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जनवरी 21, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

आधी दौलत पर सिर्फ 1 फीसदी लोगों का कब्जा : शैम शैम

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दुनिया की आधी दौलत पर सिर्फ 1 फीसदी लोगों का कब्जा : शैम शैम ईटी हिंदी| Jan 19, 2015 पैरिस http://navbharattimes.indiatimes.com/business/business-news/richest-1-to-own-more-than-rest-of-the-world-by-2016-oxfam/articleshow/45939507.cms गरीबी का मुद्दा एक ऐसा मुद्दा रहा है जो छोटे-छोटे मंचों से विश्वस्तरीय मंचों पर भी उठता रहा है, लेकिन यह विडंबना ही है कि जितनी दौलत दुनिया के 99 प्रतिशत लोगों के पास है, उतना धन अकेले एक प्रतिशत लोगों के पास है। समाज कल्याण के लिए काम करने वाली संस्था ऑक्सफैम चैरिटी की रिपोर्ट के अनुसार, 2016 तक यह आंकड़ा भी पार कर जाएगा और 1 प्रतिशत के लोगों के पास उस धन से भी अधिक धन हो जाएगा जो दुनिया के 99 प्रतिशत लोगों के पास है। ऑक्सफैम के ऐग्जिक्युटिव डायरेक्टर विन्नी बयनिमा ने बताया, दुनिया भर में असमानता का स्तर काफी बढ़ता जा रहा है और इसे ग्लोबल अजेंडा में शामिल होने के बावजूद गरीब और अमीर के बीच की खाई बढ़ती जा रही है। दुनिया भर में गरीब-अमीर के बीच की खाई काफी चौड़ी होती जा रही है। 2009 में पूरी दुनिया में एक प्रतिशत धनी लोगों के पास 44 प्रतिशत धन था जो

नरेंद्र मोदी की जनधन योजना ने बनाया गिनेस रेकॉर्ड

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पांच महीने से कम समय में 11.5 करोड़ नए बैंक खाते खोले गए   20 Jan 2015 जनधन योजना ने बनाया गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड, योजना की सफलता से बड़े बदलाव के लिये मंच तैयार : मोदी प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत केवल चार महीने में लगभग साढ़े ग्यारह करोड़ खाते खोले गये, जो गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जन धन योजना के तहत केवल चार महीने में रिकार्ड 11.4 करोड़ खाते खोले गये और 99.74 प्रतिशत परिवार बैंक सुविधा के दायरे में लाये गये. उन्होंने कहा कि बड़े बदलाव के लिये मंच तैयार हो गया है. योजना को अभूतपूर्व रूप से सफल बताते हुए मोदी ने ट्वीट कर कहा, ‘‘पीएमजेडीवाई (प्रधानमंत्री जन धन योजना) की सफलता ने लोगों के लिये बड़े बदलाव हेतु मंच तैयार किया है और यह भारत की प्रगति को आगे बढ़ाएगा.’’ इससे पहले, संवाददाता सम्मेलन में वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा, ‘‘देश का ज्यादातर हिस्सा अब बैंकिंग सुविधा के दायरे में आ चुका है.’’ वित्त मंत्री के अनुसार जनधन खातों में 9,000 करोड़ रुपये से अधिक राशि जमा की गयी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल स्वतंत्रत

सर्वोत्कृष्ट संस्कृति : भारतीय संस्कृति

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भारतीय संस्कृति के आधारभूत तत्व     श्रीराम शर्मा आचार्य सर्वोत्कृष्ट संस्कृति : भारतीय संस्कृति भूमिका विश्व की सर्वोत्कृष्ट संस्कृति भारतीय संस्कृति है, यह कोई गर्वोक्ति नहीं अपितु वास्तविकता है। भारतीय संस्कृति को देव संस्कृति कहकर सम्मानित किया गया है। आज जब पूरी संस्कृति पर पाश्चात्य सभ्यता का तेजी से आक्रमण हो रहा है, यह और भी अनिवार्य हो जाता है कि, उसके हर पहलू को जो विज्ञान सम्मत भी है तथा हमारे दैनन्दिन जीवन पर प्रभाव डालने वाला भी, हम जनजन के समक्ष प्रस्तुत करें ताकि हमारी धरोहर—आर्य संस्कृति के आधार भूत तत्त्व नष्ट न होने पायें। भारतीय संस्कृति का विश्व संस्कृतिपरक स्वरूप तथा उसका गौरव गरिमा का वर्णन तो इस वाङ्मय के पैतीसवें खण्ड ‘समस्त विश्व को भारत के अजस्र अनुदान’ में किया गया है किंतु इस खंड में संस्कृति के स्वरूप, मान्यताएँ, कर्म-काण्ड—परम्पराएँ—उपासना पद्धतियाँ एवं अंत में इसके सामाजिक पक्ष पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है। इस प्रकार दोनों खण्ड मिलकर एक-दूसरे के पूरक बनते हैं। भारतीय संस्कृति हमारी मानव जाति के विकास का उच्चतम स्तर कही जा सकती है। इसी की परि

