नेताजी की रहस्यमय मौत : एक और सनसनीखेज खुलासा




नेताजी की रहस्यमय मौत पर एक और सनसनीखेज खुलासा
Jan 29, 2013IBNkhabar
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कोलकाता। नेताजी सुभाषचंद्र बोस की रहस्यम मृत्यु पर एक और सनसनीखेज खुलासा करते हुए रूस में रामकृष्ण मिशन के प्रमुख मंहत ने कहा है कि नेताजी की मौत विमान दुर्घटना में नहीं बल्कि रूस की एक जेल में हुई थी।

रूस में पिछले दो दशक से रामकृष्ण मिशन के अध्यक्ष रहे ज्योतिरानंद ने अपनी हाल की असम यात्रा के दौरान एक टेलीविजन साक्षात्कार में यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारत सरकार का यह दावा गलत है कि नेताजी 18 अगस्त 1945 को ताईवान में ताईहोकू हवाई अड्डे पर विमान दुर्घटना में मारे गए थे।
उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि उन्हे रूसियों ने पकड़ लिया था और ओमस्क की जेल मे कैद कर दिया था जहां काफी समय बाद उन्होंने अंतिम सांस ली थी। ओमस्क रूस के साइबेरिया क्षेत्र का एक छोटा शहर है। उन्होंने कहा कि इस बात की पूरी संभावना है कि नेताजी ने इसी जेल मे अपनी अंतिम सांस ली होगी।
मास्को में रामकृष्ण मिशन की सचिव लिलियाना मालकोवा ने ज्योतिरानंद के इस सनसनीखेज खुलासे को सही बताया है। मंहत ने कुछ दस्तावेजों और रूस में भारत की तत्कालीन राजदूत विजय लक्ष्मी पंडित के बयान का हवाला देते हुए बताया कि जब पंडित को नेताजी के ओमस्क जेल में होने की खबर लगी तो वह उनसे मिलने वहां गई थीं लेकिन रूसी अधिकारियों ने उन्हें नेताजी से नहीं मिलने दिया।

ज्योतिरानंद ने कहा कि पंडित जब जेल से बाहर निकल ही रहीं थीं कि उन्होंने हूबहू नेताजी से मिलते जुलते शक्ल वाले एक कैदी को वहां देखा। वह कैदी काफी थकाहारा दिखाई पड़ रहा था। ऐसा लगता था कि उसे जेल में काफी यातना दी गई है जिससे उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया है।

मंहत ज्योतिरानंद के मुताबिक पंडित यह सबदेख कर बहुत व्यथित हुई थीं और फौरन नई दिल्ली पहुंच कर उन्होंने इस बात की जानकारी कांग्रेस के तत्कालीन बड़े नेताओं को दी थी। लेकिन इस पर कोई कार्रवाही नहीं की गयी।

इस बीच नेताजी पर शोध कर रहे एक शेाधर्कता अनुज धर ने सोमवार को कोलकाता में विदेश मंत्रालय के 12 जनवरी 1996 के एक ऐसे गोपनीय दस्तावेज का हवाला दिया जिसमें मंत्रालय की ओर से रूस की मीडिया में लगातार आ रही उन खबरों पर गहरी चिंता जताई गई थी जिनमें कहा गया था कि नेताजी की मौत 1945 के बाद रूस की एक जेल में हुई थी। इस दस्तावेज पर मंत्रालय के तत्कालीन संयुक्त सचिव आर एल नारायणन के हस्ताक्षर है और साथ ही इसमें एक पूर्व विदेश सचिव की टिप्पणी भी संलग्न है।

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