आपस में बांटने और लड़वाने के कुचक्र रचे जा रहे हैं - मोदी PM Modi

On Rashtriya Ekta Diwas, we pay tribute to Sardar Patel and remember his immense contribution to national unity: PM

Sardar Patel played a monumental role in shaping and safeguarding the nation's unity: PM 

Naxalism has been dealt a decisive blow in the country: PM 

India today is more secure and more resolute than ever before, a major reason for this is the growing self-confidence of its people: PM 

According to a World Bank report, during the 10 to 12 years leading up to 2024, 50 crore Indians have overcome poverty: PM 

Every effort we make must be driven by the resolve to build a strong and Viksit Bharat by 2047: PM


मैं कहूँगा सरदार पटेल, आप सब बोलिए – अमर रहें, अमर रहें।

सरदार पटेल - अमर रहें, अमर रहें।
सरदार पटेल - अमर रहें, अमर रहें।
सरदार पटेल - अमर रहें, अमर रहें।

मेरे प्यारे देशवासियों,
आज का ये आयोजन कुछ अलग है। अब तक हम एकता दिवस पर ये आयोजन सुबह करते आए हैं। इस बार थोड़ा परिवर्तन हुआ है। हम सभी शाम को एकत्र हुए हैं। सुबह लाखों-लाख देशवासियों ने एकता के संकल्प के साथ एकता दौड़ में हिस्सा लिया। हमने रन फॉर यूनिटी में देशवासियों का उत्साह देखा। मैंने कल शाम को भारत पर्व पवेलियन में शानदार प्रस्तुती देखी। और अब हम इस राष्ट्रीय पर्व पर सरदार पटेल के चरणों में उपस्थित हैं।

साथियों,
दुनिया की ये सबसे ऊंची प्रतिमा statue of unity इस प्रतिमा के निर्माण में लगी पूरे देश की भागीदारी, इस जगह की अपनी अद्भुत आभा और एकता दिवस की असाधारण ऊर्जा और प्रेरणा, यहां आकर मन गर्व कृतज्ञता से भर जाता है। गर्व इस महान राष्ट्र के नागरिक होने का और कृतज्ञता सरदार वल्लभ भाई पटेल के प्रति, जिन्होंने आजादी के बाद 550 से ज्यादा रियासतों को एक किया। फौलादी इरादों के साथ इस राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोया।

साथियों,
किसी भी देश के लिए स्वतंत्रता जरूरी होती है। जब स्वतंत्रता होती है, तो देश अपने भविष्य का निर्णय स्वयं करता है। लेकिन स्वतंत्रता को सही दिशा मिलती है गणतंत्र से। गणतंत्र हमें उन फैसलों को संविधान की मर्यादा में आगे बढ़ाने का मार्ग दिखाता है, संविधान हमें जनता के प्रति जवाबदेह रखता है, और एकता हमें एक राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ने की शक्ति देती है। इसलिए हमारे देश में अब स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और एकता दिवस, तीनों राष्ट्रीय पर्वों को पूरे उत्साह से मनाया जाता है।

साथियों,
यहां एकता नगर में आज एक बार फिर हमें भारत की एकता के विराट दर्शन हुए हैं। इस वर्ष की राष्ट्रीय एकता परेड भी अद्भुत रही है। ये परेड पुलिस और सुरक्षाबलों के शौर्य और साहस को समर्पित है। देश की विरासत, देश की आकांक्षाएं, आज ये सब झाकियों के माध्यम से भी देश के सामने आई है। इसलिए एकता दिवस अब केवल आयोजनों तक सीमित नहीं है। ये जन भागीदारी से से जन गौरव का उत्सव भी बन गया है। मैं इस अवसर पर सभी देशवासियों को राष्ट्रीय एकता दिवस की बधाई देता हूं। मैं सरदार वल्लभ भाई पटेल के चरणों में श्रद्धाभाव के साथ नमन करता हूं।

साथियों,
सरदार पटेल भारत के इतिहास का वो महान व्यक्तित्व है, जिनके बिना आज के भारत की कल्पना भी मुश्किल है। सरदार पटेल ने भारत के वर्तमान स्वरूप को गढ़ा है। विभाजन के बाद भी जिन्होंने हिमालय से हिंद महासागर तक भारत को सुरक्षित रखा, वो सरदार पटेल ही थे।


