‘फ्लॉप रैली’ की फजीहत से बचने को राहुल की बहस वाली नौटंकी: अरविंद सिसोदिया Rahul ki bahas
प्रेस विज्ञप्ति
‘फ्लॉप रैली’ की फजीहत से बचने को राहुल कर रहे हैँ बहस की नौटंकी : अरविंद सिसोदिया
कोटा, 5 नवंबर। भारतीय जनता पार्टी (राजस्थान) के कोटा संभाग मीडिया संयोजक एवं वरिष्ठ बुद्धिजीवी और राजनीतिक विश्लेषक अरविंद सिसोदिया ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की बहस की चुनौती पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि " राहुल गांधी द्वारा हाल ही में दी गई बहस की चुनौती पूरी तरह से फ्लॉप रैली की चर्चा से ध्यान हटाने की एक राजनीतिक नौटंकी मात्र है।" उन्होंने कहा कि " इंडी गठबंधन के 23 दलों की जिस कथित ‘महारैली’ को लेकर बड़े-बड़े दावे 15 दिन से किए जा रहे थे, वह मात्र 50 हजार की क्षमता वाले रामलीला मैदान तक को नहीं भर पाई। इस करारी नाकामी और मीडिया एवं जनता के सामने हुई भारी फजीहत से ध्यान भटकाने के लिए ही अब राहुल गांधी बहस का ड्रामा कर रहे हैं।"
अरविंद सिसोदिया ने राहुल गांधी को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि " अगर राहुल गांधी में सचमुच दम है, तो उन्हें सड़कछाप नौटंकी करने के बजाय देश के सर्वोच्च अधिकृत मंच यानी संसद में बहस करनी चाहिए। वे खुद नेता प्रतिपक्ष हैं, सदन में विषय उठानें का उन्हे अधिकार है, वे वहाँ बहस करें तथा जवाब भी सुनें।"
ऑन कैमरा दस लाख की थोथी घोषणा की भारी फजीहत
सिसोदिया ने रैली की विफलता और विपक्ष के दावों पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि " यह गठबंधन पूरी तरह से बेनकाब हो चुका है। रैली के दौरान जनता को रिझाने के लिए दस लाख लोगों के जुटने की थोथी और हवाई घोषणा की गई थी, लेकिन हकीकत में मैदान आधा भी नहीं भर सका। जैसे ही दस लाख का दावा पूरी तरह झूठा साबित हुआ, विपक्षी खेमे में खलबली मच गई। आनन फानन में कांग्रेस ने कुछ प्रदेशों में युवक कांग्रेस के लोगों को पदमुक्त भी किया है। अपनी इस सार्वजनिक फजीहत और किरकिरी से बचने के लिए राहुल गांधी ने तुरंत ‘बहस की चुनौती’ का नया शिगूफा छोड़ दिया, ताकि मीडिया और जनता का ध्यान रैली की विफलता से हटकर दूसरी तरफ चला जाए।"
संसद में बहस से भागनेवालों को देश गंभीरता से नहीं लेता
भाजपा नेता सिसोदिया ने कांग्रेस और राहुल गांधी की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि " जब संसद का सत्र चल रहा होता है, तब कांग्रेस नेता या तो सदन से नदारद रहते हैं या फिर कार्यवाही में बाधा डालते हैं। " उन्होंने जोर देकर कहा कि " लोकतंत्र में किसी भी गंभीर मुद्दे पर चर्चा के लिए संसद से बड़ा और कोई पवित्र मंच नहीं हो सकता। राहुल गांधी संसद के भीतर गंभीर बहसों और सरकार के तीखे व तथ्यात्मक जवाबों का सामना करने से डरते हैं। कथित 23 दलों के इस फ्लॉप शो के बाद सदन के बाहर बहस की चुनौती देना केवल मीडिया में बने रहने का एक हताशा भरा हथकंडा है।"
सिसोदिया ने अंत में कहा कि " देश की जनता अब विपक्ष की इस तरह की ध्यान भटकाने वाली और खोखली राजनीति को अच्छी तरह समझ चुकी है। जनता अब झूठे दावों के बजाय संसद के भीतर रचनात्मक और गंभीर भागीदारी देखना चाहती है।"
भवदीय
अरविन्द सिसोदिया
9414180151
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