भारतीय राष्ट्रवाद : सांस्कृतिक राष्ट्रवाद !

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इतिहास दृष्टि - डा. सतीश चन्द्र मित्तल http://panchjanya.com/arch/2009/5/10/File20.htm भारतीय राष्ट्रवाद का अतीत तथा वर्तमान राष्ट्रीयता की भारतीय अवधारणा तथा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद आधुनिक युग में राष्ट्रीयता अथवा राष्ट्रवाद एक विश्वव्यापी, अत्यंत महत्वपूर्ण तथा प्रभावी अवधारणा है। यह मानवता के विकास में बाधक नहीं बल्कि उसकी पोषक तत्व है। राष्ट्र, व्यक्ति और मानव जाति के बीच एक अनिवार्य शर्त है। यह विश्व के विभिन्न कालखण्डों में प्रेरक, प्रखर तथा प्रभावी तत्व रहा है। इसकी अवधारणा पूर्वी जगत में अति प्राचीन काल से तथा पाश्चात्य जगत में 18वीं शताब्दी के उत्तराद्र्ध में विकसित मानी जाती है। राष्ट्रवाद के विकास क्रम के बारे में भ्रामक धारणा पाश्चात्य विचारकों ने इस गलत तथा भ्रामक धारणा को बल दिया कि राष्ट्रवाद मूलत: एक यूरोपीय विचार है। कुछ ने आगे बढ़कर यह भी भ्रम फैलाया कि यह इंग्लैण्ड की देन है तथा 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश शासन के साथ इसका भारत में भी विकास हुआ। माक्र्सवादी चिंतक ए.आर. देसाई ने इसे एक आधुनिक विचार माना है जिसका विकास भारत में ब्रिटिश शासन तथा विश्व के प्रभावों के

भारत का आधारभूत तत्व धर्म है : स्वामी विवेकानंद

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                            भारत का आधारभूत तत्व धर्म है :स्वामी विवेकानंद साक्षात्कार 6 फरवरी  1897 को “द हिन्दू” में प्रकाशित                                           अनुवाद : सुन्दरम आनंद और जयराम विप्लव  http://janokti.com     स्वामी जी , आप अमेरिका क्यों गये ? मुझे लगता है कि संक्षेप में इसका उत्तर दे पाना कठिन है | अभी आंशिक रूप से मैं इतना ही कह सकता हूँ कि मैंने सम्पूर्ण भारत का भ्रमण किया और मैं दूसरे देशों की यात्रा करना चाहता था इसीलिए मैं सुदूर पूर्व से होते हुए अमेरिका गया |     आपने जापान में क्या देखा ? क्या भारत जापान की प्रगतिशीलता की ओर बढ़ सकता है ? नहीं , मुझे लगता है जब तक भारत के 30 करोड़ लोग समग्र राष्ट्र की तरह एकजुट ना हो जाएँ तब तक यह संभव नहीं है | विश्व में जापानियों के जैसा राष्ट्रवादी और कलात्मक नस्ल कहीं और नहीं है | जापानियों के सम्बन्ध में एक और विशिष्ट बात मैं कहना चाहूँगा , जहाँ सामान्यतः यूरोप सहित अन्य देशों में कला के साथ-साथ गंदगी देखने को मिलती है वहीँ जापान में कला का अर्थ कला और शुद्धता का सम्मिलन है | मेरे विचार से हमारे देश के हर य