साथियों,
सरदार पटेल के ये इसलिए कर पाए, क्योंकि वो भारत के चरित्र और चेतना से परिचित थे। वो जानते थे की भारत की विविधता उसकी बाधा नहीं, वो जानते थे कि भारत की विविधता तो उसकी एकता का वास्तविक आधार है। हम हजारों वर्षों से इसी तरह जीते आए हैं। हमने इसी ताकत से प्रगति और समृद्धि के शिखरों को छुआ है।

साथियों,
सरदार पटेल ने एक बार फिर उसी भारत की नींव प्रशस्त की। उन्होंने देश के भुगोल को ही नहीं छोड़ा, उन्होंने देश को भावनात्मक एकता के सूत्र में भी पिरोया। गुजरात में सोमनाथ मंदिर के पुनर्निमाण के जरिये, उन्होंने राष्ट्र के सांस्कृतिक पुनरुत्थान का भी श्री गणेश किया।

साथियों,
इस वर्ष उस महान कार्य को भी 75 वर्ष पूरे हुए हैं। जिस तरह सारे अत्याचारियों के इरादों को ध्वस्त करते हुए, एक हजार साल से सोमनाथ मंदिर की ध्वजा पताका पूरे स्वाभिमान से फहरा रही है। उसी आत्मगौरव ने हमें सोमनाथ स्वभिमान पर्व की प्रेरणा दी, और इस साल देश इस पर्व को भी उतने ही उत्साह से मना रहा है।

मेरे प्यारे देशवसियों,
आज राष्ट्रीय एकता के बड़े-बड़े अनुष्ठान, वैश्विक मंच पर भारत का बढ़ता हुआ कद, हमारी आर्थिक प्रगति की ये तेज रफ्तार, और काशी विश्वनाथ से लेकर राममंदिर तक का पुनरोद्धार, आज देश जिस दिशा में आगे बढ़ रहा है, वो राह हमें सरदार पटेल ने दिखाई है। और इसके लिए ये देश हमेशा हमेशा उनका ऋणी रहेगा।

साथियों,
पिछले साल हमने सरदार पटेल की एक सौ पचासवीं जयंती मनाई थी। दो वर्षों तक देश में उत्सवों का आयोजन हुआ था। हमने देश के लिए बड़े संकल्प लिए थे, उन्हें पूरा करने की शपथ ली थी। और, आज जब हम सरदार पटेल का एक सौ इक्यावनवां जन्मदिन मना रहे हैं, तो हम संतोष के साथ कह सकते हैं, देश ने अपने संकल्पों को इतने कम समय में पूरा करके दिखाया। इन दो वर्षों में देश ने कई अभूतपूर्व उपलब्धियां हासिल की हैं।

साथियों,
सरदार पटेल के 150वें जन्मदिवस पर, मैंने यहीं उनके चरणों में खड़े होकर कहा था, “जब तक, जब तक देश नक्सलवाद, माओवादी आतंक से पूरी तरह मुक्त नहीं हो जाता, हम चैन से बैठने वाले नहीं हैं”। और, ठीक एक साल बाद, आज जब हम यहाँ उपस्थित हैं, देश का वो संकल्प पूरा हो चुका है। आज देश में नक्सलवाद की कमर तोड़ी जा चुकी है। 2015 में देश के एक सौ छब्बीस जिले वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित थे। मार्च 2026 तक देश में ऐसा कोई जिला नहीं रह गया, जो अब भी नक्सलवाद से प्रभावित हो। दशकों तक हिंसा और खूनखराबे से पीड़ित ये जिले, अब विकास की मुख्यधारा का हिस्सा बन रहे हैं। आज इन इलाकों में सड़कों का विस्तार हो रहा है, मोबाइल नेटवर्क पहुंच रहा है, स्कूल और स्वास्थ्य की सुविधाएं बढ़ रही हैं। जिन युवाओं के सामने कभी अनिश्चितता थी, उनके लिए शिक्षा, रोजगार और आगे बढ़ने के नए अवसर खुल रहे हैं।

साथियों,
इस बार एकता दिवस के इस आयोजन में, नक्सल पीड़ित इलाकों के परिवार यहां अतिथि बनकर शामिल हुये हैं। मैं उन सभी का यहाँ अभिनंदन करता हूँ, उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ। मैं आज उन सभी वीर जवानों को भी नमन करता हूँ, जिन्होंने देश के इन क्षेत्रों में शांति स्थापित करने के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।

