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सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ता हमारा

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सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तान हमारा हम बुलबुले है इसकी ये गुलसिता हमारा ॥धृ॥ घुर्बत मे हो अगर हम रहता है दिल वतन मे समझो वही हमे भी दिल है जहाँ हमारा ॥१॥ परबत वो सब से ऊंचा हमसाय आसमाँ का वो संतरी हमारा वो पासबा हमारा ।२॥ गोदी मे खेलती है इसकी हजारो नदिया गुलशन है जिनके दम से रश्क-ए-जना हमारा ।३॥ ए अब रौद गंगा वो दिन है याद तुझको उतर तेरे किनारे जब कारवाँ हमारा ॥४॥ मझहब नही सिखाता आपस मे बैर रखना हिन्दवी है हम वतन है हिन्दोस्तान हमारा ॥५॥ युनान-ओ-मिस्र-ओ-रोमा सब मिट गये जहाँ से अब तक मगर है बांकी नामो-निशान हमारा ॥६॥ कुछ बात है की हस्ती मिटती नही हमारी सदियो रहा है दुश्मन दौर-ए-जमान हमारा ॥७॥ इक़्बाल कोइ मेहरम अपना नही जहाँ मे मालूम क्या किसी को दर्द-ए-निहा हमारा ॥८॥

मेरी आवाज पाकिस्तान पहले पहुंचती है : नरेंद्र मोदी

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मेरी आवाज पाकिस्तान पहले पहुंचती है: मोदी नवभारतटाइम्स.कॉम | Aug 15, 2013,  भुज।। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर भुज के लालन कॉलेज से दिए गए भाषण में पीएम मनमोहन सिंह और कांग्रेस पर सीधा हमला बोला। मोदी ने पीएम के स्वतंत्रता दिवस भाषण को बेहद निराशाजनक बताते हुए कहा कि वह पाक को कड़ा संदेश देने में नाकाम रहे हैं और बस एक ही परिवार का गुणगान करते रहे। उन्होंने कहा कि देश के आखिरी छोर पर बैठे होने के बाद भी उनकी आवाज पाकिस्तान तक पहले पहुंचती है। गौरतलब है कि मोदी के इस भाषण पर सभी की नजरें लगी हुई थीं। मोदी ने बुधवार को ही अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में पीएम को निशाने पर लेने का इशारा कर दिया था। मोदी ने किया भी ऐसा ही। मनमोहन का भाषण सुनकर आए मोदी ने इसको आधार बनाकर पीएम को निशाने पर लिया।  पीएम को शास्त्री, पटेल क्यों नहीं याद आएः मोदी ने कहा, 'देश की भलाई के लिए विकास एकमात्र उपाय है। इसी वजह से हम चाहते थे कि लाल किले से प्रधानमंत्री देश को कुछ पॉजिटिव संदेश देंगे। प्रधानमंत्री लाल किले से केवल एक परिवार को याद करते दिखे। प्रधानमंत्री से क्या यह

आरती भारत माता की

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आरती भारत माता की आरती भारत माता की, जगत की भाग्यविधाता की॥धृ॥ मुकुटसम हिमगिरिवर सोहे, चरण को रत्नाकर धोए, देवता कण-कण में छाये वेद के छंद, ग्यान के कंद, करे आनंद, सस्यश्यामल ऋषिजननीकी॥1॥ जगत की........... जगत से यह लगती न्यारी, बनी है इसकी छवि प्यारी, कि दुनिया झूम उठे सारी, देखकर झलक, झुकी है पलक, बढ़ी है ललक, कृपा बरसे जहाँ दाता की॥2॥ जगत की........... पले जहाँ रघुकुल भूषण राम, बजाये बंसी जहाँ घनश्याम, जहाँ पग-पग पर तीरथ धाम, अनेको पंथ, सहस्त्रों संत, विविध सद्ग्रंथ सगुण-साकार जगन्माँकी॥3॥ जगत की........... गोद गंगा-जमुना लहरे, भगवा फहर-फहर फहरे, तिरंगा लहर-लहर लहरे, लगे हैं घाव बहुत गहरे, हुए हैं खण्ड, करेंगे अखण्ड, यत्न कर चण्ड सर्वमंगल-वत्सल माँ की॥4।। जगत की........... बढ़ाया संतों ने सम्मान, किया वीरों ने जीवनदान, हिंदुत्व में निहित है प्राण, चलेंगे साथ, हाथ में हाथ, उठाकर माथ, शपथ गीता - गौमाता की॥5॥ जगत की........... भारत माता की जय..... ---------- भारत-माता जिसका कंकर-कंकर शंकर है, और जिसकी बूँद-बूँद गंगा है; कश्मीर जिसका मस्तक है