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धर्म और तत्वज्ञान में,कोई हमसे बढ़कर नहीं - नेहरु जी

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नेहरु जी आध्यात्म  के आकाश में  - अरविन्द सीसोदिया   आजकी कांगेस जिस तरह की धर्म निरपेक्षता की बाट करती है .., वह सिर्फ हिंदुत्व का विरोध मात्र है .., जो कि एक सोचा समझा इसाई एजेंन्डा है.., सच यह है की कांग्रेस को यह समझना चाहिए की नेहरूजी भी भारतीय आध्यात्म और जीवन व्यवस्था का आदर करते थे ...! धर्म निरपेक्षता शब्द ही गलत है सही शब्द धर्म सापेक्षता होना चाहिए ..!  जवाहरलाल नेहरु यूं तो समाजवादी विचारधारा से सम्बन्ध रखते थे मगर वे साम्यवाद के बहुत ही अधिक निकट थे, उनके द्वारा हिंदुत्व के गुणगान की  सामान्यतः वन्दना  कम ही थी , जिस तरहे से गांधी जी अपने हिंदुत्व वादी चिंतन  में प्रखर थे , उस तरह से नेहरूजी कभी भी नहीं रहे , मगर उनका मन कहीं न कहीं से हिन्दू चिंतन को व्याकुल तो रहता ही था , इसके कुछ अंश मुझे उनकी जीवनीं में मिले जिन्हें में आपके साथ बाँटना  चाहता हूँ ..! यह ठीक है कि उन्होंने सीधे सीधे हिंदुत्व का नाम नहीं लिया मगर , तथ्यात्म बोध तो वही कहता है, जो है ..!! उन्होंने हिन्दू संस्कृती  को सम्मान भी दिया और उसे गलत तत्वों के कारण गिरा हुआ भी ठहराया , उनके विश्लेषण से पूरी त