साथियों,
आज भारत पहले से अधिक सुरक्षित है, आज भारत अधिक संकल्पित है, और इसका एक बड़ा कारण, देशवासियों का बढ़ा हुआ आत्मविश्वास है। और आत्मविश्वास, सिद्धियों से आता है, सरकार और व्यवस्था की संवेदनशीलता से आता है। आज ऐसी ही एक बड़ी राष्ट्रीय सिद्धि की चर्चा मैं जरूर करना चाहता हूं।

साथियों,
भारत में गरीबी हटाने की बातें, आज़ादी के बाद से ही चली आ रही हैं। गरीबी हटाने के नाम पर वोट मांगे गए। लेकिन देश में गरीबी की क्या स्थिति रही, ये हम सभी जानते हैं। जिन्होंने गरीबी हटाओ के नारे लगाए, वो खुद अमीर होते चले गए। हालात में बदलाव आना शुरू हुआ, बीते कुछ वर्षों में। अभी कुछ दिन पहले ही वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट आई है। ये रिपोर्ट बताती है कि 2024 से पहले के 10-12 वर्षों में, 50 करोड़ भारतीयों ने गरीबी को परास्त किया है। यानी पहले जहाँ 100 में से 27 लोग, एक चौथाई से भी ज्यादा, 100 में से 27 लोग भीषण गरीबी की चपेट में थे, आज ये संख्या कम होते होते 100 में सिर्फ 3 से भी कम रह गई है।


साथियों,
पूरी दुनिया मान रही है कि ये बहुत बड़ी सिद्धि है। लेकिन ये सब हुआ कैसे? ये सब इसलिए हुआ, क्योंकि पिछले 12 वर्षों से देश, गरीब कल्याण, गरीबों को सशक्त करने को प्राथमिकता दे रहा है। इन 12 वर्षों में, देश को लीकेज फ्री व्यवस्था मिली। DBT के माध्यम से दिल्ली से निकला एक-एक पैसा गरीब तक पहुँचा, मुफ्त राशन ने, मुफ्त इलाज ने, गरीबों की जेब में पैसा बचाया। करोड़ों पक्के घरों ने, करोड़ो टॉयलेट्स ने, धुआँ मुक्त किचन ने, गरीब का जीवन आसान किया। करोड़ों लोगों को बीमा की सुरक्षा मिली, जिसने संकट के समय करोड़ों भारतीयों को संबल दिया। 2014 से पहले देश में 25 करोड़ लोगों के पास भी सामाजिक सुरक्षा कवच नहीं था। आज देश के करीब 100 करोड़ लोगों को सामाजिक सुरक्षा कवच से जोड़ा जा चुका है।

साथियों,
आज जब पूरा देश सरदार साहब को याद कर रहा है, उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है, उनकी आत्मा हमें जरूर आशीर्वाद देती होगी। ऐसे ही प्रयासों से हम देश में गरीबी दूर करके रहेंगे, देश को विकसित भारत बनाएंगे।

साथियों,
देश की एकता, देश की स्थिरता की, देश की सफलता की गारंटी है। और आज जैसी वैश्विक अस्थिरता में, एकता का महत्व और बढ़ गया है। आप सभी जानते हैं, आज दुनिया अशांति की आग में झुलस रही है। ये समय बीते कई दशकों का सबसे कठिन समय है। विश्व में कई देशों के बीच युद्ध छिड़े हुए हैं। बड़े-बड़े देशों की अर्थव्यवस्थाएं मुश्किलों से जूझ रही हैं। संसाधनों का संकट लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्लोबल सप्लाइ चेन्स तितर-बितर हो रही हैं। ऐसे समय में भारत की एकता, हम भारतवासियों की एकता, हमारा बहुत बड़ा संबल है। क्योंकि यही एकता हमें सारे तूफानों से बाहर निकालने वाली है।


भाइयों बहनों,
बीते महीनों में हमने दुनिया को ऊर्जा संकट से जूझते हुये देखा है! कई देशों में तो डीजल पेट्रोल की खरीद पर लिमिट तक लगा दी। भारत के लिए भी कहा जा रहा था, यहाँ इतनी ज्यादा आबादी है। पेट्रोलियम का उत्पादन भी यहाँ नहीं होता। इसलिए, सबसे बड़ा संकट भारत के सामने खड़ा होगा। इन्हीं आशंकाओं के बीच भारत विरोधी ताकतें भी सक्रिय हो गईं थीं।

