महंगा हुए एलपीजी सिलेंडर

कांग्रेस का मतलब महंगाई बढाओ सरकार
यह खबर पढ़ें .......



महंगा हुए एलपीजी सिलेंडर,
अब 922 रुपये चुकानी होगी कीमत
dainikbhaskar.com | Nov 01, 2012,
एक तरफ जहां सितंबर के आंकड़े देश में महंगाई कम होने की वकालत कर रहे हैं वहीं, सरकार ने एक बार फिर से आम आदमी पर महंगाई का बोझ डाल दिया है। इस बार ये

बोझ एलपीजी सिलेंडर के चलते पड़ा है। दरअसल, सरकार ने बिना सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर के दाम में 26.50 रुपये बढ़ा दिए हैं। ऐसे में अब आम आदमी को बिना सब्सिडी वाला सिलेंडर खरीदने के लिए 922 रुपये चुकाने होंगे। यानी अब सातवां सिलेंडर आम आदमी की जेब और ढीली करने वाला है।
तेल कंपनियों और सरकार ने हाल ही में फैसला लिया था कि बिना सब्सिडी वाले गैस सिलेंडरों का दाम हर महीने अंतरराष्ट्रीय कीमत के अनुसार तय होंगे। इसके तहत ही कंपनियों ने कीमत में बदलाव किया है। बाजार मूल्य पर बिकने वाले घरेलू सिलेंडर पर बोझ कम करने के लिये सरकार ने उत्पाद एवं सीमा शुल्क से छूट दी है। दिल्ली में व्यावसायिक उपयोग वाले वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर का दाम अब 1,062 रुपये होगा जबकि 19 किलो वाले सिलेंडर का दाम 1,636.50 रुपये होगा।
दिलचस्प है कि सरकार ने पिछले महीने ही सब्सिडी वाले सिलेंडरों की आपूर्ति को सीमित करने का फैसला लिया है। सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या सीमित करने के बाद यह संख्या केवल 6 ही रह गई है। बाकी के सिलेंडरों के लिए बाजार मूल्य पर ही कीमत चुकानी होगी। वर्तमान में सब्सिडी वाले 14.2 किलो वाले गैस सिलेंडर के लिए दिल्ली में 399 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं।

टिप्पणियाँ

इन्हे भी पढे़....

एक ईसा, एक बाइबल, लेकिन ईसाइयों में भी हैँ बहुतसारी भिन्नतायें

जर्मनी नें आंतरिक सुरक्षा हेतु 10 सूत्रीय कार्यक्रम की घोषणा की

चुनाव आयोग को चोर कहना, पूरे शासनतंत्र को अपमानित करना है, संविधान विपक्ष को इस तरह की गिरी हुई हरकतों की अनुमति नहीं देता

7 अक्टूबर: मोदीजी के शासन प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूर्ण

भारत की 80 करोड़ से अधिक आबादी मेटा की पकड़ में है....?

स्टारलिंक Starlink

तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहे।

हताश कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करके, सड़कों पर अराजकता फैलाकर और जनता को गुमराह करके सत्ता में वापसी करने की कोशिश कर रही है - शिवराज सिंह चौहान

भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा,संवैधानिक संस्थाओं की अनिवार्य जबाबदेही है — अरविन्द सिसोदिया

सेंगर राजपूतों का इतिहास एवं विकास