योपनिषद् के अनुसार जिस प्रकार जल कमल की पत्ती पर नहीं ठहरता उसी प्रकार कर्म उससे चिपकते नहीं हैं. जिस प्रकार सरकंडे की डंडी आग में भस्म हो जाती है, उसी प्रकार उसके कर्म नष्ट हो जाते हैं. चन्द्रमा जिस प्रकार ग्रहण के बाद पूरा-पूरा बाहर आ जाता है, उसी प्रकार मुक्त आत्मा अपने को मृत्यु के बन्धन से स्वतन्त्र कर लेता है. मुक्ति बन्धन का नाश है और बन्धन अज्ञान की उपज है. अज्ञान ज्ञान से नष्ट होता है कर्मों से नहीं. ज्ञान हमें उस स्थिति पर ले जाता है जहाँ कामना शान्त हो जाती है, जहाँ सभी कामनाएँ पूर्ण हो जाती हैं, जहाँ आत्मा ही अकेली कामना होती है. मुक्त आत्मा की वही स्थिति होती है जो कि एक अन्धे की दृष्टि प्राप्त कर लेने पर होती है. जब हम शाश्वत सत्य, ब्रह्म