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राष्ट्रवाद के महानायक परम पूज्य गोलवलकर जी

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    राष्ट्रवाद के महानायक ‘‘परमपूज्य श्री गुरूजी’  - अरविन्द सीसौदिया राष्ट्रीय स्वंयसेवक के द्वितीय सरसंघचालक माधवराव सदाशिव राव गोलवलकर उपनाम गुरूजी के नाम से विख्यात उनका जन्म फाल्गुन मास की एकादशी विक्रमी संवत् 1963 तदनुसार 19 फ़रवरी 1906 को महाराष्ट्र के रामटेक में हुआ था। वे अपने माता-पिता की चौथी संतान थे। उनके पिता का नाम श्री सदाशिव राव उपाख्य ’भाऊ जी’ तथा माता का श्रीमती लक्ष्मीबाई उपाख्य ’ताई’ था। उनका बचपन में नाम माधव रखा गया पर परिवार में वे मधु के नाम से ही पुकारे जाते थे। पिता सदाशिव राव प्रारम्भ में डाक-तार विभाग में कार्यरत थे परन्तु बाद में उनकी नियुक्ति शिक्षा विभाग में 1908 में अध्यापक पद पर हो गयी।  भारतीय राजनैतिक क्षितिज में जिन व्यक्तित्वों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है , उनमें से एक प्रखर राष्ट्रवादी एवं संघ के द्वितीय सरसंघचालक परमपूज्य‘माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर’ उपनाम ‘श्री गुरूजी’ थे। जिन्होने भारतीय जनसंघ जैसा राजनैतिक दल देश को दिया जो आज भारतीय जनता पार्टी के नाम से जाना जाता है। स्वतंत्र भारत में जब राष्ट्रहित और न्याय की ...