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26/11 के हमले में छः अमेरिकी नागरिक मारे गये थे

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http://meahindi.nic.in/mystart.php?id=23046535 26/11 के हमले में भारतीय मुजाहिद्यीन की सुगमतादायक भूमिका: संयुक्त राज्य सितम्बर 16, 2011  टाइम्स ऑफ इण्ड़िया, यह खबर भारत सरकार के इस  पेज से ली गई है  वाशिंगटन : संयुक्त राज्य ने बृहस्पतिवार को पुष्टि की थी कि भारतीय मुजाहिद्यीन (आई एम) ने वर्ष, 2008 के मुम्बई हमले में सुगमतादायक भूमिका निभाई थी, जो लश्कर-ए-तायबा (एल ई टी) द्वारा किया गया था, जिसमें छः अमेरिकी नागरिक सहित 163 लोग मारे गये थे”| इस कार्यवाई में जिस तथ्य को रेखाँकित किया गया है, वह यह है कि संयुक्त राज्य भारत पर हुए आतंकी हमले पर अब और अधिक तटस्थ नही है, राजकीय विभाग से प्राप्त एक मीडिया की टिप्पणी के साथ पाकिस्तान से जुड़े एक वैश्विक आतंकवादी संगठन के रूप में, आई एम का औपचारिक पद नाम स्वीकार करता है कि “ये पदवियाँ न केवल आई एम के माध्यम से पश्चिमी हितों के खतरों का उल्लेख करती हैं बल्कि भारत और एक निकट भागीदार संयुक्त राज्य को भी”. “जनसाधारण भारतियों ने भारतीय मुजाहिद्यीन की निर्दयतापूर्ण हिंसा का घातक प्रभाव झेला है और आज के कार्यकलापों से भारत सरकार के साथ हमारी एकत

चीन से 1962 का युद्ध नेहरू की वजह से हारे :पूर्व वायु सेना प्रमुख

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चीन से 1962 का युद्ध नेहरू की वजह से हारे थे हम: टिपणिस Tuesday,20 November, 2012, लिंक - http://zeenews.india.com/hindi/news नई दिल्ली: पूर्व वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल (सेवानिवृत्त) ए वाई टिपणिस ने 1962 में चीन के साथ युद्ध में भारत की हार के लिए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को उस वक्त जिम्मेदार ठहराने का प्रयास किया है जब जंग के दौरान वायु सेना का इस्तेमाल नहीं किये जाने पर बहस जारी है। यहां ‘भारत और चीन, 1962 के युद्ध के पांच दशक बाद’ शीषर्क से आयोजित सेमिनार को संबोधित करते हुए टिपणिस ने यह आरोप भी लगाया कि नेहरू ने वैश्विक नेता बनने की महत्वाकांक्षा के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों को पीछे छोड़ दिया था। उन्होंने कहा कि यह बात थोड़ी बहुत सार्वभौमिक तौर पर मान्य है। हो सकता है कि कुछ भारतीयों को हिचकिचाहट में राजनीतिक मकसद से खुलकर यह बात स्वीकार्य नहीं हो कि पंडित नेहरू ने संघर्ष मुक्त निगरुट दुनिया के बड़े दृष्टिकोण के साथ वैश्विक नेता बनने की महत्वाकांक्षा के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा के हित को छोड़ दिया। कल दिये उनके ये बयान वायु सेना के मौजूदा प्रमुख एयर चीफ मार

कसाब को फांसी : कब क्या हुआ ?

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26/11 के मुंबई हमले के दोषी अजमल आमिर कसाब को फांसी दे दी गई है। सुबह साढ़े सात बजे पुणे की यरवडा जेल में उसे फांसी दी गई है। 9 नवंबर को ही राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कसाब की दया याचिका कर दी थी। पिछले एक हफ्ते से कसाब की फांसी की तैयारी की जा रही थी। महाराष्ट्र के गृहमंत्री आर आर पाटिल ने इस खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि कसाब को पूरी प्रक्रिया के बाद फांसी दी गई है। केन्द्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने भी खबर की पुष्टि की है। कसाब मामले में कब क्या हुआ? Wed, 21 Nov 2012 नई दिल्ली। वर्ष 2008 में 26 नवंबर को हुए मुंबई आतंकी हमले में 166 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। हमले में तीन पुलिस अधिकारी भी शहीद हो गए थे। एक नजर डालते हैं मामले पर कि कब-कब क्या-क्या हुआ? 26 नवंबर 2008 : अजमल कसाब और नौ आतंकियों ने मुंबई पर हमला किया, जिसमें 166 लोगों की जान गई। 27 नवंबर 2008 : अजमल कसाब गिरफ्तार। 30 नवंबर 2008 : कसाब ने पुलिस के सामने अपना गुनाह कुबूल किया। 27/28 दिसंबर 2008 : आइडेंटीफिकेशन परेड हुई। 13 जनवरी 2009 : एम एल तहलियानी को 26/11 मामले में विशेष जज नियुक्त किया ग