लेकिन साथियों,
ये भारत का सामर्थ्य है कि हमने इस वैश्विक ऊर्जा संकट की चोट अपने नागरिकों पर नहीं पड़ने दी। ये देश की कूटनीतिक और रणनीतिक सफलता तो है ही, इसमें हमारे देशवासियों की एकता और एकजुटता की भी उतनी ही बड़ी भूमिका है। क्योंकि, जब देश बाहरी चुनौतियों के समाधान तलाश रहा था, उस समय देश के भीतर भी कुछ ताक़तें झूठ और अफवाह फैलाकर अस्थिरता पैदा करने में जुट गई थीं। लेकिन, देशवासी राष्ट्र के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे। यही इस देश की सबसे बड़ी ताकत है। यही हमारे हौसले का सबसे बड़ा आधार है।

साथियों,
सरदार पटेल, बाबा साहब अंबेडकर, ऐसी महान विभूतियों ने जब देश के संविधान का निर्माण किया था, तो उन्होंने सत्ता पक्ष और विरोध पक्ष की व्यवस्था बनाई। इस व्यवस्था का महत्व भी समझाया। लोकतन्त्र में विरोध पक्ष का दायित्व सरकार की नीतियों का विरोध करना है, लेकिन, ये हमारा दुर्भाग्य है, इस समय देश में विरोध पक्ष, अपना कर्तव्य त्यागकर, विरोध के बजाय अवरोध पक्ष बन चुका है। अपनी हताशा और निराशा में ये लोग देश के विकास के सामने अवरोध खड़े कर रहे हैं। ये विरोध नहीं है, ये अवरोध है। इन्होंने इसी को अपनी राजनीति बना लिया है। ये लोग संविधान की मर्यादाओं को तार-तार करने में लगे हैं।


साथियों,
ये ताक़तें लगातार देश में विभाजन की साज़िशों में लगी हैं। माँ भारती की संतानों को आपस में बांटने और लड़वाने के कुचक्र रचे जा रहे हैं। एक दशक से अधिक की हताशा और निराशा के कारण, ये लोग अब खुलकर सामने आ गए हैं। कौन विदेश में गुप्त रूप से किससे मिल रहा है, भारत विरोधी ताक़तें किसे समर्थन दे रहीं हैं, कौन भारत के दुश्मनों की भाषा बोल रहा है, हमें इन सभी पैटर्नस को पहचानना होगा। हमें एकजुट होकर इनका मुक़ाबला करना होगा। खासकर, सोशल मीडिया को जिस तरह हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है, अफवाहें फैलाई जा रहीं हैं, भारत की छवि को खराब करने की कोशिशें हो रहीं हैं, देशवासियों को साथ मिलकर इनसे निपटना होगा। हमने सुदूर इलाकों में नक्सलवाद का अंत कर दिया है। लेकिन, अभी दिमागी नक्सल का खतरा देश के ऊपर से टला नहीं है। देश को इन दिमागी नक्सलियों से हमेशा सतर्क रहना है।

साथियों,
हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, राष्ट्रीय एकता का ये महायज्ञ, सशक्त और समर्थ भारत की ये संकल्प यात्रा, हमें इसे रुकने नहीं देना है। इस दिशा में हमें अब अगले बड़े लक्ष्यों पर काम करना है। हमें देश की सीमाओं को पूरी तरह से सुरक्षित करना है। हमें घुसपैठ और डेमोग्राफी में हो रहे बदलावों को रोकना है। हमें सेकुलर सिविल कोड की ओर भी आगे बढ़ना है।

साथियों,
जब भी देश बड़े संकल्प लेगा, देश जब भी बड़े फैसले लेगा, बाधाएँ आएंगी, रुकावटें खड़ी होंगी, तूफानों से भी मुक़ाबला होगा, लेकिन, भारत अब रुकने वाला नहीं है। ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’। ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का मंत्र और, विकसित भारत का लक्ष्य, अब ये भारत के अटल संकल्प बन चुके हैं। हम परिश्रम की पराकाष्ठा करेंगे, हम झंझावातों से डटकर मुक़ाबला करेंगे, लेकिन, हमारी दृष्टि एक ही ध्येय पर रहेगी। 2047 तक जब आजादी के 100 साल होंगे, 2047 तक सशक्त और समर्थ विकसित भारत का निर्माण! हमारे हर प्रयास में, हमारी साँस में यही जुनून होना चाहिए। ये विचार हमारे दिलों की हर धड़कन के साथ धड़कना चाहिए। इसी संकल्प के साथ, एक बार फिर आप सभी को राष्ट्रीय एकता दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

भारत माता की जय!
भारत माता की जय!
भारत माता की जय!
वंदे मातरम।
वंदे मातरम।
वंदे मातरम।
बहुत-बहुत धन्यवाद।


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