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जनवरी 17, 2013 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

धर्म के महा बलिदानी : गुरु गोबिंद सिंह

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जयंती पर विशेष                                        धर्म के लिए महाबलिदानी : गुरु गोबिंद सिंह                                                                       लेखक - हरदीप कौर श्रीगुरु गो‍बिंद सिंह जी सिखों के दसवें गुरू हैं। इनका जन्म पौष सुदी 7वीं सन् 1666 को पटना में माता गुजरी जी तथा पिता श्रीगुरु तेगबहादुर जी के घर हुआ। उस समय गुरु तेगबहादुरजी बंगाल में थे। उन्हीं के वचनोंनुसार गुरुजी का नाम गोविंद राय रखा गया और सन् 1699 को बैसाखी वाले दिन गुरुजी पंज प्यारों से अमृत छक कर गोविंद राय से गुरु गोविंद सिंह जी बन गए। उनके बचपन के पाँच साल पटना में ही गुजरे। 1675 को कश्मीरी पंडितों की फरियाद सुनकर श्रीगुरु तेगबहादुरजी ने दिल्ली के चाँदनी चौक में बलिदान दिया।            श्रीगुरु गोबिंद सिंह जी 11 नवंबर 1675 को गुरु गद्दी पर विराजमान हुए। धर्म एवं समाज की रक्षा हेतु ही गुरु गोबिंद सिंहजी ने 1699 ई. में खालसा पंथ की स्थापना की। पाँच प्यारे बनाकर उन्हें गुरु का दर्जा देकर स्वयं उनके शिष्य बन जाते हैं और कहते हैं-जहाँ पाँच सिख इकट्ठे होंगे, वहीं मैं निवास करूँगा। उन्होंन

The Namdhari sikhs: Pioneers of freedom movement

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The Namdhari sikhs: Pioneers of freedom movement लिंक :-  http://static.panjabilok.net     'No Indian can deny the importance of efforts put in by Sat Guru Ram Singh Ji seventy five years back in achieving freedom for the motherland. Congress merely followed the path shown by him and attained independence.'  -   India's first Prime Minister, 1947 Introduction ikh history as Kooka Lahar (movement) to liberate his country from the foreign rule. It was Sat Guru Ram Singh Ji who first sowed the seeds of nationalism and patriotism in his countrymen and showed them the path to throw off the foreign yoke from the country. Mahatma Gandhi later emulated Sat Guru Ram Singh Ji's example and adopted his programme of Non-co-operation and civil disobedience which led to the Independence of India. Background Sat Guru Ram Singh Ji's linked his resolve to free the country from the clutches of foreign rule with his mission to bring about reformation in

क्रूर अंग्रेजों ने तॉप से उड़ा दिये थे 65 नामधारी सिखों को

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क्रूर अंग्रेजों ने तॉप  से उड़ा दिये थे 65 नामधारी सिखों को 12 साल दे बालक का सर कलम किया था इन मानवता के दुश्मनों नें  अंग्रजो की गो हत्या के विरोध में धर्म युद्ध किया था नामधारी सिखों नें  16 Jan 2013   भूपेश जैन, मालेरकोटला (संगरूर) : एतिहासिक शहर मालेरकोटला की धरती पर देश की स्वतंत्रता के लिए नामधारी सिखों द्वारा चलाए गए कूका आंदोलन के तहत 66 नामधारी सिख शहीद हो गए थे। नामधारी सिखों की कुर्बानियों को जंग-ए-आजादी के एतिहासिक पन्नों में कूका लहर के नाम से अंकित किया गया है। असहयोग आंदोलन के दौरान संत गुरु राम सिंह ने 12 अप्रैल 1857 को श्री भैणी साहिब जिला लुधियाना से जब अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध आवाज उठाई थी, तब भारतवासी गुलामी के साथ-साथ अधर्मी, कुकर्मी व सामाजिक कुरीतियों के शिकार थे। इन परिस्थितियों में गुरु जी ने लोगों में स्वाभिमानता जागृत की। साथ ही भक्ति व वीर रस पैदा करने, देशप्रेम, आपसी भाईचारा, सहनशीलता व मिल बांट कर खाने के लिए प्रेरित किया। सतगुरु राम सिंह एक महान सुधारक व रहनुमा थे, जिन्होंने समाज में पुरुषों व स्त्रियों की संपूर्ण तौर पर एकता का